"जीवन बचाओ मुहिम"

हत्यारा और मांसाहार नहीं बल्कि जीवों की रक्षा करने वाला बनो।

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शनिवार, जुलाई 15, 2023

What is the specialty of the book Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" ?

What is the specialty of the book "Angutha Chhap Lekhak" ?

Angutha Chhap Lekhak - "Abodh Vicharak ke Baisurha Darshan" is a book based on unsuccessful social awareness. Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" is neither an autobiography, nor a novel, nor a monologue, nor a story. In fact it is not even a philosophy. Rather, it is a book inspired by all types of literary structures and beyond the criteria of literature. Undoubtedly, there will be millions of books, books, literature, philosophy and religious books better than this book in the whole world, which would be many times better and accurate guidance than this, but this book presents a new audiology and scientific thinking.

No matter why this book marks and proves the failure and immaturity of the author. Even if the author has failed in trying to impose his thoughts and philosophy on the society. Nevertheless, through this book, the author forces you to think according to Navdarshan and for intellectual development with hundreds of questions. This book also disappoints you with lots of questions and incomplete explanations in the name of a wonderful new audiology. If you yourself are not able to reason according to the principle of natural justice, are not able to find your answer, reading Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" will cause you uneasiness. You will not get any special education or information from this book. If you are inspired by any prejudice or blind slave of any ideology, then you should not read this book at all. You may be inspired to commit violence against the author. Because the acts which you have been considering as your glorious tradition and culture, the author will try to argue with new scientific thinking citing constitutional duties on the same acts. Then you can have two options, the first one is to get free from blind slavery on the strength of your intelligence and logic and the second one is to continue blindly following the same ideology no matter how wrong it is. You will not use the Right to Question and Speaking even after knowing the injustice, but will keep on tolerating it.

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" is an attempt to develop scientific thinking on the evils going on in the name of personal, social and religious belief and glorious tradition going on in the present environment. This book is published not error-free but error-full. Basically, the error and freedom present in this book are its original elements. Originally written in Hindi language, English and Chhattisgarhi words, sentences and proverbs have been used in this book. This book can inspire Hindi speaking people to learn and speak Chhattisgarhi. In this, such words will also be found which may not be in any dictionary. With self-criticism and derogatory remarks, the author has given a hidden message. This book not only inspires the readers for social, religious and spiritual thinking, but also attacks hard on the mindset of being an intellectual or being more educated to write literature. The author also questions historical books through this book.

Who is the author of the book "Angutha Chhap Lekhak"?
Mr. Huleshwar Prasad Joshi is the author of the book "Angutha Chhap Lekhak".

From which publication will the book Angutha Chhap Lekhak be published?

रविवार, नवंबर 13, 2022

बाल दिवस विशेषांक; बालकों और महिलाओं के विशेषाधिकार तथा मानव अधिकार मार्गदर्शिका

· गुड टच और बैड टच
· बालकों और महिलाओं के विशेषाधिकार
· बाल विवाह और बाल यौन शोषण
· मानव तस्करी
· कुछ प्रश्नोत्तरी
· महिला संबंधी विचार और मानव अधिकार

श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी
प्रधान आरक्षक
जिला पुलिस बाल, नारायणपुर (छत्तीसगढ़)
मोबाईल नंबर – 9826164156
ईमेल आईडी – hp.joshi@gov.in

मंगलवार, फ़रवरी 01, 2022

एक गाथा; विकास के बढ़ते कदम की (जिला नारायणपुर)

संस्करण: प्रथम संस्करण
प्रकाशन तिथि: जनवरी 2022

आईपीएस श्री गिरिजा शंकर जायसवाल,
पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर

विशेष सहयोग (लेखन):
# श्री नीरज चंद्राकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर
# सुश्री उन्नति ठाकुर, उप पुलिस अधीक्षक, अजाक/मुख्यालय, नारायणपुर
# श्री दीपक साव, आरआई, नारायणपुर
# श्री हुलेश्वर जोशी, प्रधान आरक्षक, पुलिस लाइन, नारायणपुर

टाइपिंग एवं ग्राफिक्स सेटिंग्स:
श्री हुलेश्वर जोशी,
प्रधान आरक्षक, पुलिस लाइन, नारायणपुर


सोमवार, जनवरी 10, 2022

हिन्दी - गोण्डी संक्षिप्त शब्दकोश

निर्देशन एवं मार्गदर्शन
श्री गिरिजा शंकर जायसवाल, आईपीएस,
पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर

द्वितीय संशोधित संस्करण के प्रकाशन में विशेष योगदान :
श्री नीरज चन्द्राकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
श्री दीपक कुमार साव, रक्षित निरीक्षक

टायपिंग एवं ग्राफिक्स सेंटिंग
श्री हुलेश्वर जोशी, प्रधान आरक्षक

अनुवादक एवं मात्रात्मक त्रूटियों में सुधार
श्री अशोक दुग्गा, प्रधान आरक्षक
श्री जय वासनिक, आरक्षक

हिन्दी - गोण्डी संक्षिप्त शब्दकोश के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी :
यह शब्दकोष बस्तर संभाग, खासकर जिला नारायणपुर में शासकीय सेवा, स्वरोजगार और भ्रमण में आने वाले लोगों के मार्गदर्शन सहयोग हेतु पुलिस प्रशासन और आम नागरिकों के मध्य बेहतर कम्युनिकेशन स्थापित करने के उद्देश्य से तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आईपीएस श्री माहित गर्ग के मार्गदर्शन और निर्देशन में उप पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत राही के नेतृत्व में तैयार किया गया था। जिसका हिन्दी-गोण्डी अनुवाद, टायपिंग और सेटिंग संबंधी कार्य श्री जैनू करंगा (आरक्षक), श्री शंकर वड्डे (आरक्षक), श्री लक्ष्मी माझी (आरक्षक) व साथियों द्वारा किया गया था। इसे तैयार कराने में स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों, आत्मसमर्पित नक्सलियों का भी यहम योगदान रहा है। बस्तर फाईटर आरक्षक संवर्ग के अभ्यार्थियों को निःशुल्क वितरण हेतु आईपीएस श्री गिरिजा शंकर जायसवाल के निर्देशानुसार द्वितीय संशोधित संस्करण का 1000 प्रति प्रकाशन किया जाकर वितरित की गई है। प्रकाशन पूर्व कतिपय त्रूटियों को दूर करने का प्रयास किया गया है, इसके बावजूद क्षेत्रीय भाषाई ज्ञान के आधार पर कतिपय कमियां हो सकती है।

सोमवार, मार्च 15, 2021

नाटक "दसरी" (नाटककार श्री एचपी जोशी)

नाटक के मूल अवधारणा :-
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर
सुश्री आरती गर्ग

निर्देशक, स्क्रिप्ट राईटर और वक्ता :-
श्री हुलेश्वर जोशी, प्रधान आरक्षक

सह निर्देशक :-
कु. स्वाति पट्टावी (छात्रा), 
कु. वंदना नाग (छात्रा),
श्री दिलीप निर्मलकर (आरक्षक) 
 श्री हरिश उईके (आरक्षक)

विशेष मार्गदर्शन :-
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर, 
उप पुलिस अधीक्षक सुश्री उन्नति ठाकूर, 
श्रीमती जागृति डी.

पात्र परिचय:
रमेसर (पिता) का रोल - श्री हरीश उइके, 
लछमी (माता) का रोल - चंद्रक्रान्ति, 
बेटी दसरी का रोल - कु. नेहा मंडावी, 
बेटी संतोषी का रोल - कु. रिया दुग्गा, 
बेटी कारी का रोल - कु. बिनेश्वरी यादव, 
बेटा ललित का रोल - ललित जुर्री, 
काकी का रोल - श्रीमती पूर्णिमा ठाकुर, 
भुरवा काका, गांव के गौटिया और वक्ता का रोल - श्री हुलेश्वर जोशी, 
लड़का सत्यवान का रोल - श्री कन्हैया वैष्णव, 
लड़के के पिता प्रोफेसर कृष्णकांत का रोल - श्री चेतन बघेल, 
डॉक्टर का रोल - श्री दिलीप निर्मलकर, 
नर्स का रोल - कु.कृष्टि राठौर 
पुलिस अधिकारी का रोल - श्री सतीश दर्रो एवं साथी जवान 

मंगलवार, जनवरी 26, 2021

नारायणपुर पुलिस की उपलब्धियां 2019-2020

नारायणपुर पुलिस की उपलब्धियां 2019-2020, आईपीएस मोहित गर्ग के नेतृत्व में 

हम विकास, विश्वास और सुरक्षा के ध्येय से मजबूत और विश्वसनीय पुलिसिंग की दिशा में अपने लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर है, हमारे इस लक्ष्य की प्राप्ति में नारायणपुर पुलिस के प्रत्येक अधिकारी/कर्मचारियों का अहम योगदान है। चाहे वे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से आरक्षक स्तर के जवान हों, या सहायक आरक्षक और गोपनीय सैनिक सबने मिलकर साझा प्रयास किया है। हमारे लक्ष्य में केन्द्रीय बलों और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के जवानों का भी अहम योगदान है। मै बतौर पुलिस अधीक्षक नारायणपुर जिला में तैनात होकर कार्य करने वाले समस्त बल को बधाई देता हूं, साथ ही अपेक्षा करता हूं कि आगामी भविष्य में भी निरंतर इसी तरह पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अनुशासित और समर्पित होकर कार्य करते रहेंगे।

मोहित गर्ग, IPS 
पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर

नारायणपुर पुलिस की उपलब्धियां 2019-2020, आईपीएस मोहित गर्ग के नेतृत्व में कॉफी टेबल बुक पढ़ने एवं डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

बुधवार, जनवरी 01, 2020

AnguthaChhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" नामक किताब की खासियत क्या है ?

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" नामक किताब की खासियत क्या है ?

अँगूठाछाप लेखक - ‘‘अबोध विचारक के बईसुरहा दर्शन’’ एक असफल सामाजिक जागरूकता पर आधारित ग्रँथ है। Angutha Chhap Lekhak अँगूठाछाप लेखक न तो आत्मकथा है, न उपन्यास है, न एकाँकी है और न तो कहानी है। वास्तव में यह फिलॉसोफी भी नहीं है। बल्कि समस्त प्रकार के साहित्यिक संरचनाओं से प्रेरित और साहित्य के कसौटियों से परे एक ग्रँथ है। निःसंदेह समूचे विश्व में इस ग्रँथ से बेहतर लाखो ग्रँथ, क़िताब, साहित्य, दर्शन शास्त्र और धार्मिक पुस्तकें होंगे जो इससे कई गुणा बेहतर और सटीक मार्गदर्शन करता होगा परन्तु यह ग्रँथ एक नवीन ऑडियोलॉजी और साइंटिफिक थिंकिंग प्रस्तुत करता है।

चाहे क्यों न यह ग्रँथ लेखक की असफलता और अपरिपक्वता को चिन्हाँकित और प्रमाणित करता हो। चाहे क्यों न लेखक अपने विचार और फिलॉसोफी को समाज में थोपने के प्रयास से असफल रहा हो। फिर भी इस ग्रँथ के माध्यम से लेखक नें हंड्रेड्स क़्वेश्चन के साथ आपको नवदर्शन के अनुरूप सोचने और बौद्धिक विकास के लिए मजबूर करता है। यह ग्रँथ आपको एक बेहतरीन नवीन ऑडियोलॉजी के नाम पर ढ़ेर सारा प्रश्न और अधूरे स्पष्टीकरण के साथ आपको निराश भी करता है। यदि आप स्वयं न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत के अनुकूल तर्क करने में सक्षम नहीं हैं अपना उत्तर खोजने के योग्य नहीं हैं, Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" को पढ़ना आपके लिए बेचैनी का कारण बनेगा। इस क़िताब से आपको कोई विशेष शिक्षा अथवा जानकारी नहीं मिलेगी। यदि आप किसी पूर्वाग्रह से प्रेरित हैं अथवा किसी विचारधारा के अंधग़ुलाम हैं तो आप इस ग्रँथ को बिलकुल मत पढ़िए। आपको लेखक के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए प्रेरित होना पड़ सकता है। क्योंकि आप जिन कृत्य को अपनी गौरवशाली परंपरा और संस्कृति मानते आ रहे हैं, लेखक उन्हीं कृत्यों पर संवैधानिक कर्तव्यों का हवाला देते हुए नए साइंटिफिक थिंकिंग के साथ तर्क करने का प्रयास करेंगे। फिर आपके पास दो विकल्प हो सकते हैं, पहला यह कि आप अपनी बुद्धि और तर्क के बल पर अंध ग़ुलामी से मुक्त हो जाएँ और दूसरा यह कि आप यथावत उसी विचारधारा के साथ आँख मुँदकर चलते रहें, चाहे वह कितना ही गलत क्यों न हो। आप अन्याय जानकर भी राइट टू क़्वेश्चन एंड स्पीकिंग का प्रयोग नहीं करेंगे बल्कि सहते रहेंगे, ढ़ोते रहेंगे।

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" वर्तमान परिवेश में चल रहे व्यक्तिगत, सामाजिक तथा धार्मिक विश्वास और गौरवशाली परंपरा के नाम पर चले आ रहे बुराइयों पर साइंटिफिक थिंकिंग विकसित करने का प्रयास है। यह ग्रँथ एरर.फ्री नहीं बल्कि एरर.फुल प्रकाशित है। मूलतः इस ग्रँथ में मौजूद त्रूटि और स्वच्छंदता ही इसके ओरिजिनल एलिमेंट्स हैं। मूल रूप से हिन्दी भाषा में लिखे इस ग्रँथ में इंग्लिश और छत्तीसगढ़ी के शब्दों, वाक्यों और कहावतों का प्रयोग हुआ है। ये ग्रँथ हिन्दी भाषी लोगों को छत्तीसगढ़ी सीखने तथा बोलने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसमें ऐसे शब्दसंयोग भी मिलेंगे जो शायद किसी भी डिक्शनरी में न हो। आत्म-आलोचना और अपमानजनक सम्बोधन के साथ लेखक ने हिडन मैसेज दिया है। यह ग्रँथ पाठकों को न सिर्फ सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन के लिए प्रेरित करती है वरन् साहित्य लिखने के लिए बुद्धिजीवी होने अथवा अधिक पढ़े लिखे होने की अनिवार्य योग्यता वाली मानसिकता पर भी कठोर प्रहार करता है। लेखक इस क़िताब के माध्यम से हिस्टोरिकल बुक्स पर भी क़्वेश्चन करता है।

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब के लेखक कौन हैं ?
Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब के लेखक श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी जी हैं । 

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब किस प्रकाशन से प्रकाशित होगी ?
Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब का प्रकाशन "सतयुग प्रकाशन, रायपुर" से होगी। 

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AnguthaChhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" नामक किताब की खासियत क्या है ?

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक"  नामक किताब की खासियत क्या है ? अँगूठाछाप लेखक - ‘‘अबोध विचारक के बईसुरहा दर्शन’’ एक असफल सा...

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