Monday, May 03, 2021

पत्नी को काबू में कैसे रखें, पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत करने के 15 बेहतरीन उपाय : धर्मगुरु हुलेश्वर बाबा

पत्नी को काबू में कैसे रखें, पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत करने के 15 बेहतरीन उपाय : धर्मगुरु हुलेश्वर बाबा
मौजूदा समय में हम परिवार को लेकर इस बात के लिए आशान्वित रहते हैं कि हमारा परिवार सुखमय, शांतिपूर्ण तथा समृद्धियुक्त हो। यदि आप भी इसीतरह के कुछ आशाओं से प्रेरित हैं तो आपको इस बात का ख्याल रखना होगा कि परिवार के सुख, शांति और समृद्धि के लिए परिवार में एकता हो तथा एकता के लिए परिवार का Centralized होना भी जरूरी है जबकि परिवार को Centralized रखने के लिए परिवार का एक अपना Rules हो, DisciplineSet हो तथा इसके लिए बाकायदा JudiciarySystem भी तैयार होनी चाहिए। 

यदि आप इंसानियत के धर्म को समझते हों तो आप किसी एक मानसिकता से ग्रसित होकर परिवार के कम शक्तिशाली लोगों खासकर स्त्री को गुलाम, सेविका या दासी समझने की भूल नहीं करेंगे। इसका तात्पर्य यह है कि आपके परिवार में व्यक्तिगत रूप से शक्ति और आय के आधार पर निर्णय लेने के अधिकार तय नहीं होंगे बल्कि निर्णय का अधिकार परिवार के साझे हित और सर्वांगीण विकास के ध्येय से समानता और न्याय के सिद्धांत पर आधारित होगा। अब तक आप समझ चुके होंगे कि परिवार का मुखिया सबसे अधिक उम्र, सबसे अधिक ताकत अथवा सबसे अधिक आय के आधार पर निर्धारित नहीं होना चाहिए, खासकर लिंग के आधार पर मुखिया होने की मानसिकता तो नैसर्गिक न्याय, नैसर्गिक सौंदर्य, Equality और Rules of Peace के खिलाफ है। यदि आपके परिवार में मुखिया अथवा निर्णय के अधिकार इन आधारों पर तय होते हैं तो आपका परिवार परिवार नहीं बल्कि GoverningBody है वैसे मैं साफ शब्दों में कहूँ तो तानाशाही सरकार है।

अब पत्नी को नियंत्रण करने अथवा काबू या कब्जे में रखने की बात शुरू करने के पहले मैं एक कहानी बताना आवश्यक समझता हूं। मेरे बाप, दादा और परदादाओं के द्वारा निरंतर गाय-बैल, भैसी-भैसा पाला जाता था क्योंकि ये दुग्धपदार्थ और जीवन यापन हेतु कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी जानवर हैं। आम मनुष्यों की भांति मेरे बाप दादा भी इन्हें नियंत्रण अथवा कब्ज़े/काबू में रखते थे, मेरे पूर्वज निरंतर भूमि, जमीन जायजाद पर भी अपना कब्जा रखते आ रहे हैं। मेरे परदादाओं का सैकड़ों एकड़ जमीन था हजारों गाय, बैल और भैंस थे जिनका कब्जा वे अन्य लोगों को हस्तांतरित कर लेते थे, दान में अथवा दाम में बेच देते थे; मैं भी भूमि, सामग्री और पशुओं जैसे चल अचल संपत्ति के क्रय विक्रय करने और उसे कब्जा में रखने की मानसिकता को उचित समझकर ऐसा करता हूँ। "मैं मानता हूं कब्जा का हस्तांतरण और विक्रय किया जा सकता है।" सरकारें भी बाकायदा कानून बनाकर कब्जा हस्तातंरण करने और बेचने का नियम बना रखा है जो लगभग सभी देश में संवैधानिक भी है। आपको भी पता है "चल अचल संपत्ति को क्रय विक्रय अथवा दान में देकर इसके कब्जा को हस्तांतरित किया जा सकता है मगर परिवार के सदस्य ही नहीं वरन कोई भी इंसान चल-अचल संपत्ति अथवा वस्तु नहीं है।" 

अब आपको पता है कि आपके परिवार के सदस्य; (माँ-बाप, पति-पत्नी, भाई-बहन और बच्चे) सहित आप स्वयं भी कोई वस्तु नहीं हैं, कोई चल-अचल संपत्ति अथवा जानवर नहीं हैं। इसलिए आप पर कोई कब्जा भी नहीं कर सकता, न आप पर से कोई अपना कब्जा क्रय विक्रय अथवा दान के माध्यम से हस्तांतरित भी कर सकता है। इसका मतलब ये कि पति-पत्नी ही नहीं वरन संतान भी कब्जा में रखने की वस्तु नहीं हैं। यदि आपमें अब भी अपनी पत्नी को काबू में रखने की मानसिकता है तो आप उन्हें जानवर या गुलाम समझने की भूल कर रहें यदि ऐसा भूल कर रहे हैं तो ख्याल रखना आपकी बहन और बेटी भी किसी की...... है; आपकी माँ भी आपके बाप की गुलाम है, दासी है, सेविका है और आपके बाप के लिए हस्तांतरण योग्य वस्तुएं।

हाँ; यदि आप अपनी पत्नी अथवा पति को सदैव आकर्षित रखना चाहते हैं, आप दोनों के मध्य प्रेम और समर्पण की भावना को बरकरार रखना चाहते हैं तो इसके लिए मैं अपना सुझाव देता हूँ:-
1- अपने जीवनसाथी के साथ दोस्त बनकर जीवन जीएं; पत्नी को गुलाम, सेविका या दासी न समझें। (पति-पत्नी में कोई एक महान नहीं बल्कि दोनों बराबर हैं; पति परमेश्वर नहीं होता।)
2- हर स्थिति में सहभागिता बरकरार रखें; भोजन और सब्जी बनाने, बर्तन और कपड़े धोने,  तेल मालिश और हाथ पांव दबाने से न हिचकिचाएं।
3- अपने जीवनसाथी के छोटे मोटे गलतियों की अनदेखी करें।
4- जीवनसाथी को बेजा-कब्जा की वस्तु न समझें, बल्कि उन्हें उनके समुचित मानव अधिकारों के इस्तेमाल के लिए जागरूक करते रहें।
5- नियमित रूप से Picnic Spot, सार्वजनिक स्थानों और Tour's में जाएं और आवश्यक आजादी/स्वतंत्रता प्रदान करें। हर विषय में खुलकर विचार विमर्श करें, अपनी भावनाएं और विचार सादगीपूर्ण तरीके से एक दूसरे से शेयर करें।
6- शारीरिक श्रम में दोनों बराबर का योगदान दें, खासकर जब आपकी अवकाश हों आप भी घर का आधा काम अनिवार्य रूप से करें; जीवनसाथी का पसंदीदा भोजन स्वयं बनाएं, अपने हाथों से खिलाएं और सारे बर्तन धोएं।
7- आकश्मिक स्थिति में यदि लड़ाई झगड़े की स्थिति निर्मित हो रही हो तो माफी मांग लें, अन्यथा हानि आपको ही अधिक होने वाली है।
8- समय समय पर Gifts देते रहें, जब भी आपके जीवनसाथी तारीफ योग्य काम करे तारीफ और धन्यवाद जरूर ज्ञापित करें।
9- यथासंभव समय समय पर उन्हें मायके जरूर ले जाएं, उनके मायके वालों का अपने माता पिता के बराबर सम्मान करें।
10- पत्नी को संभोग करने और बच्चे जन्म देने की Machine न समझें।
11- पत्नी के साथ कभी मारपीट न करें; यदि आप मारपीट करते हैं मतलब आपके गलती पर आपकी पत्नी को भी पीटने का अधिकार है जिसे आपको स्वीकार करना होगा।
12- कभी भी दूसरे पक्ष को इतना प्रताड़ित न करें कि वह आपसे तंग आकर आपके साथी आत्महत्या करने पर मजबूर हो। यदि आप जीवनसाथी से परेशान हैं तो आत्महत्या कदापि न करें बल्कि तत्काल तलाक ले लें।
13- घरेलू शारीरिक काम से राहत दें परंतु खुद व्यस्त रहें और उन्हें भी व्यस्त रखें। अर्थात उच्च शिक्षा और Resurch के लिये अध्ययन करते/कराते रहें, यदि ऐसा संभव न हो तो महान लोगों की जीवनी, आत्मकथा और अन्य किताब पढ़ें और अपने जीवनसाथी को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
14- Social Media Sites, Mobile से मिलने वाले Notifications, धारावाहिक और धार्मिक राजनैतिक समाचार से बचें।
15- Life में Romance बरकरार रखें; जब भी अवसर मिले जीवनसाथी के साथ खिलखिला कर हँसे, जीवनसाथी को मुस्कराने का अवसर दें।
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Friday, April 16, 2021

नारायणपुर पुलिस द्वारा फिल्मांकित हल्बी गीत ‘‘प्रशासन करे दे रक्षा’’ रिलिज, सोशल मीडिया में जमकर हो रहा है वायरल, देखने के लिए अभी क्लिक करें.........


‘‘प्रशासन करे दे रक्षा’’ एक हल्बी गीत है, जिसे नारायणपुर पुलिस द्वारा तैयार कराया गया है। इस गीत के गीतकार श्री मोहित गर्ग (आईपीएस) पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर हैं। इस गीत के माध्यम से सरकार और पुलिस द्वारा आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराये जा रहे मूलभूत कल्याणकारी सेवाएं जैसे राशन, चिकित्सा, शिक्षा, बिजली, पानी, सड़क और सुरक्षा सहित पुलिस तथा केन्द्रीय बलों द्वारा सिविक एक्शन के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लोगों को उपलब्ध कराये जा रहे आवश्यक संसाधनों को फिल्मांकित किया गया है।

आपसे अनुरोध है कि इस विडियो को सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को शेयर करें, ताकि नक्सलियों को आत्मसमर्पण के माध्यम से समाज के मुख्यधारा में जोडने का हमारा प्रयास सार्थक हो सके।

उल्लेखनीय है कि इस गीत के निदेशक प्रवीण सलाम और उनके साथी अमित सरकार, स्वाती पट्टावी और दिलीप निर्मलकर हैं तथा गायक-गायिका दीपक, सुखदेव, राजू बघेल, रस्सु, प्रियंका और शिवानी हैं। गीत में केमरामेन नागेश मण्डावी है और म्यूजिक परवेज खान का है। गीत रचना में शानू, संतोष और राजू ने श्री गर्ग का सहयोग किया है। वहीं मुख्य कलाकार के रूप में कन्हैया वैष्णव और निकिता उर्वशा ने अपना रोल निभाया है सहयोगी कलाकार के रूप में जीत बघेल, हरिश उईके, पिताम्बर, दिव्यांशू, दिमेश्वरी यादव, दिव्या मानिकपुरी, प्रियंका उसेण्डी, सीखा साहू, बेबी यादव, अर्पण, आदि और शांतनु ने भी काम किया गया है।





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Saturday, April 10, 2021

जीवन का रिसेट बटन नहीं होता और न तो टाइम मशीन जैसी कोई मशीन होती है इसलिए जीवन के सुरक्षा को प्रथम प्राथमिकता में रखें..... प्लीज Covid-19, कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने का प्रयास करें : HP Joshi

जीवन का रिसेट बटन नहीं होता और न तो टाइम मशीन जैसी कोई मशीन होती है इसलिए जीवन के सुरक्षा को प्रथम प्राथमिकता में रखें..... प्लीज Covid-19, कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने का प्रयास करें : HP Joshi

साथियों जैसा कि आपको ज्ञात है इस बार के Covid-19 कोरोना वायरस पिछले बार के कोरोना वायरस से अधिक घातक है जो पिछले बार के वायरस से अधिक तीव्र गति से प्रसार कर रहा है। इसका मतलब ये कि हमें पिछली बार से अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, हम सबने पिछले बार वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए अपना अहम भूमिका निभाते हुए खुद को इसके संक्रमण से बचाया। आप सबने आपदा को अवसर न बनाते हुए जरूरतमंद लोगों की सहायता भी की थी इसबार भी हमें इसके लिए तैयार रहना होगा।

"जान है तो जहान है।" इस बात को गांठ बांध कर रख लीजिए क्योंकि अभी इस संक्रमण काल में इससे बड़ा धार्मिक नियम, शिक्षा, ज्ञान और संयम कुछ भी नहीं है।

मेरे प्यारे देशवासियों आपसे अनुरोध है प्लीज वायरस के संक्रमण से खुद बचें और दूसरों को भी बचने के लिए अपील करिए। चिन्हांकित अस्पताल में Covid-19 से बचाव के लिए टीकाकरण हो रहा है, जब भी आपकी बारी आए टीकाकरण जरूर कराएं। साथियों भारत में बने टीकाकरण अत्यंत सुरक्षित है, टीकाकरण करवाने के बाद आप Covid-19 के संक्रमण से लड़ने में सक्षम हो सकते हैं, संभव है आपको कोरोना संक्रमण भी न हो।

यदि आपने Covid-19 टीकाकरण करा लिया है तब भी सुरक्षा मापदंडों का पालन अवश्य करें क्योंकि संभव है इसके बाद आपको संक्रमण न हो अथवा होने पर भी ये वायरस आपके लिए जानलेवा न भी हो मगर आपको इस बात का ख्याल रखना होगा कि यदि आप संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आएंगे तो कोरोना वायरस के वाहक के रूप में काम करते हुए अन्य लोगों जिसमें आपके पारिवारिक सदस्य, नजदीकी रिश्तेदार और कार्यालयीन स्टाफ शामिल हैं के लिये खतरनाक हो सकते हैं।

Covid-19 के संबंध में सरकार और विशेषज्ञों द्वारा जारी सुरक्षा मापदंडों का अनिवार्य रूप से पालन करें, सोशल मीडिया साइट्स में उपलब्ध अफवाहों के झांसे में आकर इसे हल्के में न लें अथवा एक्सपेरिमेंट न करें; क्योंकि ऐसा करना न सिर्फ आपके लिए बल्कि आपके परिवार के अन्य सदस्य और स्टाफ के लिए जानलेवा साबित होगा।

अंत में एक बार फिर से अनुरोध है कृपया Physical Distancing का पालन करें, Face Mask पहनें और साबुन अथवा Sanitizer से हाथों का Sensitization करते रहें।

HP Joshi
Narayanpur (Chhattisgarh)
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Friday, April 09, 2021

बस्तर के मेरे प्यारे नक्सली भाईयों प्लीज क्रूरता, हत्या और मृत्यु का रास्ता छोड़कर...... आत्मसमर्पण करके आम नागरिक बनो, देश के शीर्ष अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंत्री और जज बनो: श्री एच.पी. जोशी

बस्तर के मेरे प्यारे नक्सली भाईयों प्लीज क्रूरता, हत्या और मृत्यु का रास्ता छोड़कर...... आत्मसमर्पण करके आम नागरिक बनो, देश के शीर्ष अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंत्री और जज बनो: श्री एच.पी. जोशी

दोस्तों आपको बता दूं कि ‘‘लोकतंत्र में हथियार उठाना कायरता की मिशाल है।’’ आपके शीर्ष लीडर अपने नाम बदलकर अरबपति का जीवन जी रहे हैं और उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं जबकि आप जैसे आम जनता को ये लागे गुमराह करके आपके शोषण करते हैं..... आपको सरकार में होना चाहिए और ये आपको ही सरकार के खिलाफ नक्सली बना रहे हैं।

वास्तव में हथियार उठाना कायरता और बुझदिली की निशानी हैं इसलिए आपसे निवेदन है कि आप आत्मसमर्पण करें और लोकतंत्र में भागीदार बनकर सिस्टम सुधार के जनक बनें। नक्सलवाद को बढ़ावा देने वालों का सदैव आरोप रहता है कि सरकारी तंत्र उन्हें उपेक्षित रखता हैं उन्हें समुचित संवैधानिक अधिकार नहीं देता तो यह झूठ है क्योंकि संविधान में सरकार का दायित्व निर्धारित कर दिया गया है कि सरकार देश के सभी नागरिकों को उनके अधिकारों को प्रदान करे, इसके लिए बाकायदा न्यायालय और मानव अधिकार आयोग भी है जो नागरिकों के सभी अधिकार को समान रूप से संरक्षित करते हैं, यदि आपको भी कोई समस्या है तो आम जनता की भांति न्यायालय की शरण में चलो।

खूनी आतंक के पर्याय बन चुके नक्सलियों के शीर्ष नेताओं को पता है कि इन हिंसा और उपद्रव से उन्हें आर्थिक लाभ मिलता रहेगा इसलिए नीचे के छोटे मोटे नक्सली अर्थात हथियारबंद नक्सलियों को देश के वीर जवानों के खिलाफ छल कपट से लड़ने के लिए उकसाते हैं।

आपके बड़े लीडर के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, गोपनीय और अनगिनत नामों से नक्सली बनकर न केवल आम जनता को बल्कि आपको भी लूटने वाले ये लोग अरबपति बनकर बड़े ठाठ की जिंदगी जी रहे हैं आपका ब्रेनवॉश करके ये आपका शोषण कर रहे हैं और आपको आपके ही हाथों मानव अधिकारों से वंचित रहने को मजबूर कर रहे हैं। आपको बता देना चाहता हूं कि आप आत्म समर्पण करके सबसे अच्छे, सुविधायुक्त और ठाठ के जीवन जी सकते हैं जिसपर आपका पूरा अधिकार है, संभव है आपको मेरे बातों पर विश्वास न हों इसलिए आपसे विनती है अपने आसपास के आत्म समर्पित नक्सलियों और आपके जीवन की तुलना करके देख लीजिए। कभी आपके साथ घोर जंगल, पहाडी में भटकने वाला इंसान सुख से अपने परिवार के साथ अपना जीवन व्यतित कर रहे हैं।

मेरे बस्तर के मूल निवासी भाईयों आप लोगों को समझना होगा कि किस तरह से ये लोग आपके शोषण करने में लगे हैं और कैसे बड़े चालाकी से आपको आपके परिवार, समाज और देश के खिलाफ कर चूके हैं। आपको समझना होगा, आपको जागरूक होना होगा, जितना जल्दी हो सके आपको अपने शीर्ष लीडर के चालाकी और मानसिकता की समीक्षा करके आत्मसमर्पण करना होगा और लोकतंत्र में भागीदार बनकर, चुनाव लड़कर, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विधायक, सांसद और मंत्री बनकर अपने लोगों को विकास की नई दिशा दिखाना होगा उन्हें शिक्षा और उच्च शिक्षा के माध्यम से स्वयं और अपने बच्चों को आईएएस, आईपीएस जैसे शीर्ष अधिकारी बनाना होगा।

आपको पता होनी चाहिए कि नक्सली बनकर आप बेहतर जीवन की कल्पना भी नहीं कर पा रहे हैं जबकि आमतौर पर हर नागरिक को बेहतर जीवन के लिए सारे आवश्यक अवसर उपलब्ध हैं। सरकारी तंत्र हर प्रकार के सुविधाओं जैसे निःशुल्क आवास, निःशुल्क राशन, निःशुल्क चिकित्सा, निःशुल्क शिक्षा, निःशुल्क स्कील, निःशुल्क सुरक्षा और निःशुल्क कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराता है जबकि आप नक्सली बनकर अपने इन अधिकार से वंचित दशहत, डर और भययुक्त जीवन को अपना साथी समझ बैठे हैं। आप सिस्टम में वापस आईये फिर आपको यदि लगेगा कि आपके साथ आपके लोगों के साथ अन्याय हो रहा है तो अभिव्यक्ति की आजादी का लाभ उठाईये, सरकार से लोकतांत्रिक तरीके से मांग करिए।

आपको गुरू घासीदास बाबा के बारे में जानना होगा जिन्होने कहा है कि सभी मनुष्य एक समान हैं। आपको इस बात को भी जानना होगा कि हर मनुष्य भाई बहन के समान हैं। मैं आपसे फिर से अपील करता हूं कि आओ, लोकतंत्र में अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन करते हुए अपने हक और अधिकार को हासिल करो, मरना या मारना इसका कोई विकल्प ही नहीं है। आप जिन सशस्त्र बल, पुलिस और सहायक सशस्त्र बल के जवानों से लड़ रहे हो, जिन्हें शहादत के लिए मजबूर कर रहे हो वे सब आपके बचपन के साथी या भाई ही हैं। आपके सामने ऐसे दर्जनों अवसर भी आये हैं जब आपके बंदूक के निशाने पर आपके ही भाई बहन होते हैं, आपके नक्सली लीडर आपके परिवार के सदस्यों के ऊपर मुखबिर होने का झूठा आरोप लगाकर आपसे ही मरवा देते हैं और आप उनके झांसे में आकर आपके अपने परिवार और रिश्तेदारों की भी कत्ल कर जाते हैं। आपको एक बार अपने आंखों के चश्मे उतारकर अपने और आम जनता के जीवन शैली की समीक्षा करनी होगी, तब समझ में आएगा कि उन्होनें आपको कितने गहरे पानी रखे हैं। थोड़ा अपने घर परिवार को झांक कर तो देखो और बताओ आपके पास कितने मोबाइल फोन है, कितने लेपटॉप है, कितने टेलीविजन है, कितने सोफा, कितना पलंग, कितने दीवान, कितने आलमारी और कितने लॉकर है?

नक्सली भाइयों मेरा आपसे कुछ प्रश्न है :-
1- क्या कभी आपने बिना भय के जीवन जीया है?
2- क्या कभी बिना हथियार के खुद को सुरक्षित पाते हो?
3- क्या आप नक्सली बनने के बाद सुख, चैन के साथ परिवार के साथ जीवन का आनंद ले पाते हो?
4- क्या आपके नक्सली लीडर आपको वैवाहिक जीवन, परिवार और अच्छे आवास की व्यवस्था उपलब्ध करा सकते हैं?
5- क्या आपने कभी अच्छे और मनचाहे कपड़े कभी पहना है?
6- क्या कभी मनचाहे पर्यटकों में घूमने का अवसर पाया है?
7- क्या कभी शहरों में जाकर मॉल, शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, सर्कस, मेला, उद्यान और चौक चौपाटी में जीवन का आनंद लिया है?
8- क्या कभी आप अपने परिवार और समाज के साथ कहीं पिकनिक या टूर में गया है?
9- क्या नक्सली बनने के बाद आपको किसी पारिवारिक सदस्यों, समाज या सरकार ने कभी सम्मानित किया है?
10- क्या आपको नहीं लगता कि आप भी मंत्री बनें, संसद या विधायक बनें?
11- क्या कभी आपने अपने परिवार के साथ एसी, कूलर लगे घर जिसमें सोफा हो, बड़ा सा महाराजा सेट वाला पलंग और लाइव टेलीकास्ट हो रहे टेलीविजन के सामने अपने परिवार के साथ मिलकर चाय नाश्ता और भोजन किया है?
12- क्या कभी आपने परिवार के साथ कुछ फ़िल्म, कुछ सीरियल, रोमांटिक गानें और मजेदार चुटकुले सुना है?
13- क्या आपको आपके लीडर जैसे सुविधाएं मिलती है; क्या आपके बच्चे आपके लीडर के बच्चों के बराबर उनके साथ उनके स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं?
14- क्या आपको और आपके बच्चों को विभिन्न भाषाओं को पढ़ना लिखना आता है? पढ़ना लिखना नहीं आता इसीलिए तो आपके लीडर आपको बेवकूफ बनाकर मजा कर रहे हैं।

मुझे विश्वास है इन चंद प्रश्नों के लिए आपका हर जवाब 'नहीं' में होगा, मैं जानता हूँ आपसे सैकड़ों ही नहीं हजारों प्रश्न भी करूँगा तो भी आपके सारे जवाब 'नहीं' में ही रहेगा। इसलिए यदि आपको जीवन का असली आनंद लेना हो तो आओ हिंसा को त्याग कर हमारे साथ जीवन का आंनद लीजिए... सुखद जीवन के लिए हिंसा का रास्ता छोड़ दो, प्रेम और सद्भावना को अपने जीवन में स्थान दो। आपके ईश्वर ने आपके आराध्य ने और आपके माता पिता ने आपको सुख सुविधाओं से युक्त सुखद जीवन जीने के लिए जन्म दिया है इसलिए जीने का आनंद लो। आइए क्रूरता, हत्या और मृत्यु का रास्ता छोड़कर, नक्सली लीडरों के चमचागिरी को त्यागकर अच्छे जीवन का विकल्प चुने...... आत्मसमर्पण करके आम नागरिक बनें, अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंत्री और जज बनें।
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वन्य क्षेत्रों में जल की उपलब्धता पर आधारित "मंकी सिंह की कहानी"

बंदर मंकी सिंह की आपबीती कहीं आपकी न हो जाए, इसलिए जल का संरक्षण करें... वन्य जीवों के लिए पर्याप्त जल और वृक्षों की उपलब्धता किस तरह सुनिश्चित किया जाए इसे जानने के लिए मातृका दीदी की सुझाव जरूर पढ़िए...

"मंकी सिंह की कहानी"

एक बार की बात है दो बहनें मातृका और दुर्गम्या Morning Walk पर जा रही थी तभी उन्होंने देखा सड़क किनारे बंदर मंकी सिंह अलसाया हुआ, दुःखी और निराश बैठा है।

मातृका दीदी बंदर के पास जाकर पूछती है: क्यों भाई मंकी सिंह आप परेशान और चिंतित क्यों बैठे हैं?

मंकी सिंह ने जवाब दिया: मातृका दीदी, "क्या आपको पता कि जंगलों से सारे फलदार और इमारती ही नहीं वरन अन्य वृक्षों को भी काटकर समाप्त कर दिया गया है जिसके कारण जंगलों के लगभग सारे जलस्रोत भी सूख चुके हैं।" भोजन और पानी के अभाव में जंगल के सारे जीवों के जीवन खतरे में पड़ गया है, यदि यही स्थिति रही तो सारे जंगली जानवर जल्दी ही मर जायेंगे।

मातृका दीदी: ओह! आप ये क्या कह रहे हैं मंकी सिंह?

मंकी सिंह: सही बता रहा हूँ मातृका दीदी, मेरा ही दुर्भाग्य देखिए भूख प्यास के कारण मेरे माता-पिता, पत्नी और बच्चे सहित मेरा पूरा परिवार मर गया है, इसलिए मैं दुःखी हूँ।

दुर्गम्या अपने बैग से Bottle निकालती है और मंकी सिंह को पीने के लिए देते हुए कहती है: मंकी सिंह आप भी बहुत भूखे प्यासे लग रहे हैं, थोड़ा पानी पी लीजिए फिर मेरे घर चलकर मेरे साथ भोजन ग्रहण कर लेना।

मंकी सिंह Bottle वापस करते हुए कहता है: नहीं दुर्गम्या दीदी मेरे परिवार के सारे सदस्य तो मर गए हैं फिर मैं जी कर क्या करूँगा कहते हुए फफककर रो पड़ता है।

मातृका दीदी मंकी सिंह के आँसू पोछती है और उसके शिर में हाथ फेरकर उन्हें समझाते हुए कहती है: भाई मंकी सिंह हम आपके परिवार तो आपको लौटा नहीं सकते मगर हम पर भरोसा रखो, हम प्रयास करेंगे कि अब जंगल के कोई भी जीव भूख और प्यास के कारण नहीं मरेगा और जंगल में फिर से खुशहाली वापस लौट आएगी।

दुर्गम्या दीदी मातृका दीदी के बातों का समर्थन करते हुए कहती है: भाई मंकी सिंह, हम प्रयास करेंगे कि जंगल फिर से आप सबके रहने योग्य और सुरक्षित हो जाए।

ये सुनकर थोड़ी ही देर में मंकी सिंह Bottle का ढक्कन खोलता है और एक ही घुट में पूरे पानी ढक कर जाता है और बोलता है: ThankYou दीदी।

तभी दुर्गम्या दीदी नौटंकी करते हुए कहती है: देखो न मातृका दीदी भाई मंकी सिंह ने तो मेरे Bottle के सारे पानी पी लिया.... उहू उहुँ कहते हुए रोने लगती है।

दुर्गम्या दीदी के नखरे देखकर मंकी सिंह और मातृका दीदी जोर से हस पड़ते हैं,उसके बाद तीनों वापस घर आ जाते हैं, आंगन में लगे आम फल की लालच मंकी सिंह को पेड़ में चढ़ने पर मजबूर कर देता है, मंकी सिंह आज खूब आम खाया और उसके बाद उछल कूद मचाते हुए कुछ आम नीचे आंगन में ही गिरा देता है इसे देखकर दुर्गम्या दीदी गुस्से में आ जाती है और बोलती है मंकी सिंह आखिर तुम बंदर ही रहोगे..... गुलाटी मारना कभी नहीं छोड़ोगे.....। मंकी सिंह नीचे आकर माफ़ी के भाव से बोलता है: Sorry Durgamya Joshi, फिर तीनों घर के भीतर प्रवेश करते हैं Cooler चालू करके चर्चा करने लग जाते हैं कि कैसे हम जंगलों में पर्याप्त मात्रा में पानी और जंगली जानवरों के लिए भोजन सुनिश्चित कर सकते हैं।

दुर्गम्या दीदी चर्चा का शुरुआत करते हुए बोलती है: हम सरकार से आग्रह करेंगे कि सरकार वन क्षेत्र में अधिक से अधिक बांध और चेकडैम बनवाये, जहाँ बांध और चेकडैम संभव न हो वहां पर तालाब अथवा डबरी का निर्माण करवाए।

मंकी सिंह: दुर्गम्या दीदी यह सबसे बेहतर उपाय है परंतु इसमें तो सरकार को भारी लागत लगाना पड़ेगा, ऊपर से अधिकतर बांध और चेकडैम विवादित भी हो जाते हैं। बांध बन भी गया तो लोग बांध के चोरों तरफ पिकनिक स्पॉट बनाकर जंगली जानवरों के लिए फिर से उसे प्रतिबंधित कर देते हैं। कुछ तालाब और डबरी तो शिकारी जानवरों के ही कब्जा में होता है जिसके कारण भूख प्यास मिटाने के नाम पर अधिकतर जीव उन शिकारी जानवरों के भोजन बन जाते हैं।

दुर्गम्या दीदी: तो हम इसके लिए बेहतर विकल्प के रूप में क्या कर सकते हैं मातृका दीदी?

मातृका दीदी: अच्छा है, कोई बात नहीं, हमारे पास इससे सरल, सहज, सस्ते और आसान परन्तु बेहतर उपाय है जिससे हम जंगल के हर स्थान में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं।

दुर्गम्या दीदी: वो कैसे दीदी?

मातृका दीदी: आप सबको तो पता है कि वन क्षेत्र में भी पहले से ही पर्याप्त संख्या में तालाब, डबरी और छोटे बड़े नाला उपलब्ध है; हम उन सारे स्थानों में ट्यूबवेल खोदाई करके उसमें सोलर पंप लगवा कर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते हैं फिर प्यास के कारण कोई भी जीव मरेगा नहीं।

मंकी सिंह: ये तो बेहतर उपाय है मातृका दीदी। मगर एक समस्या उन जीवों के लिए स्थिर बनी रहेगी जो अधिकतर समय पर्वतों में रहते हैं। जब गर्मी के दिनों में उन्हें प्यास लगती है तो वे नीचे आकर पानी पीते उसके पहले ही उनके जान गले से आ निकलती है, मुश्किल से प्यास बुझ भी गई तो फिर से पहाड़ी के ऊपर चढ़ने में उन्हें पुनः प्यास लग जाती है। मातृका दीदी कई जंगली जानवर तो पर्वत श्रृंखलाओं के उस पार होते हैं उनके लिए क्या कुछ बेहतर व्यवस्था सोची जा सकती है?

मातृका दीदी: क्यों नहीं; हम ऐसे पर्वत श्रृंखलाओं के बीच वाले पर्वत के ऊपर ही ट्यूबवेल और सोलर एनर्जी के माध्यम से पानी उपलब्ध करवा सकते हैं जो नीचे की ओर छोटी सी झरना की भांति झरती रहेगी फलस्वरूप अलग अलग श्रेणी के जानवर एक ही समय में पानी पी सकेंगे इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के वृक्षों को भी जीवित रखने में लाभदायक हो सकेगा।

दुर्गम्या दीदी: मातृका दीदी हम मंकी सिंह के लिए उन स्थानों में आम और अन्य फलदार वृक्ष जरूर लगाएंगे; ताकि मंकी सिंह हमारे घर, आंगन, बाड़ी और खेतों के फसल, फल और पेड़ को बर्बाद करने न आएं।

मंकी सिंहः दुर्गम्या दीदी, हम जानवर तो खुद को जंगलों में ही सुरक्षित और बेहतर समझते हैं, आबादी क्षेत्र में आना हमारे लिए अत्यंत खतरनाक और जानलेवा होता है क्योंकि कई गांव और शहर में हमारे साथी जानवरों को भरमार बंदूक का शिकार होना पड़ता है।

चर्चा समाप्ति के बाद मातृका दीदी टेबल में रखे अपने स्मार्टफोन को उठाती है और सोशल मीडिया साइट्स के माध्यम से दोस्तों और सरकार से अपील करती है : "प्लीज सर.... प्लीज दोस्तों.... वनों और पर्वतीय क्षेत्रों में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में अपना योगदान दीजिए, क्योंकि जंगलों और पर्वतों में पानी और फलदार वृक्षों की जरूरत न सिर्फ मंकी सिंह और अन्य जंगली जीव के आवश्यक है वरन समान रूप से हम सभी मनुष्यों के लिए भी आवश्यक है।" आपको याद दिला देना चाहती हूँ कि पारिस्थितिकी तंत्र के सारे जीव के लिए सबसे पहली प्राथमिकता जल और भोजन है, सबसे खास बात तो ये है कि जैव विविधता के बिना हम मनुष्यों के जीवन की भी कल्पना नहीं की जा सकती।

वृक्ष, वन और जल एक दूसरे के पूरक और एक दूसरे पर निर्भर है, आप सबको तो पता ही है कि जल बिना किसी भी जीव की जीवन संभव नहीं है इसलिए प्लीज आज ही संकल्प लीजिए कि अपने घर, परिवार, वार्ड, मोहल्ले, गांव और शहर से पहले जंगलों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता और वृक्षारोपण सुनिश्चित करेंगे। आप सबको ज्ञात है कि हर साल दर साल गर्मी बढ़ती जा रही है जिसके कारण हम Cooler, AC और Fridge के आदी होते जा रहे हैं जबकि ये हमारे जीवन के लिए घातक भी है इसलिए आपसे निवेदन है अपने घर, महल या Building को बड़ा बनाने के बजाय उसे छोटा बनाइये मगर अपने आंगन, बाड़ी, खेत और सड़क में पौधरोपण जरूर करिए इससे न सिर्फ धरती की तापमान कम होगी बल्कि हम Cooler, AC और Fridge के निर्भरता से भी उबर सकेंगे।

प्लीज सर..... प्लीज पाठक साथियों.... प्लीज मीडिया बंधुओं..... आप भी जल संरक्षण के लिए अपने हिस्से का पहल करिए ताकि मंकी सिंह की कहानी आपके साथ न दोहरा जाए।

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Thursday, April 01, 2021

वास्तव में भारत के रत्न कौन? इसे जानने के लिए इस उपन्यासिका को जरूर पढ़ें.... वास्तविक राष्ट्रवाद को रेखांकित करती है किताब ‘‘भारत के रत्न’’

वास्तव में भारत के रत्न कौन? इसे जानने के लिए इस उपन्यासिका को जरूर पढ़ें.... वास्तविक राष्ट्रवाद को रेखांकित करती है 
किताब ‘‘भारत के रत्न’’

श्री नीरज चन्द्राकर द्वारा लिखित उपन्यासिका ‘‘भारत के रत्न’’ का अनेकोबार प्रसंसा सुना था, ये पुस्तक देश के शीर्ष प्रकाशक ‘‘भारतीय ज्ञानपीठ’’ द्वारा प्रकाषित है। मैं दिनांक 20 मार्च 2021 को विशेष अवकाश पर रवाना होने के पूर्व अवकाश स्वीकृति के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर के कार्यालय में गया हुआ था, चर्चा के दौरान मैंने उनके उपन्यास ‘‘भारत के रत्न’’ का जिक्र किया तब उन्होने पुस्तक की एक प्रति भेंट किया था। लम्बे दिनों से साहित्य पढ़ने की आदत छूट सी गई है मगर मित्रों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अनेकोंबार इतना प्रसंसा सुन चूका था कि मैने सोचा उपन्यासिका ‘‘भारत के रत्न’’ को एक-दो घण्टे के मान से 3-4 दिन में पढ़ लूंगा, आज सुबह मार्निंगवाॅक के बाद लगभग 8 बजे घर पहुंचा तो देखा बाथरूम में बच्चों का कब्जा है सोचा क्यों न 20-25 मिनट तक खाली समय का उपयोग करके पुस्तक को पढ़ लूं? मैंने पढ़ना शूरू किया, ‘‘भारत के रत्न..... दिसंबर की कड़कती ठंड भरी रात के पश्चात् अलसाया हुआ भोर....’’ तो पाया कि इस उपन्यासिका में मूलतः चार हीरोज की कहानी हैं जो काका के टूटी-फूटी झोपडीनुमा चाय दूकान से अपने दिन की शुरूआत करते हैं, खेलना, मस्ती करना और अलग-अलग लक्ष्य के साथ स्ट्रगल करना ही इनका मूल धर्म है.... हम सबके युवावस्था की आम जीवन, मित्रों और परिवार के ब्यंग और घनश्याम काका के चाय पर चर्चा परिचर्चा और हास उपहास के साथ लम्बी चर्चा ने कब टाईम मशीन लाकर मुझे पुस्तक के भीतर प्रवेश देकर इसका पात्र बना दिया मुझे पता ही नहीं चला। मैं कभी संजय तो कभी हरिश, कभी जितेन्द्र तो कभी राघवेन्द्र के रूप में अपना युवापन फिर से जी गया। संजय अपने दोस्तों में सबसे अधिक आर्थिक विपन्नता भरे जीवन जी रहा है इसके बावजूद दोस्तों के द्वारा उनके आर्थिक स्थिति के प्रतिकूल उनके जन्मदिन पर घनश्याम काका को राजशाही आर्डर दिया जाना बेचारे संजय को अंतर्द्वंद में फंसा देता है मगर चोरी से दोस्त ही उसके सारे बिल चुकता कर देते हैं। देश-प्रेम की भावना से ओत-प्रोत संजय सबसे पहले भारतीय सेना में जवान बन कर अपने सपने साकार कर लेता है इसके साथ ही आर्थिक आजादी को हासिल भी कर लेता है इसके साथ ही सभी दोस्त अपने सपने के शीर्ष में पहुंच चूके हैं। संजय की शादी का तय होना और इसमें दोस्तों और बहन अलका द्वारा संजय को ढ़केलने का प्रयास करना। संजय के विवाह के दौरान संजय की अनदेखी और उनके दोस्तों फिल्म स्टार जितेन्द्र और क्रिकेटर हरीश को व्हीआईपी ट्रीटमेंट देना एक पल के लिए संजय को भी मानवीय व्यवहार के मानसिकता में भीतर ही भीतर आहत करने लगती है तभी उनके दोस्त उन्हें एक दिन के राजा होने के गौरव का अहसास कराने के लिए बारात से वापस आ जाते हैं तब जाकर संजय को उचित सम्मान मिल पाता है। संजय और योगिता के विवाह के माध्यम से समाज में लड़की का पिता होना किस तरह से अभिषाप माना जाता है इसे रेखांकित करने और भारत की व्हीआईपी कल्चर पर प्रहार करने का कुशलतापूर्ण प्रयास किया गया है। कुछ ही दिन बाद राघवेन्द्र भी केन्द्रीय मंत्री बन जाता है इसके साथ ही दोस्तों के हैसियत के आगे संजय कई बार खूद को बौना पाता है तो उसे उनके दोस्त गौरवान्वित भी करते हैं। संजय की पोस्टिंग पुलवामा बार्डर में हो जाता है, उसके बटालियन के पोस्ट में आतंकी हमला हो जाता है और वह पुरे बहादूरी के साथ आतंकवादियों का सफाया करते हुए अंततः अपने साथी जवान को गोला बारूद उपलब्ध कराने के दौरान शहादत को प्राप्त हो जाता है। तिरंगा में लिपटे शहीद संजय के पार्थिव शरीर के सम्मान के लिए लाखों की संख्या में आज भीड उमडी हुई है उसे पुष्पचक्र और पुष्पार्पित करने के लिए आज उनके तीनो दोस्त केन्द्रीय मंत्री, फिल्म स्टार और क्रिकेटर सहित प्रदेश के मंत्रीगण, सैकड़ों जनप्रतिनिधि और आईएएस, आपीएस अधिकारी उपस्थित हैं मगर आज भीड़ की प्राथमिकता केवल और केवल शहीद संजय का पार्थिव शरीर है; ये पहला अवसर है जब पहलीबार लाखों के भीड में कोई व्हीव्हीआईपी या व्हीआईपी नहीं है बल्कि सबके सब बराबर और समान हैं आम दर्शक। इसी बीच शहादत और श्रद्धांजलि के ठीक दूसरे-तीसरे दिन योगिता का तबियत खराब हो गया है उसे अस्पताल ले जाया गया है वहां पता चलता है कि योगिता गर्भवती है, अलका से सूचना पाकर संजय के तीनों व्हीआईपी दोस्त योगिता को बधाई देने आए हुए हैं तीनो अपने योगिता भाभी से बारी-बारी से पुछते हैं कि आपके भावी संतान मेरी तरह क्रिकेटर, केन्द्रीय मंत्री या फिल्म स्टार बनेंगे न भाभी, मगर योगिता खुली और दमदार आवाज में बोल पड़ती है - संजय जैसे ही भारत मां का अनमोल रत्न ‘‘भारत रत्न’’ और फिर फूट-फूटकर रोने लगती है।

ये उपन्यासिका जहां मित्रता की मिशाल प्रस्तुत करती है वहीं खिलाडियों, फिल्म स्टार और राजनेताओं को कैसे ईश्वर मान लिया जाता है और देशसेवा करने वाले जवानों को कितना तुच्छ समझा जाता है ऐसी मानसिकता पर भी प्रहार किया गया है। इसके माध्यम से कैसे देश के लिए अपने प्राणों का न्यौछावर कर देने के लिए तत्पर रहने वाले जवानों के परिवार को सीमित संसाधन में जीने को मजबूर रहना पडता है इसे भी रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। साथियों ये उपन्यास मेरे जीवन का पहला ऐसा उपन्याय है जो मेरे आखों से अश्रुधारा बहने पर विवष कर दिया है हालांकि मै इस ग्रंथ का पात्र बनकर लगभग पूरे चार घण्टे तक पूरी तरह से सैनिक का जीवन जीया, शौर्य और पराक्रम किया। अंततः संजय के शहादत के साथ ही मेरी आखें राहेन नदी बनकर बहने लगी जो लगभग पूरे 20 मिनट तक नम ही रही है। मैं इसके माध्यम से अनुरोध करता हूं कि आप भी इस उपन्यासिका को एक बार जरूर पढ़ें...... बहुत अच्छा लगेगा, सायद आपने भी इतनी अच्छी किताब कभी और नहीं पढ़ा होगा। मेरा मानना है कि इस किताब को न सिर्फ फौजी, सशस्त्र बल के जवान औ पुलिस जवान अनिवार्य रूप से पढ़ें वरन् हर युवा और छात्र को इसका अध्ययन जरूर करना चाहिए। मेरी अपनी सिफारिश है कि इसे यूनिवसिटी के सिलेबस में शामिल कर देना चाहिए... क्योंकि वास्तव में देश के सीमा की सुरक्षा और सीमा के भीतर की सुरक्षा से ही हर नागरिक के जीवन को स्थायित्व मिलता है। आप जिसे भगवान मानने का भ्रम पाल रखे हैं आप जिन क्रिकेटर्स और फिल्म स्टार को भगवान मानते है उनके नहीं होने पर भी आपके देश और आपका जीवन सुरक्षित हो सकता है मगर देश में फौजी, सशस्त्र बल और पुलिस के जवान और किसान नही होंगे तो आप न तो सुरक्षित होंगे न आपका जीवन रहेगा इसलिए ही स्वतंत्र भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री माननीय लालबहादूर शास्त्री जी ने ‘‘जय जवान और जय किसान’’ का नारा देते हुए इसे ही जय हिन्द का आधारशिला बताया है। 

साथियों, जिस किताब को 03-04 दिन में पढ़ने का लक्ष्य बनाया था, उसे बिना ब्रेक के अभी लगभग साढ़े 4घंटे में पूरी तरह पढ़ लेने के बाद रिव्यू लिखकर आपको शेयर कर रहा हूँ। पुनः आपसे अनुरोध है इस पुस्तक को जरूर पढियेगा... मैं दावा करता हूँ ये किताब आपको बहुत अच्छा लगने वाला है।


एच.पी. जोशी
नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
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Monday, March 29, 2021

"हुलेश्वरोदुष्टताय दहनम" नव दर्शन पर आधारित दुनिया की सबसे अच्छी होलिका दहन... एक बार जरूर देखें


"हुलेश्वरोदुष्टताय दहनम" नव दर्शन पर आधारित दुनिया की सबसे अच्छी होलिका दहन...

नवीन जीवन दर्शन पर आधारित, होलिका दहन का विकल्प प्रस्तुत करते हुए हुलेश्वरोदुष्टताय दहनम की शुरूआत हो चूकी है, यदि आप भी अपने भीतर के स्लीपिंग क्रिमिनल्स को समाप्त करने के पक्षधर हैं और सही मायने में भक्त प्रहलाद के साथ न्याय करना चाहते हैं तो आप भी इसे आगे बढ़ाकर अपने जीवन शैली को बेहतर बनाते हुए धरती को स्वर्ग बनाकर सतयुग की शुरूआत कर सकते हैं।  आदरणीय पाठकगण इसके माध्यम से आपसे निवेदन है कि आप गुरू घासीदास बाबा के संदेश ‘‘पर स्त्री को माता-बहन मानो’’ और ‘‘नारी का समान करो’’ का पालन करें।

हुलेश्वरोदुष्टताय दहनम की शुरूआत क्यों? 
"हुलेश्वरोदुष्टताय दहनम की शुरूआत करने का सबसे प्रमुख कारण यह है कि मुझमें भी सैकड़ों स्लीपिंग क्रिमिनल्स हैं जो मुझे होलिका से अधिक दुष्ट बनाती है। सबसे खास बात तो यह है कि होलिका के दहन के साथ ही उन्हें हजारों साल पहले ही सजा मिल चूका है जबकि मेरे भीतर के वैचारिक अपराधी और हत्यारे को कभी सजा ही नहीं मिल पा रही है इसलिए मैने हुलेश्वरोदुष्टताय दहनम की शुरूआत की है।" हुलेश्वर जोशी, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़

हुलेश्वरोदुष्टताय दहनम का अंश





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Sunday, March 28, 2021

अबूझमाड़ के नवयुवकों द्वारा बनाया वीडियो गीत हो रहा है वायरल, वायरल गीत ‘‘बन जा तै मोर सजनी’’ देखने के लिए अभी क्लिक करें

अबूझमाड़, जिला नारायणपुर के नवयुवकों द्वारा बनाया वीडियो गीत ‘‘बन जा तै मोर सजनी’’ सोशल मीडिया में बडे स्पीड से वायरल हो रहा है, ये वीडियो गीत यू-ट्यूब चैनल ROCKET DANCE CREW में अपलोड किया गया है, उल्लेखनीय है कि यह वीडियो मुख्यतः जिला मुख्यालय नारायणपुर, शांत सरोवर और एजूकेशन क्लब गरांजी सहित आसपास के क्षेत्रों में रिकार्ड किया गया है। इस विडियो गीत का निर्देशन, कोरियोग्राफी और वीडियोग्राफी सहित वीडियो एडिटिंग नागेश मण्डावी द्वारा किया गया है। इस गीत को आकाश शर्मा और प्राज्ञा द्वारा गाया गया है जबकि इस गीत के लीड रोल में आकाश राव और बेबी यादव द्वारा अभिनय किया गया है।

ये है वायरल गीत ............

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Thursday, March 18, 2021

अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह के दौरान नव संचार द्वारा किये गये सराहनीय कार्य.......

छत्तीसगढ़ पुलिस के निर्देशानुसार 
जिला पुलिस बल नारायणपुर और सामाजिक संस्था करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह के दौरान नव संचार फाउण्डेशन द्वारा तिथिवार निम्नानुसार सराहनीय कार्य किया गया है:- 

दिनांक : 08.03.2021, स्थान- गुडरीपारा नारायणपुर
1- मेडिकल कैम्प: आईटीबीपी के महिला चिकित्सकों के सहयोग से कार्यक्रम स्थल में मेडिकल कैम्प लगाया गया, जिसमें लगभग 85 महिलाओं और बच्चों ने अपना उपचार कराया।
2- महिला जागरूकता-सह-सम्मान समारोह: सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन एवं करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से महिला जागरूकता-सह-सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 200 से अधिक महिलाएं और बालिका उपस्थित रहीं। जागरूकता के अंतर्गत घरेलू हिंसा, छेड़खानी, लैगिंक उत्पीड़न, गुड टच और बेड टच की जानकारी, साईबर सुरक्षा, पोक्सो एक्ट, स्वच्छता, मानव तस्करी, कैरियर कांउसलिंग, टोनही निवारण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने और खासकर बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने पर जोर दिया गया। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। इसके पश्चात् जिला नारायणपुर की ऐसी महिलाएं जो स्वयं आर्थिक रूप से आत्म निर्भर होकर अपना व्यवसाय, जैसे सब्जी और फल बेचना, इेला अथवा दूकान का संचालन करने का काम कर रही हैं उन्हें सम्मान स्वरूप साड़ी और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।

दिनांक : 09.03.2021, स्थान- थाना छोटेडोंगर
1- महिला जागरूकता-सह-सम्मान समारोह: सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन एवं करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से महिला जागरूकता-सह-सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 150 के करीबन महिला और बालिकाएं उपस्थित रहीं। जागरूकता के अंतर्गत घरेलू हिंसा, छेड़खानी, लैगिंक उत्पीड़न, गुड टच और बेड टच की जानकारी साईबर सुरक्षा, पोक्सो एक्ट, स्वच्छता, मानव तस्करी, कैरियर कांउसलिंग, टोनही निवारण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने और खासकर बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने पर जोर दिया गया। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।
2- एक दिन के पुलिस अधिकारी: कक्षा 10 वीं की छात्रा को निर्देशानुसार 01 दिन के लिए सांकेतिक रूप से निरीक्षक बनाकर, थाना छोटेडोंगर का प्रभार दिया जाकर पुलिस के कार्यशैली से अवगत कराते हुए बेटियों को भी पुलिस अधिकारी बनकर अपराध मुक्त समाज की पुनर्स्थापना करने के लिए प्रेरित किया गया।

दिनांक : 10.03.2021, स्थान- नारायणपुर के चिन्हांकित 07 कन्या स्कूल 
विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन: जिला मुख्यालय नारायणपुर के चिन्हांकित 07 बालिका विद्यालयों में चित्राकला प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, रंगोली प्रतियोगिता, पारम्परिक व्यजंन प्रतियोगिता (व्यजंन घर बना हुआ) कराया गया। जिसमें संबंधित स्कूलों की छात्राएं, शिक्षिका एवं आसपास की महिलाएं सम्मिलित हुई।

दिनांक : 11.03.2021, स्थान- थाना बेनूर
1- महिला जागरूकता-सह-सम्मान समारोह: सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन एवं करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से महिला जागरूकता-सह-सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 200 के करीबन महिला और बालिकाएं उपस्थित रहीं। जागरूकता के अंतर्गत घरेलू हिंसा, छेड़खानी, लैगिंक उत्पीड़न, गुड टच और बेड टच की जानकारी साईबर सुरक्षा, पोक्सो एक्ट, स्वच्छता, मानव तस्करी, कैरियर कांउसलिंग, टोनही निवारण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जागरूकता लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने और खासकर बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने पर जोर दिया गया। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।
2- एक दिन के पुलिस अधिकारी: कक्षा 10 वीं की छात्रा को निर्देशानुसार 01 दिन के लिए सांकेतिक रूप से निरीक्षक बनाकर, थाना बेनूर का प्रभार दिया जाकर पुलिस के कार्यशैली से अवगत कराते हुए बेटियों को भी पुलिस अधिकारी बनकर अपराध मुक्त समाज की पुनर्स्थापना करने के लिए प्रेरित किया गया।

दिनांक : 12.03.2021, स्थान- मावली मेला स्थल, नारायणपुर
नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन: महिला सशक्तिकरण के सभी पहलुओं जैसे कन्या भ्रण हत्या, बाल विवाह, बेटियों की उपेक्षा और उनके मानव अधिकारों की हनन तथा बेटा की लालसा और बेटा को अनावश्यक छूट देने वाली मानसिकता पर आधारित नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन किया इस नाटक का मंचन स्कूली छात्रों और पुलिस बल के जवानों द्वारा किया गया है। नाटक ‘‘दसरी’’ की मूल अवधारणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर एवं सुश्री आरती गर्ग आधारित है, इस नाटक के स्क्रिप्ट और डाॅयलाॅग श्री हुलेश्वर जोशी द्वारा लिखा गया है। चूंकि इस नाटक का मंचन जिला नारायणपुर के सुप्रसिद्ध मावली मेला स्थल के मंच में किया गया, नाटक को लगभग 2000 से अधिक लोगों ने देखा और इसकी सराहना भी किया।

दिनांक : 13.03.2021, स्थान- पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर
महिला जागरूकता सायकल रैली: सुपोषित महिला-खुशहाल परिवार’’ के थीम पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से महिला सायकल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें जिला नारायणपुर की महिला जनप्रतिनिधि, महिला अधिकारी, शिक्षिका, छात्राएं सहित लगभग 250 महिला सम्मिलित होकर महिला जागरूकता को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

दिनांक : 14.03.2021, स्थान- आडिटोरियम, नारायणपुर
अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह का समापन समारोह: दिनांक 14.03.2021 को आडिटोरियम, नारायणपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह का समापन समारोह आयोजित किया गया, कार्यक्रम के समापन समारोह में माननीय सांसद श्री दीपक बैज, माननीय विधायक श्री चन्दन कश्यप, कलेक्टर श्री धर्मेश कुमार साहू, पुलिस अधीक्षक श्री मोहित गर्ग, सीईओ जिला पंचायत श्री राहूल देव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर, डीएसपी उन्नति ठाकूर, डीएसपी अभिवन उपाध्याय और रक्षित निरीक्षक श्री दीपक साव सहित नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के पदाधिकारियों सहित सैकडों जन प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक उपस्थित रहे। समापन समारोह में स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के समापन उपरांत अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह के दौरान दिनांक 08 मार्च 2021 से 14 मार्च 2021 तक महिला जागरूकता कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, नारायणपुर की सशक्त महिलाओं, शहीद परिवार की महिलाओं और नाटक ‘‘दसरी’’ के मंचन करने वाले नन्हें छात्र कलाकारों व पुलिस अधिकारियों तथा विभिन्न कैटेगरी जैसे रंगोली प्रतियोगिता, पेंटिग प्रतियोगिता, पकवान प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विजेता प्रतिभिागियों को सम्मानित किया गया।
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Sunday, March 14, 2021

नारायणपुर: अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह का समापन.... सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह

नारायणपुर : अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह का समापन.... सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह

आज दिनांक 14.03.2021 को जिला पुलिस बल नारायणपुर द्वारा सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह का समापन हुआ। आडिटोरियम में आयोजित समापन समारोह के दौरान माननीय सांसद श्री दीपक बैज, माननीय विधायक श्री चन्दन कश्यप, कलेक्टर श्री धर्मेश कुमार साहू, पुलिस अधीक्षक श्री मोहित गर्ग, सीईओ जिला पंचायत श्री राहूल देव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर, डीएसपी उन्नति ठाकूर, डीएसपी अभिवन उपाध्याय और रक्षित निरीक्षक श्री दीपक साव सहित नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के पदाधिकारियों सहित सैकडों जन प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक उपस्थित रहे।

समापन समारोह में स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई, वहीं जिला पुलिस बल नारायणपुर द्वारा सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह के दौरान दिनांक 08 मार्च 2021 से 14 मार्च 2021 तक महिला जागरूकता कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी देने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, नारायणपुर की सशक्त महिलाओं, शहीद परिवार की महिलाओं और नाटक "दसरी" के मंचन करने वाले नन्हें छात्र कलाकारों व पुलिस अधिकारियों तथा विभिन्न कैटेगरी जैसे रंगोली प्रतियोगिता, पेंटिग प्रतियोगिता, पकवान प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विजेता प्रतिभिागियों को सम्मानित किया गया। 

महिला सशक्तिकरण के सभी पहलुओं जैसे कन्या भ्रुण हत्या, बाल विवाह, बेटियों की उपेक्षा और उनके मानव अधिकारों की हनन तथा बेटा की लालसा और बेटा को अनावश्यक छूट देने वाली मानसिकता पर आधारित नाटक "दसरी" लिखने तथा अल्प अवधि में इसके सफल मंचन करने के लिए नाटक दसरी के प्रतिभागियों का तारीफ किया गया। नाटक दसरी की मूल अवधारणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर एवं सुश्री आरती गर्ग पर आधारित है, इस नाटक के स्क्रिप्ट और डाॅयलाॅग श्री हुलेश्वर जोशी द्वारा लिखा गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर, उप पुलिस अधीक्षक सुश्री उन्नति ठाकूर एवं श्रीमती जागृति डी. के कुशल मार्गदर्शन में श्री हुलेश्वर जोशी, कु. स्वाति पट्टावी, श्री दिलीप निर्मलकर और श्री हरिश उईके द्वारा संयुक्त रूप से निर्देशन किया गया।

उल्लेखनीय है कि जिला पुलिस बल नारायणपुर द्वारा सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से 08 मार्च को गुडरीपारा में तथा दिनांक 09 मार्च को छोटेडोंगर में महिला जागरूकता सह सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया था। दिनांक 10 मार्च को जिला मुख्यालय नारायणपुर के चयनित 07 स्कूलों में निबंध, रंगोली, पेंटिग एवं व्यंजन प्रतियोगिता आयोजित किया गया था। दिनांक 11 मार्च को बेनूर में महिला जागरूकता सह सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया तथा दिनांक 12 मार्च को मावली मेला स्थित मंच में नाटक दसरी का मंचन किया गया। दिनांक 13 मार्च को पुलिस अधीक्षक कार्यालय से सशक्त महिला - सशक्त अबूझमाड थीम पर महिला सायकल रैली का आयोजन किया गया था।

माननीय सांसद श्री दीपक बैज द्वारा समस्त विजयी प्रतिभागियों एवं आयोजक मण्डल को शुभकामनाएं दी तथा जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के कार्यों की सराहना करते हुए अबूझमाड सहित समूचे बस्तर के विकास में जवानों के योगदान और शहादत का जिक्र किया।

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नारायणपुर - अबूझमाड़ संस्कृति पर आधारित परिधान और गहनों के साथ संपन्न हुआ अबूझमाडिया फैंसन शो, अबूझमाड की नन्ही परियो, बेटियों, महिलाओं और पुरूषों ने किया रैम्पवाक

नारायणपुर - अबूझमाड़ संस्कृति पर आधारित परिधान और गहनों के साथ संपन्न हुआ अबूझमाडिया फैंसन शो, अबूझमाड की नन्ही परियो, बेटियों, महिलाओं और पुरूषों ने किया रैम्पवाक

मावली मेला, नारायणपुर के चैथे दिन अंतरराष्ट्रीय महिला सप्ताह के अवसर पर जिला प्रशासन, नारायणपुर पुलिस और जिला पंचायत के सौजन्य से करुणा फाउंडेशन और नव संचार फाउंडेशन के सहयोग से अबूझमाड़ संस्कृति पर आधारित परिधान और गहनों के साथ संपन्न हुआ अबूझमाडिया फैंसन शो, इस शो में अबूझमाड़ की सैकड़ों नन्ही बेटियों, महिलाओं और बालकों ने भाग लेकर रैम्पवाक किया। यह फैशन शो-रैम्पवॉक जिला कलेक्टर श्री धर्मेश कुमार साहू, पुलिस अधीक्षक श्री मोहित गर्ग, जिला पंचायत सीईओ श्री राहूल देव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर, उप पुलिस अधीक्षक सुश्री उन्नति ठाकुर, श्रीमती जागृति डी. और सुश्री आरती गर्ग के कुशल मार्गदर्शन में कु. स्वाति पट्टावी के लीड निर्देशन में आयोजित की गई। अलग अलग वर्ग में विजेता प्रतिभागियों को जिला प्रशासन द्वारा स्मृति चिन्ह और पुरुस्कार वितरण किये गए।

रैम्पवॉक को देखकर हजारों की संख्या में उपस्थित जनप्रतिनिधि, अधिकारियों और दर्शकों ने दांतो तले अंगुली दबाने को मजबूर कर दिया। अबूझमाडिया फैंसन शो - रैम्पवॉक ने साबित कर दिया कि अबूझमाड़ की बेटियों की सुंदरता गोरी रंग का मोहताज कदापि नहीं है।

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मास्टर आफ कुंगफू और स्ट्रान्गेस्टमेन आफ एशिया ने दिखाया करतब, कहा अबूझमाड़ के लोगों में ..........

मास्टर आफ कुंगफू और स्ट्रान्गेस्टमेन आफ एशिया ने दिखाया करतब, कहा अबूझमाड़ के लोगों में ..........

मावली मेला, नारायणपुर के चैथे दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन् देश की पहचान बन चूके मास्टर आफ कुंगफू दिलीप कुमार और स्ट्रान्गेस्टमेन आफ एशिया मनोज चोपडा ने अपने कला और ताकत का प्रदर्शन किया। बिलासपुर निवासी मास्टर आफ कुंगफू दिलीप कुमार वर्ष-2002 से देश विदेश में सेल्फडिफेंस का प्रशिक्षण देने का काम करते रहे हंै जबकि साढ़े छः फीट उंचे और लगभग पौने दो क्विंटल के रायपुर निवासी स्ट्रान्गेस्टमेन आफ एशिया मनोज चोपडा दूसरा पूरे एशिया का अकेला सबसे शक्तिशाली इंसान हैं।


मंच में मास्टर आफ कुंगफू दिलीप कुमार ने अनेंको करतब दिखाया, जैसे शिर में फर्स रखवाकर हथौडे से तोडवाना, हथौडे से सीने को पीटवाना, बेसबाल को तोडना, इंट को तोडना, हांथ, पीट, पैर और पीठ से खप्पर को तोडना, इत्यादि। श्री दिलीप कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह के अवसर पर अबूझमाड के लोगों, खासकर बेटियों से अपील किया है कि "आप अपने शक्ति को पहचानें और सेल्फडिफेंस के तरीके सीखकर शारीरिक रूप से सुदृढ़ और सशक्त बनें। जब आप स्वयं की रक्षा करने में सक्षम होंगे तो आप निर्भय होकर अपने लक्ष्य को सरलता से हासिल कर लेंगे, यही नहीं लोग आपसे उलझने, आपके अस्तित्व और आत्मस्वाभिमान को ललकारने अथवा क्षति पहुंचाने का कोई साहस नहीं सकेगा।"


स्ट्रान्गेस्टमेन आफ एशिया मनोज चोपडा ने मंच के माध्यम से लगभग 1000 पेज के पुस्तक को एक साथ दोनों हाथों से फाडकर दिखाया वहीं कार के नंबर प्लेट को दो तुडके फाड दिये और हाथों से बियर बाॅटल को भी तोडकर दिखया। चूंकि मावली मेला मंच में अनेकोनेक आकर्षण के कार्यक्रम होना था, समयाभाव के कारण अन्य महत्वपूर्ण करतब दिखाया नहीं जा सका। स्ट्रान्गेस्टमेन आफ एशिया मनोज चोपडा ने अबूझमाड के लोगों से कहा "अबूझमाड में ताकतवर लोगों की कमी नहीं है, हर व्यक्ति अलग-अलग प्रकार के विशिष्ट शक्तियों के साथ जन्म लिया हुआ है, उन्होने कहा कि विश्व स्तर पर देश के तिरंगा को बडे शान से फहराने की दृढ़ इच्छाशक्ति ने आज मूझे एशिया का सबसे ताकतवर इंसान बनाया है कोई भी इंसान दृढ़ इच्छाशक्ति और कडे मेहनत के बल बूते अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।"

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Saturday, March 13, 2021

अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर नाटक "दसरी" का मंचन

नाटक "दसरी" का मंचन

जिला प्रशासन, नारायणपुर द्वारा आयोजित मावली मेला स्थल में आज दिनांक 12/03/2021 को नाटक "दसरी" का मंचन किया गया। यह नाटक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर और सुश्री आरती गर्ग के कॉन्सेप्ट पर आधारित तथा श्री हुलेश्वर जोशी द्वारा रचित है। नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन जिला पुलिस बल द्वारा सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर थीम ‘सुपोषित महिला, खुसहाल परिवार’ के तहत किया गया।

इस नाटक के माध्यम से नन्हे छात्र - छात्राओं और पुलिस के जवानों द्वारा बेटियों के साथ होने वाले सौतेले व्यवहार, बेटी के खिलाफ सामाजिक मानसिकता, भ्रूण हत्या, कुपोषण और बालविवाह जैसे सामाजिक बुराइयों को चित्रांकित करते हुए नाटक के माध्यम से इन सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने की अपील की गई। हम किस तरह से बेटियों को उपेक्षित रखकर उनके मानव अधिकारों का हनन करते हैं उन्हें उपेक्षित रखते हैं, कैसे हम अपने बेटा को शिर में चढ़ाकर उन्हें अपराध की दुनिया मे ढकेल देते हैं, हम बेटा के लिए क्या क्या सपने देखते हैं और कैसे उन सपनों को आखिरकार बेटियाँ साकार करती है इसे दिखाने का प्रयास किया गया है। कैसे लछमी जो खुद एक स्त्री है भ्रूण हत्या के लिए कैसे उतावली होकर अपनी झुमका बेच देती है, रमेसर और लछमी कितने क्रूरता से कोख में ही बेटी की हत्या करने का आपराधिक षड्यंत्र रचते हैं। गांव का गौटिया कैसे नाबालिग दसरी के लिए रिश्ते लाकर उसे पढ़ाई से वंचित करने और दसरी के मानव अधिकारों के हनन का प्रयास करता है और रमेसर को दुत्कारता है अपने पॉवर का रौब दिखता है। मगर इन सभी के बीच संतोषी हमेशा अपने खुद के साथ साथ अपनी दीदी के हक और अधिकार के लिए लड़ती रहती है, वहीं जेंटलमैन सत्यवान और प्रोफेसर कृष्णकांत द्वारा दसरी को उसके शिक्षा के अधिकार, विवाह के लिए वर चुनने के अधिकार को संरक्षित करते हुए नाबालिग दसरी की शादी 18 साल के बाद ही करने के लिए समझाइस दी जाती है। उपेक्षाओं के बावजूद दसरी, संतोषी और कारी आइकोनिक बेटी बनकर समाज में मिशाल बनती है, माता पिता को सहारा देती है। अंत मे जब बेटा ललित गैंगस्टर बन जाता है तब रमेसर को पश्चाताप होता है और फिर गर्व करता है अपनी बेटियों के सफलता और जिम्मेदारियों पर... नाटक लोगों को हर क्षण अपने आगे के एक्ट और डायलॉग के लिए बांधकर रखता है, नाटक में हृयविदारक डायलॉग हैं जो दर्शकों के केवल रोंगटे ही खड़े नहीं करते बल्कि रुला भी देता है।

सबसे खास बातः
जब खुल मच में किसी नाटक मंचन या कार्यक्रम हो रहा हो और इस दौरान पानी गिर जाए तो भगदड मच जाती है मगर नाटक ‘‘दसरी’’ लोगों को इतना मुग्ध कर रखा था कि पानी गिरने के बावजूद खूले मंच में हजारों अतिथिगण और दर्शक इसका मंचन देखते रहे, किसी एक ने भी नाटक छोडकर खूद को भींगने से बचाने का प्रयास नहीं किया। नाटक के पात्र नन्हे छात्र कलाकारों और पुलिस अधिकारियों ने इसे अपना अप्रत्यासित सफलता के रूप में अभिव्यक्त किया।

पात्र परिचय:
इस नाटक में रमेसर (पिता) का रोल - श्री हरीश उइके, लछमी (माता) का रोल - चंद्रक्रान्ति, बेटी दसरी का रोल - कु. नेहा मंडावी, बेटी संतोषी का रोल - कु. रिया दुग्गा, बेटी कारी का रोल - कु. बिनेश्वरी यादव, बेटा ललित का रोल - ललित जुर्री, काकी का रोल - श्रीमती पूर्णिमा ठाकुर, भुरवा काका, गांव के गौटिया और वक्ता का रोल - श्री हुलेश्वर जोशी, लड़का सत्यवान का रोल - श्री कन्हैया वैष्णव, लड़के के पिता प्रोफेसर कृष्णकांत का रोल - श्री चेतन बघेल, डॉक्टर का रोल - श्री दिलीप निर्मलकर, नर्स का रोल - कु.कृष्टि राठौर और पुलिस अधिकारी का रोल - श्री सतीश दर्रो द्वारा निभाया गया।

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Wednesday, March 03, 2021

नव संचार फाउण्डेशन द्वारा शासकीय बालक हायर सैकेण्ड्री स्कूल, नारायणपुर में किया गया कैरियर काउन्सलिंग

नव संचार फाउण्डेशन द्वारा शासकीय बालक हायर सैकेण्ड्री स्कूल, नारायणपुर में किया गया कैरियर काउन्सलिंग

आज दिनांक 03/03/2021 को शासकीय बालक हायर सैकेण्ड्री स्कूल, नारायणपुर में नव संचार फाउण्डेशन द्वारा हायर सैकेण्ड्री स्तर के छात्रों का कैरियर काउन्सलिंग किया गया। जिसमें नव संचार फाउण्डेशन के श्रीमती जागृति डी., सचिव सुश्री आरती गर्ग, श्रीमती उपमा साहू, श्री दीपक साव, रक्षित निरीक्षक तथा शासकीय बालक हायर सैकेण्ड्री स्कूल के प्राचार्य श्री मनोज बागडे एवं समस्त स्टाॅफ उपस्थित रहे।

संस्था के अध्यक्ष श्रीमती जागृति डी. द्वारा छात्रों को परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने के गुर सीखाये गये, तथा रक्षित निरीक्षक श्री दीपक साव द्वारा फीयर आफ इग्जामिनेशन कोे हराकर तनावमुक्त परींक्षा और प्रतियोगिता को इन्जाॅय करने के टिप्स दिये गये। प्राचार्य श्री मनोज बागडे द्वारा कम समय में साल भर के पढ़ाई का रिविजन कैसे करना है, किस तरह के प्रश्नों की रिविजन पहले और अनिवार्य रूप से करना है इसे चिन्हांकित करने का तरीका बताते हुए पाठ्य पुस्तक से दोस्ती करने की सीख दी गई।

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अबुझमाड़ महोत्सव - तृतीय अंतर्राष्ट्रीय माड़ मैराथन - 2021 की समीक्षा बैठक-सह-सम्मान समारोह आयोजित

अबुझमाड़ महोत्सव - तृतीय अंतर्राष्ट्रीय माड़ मैराथन - 2021 की समीक्षा बैठक-सह-सम्मान समारोह आयोजित

आज दिनांक 03.03.2021 को जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा डीआरजी ग्रेट हाॅल, नारायणपुर में अबुझमाड़ महोत्सव - तृतीय अंतर्राष्ट्रीय माड़ मैराथन - 2021 के सफल आयोजन की समीक्षा बैठक-सह-सम्मान समारोह आयोजित किया गया। उक्त समीक्षा बैठक-सह-सम्मान समारोह में श्री धर्मेश कुमार साहू, कलेक्टर, श्री मोहित गर्ग, पुलिस अधीक्षक, श्री राहूल देव, सीईओ, जिला पंचायत, श्री नीरज चन्द्राकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, श्री जी.आर. मण्डावी, जिला शिक्षा अधिकारी, श्री अभिनव उपाध्याय, उप पुलिस अधीक्षक, श्रीमती उन्नति ठाकूर, उप पुलिस अधीक्षक, श्री दीपक साव, रक्षित निरीक्षक तथा सर्व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती जागृति डी, श्रुति उपाध्याय, मनु चन्द्राकर, और सुश्री आरती गर्ग सहित पुलिस/प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी/कर्मचारी, शिक्षक और छात्र सहित सामाजिक संगठन करूणा फाउण्डेशन पदाधिकारी और सदस्यगण उपस्थित रहे।

बैठक-सह-सम्मान समारोह में फ्रण्टलाईन में कार्य करने वाले समस्त अधिकारी/कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अबुझमाड़ महोत्सव - तृतीय अंतर्राष्ट्रीय माड़ मैराथन - 2021 के दौरान अपने कार्य की अनुभव और चुनौतियों को शेयर करते हुए आगामी आयोजन के दौरान इसे बेहतर बनाने के सुझाव दिये गये। इसके बाद कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, सीईओ, जिला पंचायत और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा अबुझमाड़ महोत्सव - तृतीय अंतर्राष्ट्रीय माड़ मैराथन - 2021 के सफल आयोजन को सफल बनाने के लिए काम करने वाले सभी विभागों के अधिकारी/कर्मचारियों, शिक्षकों, सामाजिक कायकर्ताओं और छात्रों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक श्री अजय डहरिया द्वारा बस्तर के विकास में पुलिस जवानों के श्रेय को रेखांकित करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। 

श्री राहूल देव, सीईओ, जिला पंचायत ने माड़ मैराथन को जिला नारायणपुर का पहचान बताते हुए आयोजन को सफल बनाने के लिए समस्त अधिकारी/कर्मचारियों और वालेंटियर्स का आभार प्रकट किया।

श्री मोहित गर्ग, पुलिस अधीक्षक द्वारा नारायणपुर के बच्चों और युवाओं के टेलेण्ट की सराहना करते हुए उन्हें मंच प्रदान करने की जोर देते हुए अधिकारी/कर्मचारियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारी संघ,  सेलून  संघ, डीजे  संघ  और क्रिकेट टीम सहित छात्रों को अपने जिला, प्रदेश और देश की उन्न्ति के लिए निरंतर बेहतर और गुणवत्तायुक्त संवाद जारी रखने की बात कही गई। श्री गर्ग ने मैराथन के आयोजन को सफल बनाने के लिए सबके सक्रिय भागीदारी की प्रसंशा की। 

श्री धर्मेश कुमार साहू ने अबुझमाड़ महोत्सव - तृतीय अंतर्राष्ट्रीय माड़ मैराथन - 2021 को नारायणपुर के लोगों, जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, पुलिस/प्रशासन, शिक्षकों, छात्रों और युवाओं का का ग्राण्ड सक्सेस बताते हुए आगामी मैराथन को नई उंचाईयों तक ले जाने की गुंजाईस पर जोर देते हुए अबुझमाड़ के पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में काम करने की अपील की है। श्री साहू ने विश्व महिला सप्ताह के दौरान जिला के समस्त विभागों और सामाजिक संस्थाओं को महिला सशक्तिकरण के लिए जागरूता अभियान और आयोजन करने की अपील की है।

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Tuesday, March 02, 2021

‘‘नव संचार फाउण्डेशन’’ द्वारा वन विभाग के सहयोग से गुडरीपारा में चलाया अभियान, वन विभाग द्वारा महिलाओं को दिये जाएंगे रोजगार के अवसर

‘‘नव संचार फाउण्डेशन’’ द्वारा वन विभाग के सहयोग से गुडरीपारा में चलाया अभियान, वन विभाग द्वारा महिलाओं को दिये जाएंगे रोजगार के अवसर

सामाजिक संस्था ‘‘नव संचार फाउण्डेशन’’ द्वारा वन विभाग के सहयोग से आज दिनांक 02 मार्च 2021 को नारायणपुर के गुडरीपारा में जन जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान एसीडीओ फारेस्ट श्री आशीष सिंह और फारेस्ट अधिकारी श्री विजेन्द्र तथा संस्था के अध्यक्ष श्रीमती सीमा गर्ग, सचिव जागृति डी., सह सचिव सुश्री आरती गर्ग, श्रीमती उपमा साहू, श्रीमती मनु चन्द्राकर श्रीमती श्रुति उपाध्याय सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

नव संचार फाउण्डेशन द्वारा गुडरीपारा (नारायणपुर) के महिलाओं और बच्चों को एकजूट कर महिलाओं और बच्चों से बात की गई, उनके साथ खेल भी खेला गया उसके बाद उनके हाथ धुलवाकर न्यूट्रिशियन के लिए अण्डे और बिस्किट वितरित किये गये। श्रीमती जागृति डी. के अनुरोध पर वन विभाग के एसडीओ श्री आशीष सिंह द्वारा स्थानीय महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ईमली उपलब्ध कराया जाकर उसके छीलके, पल्प और बीज अलग करने का काम सौपा जाएगा। वहीं संस्था के पदाधिकारियों और उपस्थित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जिला कलेक्टर श्री धर्मेश कुमार साहू से मिलकर नारायणपुर से गुडरीपारा को जोडने वाले सड़क को उन्नत करने और बिजली कनेक्शन व स्ट्रट लाईट लगवाने हेतु अनुरोध किया गया। श्री साहू द्वारा शीघ्र ही मांग पूरी करने का आश्वासन देते हुए नव संचार फाउण्डेशन के पदाधिकारियों को गुणवत्तायुक्त सामाजिक कार्य करने के लिए शुभकामना दी गई।

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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें?

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