बरसात : जीवनदायिनी 'या' बीमारियों और मौत का सौदागर ?
@जानें बरसात में स्वस्थ और निरोगी रहने के उपाय
लेखक : एच.पी. जोशी
भारत में बरसात केवल एक मौसम नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव है। जैसे ही काले बादल आसमान में छाते हैं और पहली वर्षा की बूंदें धरती को स्पर्श करती हैं, वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार होने लगता है। सूखी धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, खेतों में नई उम्मीदें अंकुरित होती हैं, नदियाँ और तालाब जीवन से भर उठते हैं तथा पशु-पक्षियों से लेकर मनुष्य तक सभी वर्षा का स्वागत करते हैं। भारतीय कृषि, अर्थव्यवस्था, जैव विविधता और पेयजल का बड़ा हिस्सा आज भी मानसून पर निर्भर है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में वर्षा को सदैव जीवनदायिनी, समृद्धि की दूत और प्रकृति का अमूल्य उपहार माना गया है। किन्तु प्रकृति का यही वरदान यदि लापरवाही, गंदगी और वैज्ञानिक जागरूकता की कमी के साथ जुड़ जाए, तो यही मौसम अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है। मानसून के आगमन के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। कहीं डेंगू और मलेरिया के रोगी भर्ती होते हैं, कहीं टाइफाइड, हैजा और डायरिया के मामले सामने आते हैं, तो कहीं वायरल बुखार, निमोनिया और त्वचा संक्रमण लोगों को परेशान करने लगते हैं। अनेक परिवारों में यह मौसम खुशियाँ लेकर आता है, तो कई परिवारों के लिए चिंता, आर्थिक बोझ और कभी-कभी अपूरणीय क्षति का कारण भी बन जाता है। हर वर्ष लाखों लोग मानसून से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। इनमें सबसे अधिक जोखिम छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों तथा पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को होता है। इसलिए यह समझना आवश्यक है कि समस्या स्वयं वर्षा नहीं, बल्कि वर्षा के बाद बनने वाली परिस्थितियाँ हैं।
# क्या वास्तव में बारिश बीमारियाँ फैलाती है ?
यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है कि क्या बारिश होने से लोग बीमार पड़ते हैं? विज्ञान इसका उत्तर स्पष्ट रूप से "नहीं" देता है। क्योंकि वर्षा स्वयं किसी रोग का कारण नहीं होती। बीमारी तब फैलती है जब वर्षा के कारण वातावरण में ऐसे परिवर्तन होते हैं जो बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद, परजीवी और रोग फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार कर देते हैं। मानसून के दौरान वायु में आर्द्रता बढ़ जाती है, तापमान में परिवर्तन होता है, अनेक स्थानों पर जलभराव हो जाता है, नालियाँ उफनने लगती हैं, सीवर का पानी पेयजल स्रोतों में मिल सकता है और भोजन अपेक्षाकृत जल्दी खराब होने लगता है। यही परिस्थितियाँ संक्रामक रोगों के प्रसार का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) तथा भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह देता है, क्योंकि यह मौसम जलजनित, मच्छरजनित और भोजनजनित रोगों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है
# जानें क्या है वर्षा और सूक्ष्मजीवों का विज्ञान ?
हमारे चारों ओर लाखों-करोड़ों सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। इनमें बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद और परजीवी शामिल हैं। सामान्य परिस्थितियों में इनमें से अनेक सूक्ष्मजीव लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाते, लेकिन नमी और मध्यम तापमान इनके विकास के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करते हैं। बारिश के बाद वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और फफूंद तेजी से बढ़ते हैं। कई प्रकार के वायरस भी अधिक समय तक सक्रिय बने रहते हैं। दूषित जल में मौजूद रोगजनक जीवाणु भोजन और पेयजल के माध्यम से मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यही कारण है कि मानसून में डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पीलिया, फूड पॉइजनिंग और अन्य जलजनित रोगों की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।
# जानें कैसे बढ़ता है मच्छरों का साम्राज्य ?
यदि मानसून में इंसानों और जानवरों सबसे बड़ा दुश्मन किसी एक जीव को कहा जाए, तो वह मच्छर है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार केवल पाँच से सात दिन तक जमा रहने वाला पानी मच्छरों के हजारों लार्वा विकसित करने के लिए पर्याप्त होता है। डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। इसके विपरीत मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर विभिन्न प्रकार के जलस्रोतों में विकसित हो सकता है। चिकनगुनिया भी मुख्यतः एडीज मच्छर के माध्यम से फैलता है। कूलर, पानी की टंकियाँ, गमलों की तश्तरियाँ, पुराने टायर, टूटे बर्तन, नारियल के खोल और छत पर जमा पानी मच्छरों के सबसे सुरक्षित प्रजनन स्थल बन जाते हैं।
# जानें सबसे अधिक खतरा किसे ?
बरसात का मौसम सभी के लिए समान रूप से जोखिमपूर्ण नहीं होता। कुछ वर्गों में संक्रमण की संभावना और जटिलताएँ अधिक होती हैं।
@ बच्चे : बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती। वे स्कूल, खेल और सामूहिक गतिविधियों के कारण जल्दी संक्रमण की चपेट में आते हैं। डायरिया, वायरल बुखार, डेंगू और निमोनिया उनके लिए गंभीर रूप ले सकते हैं।
@ गर्भवती महिलाएँ : गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई जैविक परिवर्तन होते हैं। संक्रमण होने पर माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को दूषित भोजन, संक्रमित पानी और मच्छरों से विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
@ बुजुर्ग : बढ़ती उम्र के साथ प्रतिरक्षा क्षमता कम होने लगती है। यदि मधुमेह, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अस्थमा या गुर्दे की बीमारी पहले से मौजूद हो, तो साधारण संक्रमण भी गंभीर जटिलताओं में बदल सकता है।
@ दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित व्यक्ति : कैंसर, एचआईवी, प्रतिरक्षा-दमित रोगी, स्टेरॉयड लेने वाले मरीज और प्रत्यारोपण (Transplant) करा चुके लोगों में संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है।
# बरसात में होने वाली प्रमुख बीमारियाँ कौन कौन सी हैं ?
1. डेंगू : डेंगू एक वायरल रोग है, जो एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर प्रायः सुबह और शाम के समय अधिक सक्रिय रहता है तथा साफ और रुके हुए पानी में अंडे देता है।
इसके प्रमुख लक्षण हैं—
- तेज बुखार
- सिर एवं आँखों के पीछे दर्द
- शरीर और जोड़ों में तीव्र दर्द
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- कमजोरी और प्लेटलेट्स की संख्या में कमी
अधिकांश रोगी सामान्य उपचार से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में डेंगू रक्तस्रावी (Hemorrhagic Dengue) या डेंगू शॉक सिंड्रोम का रूप लेकर जानलेवा बन सकता है। इसलिए तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
2. मलेरिया : मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक परजीवी से होता है, जो एनोफिलीज मच्छर द्वारा फैलता है। इसके लक्षणों में ठंड लगकर तेज बुखार आना, अत्यधिक पसीना आना, सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी शामिल हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह मस्तिष्क, यकृत और गुर्दों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
3. चिकनगुनिया : यह भी मच्छरों से फैलने वाला वायरल रोग है। इसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों में इतना अधिक दर्द हो सकता है कि कई रोगियों को महीनों तक चलने-फिरने में कठिनाई होती है। कुछ लोगों में यह दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है।
4. टाइफाइड : दूषित पानी और भोजन के माध्यम से फैलने वाला यह रोग साल्मोनेला टाइफी जीवाणु के कारण होता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो आंतों में गंभीर संक्रमण और अन्य जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
5. डायरिया और हैजा : बरसात में दूषित पानी पीना अनेक जलजनित रोगों का सबसे बड़ा कारण है। डायरिया और हैजा शरीर में पानी और लवणों की गंभीर कमी (डिहाइड्रेशन) पैदा कर सकते हैं, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए अत्यंत खतरनाक है।
6. लेप्टोस्पायरोसिस : यह बीमारी संक्रमित पशुओं के मूत्र से दूषित पानी या कीचड़ के संपर्क में आने से फैलती है। बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों को इसका खतरा अधिक रहता है।
7. वायरल हेपेटाइटिस (पीलिया) : दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलने वाले हेपेटाइटिस A और E मानसून के दौरान अधिक देखने को मिलते हैं। इससे यकृत (लीवर) प्रभावित होता है और रोगी को पीलिया, कमजोरी, उल्टी तथा भूख न लगने जैसी समस्याएँ होती हैं।
बरसात में क्या करें?
✔️ केवल गर्म और ताजा भोजन ही खाएं।
✔️ केवल स्वच्छ और सुरक्षित पानी पिएँ। यदि पानी की शुद्धता संदिग्ध हो, तो उसे उबालकर ही उपयोग करें।
✔️ घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कम से कम सप्ताह में एक बार कूलर, गमले और पानी के बर्तनों की सफाई करें।
✔️ मच्छरदानी लगाएं, पूरी बाँह के कपड़े पहने और यथा संभव मच्छररोधी क्रीम का उपयोग करें।
✔️ घर का बना ताज़ा और गर्म भोजन ही खाएँ। तिल, मूंगफली और जचकी लड्डू खाएं।
✔️ गुड़ को अपने भोजन में शामिल करें।
✔️ फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर उपयोग करें।
✔️ बच्चों को खुले में रखे खाद्य पदार्थ खाने से रोकें।
✔️ नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत डालें।
✔️ बुखार, उल्टी, दस्त या सांस लेने में कठिनाई होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
✔️ अपनी हेल्थ के अनुसार पानी में भींगने से बचें। खासकर हल्की फुहारों से बचाव के लिए टोपी जरूर पहनें।
✔️ यदि भींगने से एलर्जी हो छतरी, रेनकोट हेलमेट, मास्क लगाएं।
✔️ विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए आवश्यक है कि रात्रि में अथवा सोने के समय शरीर को गर्म रखने के लिए सॉफ्ट और मोटे ब्लैंकेट का उपयोग करें।
बरसात में क्या न करें?
✘ सड़क किनारे खुले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
✘ बासी रोटी, भोजन इत्यादि न खाएँ।
✘ तेज बुखार में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दर्दनाशक दवाएँ न लें।
✘ डेंगू की आशंका होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसी दर्दनिवारक दवाओं से बचें जो रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
✘ घर के आसपास कचरा या पानी जमा न रहने दें।
✘ बीमारी के शुरुआती लक्षणों को हल्के में न लें तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं
जानें क्या है मिथक ?
बारिश में भीगने से ही बुखार आता है।
सत्य: बीमारी का कारण संक्रमण है, केवल भीगना नहीं।
डेंगू का मच्छर केवल गंदे पानी में पनपता है।
सत्य: यह साफ और रुके हुए पानी में भी पनपता है।
हर बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी है।
सत्य: वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होती।
केवल गरीब बस्तियों में डेंगू होता है।
सत्य: डेंगू किसी भी क्षेत्र में फैल सकता है यदि मच्छरों के प्रजनन की परिस्थितियाँ मौजूद हों।
क्या आप जानते हैं?
- विश्व में मच्छर सबसे अधिक मानव मृत्यु से जुड़े जीवों में गिने जाते हैं।
- केवल 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने की आदत अनेक संक्रामक रोगों के प्रसार को काफी हद तक रोक सकती है।
- अधिकांश मानसूनी बीमारियों की रोकथाम स्वच्छता, सुरक्षित पानी और मच्छर नियंत्रण से संभव है।
अंततः हम इस निष्कर्ष में पहुंचते हैं कि बरसात जीवनदायिनी तो है किंतु बीमारियों और मौत का सौदागर नहीं! यह प्रकृति का अनुपम उपहार है, जो मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और जल संसाधनों का आधार है। किंतु जब स्वच्छता की अनदेखी होती है, दूषित जल का उपयोग किया जाता है, मच्छरों को पनपने दिया जाता है और बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों की उपेक्षा की जाती है, तब यही मौसम अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बन जाता है। ऐसी स्थिति में हम बरसात को दोषारोप करते हुए कह सकते हैं कि बरसात केवल जीवनदायिनी नहीं बल्कि बीमारियों और मौत का सौदागर भी है। विज्ञान हमें बताता है कि मानसून का आनंद और सुरक्षा दोनों साथ-साथ संभव हैं। इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाए, सुरक्षित पेयजल का उपयोग करे, संतुलित आहार ले, मच्छरों के प्रजनन को रोके और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करे। बरसात हमें केवल प्रकृति की सुंदरता का अनुभव ही नहीं कराती, बल्कि यह भी सिखाती है कि जीवन की रक्षा के लिए जागरूकता, अनुशासन और वैज्ञानिक सोच कितनी आवश्यक है।
"बारिश प्रकृति का आशीर्वाद है; इसे अभिशाप केवल हमारी अर्थात इंसानों की लापरवाही ही बनाती है। आइए, इस मानसून स्वच्छता अपनाएँ, मच्छरों को पनपने से रोकें, सुरक्षित भोजन और स्वच्छ पानी का उपयोग करें तथा स्वयं, अपने परिवार और समाज को स्वस्थ रखने का संकल्प लें।"
(एच.पी. जोशी)
लेखक, विचारक, दार्शनिक एवं पुलिस अधिकारी