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हत्यारा और मांसाहार नहीं बल्कि जीवों की रक्षा करने वाला बनो।


रविवार, अक्टूबर 18, 2026

“मौन व्रत का तात्पर्य केवल चुप रहना नहीं; बल्कि चाहे ब्रह्मांड की समूची शक्ति आपको क्रोध करने या परेशान करने की कोशिश करे, आप आंतरिक रूप से सहजता के साथ खुश रहें।"

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जीवन सूत्र : मौन व्रत के फायदे
√ दर्शन, मनोविज्ञान और आंतरिक प्रसन्नता की पुनर्प्राप्ति का मूल सूत्र, मौन

“मौन व्रत का तात्पर्य केवल चुप रहना नहीं; बल्कि चाहे ब्रह्मांड की समूची शक्ति आपको क्रोध करने या परेशान करने की कोशिश करे, आप आंतरिक रूप से सहजता के साथ खुश रहें।"
"मौन व्रत Happiness Recovery Tool है।"
— HP Joshi
मनुष्य के जीवन में सबसे कठिन कार्यों में से एक है—उन परिस्थितियों में भी स्वयं को सहज बनाए रखना, जब परिस्थितियाँ उसके भीतर क्रोध, निराशा, तनाव और प्रतिशोध की भावनाएँ उत्पन्न कर रही हों। जब कोई हमारी आलोचना करता है, हमारी भावनाओं को चोट पहुँचाता है, हमारे धैर्य की परीक्षा लेता है अथवा हमारी अपेक्षाओं के विपरीत व्यवहार करता है, तब हमारी मानसिक शांति प्रभावित होने लगती है। सामान्यतः हम अपनी प्रतिक्रिया को सामने वाले के व्यवहार से जोड़ देते हैं। कोई अच्छा व्यवहार करे तो हम प्रसन्न होते हैं और कोई अप्रिय व्यवहार करे तो हमारी प्रसन्नता समाप्त होने लगती है। इस प्रकार हमारे मन की स्थिति का नियंत्रण अनजाने में दूसरे लोगों के हाथों में चला जाता है।

यहीं से मौन व्रत के वास्तविक दर्शन की शुरुआत होती है। मौन का अर्थ केवल वाणी को रोक देना नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक सहजता और प्रसन्नता को बाहरी परिस्थितियों के प्रभाव से यथासंभव सुरक्षित रखना है। मौन वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति परिस्थितियों को बदलने का प्रयास तो करता है, लेकिन परिस्थितियों को अपने भीतर की शांति नष्ट करने का अनियंत्रित अधिकार नहीं देता। इसी दृष्टिकोण से मेरा मानना है कि "मौन व्रत को एक Happiness Recovery Tool अर्थात् प्रसन्नता की पुनर्प्राप्ति का साधन कहा जा सकता है।"

📂 मौन का वास्तविक अर्थ - चुप्पी से चेतना तक :
सामान्यतः मौन को बोलना बंद कर देने की प्रक्रिया माना जाता है। व्यक्ति कुछ समय तक किसी से बातचीत नहीं करता, एकांत में बैठता है अथवा अपनी वाणी पर नियंत्रण रखता है। ये मौन के बाहरी स्वरूप हैं, लेकिन मौन की वास्तविक सार्थकता उसके आंतरिक प्रभाव में निहित है।

यदि कोई व्यक्ति दिनभर चुप रहता है, लेकिन उसके मन में क्रोध, ईर्ष्या, प्रतिशोध और शिकायतों का निरंतर प्रवाह चलता रहता है, तो उसकी वाणी भले ही शांत हो, उसका मन अशांत है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में अपनी भावनाओं को पहचानता है, प्रतिक्रिया देने से पहले विचार करता है और अपने व्यवहार को विवेक के अनुसार निर्धारित करता है, वह आंतरिक मौन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसलिए मौन का अर्थ भावनाओं को दबाना नहीं, बल्कि उन्हें समझना है। यह असहमति से भागना नहीं, बल्कि असहमति के बीच भी विवेक बनाए रखना है। यह अपनी आवाज खो देना नहीं, बल्कि अपनी आवाज का उपयोग उचित समय, उचित शब्दों और उचित उद्देश्य के लिए करना है।

📂 विश्व दर्शन में मौन और आंतरिक स्वतंत्रता :
विश्व की अनेक दार्शनिक परंपराएँ मनुष्य की आंतरिक स्वतंत्रता, आत्मसंयम और विवेकपूर्ण व्यवहार को महत्त्व देती हैं।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है "जीव हिंसा का मतलब केवल प्राण लेना नहीं; बल्कि मन, वचन अथवा कर्म के आधार पर किसी भी जीव को क्षति पहुंचाने की विचार रखना भी हिंसा अर्थात हत्या का रूप है।"

भगवान बुद्ध और भगवान महावीर के दर्शन में सजगता, सम्यक वाणी, सद्भावना, करुणा, प्रेम और मानसिक संतुलन का विशेष महत्त्व है। प्रत्येक विचार को सत्य मान लेना अथवा प्रत्येक भावना के अनुसार तत्काल व्यवहार करना आवश्यक नहीं है। क्रोध उत्पन्न होने पर उसे पहचानना, उसके कारणों को समझना और विवेकपूर्ण व्यवहार करना व्यक्ति को मानसिक परिपक्वता की ओर ले जा सकता है।

स्टोइक दर्शन के प्रमुख विचारक मार्कस ऑरेलियस ने अपनी कृति Meditations में इस बात पर बल दिया कि बाहरी घटनाओं की तुलना में उनके बारे में हमारे निर्णय और प्रतिक्रियाएँ भी हमारे अनुभव को प्रभावित करती हैं। इस दृष्टिकोण से मौन हमें यह समझने में सहायता करता है कि प्रत्येक परिस्थिति पर हमारा नियंत्रण नहीं हो सकता, लेकिन अपनी प्रतिक्रिया को समझने और नियंत्रित करने का अभ्यास किया जा सकता है।

इसी प्रकार लाओत्से से संबंधित ताओवादी दर्शन में सहजता और अनावश्यक संघर्ष से बचने की अवधारणा मिलती है। प्रत्येक विवाद में विजय प्राप्त करना आवश्यक नहीं होता और हर परिस्थिति में अपनी शक्ति खर्च करना बुद्धिमानी नहीं है। कभी-कभी ठहरना, परिस्थिति को समझना और सही समय की प्रतीक्षा करना अधिक प्रभावी होता है।

विक्टर फ्रैंकल के अस्तित्ववादी दृष्टिकोण में कठिन परिस्थितियों के बीच अर्थ, उद्देश्य और मानवीय गरिमा को बनाए रखने की महत्ता दिखाई देती है। इन विचारों से प्रेरणा लेते हुए कहा जा सकता है कि मौन व्यक्ति को परिस्थितियों से भागने के बजाय उनके बीच अपने मूल्यों के अनुरूप व्यवहार करने का अवसर प्रदान करता है।

ईशा मसीह को शूली पर चढ़ाया जा रहा था तब वो स्वयं को बचाने के लिए प्रतिरोध करने या दर्द से रोने के बजाय ईश्वर से प्रार्थना करते हैं "हे ईश्वर इन्हें इनके गुनाहों के लिए माफ़ करना, क्योंकि इन्हें नहीं पता है कि ये क्या कर रहे हैं।"

वर्ष 1915 में बिहार के चंपारण में एक अंग्रेज नील बागान मालिक गांधीजी के कार्यों से नाराज था। जब गांधीजी को सूचना मिली कि बागान मालिक उन्हें मारने के लिए हथियार जुटा रहा है, तो वे रात में अकेले उसके घर पहुँच गए और कहा, “मुझे पता चला है कि आप मुझे मारना चाहते हैं, इसलिए मैं स्वयं आपके पास आया हूँ।” यह सुनकर बागान मालिक स्तब्ध रह गया। ये मौन की पराकाष्ठा से ऊपर की संयम है।

इन दार्शनिक परंपराओं की अपनी अलग-अलग मान्यताएँ हैं, फिर भी उनमें एक साझा संदेश दिखाई देता है—मनुष्य की आंतरिक स्वतंत्रता उसके विवेकपूर्ण चुनावों से मजबूत होती है। मौन इस स्वतंत्रता को विकसित करने का एक व्यावहारिक माध्यम बन सकता है।

📂 मौन व्रत और आधुनिक मनोविज्ञान :
आधुनिक मनोविज्ञान की दृष्टि से मौन को भावनात्मक नियमन, आत्मनिरीक्षण और सजगता के अभ्यास से जोड़ा जा सकता है। जब व्यक्ति क्रोध या मानसिक तनाव की स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ क्षण ठहरता है, सहज साँस लेता है और परिस्थिति को समझने का प्रयास करता है, तब उसे अपने व्यवहार का अधिक सोच-समझकर चुनाव करने का अवसर मिलता है।

मनोविज्ञान में भावनात्मक नियमन का अर्थ अपनी भावनाओं को पहचानना, समझना और उनके अनुसार उचित व्यवहार करना है। इसका उद्देश्य क्रोध, दुख या भय को पूरी तरह समाप्त करना नहीं, बल्कि इन भावनाओं के कारण विवेकहीन निर्णय लेने से बचना है।

उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की आलोचना सुनकर हमारे मन में तुरंत उत्तर देने अथवा अपनी सफाई प्रस्तुत करने की इच्छा उत्पन्न हो सकती है। लेकिन यदि हम स्वयं से पूछें कि क्या अभी उत्तर देना आवश्यक है, क्या हमारे पास पर्याप्त तथ्य हैं और क्या हमारी प्रतिक्रिया समस्या को सुलझाएगी, तो हम अधिक संतुलित निर्णय ले सकते हैं।

यहाँ मौन एक सजग विराम की भूमिका निभाता है। वह हमें अपने विचारों और भावनाओं को देखने का अवसर देता है। इस प्रक्रिया से मानसिक स्पष्टता और आत्मनियंत्रण विकसित हो सकते हैं। हालाँकि, केवल चुप रहने से प्रत्येक समस्या हल नहीं होती। कुछ परिस्थितियों में संवाद, सहायता, समस्या का समाधान और दृढ़ कार्रवाई भी आवश्यक होते हैं।

📂 मौन व्रत के प्रमुख फायदे
🌼 क्रोध पर नियंत्रण: मौन का अभ्यास प्रतिक्रिया देने से पहले ठहरने की आदत विकसित कर सकता है। इससे आवेगपूर्ण शब्दों और व्यवहार से बचने तथा विवाद को विवेकपूर्ण ढंग से सुलझाने में सहायता मिल सकती है।
🌼 मानसिक शांति की रक्षा: प्रत्येक आलोचना, टिप्पणी अथवा अप्रिय व्यवहार को अपनी प्रसन्नता निर्धारित करने देना आवश्यक नहीं है। मौन हमें अपनी मानसिक ऊर्जा और ध्यान को अधिक सोच-समझकर उपयोग करने की प्रेरणा देता है।
🌼 संबंधों में मधुरता: क्रोध में बोले गए शब्द संबंधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। उचित समय पर लिया गया मौन व्यक्ति को सुनने, समझने और सम्मानपूर्वक अपनी बात रखने का अवसर देता है।
🌼 आत्मनिरीक्षण और आत्मज्ञान: शांत वातावरण में व्यक्ति अपनी आदतों, अपेक्षाओं, आशंकाओं और प्रतिक्रियाओं का निरीक्षण कर सकता है। इससे स्वयं को समझने और अपने व्यवहार में आवश्यक सुधार करने की संभावना बढ़ती है।
🌼 मानसिक ऊर्जा का संरक्षण: हर बहस में अपनी सफाई देना, हर आलोचना का उत्तर देना और प्रत्येक व्यक्ति को संतुष्ट करने का प्रयास मानसिक रूप से थका सकता है। विवेकपूर्ण मौन इस ऊर्जा को अधिक सार्थक कार्यों के लिए बचाने में सहायता करता है।
🌼 निर्णय लेने में स्पष्टता: भावनात्मक उत्तेजना के समय कुछ देर रुकना तथ्यों, विकल्पों और संभावित परिणामों पर विचार करने का अवसर देता है। इससे जल्दबाजी में निर्णय लेने की संभावना कम हो सकती है।
🌼 प्रसन्नता की पुनर्प्राप्ति: अप्रिय घटनाओं के बाद स्वयं को संभालना, आवश्यक कदम उठाना और धीरे-धीरे सामान्य मानसिक संतुलन में लौटना मौन की साधना का एक महत्त्वपूर्ण लाभ हो सकता है।

📂 मौन व्रत : Happiness Recovery Tool का दर्शन :
इस लेख का केंद्रीय विचार यह है कि मनुष्य को केवल प्रसन्न रहना ही नहीं, बल्कि अप्रिय परिस्थितियों के बाद अपनी प्रसन्नता की ओर लौटना भी सीखना चाहिए। जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को आलोचना, असफलता, निराशा, संघर्ष और अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इन घटनाओं से दुख या क्रोध उत्पन्न होना स्वाभाविक है। समस्या तब बढ़ती है, जब कोई घटना समाप्त हो जाने के बाद भी हम उसे अपने मन में बार-बार दोहराते रहते हैं और अपनी मानसिक ऊर्जा उसी में खर्च करते रहते हैं।

मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने आपके साथ अनुचित व्यवहार किया। घटना कुछ मिनटों की थी, लेकिन आप पूरे दिन उसके बारे में सोचते रहे। मन में बार-बार वही संवाद चलता रहा, आप कल्पना में उत्तर देते रहे और अपने भीतर क्रोध को जीवित रखते रहे। इस स्थिति में उस घटना का प्रभाव उसके वास्तविक समय से कहीं अधिक लंबा हो गया। आपका ध्यान वर्तमान कार्यों से हट गया और आपकी प्रसन्नता प्रभावित होती रही।

मौन का अभ्यास इस चक्र को पहचानने में सहायता कर सकता है। इसका अर्थ घटना को नकार देना या अन्याय को स्वीकार कर लेना नहीं है। इसका अर्थ है कि आप घटना का आवश्यक मूल्यांकन करें, उचित कदम उठाएँ और उसके बाद अपनी मानसिक ऊर्जा को धीरे-धीरे वर्तमान जीवन की ओर वापस लाएँ।

यही Happiness Recovery का मूल भाव है। इसका लक्ष्य हर समय प्रसन्न दिखाई देना नहीं, बल्कि अप्रिय अनुभवों से उबरने की क्षमता विकसित करना है। मौन व्यक्ति को अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं के बीच एक अवसर प्रदान करता है, जहाँ वह तय कर सकता है कि उसे क्रोध में उलझे रहना है या विवेकपूर्ण ढंग से आगे बढ़ना है।

इस दृष्टिकोण से मौन व्रत केवल एक आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में मानसिक संतुलन विकसित करने का अभ्यास है। यह व्यक्ति को अपनी खुशी की जिम्मेदारी समझने की प्रेरणा देता है, यद्यपि जीवन की सभी परिस्थितियों और भावनात्मक अनुभवों पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं होता।

📂 जब पूरा ब्रह्मांड आपको क्रोधित करने की कोशिश करता हुआ लगे :
जीवन में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जब हमें लगता है कि हर व्यक्ति हमारी परीक्षा ले रहा है। हम अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाते हैं, फिर भी आलोचना का सामना करते हैं। हम किसी समस्या का समाधान करना चाहते हैं, लेकिन सामने वाला विवाद बढ़ाने लगता है। हम शांति बनाए रखना चाहते हैं, फिर भी परिस्थितियाँ हमें प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाती हैं।

ऐसे क्षणों में व्यक्ति के सामने दो रास्ते होते हैं। पहला, वह प्रत्येक उकसावे के साथ अपनी प्रतिक्रिया को तीव्र करता जाए और अपनी मानसिक ऊर्जा संघर्ष में खर्च करता रहे। दूसरा, वह कुछ क्षण ठहरकर परिस्थिति का मूल्यांकन करे और यह निर्णय ले कि कौन-सी प्रतिक्रिया वास्तव में आवश्यक है।

मौन का दर्शन दूसरे रास्ते को अधिक महत्त्व देता है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा ब्रह्मांड सचमुच आपके विरुद्ध है, बल्कि यह कि विपरीत परिस्थितियों के बीच भी अपनी आंतरिक सहजता को सुरक्षित रखने का अभ्यास किया जा सकता है।

आप किसी के अनुचित व्यवहार को स्वीकार किए बिना शांत रह सकते हैं। आप अपनी बात दृढ़ता से रख सकते हैं, किसी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा सकते हैं और आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं। अंतर केवल इतना है कि आपका व्यवहार तत्काल क्रोध के बजाय विवेक, उद्देश्य और आत्मसम्मान से निर्देशित हो।

यदि आप हर परिस्थिति में अपनी प्रतिक्रिया का चुनाव करना सीखते हैं, तो दूसरे व्यक्ति के व्यवहार का आपकी मानसिक स्थिति पर पड़ने वाला प्रभाव कम हो सकता है। इस प्रकार मौन आपको अपनी ऊर्जा बचाने, अपने कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करने और अपनी प्रसन्नता की ओर लौटने में सहायता कर सकता है।

📂 मौन का अर्थ अन्याय सहना नहीं है :
मौन की अवधारणा को गलत ढंग से समझना उचित नहीं होगा। मौन का अर्थ भय के कारण चुप रहना, अन्याय स्वीकार करना, उत्पीड़न सहना अथवा आवश्यक सत्य को छिपाना नहीं है। कभी-कभी सही समय पर बोलना, स्पष्ट असहमति व्यक्त करना और अपने अधिकारों की रक्षा करना ही विवेकपूर्ण व्यवहार होता है।

सच्चा मौन व्यक्ति को यह समझने में सहायता करता है कि कब बोलना आवश्यक है, किस प्रकार बोलना चाहिए और कब अनावश्यक प्रतिक्रिया से बचना चाहिए। शांत रहकर भी दृढ़ता दिखाई जा सकती है। बिना अपमान किए भी विरोध व्यक्त किया जा सकता है। प्रतिशोध की भावना से मुक्त रहते हुए भी न्याय की माँग की जा सकती है।

इसलिए मौन को कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मसंयम और विवेक के अभ्यास के रूप में देखना चाहिए। आंतरिक सहजता बनाए रखने का अर्थ समस्याओं से पलायन करना नहीं, बल्कि उनका सामना करते समय स्वयं को अनावश्यक मानसिक अशांति से बचाने का प्रयास करना है।

📂 दैनिक जीवन में मौन व्रत का अभ्यास :
मौन को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए किसी विशेष अवसर की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं है। प्रतिदिन कुछ मिनट शांत बैठना, अपनी साँस पर ध्यान देना और मन में उठने वाले विचारों को बिना तत्काल प्रतिक्रिया दिए देखना एक उपयोगी शुरुआत हो सकती है।

जब क्रोध आए, तब स्वयं को कुछ क्षण दें। परिस्थिति सुरक्षित हो तो उत्तर देने से पहले रुकें और विचार करें कि आपका उत्तर समाधान में योगदान देगा या केवल विवाद को बढ़ाएगा। अनावश्यक बहस से बचें, लेकिन आवश्यक संवाद से पीछे न हटें। अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें पहचानें और जरूरत पड़ने पर किसी विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करें।

दिन के अंत में आत्मनिरीक्षण करें कि किन परिस्थितियों में आप अनावश्यक रूप से विचलित हुए, कहाँ आपने संयम बनाए रखा और कहाँ आपको अधिक स्पष्टता के साथ अपनी बात रखनी चाहिए थी। इस प्रकार मौन धीरे-धीरे एक सजग जीवनशैली का रूप ले सकता है।

इसका उद्देश्य हर समय शांत दिखाई देना नहीं, बल्कि अधिक संतुलित, संवेदनशील और विवेकपूर्ण बनना है।

📂 अपनी प्रसन्नता की ओर लौटना सीखें :
जीवन में अनेक परिस्थितियाँ हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं। दूसरे लोग क्या सोचेंगे, कौन हमारी आलोचना करेगा और कौन हमारे साथ कैसा व्यवहार करेगा, यह सब हम निर्धारित नहीं कर सकते। लेकिन अपने व्यवहार, अपनी सीमाओं, अपने अगले कदम और अपने ध्यान को दिशा देने का अभ्यास अवश्य कर सकते हैं।

मौन इसी अभ्यास का एक माध्यम है। यह हमें याद दिलाता है कि हर विवाद में उतरना आवश्यक नहीं, हर आलोचना का उत्तर देना जरूरी नहीं और हर अप्रिय घटना को अपने मन में बार-बार दोहराते रहना भी अनिवार्य नहीं है।

इसका अर्थ यह नहीं कि दुख कभी नहीं होगा या क्रोध उत्पन्न नहीं होगा। इसका अर्थ यह है कि हम अपनी भावनाओं को समझते हुए उनसे उबरने की क्षमता विकसित करें। जहाँ आवश्यक हो, बोलें; जहाँ आवश्यक हो, कार्रवाई करें; और जहाँ प्रतिक्रिया केवल अशांति बढ़ा रही हो, वहाँ ठहरना सीखें।

मौन व्रत का तात्पर्य केवल चुप रहना नहीं है; बल्कि विपरीत परिस्थितियों के बीच भी अपनी आंतरिक सहजता और प्रसन्नता को बचाए रखने का अभ्यास करना है।

जब आप अपने मन की शांति को दूसरों के प्रत्येक व्यवहार पर निर्भर रहने से बचाना सीखते हैं, तब आप अपनी मानसिक स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ते हैं। और जब आप अप्रिय अनुभवों के बाद अपनी प्रसन्नता की ओर लौटना सीखते हैं, तब मौन आपके जीवन में एक व्यावहारिक साधना बन जाता है।

अंततः, मौन का उद्देश्य दुनिया को चुप कराना या चुप रहना नहीं, बल्कि दुनिया के शोर के बीच अपने भीतर की सहजता को बचाए रखना है।
> “मौन व्रत Happiness Recovery Tool है।”

— एच.पी. जोशी
(लेखक, विचारक, दार्शनिक एवं पुलिस अधिकारी)
लेखक श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी जी "मानव अधिकार के अनछुए पहलू" नामक ग्रन्थ के लेखक हैं।

शनिवार, अक्टूबर 17, 2026

“सशस्त्र बल की पहचान केवल उसकी शक्ति और अनुशासन से नहीं; बल्कि जवानों के सम्मान, सुरक्षा, कल्याण और संवेदनशील नेतृत्व से होती है।”

सशस्त्र बल में संवेदनशील एवं प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व
अनुशासन, जवानों का कल्याण, तनाव प्रबंधन और सुरक्षित कार्यसंस्कृति की दिशा में पहल

प्रशासनिक नेतृत्व का मूल मंत्र “सशस्त्र बल की पहचान केवल उसकी शक्ति और अनुशासन से नहीं; बल्कि जवानों के सम्मान, सुरक्षा, कल्याण और संवेदनशील नेतृत्व से होती है।” (श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी)

सशस्त्र बल की वास्तविक शक्ति उसके अनुशासित, प्रशिक्षित और कर्तव्यनिष्ठ जवान हैं। बल की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रशासन के साथ जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक जीवन और सम्मानजनक कार्य वातावरण पर भी ध्यान देना आवश्यक है। प्रशासनिक नेतृत्व का उद्देश्य केवल ड्यूटी का संचालन करना नहीं, बल्कि ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना भी है, जिसमें अनुशासन, मानवीय संवेदनशीलता, निष्पक्षता और पारस्परिक विश्वास साथ-साथ आगे बढ़ें।

1. न्यायालयों के निर्णय और जवानों के हित
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने Prakash Singh बनाम Union of India (2006), (2006) 8 SCC 1 में पुलिस सुधारों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इस निर्णय में पुलिस व्यवस्था की व्यावसायिक स्वतंत्रता, संस्थागत जवाबदेही, सेवा-संबंधी मामलों के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड और निर्धारित कार्यकाल जैसे विषयों पर बल दिया गया। यह निर्णय पुलिस प्रशासन को अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। 

इसी प्रकार, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने Arun Kumar Bhadoria बनाम State of Uttarakhand (15 मई 2018) में पुलिसकर्मियों की कठिन कार्य परिस्थितियों, अवकाश, कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं और तनाव प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने Hardam Singh बनाम State of Punjab (12 सितंबर 2019) में लंबे एवं अनियमित ड्यूटी घंटों, पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य और पुलिसकर्मियों की सेवा-स्थितियों में सुधार की आवश्यकता पर विचार किया। ये निर्णय पुलिसकर्मियों के कल्याण और कार्य-जीवन संतुलन के संबंध में उपयोगी न्यायिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इनके विशिष्ट निर्देश संबंधित राज्यों और मामलों के संदर्भ में हैं; छत्तीसगढ़ में उनका क्रियान्वयन लागू कानूनों, नियमों और सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों के अनुरूप किया जाना चाहिए।


2. सुचारु ड्यूटी और समय पर अवकाश
ड्यूटी का निर्धारण करते समय उपलब्ध बल, कार्य की प्रकृति, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और जवानों की कार्यक्षमता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। जहाँ संभव हो, ड्यूटी का उचित वितरण, पर्याप्त विश्राम, साप्ताहिक अवकाश और समय पर छुट्टी की व्यवस्था की जाए। अवकाश एवं अनुमति संबंधी आवेदनों का निस्तारण निर्धारित नियमों और वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार समयबद्ध ढंग से किया जाना चाहिए। आपातकालीन आवश्यकता में ड्यूटी संबंधी बदलाव आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में पूर्व नियोजन से जवानों को अपने पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व निभाने में सुविधा मिल सकती है।


3. अनुशासन ऐसा हो जो जिम्मेदारी बढ़ाए
अनुशासन सशस्त्र बल की पहचान है। इसे मजबूत बनाने के लिए स्पष्ट निर्देश, उचित मार्गदर्शन, निष्पक्ष समीक्षा और निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। सुधारात्मक सुझाव, कार्य संबंधी समीक्षा या नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई का उद्देश्य कार्यक्षमता और जवाबदेही को बेहतर बनाना होना चाहिए। यह प्रयास किया जाना चाहिए कि अनुशासन के नाम पर अनावश्यक मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार या व्यक्तिगत प्रताड़ना की स्थिति उत्पन्न न हो। सम्मानपूर्ण संवाद और निष्पक्ष व्यवहार से अनुशासन के साथ विश्वास भी मजबूत होता है।

4. तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य
पुलिस सेवा में अनियमित ड्यूटी, कठिन तैनाती, पारिवारिक दूरी और निरंतर सतर्कता की आवश्यकता तनाव पैदा कर सकती है। इसलिए तनाव प्रबंधन को जवानों के कल्याण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए। समय-समय पर स्वास्थ्य परामर्श, तनाव प्रबंधन संबंधी जागरूकता, गोपनीय मनोवैज्ञानिक सहायता, आपसी सहयोग और आवश्यक विश्राम की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। मानसिक परेशानी के संकेतों को कमजोरी मानने के बजाय समय पर सहायता उपलब्ध कराने की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।

5. आत्महत्या और साथी जवानों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम
आत्महत्या अथवा साथी जवानों के विरुद्ध गंभीर हिंसा की किसी भी घटना को रोकने के लिए संवेदनशील, व्यवस्थित और समयबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। इसके लिए तनाव, निराशा, असामान्य व्यवहार, गंभीर पारिवारिक विवाद या लगातार मानसिक परेशानी के संकेत मिलने पर उचित सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। जवानों को बिना भय या कलंक के अपनी समस्या बताने का अवसर मिले तथा आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही, तनावपूर्ण परिस्थितियों में तत्काल सहायता की स्पष्ट व्यवस्था, गोपनीय शिकायत एवं परामर्श माध्यम, प्रशिक्षित सहयोगी कर्मियों की उपलब्धता और जोखिम की स्थिति में नियमानुसार सुरक्षा उपाय अपनाना उपयोगी होगा। शस्त्रों एवं अन्य संवेदनशील संसाधनों से संबंधित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए केवल घटना के बाद की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; नियमित संवाद, शुरुआती पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर कल्याणकारी प्रयास आवश्यक हैं।


6. पारिवारिक जिम्मेदारियों और जवानों के सम्मान का ध्यान
जवान भी परिवार और समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बच्चों की शिक्षा, माता-पिता की देखभाल, जीवनसाथी की जिम्मेदारियाँ और आकस्मिक पारिवारिक परिस्थितियाँ उनके जीवन को प्रभावित करती हैं। जहाँ प्रशासनिक आवश्यकता और लागू नियम अनुमति दें, वहाँ ऐसी परिस्थितियों में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना उपयोगी होगा। जवानों को अपनी समस्याएँ उचित माध्यम से रखने और नियमानुसार समाधान प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। अच्छे कार्य की सराहना, निष्पक्ष व्यवहार और संवाद की सहज व्यवस्था से संगठन के प्रति विश्वास तथा कर्तव्यनिष्ठा मजबूत होती है।


छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में प्रभावी नेतृत्व का उद्देश्य अनुशासन, कार्यक्षमता और जवानों के कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना है। समयबद्ध ड्यूटी प्रबंधन, उचित अवकाश, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सम्मानजनक व्यवहार और निष्पक्ष प्रशासन ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित कर सकते हैं, जिसमें जवान अधिक आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य निभाएँ।

मजबूत बल वही है, जहाँ अनुशासन के साथ संवेदनशीलता, जिम्मेदारी के साथ सम्मान और कर्तव्य के साथ कल्याण को भी महत्व दिया जाता है। जवानों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संतुलन को प्राथमिकता देना न केवल मानवीय दायित्व है, बल्कि एक सक्षम, विश्वसनीय और प्रभावी सशस्त्र बल के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

(श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी)
बी.एससी./डिप्लोमा इन इलेक्ट्रोपेथी साइंस
श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी राष्ट्रीय सेवा से जुड़ी हुई एक समाजसेवी महिला हैं जो पिछले 10 वर्षों से निरंतर WWW.THEBHARAT.CO.IN के माध्यम से देश के आम नागरिकों खासकर युवाओं का मार्गदर्शन करती हैं। श्रीमती जोशी सामाजिक न्याय, सामाजिक समरसता और कमजोर वर्ग तथा महिलाओं की उचित प्रतिनिधित्व की वकालत करती हैं।

शुक्रवार, अक्टूबर 02, 2026

विवाह, गरिमा और मानवीय स्वतंत्रता के लिए एक वैश्विक विमर्श : तलाक किन परिस्थितियों में बेहतर विकल्प ?


चिंतन/आलेख : तलाक किन परिस्थितियों में बेहतर विकल्प?
विवाह, गरिमा और मानवीय स्वतंत्रता के लिए एक वैश्विक विमर्श

विवाह केवल दो व्यक्तियों का सामाजिक या कानूनी संबंध नहीं है; यह भावनाओं, विश्वास, जिम्मेदारियों, आर्थिक साझेदारी, पारिवारिक अपेक्षाओं और भविष्य की साझा कल्पनाओं से निर्मित एक जटिल मानवीय संस्था है। इसलिए जब किसी विवाह के सामने तलाक का प्रश्न आता है, तो यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया का प्रश्न नहीं रहता। यह प्रश्न बन जाता है—क्या यह संबंध अपने मूल उद्देश्य, अर्थात् पारस्परिक सम्मान, सुरक्षा, विश्वास और गरिमा को अभी भी जीवित रखे हुए है?

समकालीन विश्व में तलाक को न तो हर वैवाहिक कठिनाई का समाधान माना जा सकता है और न ही हर परिस्थिति में विवाह बचाए रखना नैतिक रूप से उचित माना जा सकता है। वास्तविक प्रश्न यह है कि किस परिस्थिति में संबंध को बचाने का प्रयास मानवीय रूप से उचित है और किस परिस्थिति में वैवाहिक संबंध से अलग होना व्यक्ति की सुरक्षा, गरिमा और दीर्घकालीन हितों की रक्षा का अधिक उपयुक्त मार्ग हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ढाँचा विवाह और उसके विघटन—दोनों में समानता और स्वतंत्र सहमति के महत्व को स्वीकार करता है। CEDAW के अनुच्छेद 16 में विवाह के दौरान तथा उसके विघटन के समय महिलाओं के समान अधिकार और जिम्मेदारियों को मान्यता दी गई है।

इसलिए तलाक को केवल “रिश्ता टूटना” कह देना शायद पर्याप्त नहीं है। कभी-कभी प्रश्न यह भी होता है कि क्या एक ऐसा संबंध, जिसमें व्यक्ति की गरिमा, सुरक्षा और स्वतंत्रता लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हो, वास्तव में संबंध कहलाने योग्य रह गया है?

1. तलाक: असफलता या एक वैधानिक विकल्प?
समाज में तलाक को अक्सर असफल विवाह की अंतिम घोषणा की तरह देखा जाता है। लेकिन विवाह और तलाक दोनों को केवल सफलता-असफलता के द्वैत में देखना मानवीय संबंधों की जटिलता को सरल बना देना है।
विवाह तब सार्थक होता है जब उसमें दोनों व्यक्तियों की स्वतंत्र इच्छा, पारस्परिक सम्मान, संवाद और जिम्मेदारी मौजूद हो। उसी प्रकार तलाक भी तभी समझदारीपूर्ण निर्णय हो सकता है जब वह परिस्थितियों, अधिकारों, दायित्वों और संभावित परिणामों पर विचार करने के बाद लिया जाए।
मानवाधिकारों का मूल सिद्धांत यह है कि विवाह स्वतंत्र और पूर्ण सहमति पर आधारित होना चाहिए तथा विवाह के विघटन के समय भी समान अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। 
इस दृष्टि से तलाक को “विवाह-विरोधी” विचार के रूप में देखने के बजाय उसे एक कानूनी और मानवीय सुरक्षा-तंत्र के रूप में भी समझा जा सकता है—हालाँकि इसका प्रयोग परिस्थितिनिष्ठ होना चाहिए।

2. जब विवाह सुरक्षा के बजाय भय का स्रोत बन जाए
किसी भी वैवाहिक संबंध में मतभेद, क्रोध, आर्थिक तनाव और विचारों की असहमति असामान्य नहीं हैं। लेकिन हिंसा और सामान्य वैवाहिक मतभेद को एक ही श्रेणी में रखना गंभीर भूल होगी। 
शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, गंभीर मानसिक उत्पीड़न, धमकी, जबरदस्ती, अत्यधिक नियंत्रण या ऐसी परिस्थितियाँ जिनमें व्यक्ति की मूलभूत सुरक्षा लगातार खतरे में हो, सामान्य वैवाहिक मतभेद नहीं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार intimate partner violence में शारीरिक, यौन और मनोवैज्ञानिक हिंसा तथा controlling behaviours शामिल हो सकते हैं। WHO यह भी रेखांकित करता है कि ऐसी हिंसा महिलाओं के शारीरिक, मानसिक, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है तथा बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण को भी प्रभावित कर सकती है। 
ऐसी परिस्थितियों में “परिवार बचाने” की सामाजिक अपेक्षा को व्यक्ति की सुरक्षा से ऊपर रखना उचित नहीं माना जा सकता।
यहाँ एक महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आता है—
परिवार का अस्तित्व महत्वपूर्ण है, लेकिन परिवार के भीतर व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा उससे कम महत्वपूर्ण नहीं है।

3. क्या हर संघर्ष तलाक का कारण है?
नहीं।
दो व्यक्तियों के बीच विचारों का अंतर, आर्थिक कठिनाई, ससुराल संबंधी तनाव, जीवनशैली का अंतर, संचार की कमी, पालन-पोषण को लेकर मतभेद या समय-समय पर होने वाले विवाद अपने आप में तलाक की अनिवार्य परिस्थितियाँ नहीं हैं।
मानवीय संबंधों में परिवर्तन स्वाभाविक है। कई विवाह संवाद, सीमाओं के पुनर्निर्धारण, पारिवारिक सहयोग, परामर्श अथवा अन्य उपयुक्त उपायों से बेहतर हो सकते हैं।
इसलिए तलाक पर विचार करने से पहले एक महत्वपूर्ण प्रश्न होना चाहिए—
क्या समस्या संबंध में स्थायी और मूलभूत टूटन है, या ऐसी समस्या है जिसे दोनों पक्ष वास्तविक इच्छा और सुरक्षित परिस्थितियों में सुधार सकते हैं?
इस प्रश्न का उत्तर प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक परिवार के लिए अलग हो सकता है।

4. जब विश्वास का आधार लगातार समाप्त हो जाए
विवाह केवल साथ रहने का समझौता नहीं है। इसमें विश्वास, पारदर्शिता और पारस्परिक उत्तरदायित्व का महत्वपूर्ण स्थान है।
यदि लंबे समय तक छल, गंभीर विश्वासघात, लगातार धोखाधड़ी या ऐसी परिस्थितियाँ बनी रहें जिनसे संबंध का बुनियादी विश्वास समाप्त हो जाए, तो दंपति को यह विचार करना पड़ सकता है कि क्या संबंध को पुनर्निर्मित करने की वास्तविक संभावना मौजूद है।
यहाँ भी किसी एक घटना को स्वतः तलाक का कारण मानना उचित नहीं होगा। महत्वपूर्ण यह है कि—
क्या गलती स्वीकार की गई है?
क्या सुधार की वास्तविक इच्छा है?
क्या व्यवहार में स्थायी परिवर्तन आया है?
क्या दूसरा पक्ष फिर से विश्वास स्थापित करने में सक्षम है?
क्या संबंध में सम्मान और सुरक्षा वापस आ सकती है?
यदि इन प्रश्नों के उत्तर लगातार नकारात्मक हों, तो विवाह की दीर्घकालीन व्यवहार्यता पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

5. जब विवाह व्यक्ति की गरिमा को लगातार नष्ट करने लगे
मानव गरिमा आधुनिक मानवाधिकार विमर्श का केंद्रीय सिद्धांत है।
विवाह किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की संपत्ति नहीं बनाता। पति-पत्नी दोनों स्वतंत्र मानव व्यक्तित्व हैं। CEDAW विवाह और परिवार संबंधों में समानता तथा विवाह-विघटन के समय समान अधिकारों की आवश्यकता को स्पष्ट करता है।
इसलिए यदि कोई संबंध लगातार किसी व्यक्ति को अपमानित, नियंत्रित, अलग-थलग या उसकी स्वतंत्र निर्णय-क्षमता से वंचित करने का माध्यम बन जाए, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि उस संबंध को बनाए रखने की सामाजिक कीमत कितनी उचित है।
विवाह साथ रहने का अधिकार देता है; किसी व्यक्ति पर स्वामित्व का अधिकार नहीं।

6. बच्चों के कारण विवाह बचाना—एक जटिल प्रश्न
तलाक के निर्णय में बच्चों का प्रश्न सबसे संवेदनशील होता है।
सामान्य धारणा है कि बच्चे होने पर विवाह हर परिस्थिति में बचाया जाना चाहिए। लेकिन यह सार्वभौमिक सिद्धांत नहीं हो सकता। दूसरी ओर, बच्चों की उपस्थिति को तलाक का स्वतः आधार मानना भी उचित नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय बाल-अधिकार मानक बच्चों के “best interests” अर्थात् सर्वोत्तम हित को प्राथमिक विचार मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय के अनुच्छेद 3 में यह सिद्धांत स्पष्ट है। इसी अभिसमय में अलग रह रहे माता-पिता और बच्चों के संबंधों के संदर्भ में भी बच्चे के हित, सुरक्षा और परिस्थितियों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है। 
इसलिए वास्तविक प्रश्न यह नहीं होना चाहिए—
“बच्चे हैं, इसलिए तलाक नहीं हो सकता।”
बल्कि प्रश्न होना चाहिए—
“बच्चे के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, शैक्षणिक और सामाजिक हित किस व्यवस्था में बेहतर सुरक्षित रहेंगे?”
कभी-कभी सहयोगपूर्ण सह-अभिभावकत्व के साथ अलगाव बच्चों के लिए अधिक स्थिर वातावरण दे सकता है; दूसरी परिस्थितियों में माता-पिता के बीच सुधार और सहयोग के प्रयास अधिक उपयुक्त हो सकते हैं। इसका निर्णय तथ्य-विशेष पर निर्भर करता है।

7. हिंसा वाले परिवार में “समझौता” हमेशा समाधान नहीं
भारतीय और वैश्विक सामाजिक परिवेश में “समझौता कर लो”, “बच्चों के लिए सह लो”, “समाज क्या कहेगा” जैसी सलाह अक्सर सुनाई देती है।
समझौता तब सार्थक है जब दोनों पक्ष स्वतंत्र इच्छा से समाधान की ओर बढ़ रहे हों। लेकिन यदि समझौते का अर्थ हिंसा, धमकी या गंभीर उत्पीड़न को सहते रहना हो, तो यह समाधान नहीं बल्कि समस्या को लंबा खींचना हो सकता है।
WHO के अनुसार intimate partner violence के स्वास्थ्य परिणाम अल्पकालिक ही नहीं, दीर्घकालिक भी हो सकते हैं और हिंसा महिलाओं तथा बच्चों दोनों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित कर सकती है। 
इसलिए “परिवार बचाने” और “व्यक्ति को बचाने” के बीच अंतर समझना आवश्यक है।

8. मानसिक दूरी और भावनात्मक विघटन
हर टूटता हुआ विवाह हिंसक नहीं होता।
कभी-कभी दो लोग वर्षों तक एक ही घर में रहते हुए भी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हो जाते हैं। संवाद समाप्त हो जाता है, साझा भविष्य की कल्पना समाप्त हो जाती है और संबंध केवल सामाजिक औपचारिकता बनकर रह जाता है।
लेकिन यहाँ भी सावधानी आवश्यक है।
अस्थायी भावनात्मक दूरी और स्थायी वैवाहिक विघटन एक ही बात नहीं हैं। जीवन के कठिन चरणों में संबंधों में दूरी आ सकती है। इसलिए तलाक का प्रश्न उठाने से पहले यह समझना आवश्यक है कि यह स्थिति अस्थायी संकट है या लंबे समय से चली आ रही अपरिवर्तनीय दूरी।

9. आर्थिक स्वतंत्रता और तलाक
तलाक का प्रश्न केवल भावनात्मक नहीं, आर्थिक भी है।
आवास, आय, संपत्ति, ऋण, बच्चों का पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक स्थिरता—इन सभी का मूल्यांकन आवश्यक हो सकता है।
CEDAW की General Recommendation No. 29 विशेष रूप से विवाह और परिवार के विघटन के आर्थिक परिणामों पर ध्यान आकर्षित करती है और बताती है कि वैवाहिक संबंध टूटने के आर्थिक प्रभाव स्त्री और पुरुष पर समान रूप से नहीं पड़ सकते।
इसलिए किसी भी तलाक के निर्णय में भावनात्मक प्रश्न के साथ आर्थिक यथार्थ को भी देखना आवश्यक है।

10. तलाक का अर्थ बच्चों से संबंध समाप्त होना नहीं
विवाह का अंत और माता-पिता की भूमिका का अंत दो अलग बातें हैं।
यदि दंपति अलग होते हैं और उनके बच्चे हैं, तो बच्चों के प्रति माता-पिता की जिम्मेदारियाँ परिस्थितियों और लागू कानून के अनुसार बनी रह सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार ढाँचा भी इस बात पर बल देता है कि बच्चे के हितों को प्राथमिकता दी जाए और, जहाँ बच्चे के हितों के विपरीत न हो, अलग रह रहे माता-पिता और बच्चे के संबंध को बनाए रखने का अधिकार सम्मानित किया जाए।
इसलिए परिपक्व तलाक का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत हो सकता है—
पति-पत्नी अलग हो सकते हैं, लेकिन माता-पिता की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।

11. तलाक का निर्णय भावनात्मक आवेग में नहीं
तलाक जीवन बदलने वाला निर्णय हो सकता है। इसलिए अत्यधिक क्रोध, अपमान, तत्काल प्रतिशोध या सामाजिक दबाव में लिया गया निर्णय बाद में जटिल परिणाम पैदा कर सकता है।
जहाँ सुरक्षित और उपयुक्त हो, वहाँ व्यक्ति निम्न प्रश्नों पर शांतिपूर्वक विचार कर सकता है—
क्या संबंध में सुरक्षा बनी हुई है?
क्या दोनों पक्ष सम्मानपूर्वक संवाद कर सकते हैं?
क्या समस्या सुधार योग्य है?
क्या सुधार के वास्तविक प्रयास पहले किए गए हैं?
क्या संबंध में हिंसा, धमकी या coercive control मौजूद है?
बच्चों के सर्वोत्तम हित क्या हैं?
अलग होने की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियाँ क्या होंगी?
क्या निर्णय स्वतंत्र इच्छा से लिया जा रहा है?
क्या लागू राष्ट्रीय कानून के अनुसार उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
क्या निर्णय किसी व्यक्ति को दंडित करने के लिए है या दीर्घकालीन जीवन की सुरक्षा और स्थिरता के लिए?
इन प्रश्नों का कोई सार्वभौमिक “हाँ” या “नहीं” उत्तर नहीं है। यही विवाह और तलाक के प्रश्न की मानवीय जटिलता है।

12. तलाक को “जीत” और “हार” से बाहर निकालना होगा
तलाक के बाद भी दो लोग एक-दूसरे के विरोधी बने रहें—यह आवश्यक नहीं है।
विशेषकर जब बच्चे हों, तो पूर्व पति-पत्नी को एक-दूसरे के प्रति व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठकर बच्चों के हित में सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
तलाक के बाद भी गरिमा, निजता, आर्थिक दायित्व, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भावनात्मक सुरक्षा जैसे प्रश्न बने रहते हैं।
इसलिए परिपक्व समाज को तलाक को केवल सामाजिक कलंक या व्यक्तिगत विजय-पराजय के रूप में देखने के बजाय इसे कानून, जिम्मेदारी और मानवीय गरिमा के दायरे में समझना चाहिए।

13. क्या तलाक हमेशा बेहतर विकल्प है?
इस प्रश्न का सार्वभौमिक उत्तर नहीं दिया जा सकता।
किसी विवाह को केवल इसलिए समाप्त करना उचित नहीं कहा जा सकता कि उसमें कठिनाइयाँ हैं। उसी प्रकार केवल इसलिए विवाह को बनाए रखना भी उचित नहीं कहा जा सकता कि समाज तलाक को पसंद नहीं करता।
“बेहतर विकल्प” परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
यदि संबंध में पारस्परिक सम्मान, सुरक्षा, संवाद और सुधार की वास्तविक संभावना है, तो संबंध को सुधारने का प्रयास महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके विपरीत, यदि संबंध लगातार हिंसा, गंभीर उत्पीड़न, भय, जबरदस्ती या ऐसी परिस्थितियों में बदल गया है जहाँ व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है, तो अलगाव या तलाक सहित उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करना व्यक्ति के अधिकारों और सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है। WHO हिंसा के ऐसे प्रभावों को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार चिंता के रूप में रेखांकित करता है।

14. वैश्विक समाज के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण
विवाह संस्था को मजबूत करना और तलाक की आवश्यकता पड़ने पर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना—ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी उद्देश्य नहीं हैं।
एक स्वस्थ समाज को एक साथ चार बातें स्वीकार करनी होंगी—
पहली, विवाह सम्मान, स्वतंत्र सहमति और समानता पर आधारित होना चाहिए।
दूसरी, विवाह में मतभेद होना अपने आप में विवाह की विफलता नहीं है।
तीसरी, हिंसा और गंभीर उत्पीड़न को “पारिवारिक मामला” कहकर सामान्य नहीं बनाया जा सकता।
चौथी, विवाह-विघटन की स्थिति में भी बच्चों के सर्वोत्तम हित, दोनों पक्षों की गरिमा और लागू कानूनों का सम्मान आवश्यक है।
CEDAW विवाह और उसके विघटन दोनों में समान अधिकारों की अवधारणा को स्वीकार करता है, जबकि बाल अधिकार अभिसमय बच्चों के सर्वोत्तम हित को केंद्रीय विचार बनाता है।

निष्कर्ष: कभी संबंध बचाना बुद्धिमत्ता है, कभी स्वयं को बचाना
विवाह को बचाना अपने आप में कोई नैतिक उपलब्धि नहीं, यदि उसकी कीमत किसी व्यक्ति की सुरक्षा और गरिमा हो। उसी प्रकार तलाक लेना भी अपने आप में स्वतंत्रता या सफलता का प्रमाण नहीं है।
वास्तविक बुद्धिमत्ता इस बात में है कि व्यक्ति परिस्थितियों को ईमानदारी से देख सके।
कभी दो लोगों को अपने अहंकार से ऊपर उठकर विवाह बचाना पड़ता है।
कभी संवाद की कमी को संवाद से दूर करना पड़ता है।
कभी क्षमा संबंध को पुनर्जीवित कर सकती है।
कभी पेशेवर परामर्श और समय संबंध को नया अवसर दे सकते हैं।
और कभी परिस्थितियाँ इतनी गंभीर हो जाती हैं कि अलग होना ही व्यक्ति की सुरक्षा, गरिमा और भविष्य के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण कानूनी विकल्पों में से एक बन जाता है।
इसलिए शायद प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि—
“तलाक सही है या गलत?”
बल्कि अधिक मानवीय प्रश्न यह है—
“इस विशेष परिस्थिति में कौन-सा वैधानिक और जिम्मेदार मार्ग संबंधित व्यक्तियों की गरिमा, सुरक्षा, स्वतंत्रता और बच्चों के सर्वोत्तम हित की सबसे बेहतर रक्षा कर सकता है?”
यही दृष्टिकोण विवाह को भी सम्मान देता है और व्यक्ति की स्वतंत्रता को भी।
और शायद आधुनिक विश्व में तलाक पर सबसे परिपक्व चिंतन यही है—
रिश्ते समाज के लिए नहीं, मनुष्य के लिए होते हैं; इसलिए किसी भी रिश्ते का मूल्यांकन अंततः मनुष्य की गरिमा, सुरक्षा, स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान के आधार पर होना चाहिए।


संदर्भात्मक अंतरराष्ट्रीय आधार
Universal Declaration of Human Rights, Article 16 — विवाह, विवाह के दौरान और उसके विघटन में समान अधिकार तथा स्वतंत्र एवं पूर्ण सहमति की अवधारणा। (romena.ohchr.org)
Convention on the Elimination of All Forms of Discrimination against Women (CEDAW), Article 16 — विवाह और उसके विघटन में समान अधिकार एवं जिम्मेदारियाँ तथा बच्चों के हितों की प्राथमिकता।
CEDAW General Recommendation No. 29 — विवाह, परिवार संबंधों और उनके विघटन के आर्थिक परिणामों पर विचार।
Convention on the Rights of the Child, Articles 3 and 9 — बच्चे के सर्वोत्तम हित तथा माता-पिता से अलगाव की परिस्थितियों में बच्चे के अधिकार। (UNICEF Global)
World Health Organization — intimate partner violence के स्वास्थ्य, सामाजिक और मानवीय प्रभावों संबंधी वैश्विक साक्ष्य। (World Health Organization)

चेतावनी : यह आलेख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों पर आधारित चिंतनात्मक लेख है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति, अभिरक्षा, घरेलू हिंसा तथा वैवाहिक अधिकारों की वास्तविक कानूनी स्थिति प्रत्येक देश/क्षेत्र के लागू कानून और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करती है। अतः किसी वास्तविक मामले में संबंधित क्षेत्राधिकार के योग्य विधिक विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है। यह संस्करण अंतरराष्ट्रीय पत्रिका/वेब-जर्नल के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और संतुलित है—किसी धर्म, देश, लिंग, न्यायालय या व्यक्ति को लक्षित नहीं करता और किसी विशिष्ट राष्ट्रीय कानून को सार्वभौमिक नियम के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। WHO, UN/CEDAW और UNICEF जैसे प्राथमिक अंतरराष्ट्रीय स्रोतों को आधार बनाया गया है।

बुधवार, सितंबर 23, 2026

लेखक, विचारक, दार्शनिक और पुलिस ऑफिसर श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी ने पुलिस विभाग में अपनी उत्कृष्ट सेवा के 21 साल किये पुरे; 22वें वर्ष में प्रवेश करते हुए अपने आदर्शो और सहयोगियों सहित पत्रकारों और मीडिया बंधुओं का आभार

लेखक, विचारक, दार्शनिक और पुलिस ऑफिसर श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी ने पुलिस विभाग में अपनी उत्कृष्ट सेवा के 21 साल किये पुरे; 22वें वर्ष में प्रवेश करते हुए अपने आदर्शो और सहयोगियों सहित पत्रकारों और मीडिया बंधुओं का आभार

व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी माना रायपुर में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ जवान श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी की सेवा का 21 वर्ष पूर्ण; 22वें वर्ष पर प्रवेश करने पर उन्होंने अपने आदर्शो और सहयोगियों सहित पत्रकारों और मीडिया बंधुओं का आभार प्रकट करते हुए अपने पुलिस जीवन में प्रेरणा स्त्रोत, मार्गदर्शकों और सहयोगियों का नाम अमिट स्याही में लिखने का प्रयास किया है।

श्री जोशी ने कहा है कि पुलिस विभाग में मैंने अपने विभागीय अनुशासन को पूर्ण करते हुए पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ अव्वल दर्जे के सेवा के दौरान आप सभी से प्राप्त आशीर्वाद, मार्गदर्शन, सहयोग, सम्मान और प्रेम के लिए कोटिशः आभार। 21वर्ष के दीर्घकालीन सेवा के दौरान मेरी अनुभव और कार्यक्षमता में निरंतर वृद्धि हुई है, इसका तात्पर्य है कि मैंने लगभग Zero से शुरुआत के साथ दर्जनों छिटपुट गलतियों और आपके क्षमादान के साथ आज इस identity को प्राप्त कर पाया हूं तो उसके पीछे आप सबका सराहनीय योगदान रहा है।

श्री जोशी जी के प्रेरणास्रोत : विशेष डीजीपी श्री जीपी सिंह, आरक्षक श्री जय डहरिया, रिटायर्ड कंपनी कमांडर श्री अशोक चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक श्री मोहित गर्ग, पुलिस अधीक्षक श्री गिरिजा शंकर जायसवाल, एसपी श्री रोबिनसन गुड़िया, सेनानी एम. तुङ्गोई, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर, सहायक सेनानी श्री रविप्रताप सिंह, रिटायर्ड सहायक सेनानी श्री धर्मनाथ सिंह, सहायक सेनानी श्री टीका राम कुर्रे, भूतपूर्व कंपनी कमांडर श्री सत्यनारायण शुक्ला, भूतपूर्व कंपनी कमांडर श्री सरजू सिंह सिकरवार, एपीसी श्री शैवाल चटर्जी, एपीसी श्री जयंत पॉल को सादर प्रणाम।

श्री जोशी जी के मार्गदर्शक : सहायक सेनानी श्री कुंजराम चौहान, सहायक सेनानी श्री लोकेश्वर शांडिल्य, सहायक सेनानी श्री गोविन्द राम मिंज, सहायक सेनानी श्री विजय तिर्की, Ret.CC श्री अशोक चतुर्वेदी, रक्षित निरीक्षक श्री दीपक कुमार साव, रक्षित निरीक्षक श्री सोनू वर्मा, CC श्री सुरित राम बघेल, CC श्री नरसिंह यादव, PC श्री हरीश चंद्र सिन्हा, APC स्वर्गीय श्री ओंकार नाथ सिंह, PC श्री पंकज तिवारी, PC श्री चंद्रमा राम, Steno श्री पवन नामदेव, ASI श्री नीलकमल दिवाकर, APC श्री महेंद्र शर्मा, APC श्री रामा साहू, HC श्री गोविन्द बिहारी शर्मा, श्री निर्मल बारमते, श्री संजय खांडेकर, को सादर प्रणाम।

विशेष आभार : भूतपूर्व डीआईजी श्री एनकेएस ठाकुर, भूतपूर्व आईजी श्री के.सी. अग्रवाल, भूतपूर्व डीआईजी श्री जगमोहन वट्टी, सेनानी श्री नरेंद्र खरे, भूतपूर्व एसी श्री पासवान सर, एसी श्री त्रिभुवन मोहन वासनिक, सीसी श्री नरसिंह यादव, श्री सीसी श्री जितेंद्र कोरी, अकाउंटेंट श्री मनिहार सिंह सहारे, अकाउंटेंट श्री मुरली रावते, स्टेनो श्री संतोष देहारी, SI - M श्री राजेश दुरुक्कर, ASI श्री जितेन्द्र राजपूत, Asi-M श्री महेश बंजारे, श्री श्रीधर सिंह बैस, श्री लाल मोहन पटेल, श्री सुदर्शन गुप्ता, श्री धनंजय हिरवानी, श्री राकेश साव, श्री अनिल जोशी, श्री दिवाकर मिश्रा, श्री रोहित अग्निहोत्री, श्री अनिल तिवारी, श्री तुकाराम साहू, श्री भानु प्रकाश मारकंडे, श्री श्यामचरण मुंडा, श्री अवधेश तिवारी, श्री गजेंद्र सिंह कुशवाहा, श्री शिव सोनवानी, श्री नरेन्द्र कुशवाहा, श्री रोशन दुबे, श्री कमल किशोर द्विवेदी, श्री दिनेश चंद्राकर, श्री सत्यप्रकाश भारद्वाज, श्री मनोज शर्मा, श्री महेंद्र हंश, श्री अनिल यादव, श्री सुनील सहगल, श्री रामस्वरूप सोनवानी, श्री परमेश्वर निषाद, श्री जितेन्द्र कुमार पटेल, श्री लोमन सिंह रावते, श्री राकेश ताम्रकार, श्री जय वासनिक, श्री जगदेव नेताम, श्री कन्हैया वैष्णव, श्री खिलेश्वर बेसरा, श्री भीमसिंह कुमेटी, सहित सभी वरिष्ठ एवम सहयोगी पुलिस अधिकारीगण का आभार प्रकट करता हूँ। आदरणीय पाठकों, उपरोक्तानुसार दर्शाए नाम के अलावा भी बहुत से लोगों ने मेरी सेवा के दौरान अपना अहम किरदार निभाया है उन सबको भी बहुत बहुत धन्यवाद।

आदरणीय/आदरणीया
मैंने अपनी 21 साल की सेवा के दौरान 5वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल कांगोली जगदलपुर, व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी माना रायपुर और जिला पुलिस बल नारायणपुर में पदस्थ होकर थाना जांगला (जिला बीजापुर), थाना कोरर (जिला कांकेर), CIATS जगदलपुर, 4th BN CAF माना रायपुर, पुलिस मुख्यालय (व्हीआईपी सुरक्षा सेल, चुनाव सेल, तकनीकी सेवाएं शाखा, सिटीजन कॉप सेल), आईजी रेंज रायपुर, आईजी रेंज दुर्ग, Directorate EOW Raipur और राज्य पुलिस अकादमी चंद्रखूरी में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त किया है। इस दौरान संबंधित कार्यालयों के स्टाफ से भी मुझे बेहतर मार्गदर्शन और सहयोग के साथ साथ पद की गरिमा से बढ़कर मुझे सम्मान प्राप्त हुआ है, इसके लिए सभी स्टॉफ को बहुत बहुत धन्यवाद.....

पुलिस बल में सेवा के दौरान पुलिस विभाग के अच्छे कार्यों को जन मानस तक पहुंचने में छत्तीसगढ़ राज्य के अलावा देश के अनेकोनेक बुद्धिजीवी पत्रकारों, मीडिया साथियों का भी निरंतर सहयोग प्राप्त हुआ है, अतः आप सभी पत्रकार और मीडिया साथियों का विशेष आभार प्रकट करता हूं।

मेरी इस उत्कृष्ट सेवा में मेरे दादा, दादी, मां, बाबूजी, बड़े भैया, भाई, छोटी बहन, पत्नी और नन्हें बच्चों के अलावा बहुत से पारिवारिक सदस्यों और मित्रों का बलिदान और मार्गदर्शन भी शामिल है आप सबको सादर प्रणाम...... अपेक्षा है आप सबका सहयोग निरंतर प्राप्त होता रहेगा।

: जीवन की अनमोल कहानी :
अधिवक्ता श्री देव प्रसाद जोशी : आपने सेवा में आने के लिए और आने के पहले बचपन से ही सदैव गुरु और कष्टमुक्तिदाता बनकर मेरे लिए सैकड़ों उपकार किया। मुझे कुएं मे डूबकर मरने से बचाया; कंप्यूटर सिखाया; ऑफिसियल कार्य सिखाया; आप मेरे बड़े भैया से अधिक मेरे असली गुरु हैं।

आरक्षक श्री जय डहरिया : जीजू, आपने मेरे पिताश्री को छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में सेवा के फायदे बताकर 11 वीं बटालियन आईआर भर्ती में फॉर्म भरने के लिए मनाया।

रिटायर्ड कंपनी कमांडर श्री अशोक चतुर्वेदी : आपने वर्ष 2005 में जब मुझे दूसरी बटालियन सकरी में भर्ती (शारीरिक दक्षता परीक्षा) के दौरान 100 मीटर दौड़ में फैल कर दिया गया; तब मैं हार मानकर घर की ओर रुख कर दिया था। आपने मेरे चेहरे के भाव से मेरा व्यक्तित्व और भविष्य पहचानकर मुझे अपना छोटा भाई माना और मेरा मार्गदर्शन किया। आप मेरी जिंदगी में भगवान बनकर आए और मेरे जीवन को एक बेहतर स्वरूप दी।

सहायक सेनानी श्री कुंजराम चौहान : आपने सेवा के दौरान भी शिक्षा अध्ययन जारी रखने के लिए मुझे प्रेरित किया; इसके साथ ही आपने पुलिस विभाग में कार्यालयीन कार्य करने की सीख और अवसर प्रदान किया।

निरीक्षक जगदीश पाणिग्रही : आपने मुझे मेरी छोटी-बड़ी गलतियों पर मुझे कटु शब्दों में समझाईस देकर भी परफेक्ट बनाया; आपने ही मुझे लेपटॉप खरीदने की सलाह दी थी। लेपटॉप खरीदने के बाद से मेरी ख्याति में वृद्धि हुई।

रिटायर्ड सहायक सेनानी श्री धर्मनाथ सिंह : आपने मेरी योग्यता और दक्षता का सराहना करते हुए मुझे सम्मानजनक जीवन का अवसर प्रदान किया।

विशेष डीजीपी श्री जीपी सिंह : आपने मुझे पुलिस विभाग में उत्कृष्ट सेवा करने के तरीके सिखाए हैं, आपने कार्यों को समय-सीमा में भीतर जीरो गलती के साथ तत्परता पूर्वक कार्य पूर्ण करने, और निर्भय होकर सीनियर अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने की साहस और हिम्मत दी। आपने मुझे रैंक से अधिक जिम्मेदारी देकर दक्ष पुलिस अधिकारी बनाया। मैं अपने इस पूरे जीवन तक आपके स्नेह, सद्भावना और आशीर्वाद के लिए कृतज्ञ रहूँगा।

भवदीय
(हुलेश्वर प्रसाद जोशी)
प्रधान आरक्षक
व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर




व्यक्तिगत जानकारी:-

1. नाम – श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी
2. पिता का नाम - श्री शैल कुमार जोशी
3. माता का नाम - श्रीमती मोतिम बाई
4. पत्नी का नाम - श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी
5. पदनाम एवं बैज नंबर - प्रधान आरक्षक 159,
6. वर्तमान पद्स्थापा इकाई का नाम - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर
7. जन्मतिथि - 09.09.1984
8. प्रथम नियुक्ति - आरक्षक-जीडी, दिनांक 23.09.2005 (5वीं वाहिनी छसबल, जगदलपुर)
9. पदोन्नति - प्रधान आरक्षक-जीडी, दिनांक 12.03.2019 (व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर)
10. मूल निवास का पता - ग्राम- मनकी, पोस्ट ऑफिस- साल्हेघोरी, तहसील-लोरमी, जिला मुगेली।
11. मोबाईल नंबर - 9826164156, 9406003006
12. ई-मेल आईडी – hp.joshi@gov.in

कार्यस्थल (पदस्थापना) की जानकारी:-

1. 5वीं वाहिनी छसबल, जगदलपुर
2. व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर
3. जिला पुलिस बल, जिला नारायपुर
4. व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर


कार्यस्थल (संबद्धता/मौखिक आदेश पर) की जानकारी:-

1. सीआईएटी स्कूल, जगदलपुर
2. व्हीआईपी सुरक्षा सेल, पुमु
3. राज्य चुनाव सेल, पुमु
4. सिटीजन कॉप सेल, आईजी रेंज, रायपुर
5. तकनीकी सेवाएं शाखा, पुमु
6. सिटीजन कॉप/चुनाव सेल, आईजी रेंज, दुर्ग
7. सीसीटीएनएस शाखा, ईओडब्ल्यू
8. राज्य पुलिस अकादमी, चन्दखुरी



शैक्षणिक योग्यताएं:-

1. बैचलर ऑफ आर्ट्स – गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर
2. मास्टर ऑफ आर्ट्स (शिक्षा शास्त्र) – मैट्स विश्वविद्यालय, आरंग-रायपुर।
3. मास्टर ऑफ आर्ट्स (अर्थशास्त्र) – बस्तर विश्वविद्यालय, जगदलपुर।
4. पीजीडीसीएपी – मैट्स विश्वविद्यालय, आरंग-रायपुर।
5. मानव अधिकार में प्रमाण पत्र – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली।
6. डीसीएपी – एम. टेक कम्प्यूटर एजूकेशन सेंटर
7. मेडिकल लेबोरेटरी टेक्निशियन – भारत सेवक समाज



प्रकाशित ग्रंथ/किताब:-

1. लिख दूं क्या? – काव्य संग्रह
2. मानव अधिकार के अनछूए पहलू



कुछ महत्वपूर्ण कार्य

2005 प्रथम नियुक्ति - दिनांक 23.09.2005 को 5वीं वाहिनी छसबल, कंगोली-जगदलपुर में आरक्षक (जीडी) के पद पर नियुक्त हुआ। इस दौरान ई कंपनी कैम्प, थाना जांगला (जिला बीजापुर) एवं थाना कोरर (जिला कांकेर) में तैनात रहा।

2006 बुनियादी प्रशिक्षण - एपीटीएस, माना-रायपुर में दिनांक 01.03.2006 से 30.09.2006 तक बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रथम श्रेणी के साथ सफलता अर्जित किया।

2006 कोरियन कराटे प्रशिक्षण - एपीटीएस, माना-रायपुर में बुनियादी प्रशिक्षण के दौरान दिनांक 20.06.2006 से 30.09.2006 तक मार्शल आर्ट्स की प्रशिक्षण प्राप्त किया।

2008 सीआईएटी कोर्स, असम 4कोर हरचुरा (असम) में सीआईएटी प्रशिक्षण प्राप्त किया।

2010-12 सीआईएटी स्कूल में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन - सीआईएटी स्कूल में कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं कार्यालय सहायक के रूप में तैनात होकर महत्वपूर्ण योगदान देते हुए महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2012-13 स्थानीय छसबल बटालियन एवं आईआर बटालियन भर्ती में योगदान - छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार पुलिस मुख्यालय द्वारा स्थानीय बटालियन एवं आईआर बटालियन भर्ती वर्ष 2012-13 में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अंतर्गत 4थी वाहिनी छसबल अंतर्गत आवेदन पत्र का संकलन, स्कैनिंग एवं भर्ती ड्यूटी किया।

2013-2015 व्हीआईपी सुरक्षा सेल मंे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन - (11/06/2013 से 14/10/2015) पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित व्हीआईपी सुरक्षा सेल में तैनात होकर अतिमहत्वपूर्ण व्यक्तियों/ महत्वपूर्ण व्यक्तियों /राजनैतिक व्यक्तियों/ जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक/ न्यायिक अधिकारियों और राज्य के पत्रकारों, व्हिसिल व्लोवरों सहित आम नागरिकों कों सफलतापूर्वक सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान देने के साथ-साथ पीएसओ बुकलेट प्रकाशन एवं व्हीआईपी सुरक्षा बटालियन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
सुरक्षा के अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि -
ऽ बलिदानी माटी कलस यात्रा।
ऽ परिवर्तन यात्रा।
ऽ विकास यात्रा।

2014-2015 व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी के गठन में महत्वपूर्ण योगदान - पुलिस महानिरीक्षक, सुरक्षा/ योप्र/रेंज के नेतृत्व में व्हीआईपी सुरक्षा के तहत माननीय मुख्यमंत्री, माननीय राज्यपाल, माननीय हाईकोर्ट, छग भवन/सदन एवं अन्य महत्वपूर्ण/सुरक्षा श्रेणी प्राप्त व्यक्तियों की सुरक्षा हेतु पूर्व से शासन स्वीकृत बलों से व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर का गठन पूर्ण कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2013-2015 विभिन्न पीएसओ कोर्स/पीएसओ रिफ्रेसर कोर्स के संचालन में सहयोग - तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक, सुरक्षा के निर्देशानुसार विभिन्न पीएसओ रिफ्रेसर कोर्स एवं पीएसओ कोर्स कराया गया। प्रशिक्षणार्थियों को छग में पहली बार प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र देकर उनके सेवापुस्तिका में इन्द्राज कराया गया। उक्त कार्यों में आईजी महोदय के अधीन कार्यालय सहायक के रूप में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2014-2015 पीएसओ मार्गदर्शिका के प्रकाशन एवं वितरण में योगदान - पुलिस महानिरीक्षक, सुरक्षा के निर्देशानुसार 3000 नग पीएसओ मार्गदर्शिका का प्रकाशन कराते हुए व्हीआईपी सुरक्षा में तैनात पीएसओ को वितरित कराया गया उक्त कार्यों के संपादन हेतु महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। ।

2013-2015 राज्य निर्वाचन सेल में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर कार्य किया। इस दौरान:-
ऽ विधान सभा आम निर्वाचन-2013
ऽ लोक सभा आम निर्वाचन-2014
ऽ नगरीय निकायों के आम निर्वाचन-2014
ऽ एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन-2015
में संलग्न तैनात होकर महत्वपूर्ण योगदान देते हुए जीरो-इंसिडेंट के लक्ष्य को हासिल करने हेतु महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2013 विधान सभा आम निर्वाचन-2013 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर विधान सभा आम निर्वाचन-2013 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2013 IPL 7 क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग – दिनांक 28.04.2013 एवं 01.05.2013 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2014 चैम्पियन लीग क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग – दिनांक 19.09.2014 एवं 23.09.2014 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर में शांतिपूर्ण आयोजन को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2014 लोक सभा आम निर्वाचन-2014 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर लोक सभा आम निर्वाचन-2014 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2014 नगरीय निकायों के आम निर्वाचन-2014 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर नगरीय निकायों के आम निर्वाचन-2014 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2015 IPL 8 क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग - दिनांक 09.05.2015 एवं 12.05.2015 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर में आयोजित मैच को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 विश्व हाकी लीग प्रतियोगिता के आयोजन में सहयोग – दिनांक 27.11.2015 से 06.12.2015 तक रायपुर सांइस कालेज स्थित अन्तर्राष्ट्रीय हांकी स्टेडियम में विश्व हाकी लीग प्रतियोगिता के आयोजन को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 चैम्पियन टेनिस लीग के आयोजन में सहयोग – दिनांक 01.12.2015 एवं 02.12.2015 को रायपुर स्थित इन्डोर स्टेडियम में आयोजित चैम्पियन टेनिस लीग को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 नवनिर्मित जैतखाम का लोकार्पण में सहयोग – दिनांक 18.12.2015 को गिरौधपुरी धाम में नवनिर्मित जैतखाम का लोकार्पण माननीय मुख्यमंत्री छ0ग0शासन के दौरान सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2015 स्थानांतरण पर व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर कार्यभार - वर्ष-2015 में 5वीं वाहिनी छसबल, जगदलपुर से स्थानांतरण पर व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर कार्यभार ग्रहण किया।

2015 त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन-2015 का संपादन - पुलिस मुख्यालय रायपुर में गठित राज्य निर्वाचन सेल में तैनात होकर त्रिस्तरीय पंचायतों के आम निर्वाचन-2015 को निष्पक्ष, निर्विध्न एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।

2015-2020 सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के क्रियान्वयन एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका -पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज, रायपुर के अंतर्गत गठित सिटीजन कॉप सेल में तैनात होकर महत्वपूर्ण योगदान देते हुए महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। यह मोबाईल एप्प रायपुर एवं दुर्ग संभाग के सभी जिलों के साथ ही जिला मुंगेली में लागू किया गया था। इस एप्प के लगभग 1.35 लाख से अधिक यूजर्स थे। इस एप्प के माध्यम से लगभग 500 से अधिक गुम/चोरी मोबाईल को रिकवर कर मूम मालिक को सौपने में सहयोग प्रदान किया तथा आम लोगो की लगभग 75,00 से अधिक शिकायतों पर कार्यवाही करने में अपना योगदान दिया।

2015 सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प को Federation of India Chambers of Commerce and Industry (FICCI) New Delhi द्वारा 05.05.2015 को Smart Policing Award – 2016 से सम्मानित किया गया। सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के सफल क्रियान्वयन, संचालन, एवं शिकायतों के निराकरण में अहम भूमिका का निर्वहन किया गया।

2015 नेशनवाइड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम डायल-112 का राज्य में स्थापना एवं संचालन में सहयोग - पुलिस महानिदेशक, छग के दिनांक 21/09/2015 के माध्यम से एनईआरएस के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित कॉल, ग्लोबल पोजिशिनिंग सिस्टम आधारित पुलिस वाहन तथा एकीकृत कम्प्यूटर प्रेषण व 112 नंबर की स्थापना के लिए पुलिस महानिरीक्षक श्री जी.पी. सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस दौरान नोडल अधिकारी के अधीन कार्यालय सहायक के रूप में कार्य करते हुए आवश्यक भूमिकाओं का निर्वहन किया।

2016 The Digital India Conclave – Digital Trailblazers Award - सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प को इंडिया टूडे व एचपी के माध्यम से दिनांक 27.05.2016 को The Digital India Conclave – Digital Trailblazers Award से सम्मानित किया गया। सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के सफल क्रियान्वयन, संचालन, एवं शिकायतों के निराकरण में अहम भूमिका का निर्वहन किया गया।

2016 Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) Govt of India द्वारा दिनांक 19-12-2016 को Digital India Awards – 2016 सम्मानित किया गया। सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प के सफल क्रियान्वयन, संचालन, एवं शिकायतों के निराकरण में अहम भूमिका का निर्वहन किया गया।

2016 IPL9 क्रिकेट मैच के आयोजन में सहयोग – दिनांक 20.05.2016 एवं 22.05.2016 को रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम परसदा, रायपुर को सुरक्षा प्रदान करते हुए शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

2017 पीएसओ प्रशिक्षण - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी द्वारा आयोजित पीएसओ प्रशिक्षण सत्र - 03 में शामिल होकर सफलता अर्जित किया।

2018 सिटीजन कॉप मोबाईल एप्प के अपग्रेटेड वर्जन की शुभारंभ एवं क्रियान्वयन में विशेष योगदान - तत्कालीन पुमनि दुर्ग के विशेष प्रयास के फलस्वरूप दिनांक 29/03/2018 को कलेक्टोरेट दुर्ग सभागृह में माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह द्वारा सिटीजन कॉप मोबाईल एप्प के अपग्रेटेड वर्जन का शुभारंभ किया गया, जिसमें विशेष योगदान देते हुए रेंज स्तरीय सिटीजन कॉप सेल के कार्यान्वयन में हिस्सा लेकर एप्प के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2018 विधान सभा आम निर्वाचन-2018 के संपादन में महत्वपूर्ण योगदान - पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय दुर्ग में तैनाती के दौरान संभाग स्तरीय चुनाव सेल में कार्य करते हुए विधान सभा आम निर्वाचन-2018 को शांतिपूर्ण संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2018 विभागीय कैडर कोर्स - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी द्वारा आयोजित कैडर कोर्स में शामिल होकर सफलता अर्जित किया।

2019 प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति - दिनांक 12 मार्च 2019 को व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में प्रधान आरक्षक (जीडी) के पद पर कार्यभार ग्रहण किया।

2019 लोकसभा आम निर्वाचन 2019 में महत्वूर्ण भूमिका का निर्वहन - व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर के स्थापना शाखा में तैनाती के दौरान अपने कार्य के साथ-साथ लोकसभा आम निर्वाचन 2019 में महत्वूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। मेरे द्वारा व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में पदस्थ एवं राज्य भर के प्रोटेक्टियों की सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों/निज सुरक्षा अधिकारियों को बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

2019 CCTNS COREApplication Implementation - राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में तैनाती के दौरान ईओडब्ल्यू में CCTNS CORE Application को Implementation कराने में महत्वूपर्ण भूमिका का निर्वहन किया।

2019 सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्प का बीपीआरएण्डडी में प्रजेंटेशन देने में महत्वपूर्ण योगदान - One Nation One App के तहत छत्तीसगढ़ पुलिस के मोबाइल एप्पलीकेशन सिटीजन कॉप को देशभर में लागू करने हेतु 2nd कॉन्फ्रेंस ऑन नेशनल पुलिस मिशन के माइक्रो मिशन- 03 मे कम्युनिकेशन एवं टेक्नोलॉजी कैटेगरी के तहत, दिनांक 07.02.2019 को आईजी श्री जी पी सिंह के द्वारा बीपीआरएंडडी नई दिल्ली में दिया प्रजेंटेशन दिया गया, जिसके माध्यम से सिटीजन कॉप को पूरे देशभर में लागू करने हेतु चयनित किया गया। इस कार्य में मेरे द्वारा श्रीमान् आईजी महोदय के निर्देशानुसार कार्य करते हुए उनके साथ इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2013-2020 विभिन्न वर्कशॉप/प्रशिक्षण में योगदान - पुलिस महानिरीक्षक श्री जी.पी. सिंह के निर्देशानुसार समय-समय पर विभिन्न विषयों पर पुलिस बल के कार्यदक्षता में वृद्धि एवं आम नागरिकों मंे अपराध के नियंत्रण संबंधी रोकथाम के लिए निम्नानुसार कार्यशाला/ प्रशिक्षण आयोजित कराया गया।
1. Workshop on Bank Frauds; Prevention and Investigation विषय पर दिनांक 29.11.2013 को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन वृन्दावन सभागृह, रायपुर में किया गया, जिसमें राज्य भर के 88 राजपत्रित पुलिस अधिकारियों सहित लगभग 200 निरी/उनि को प्रशिक्षित किया गया।
2. साईबर अपराध नियंत्रण पर राज्य स्तरीय वर्कशॉप पुलिस ट्रांजिट मेस, रायपुर में आयोजित की गई। इस कार्यशाला में श्री इशांत सिन्हा, साईबर एक्सपर्ट द्वारा पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों को साईबर अपराध से जूडे जानकारी से अवगत कराया गया।
3. सिटीजन कॉप - मोबाईल एप्लीकेशन को चरणवार बिलासपुर एवं दूर्ग संभाग में लागू करने दिनांक 12/02/2016 को पुलिस ट्रांजिट मेस, रायपुर में वर्कशॉप आयोजित की गई।
4. Stress Management आधुनिक जीवन शैली में काम के असीमित घण्टे के फलस्वरूप पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को तनावमुक्ति के लिए दिनांक 09/01/2015 को कास्मिक विजन रिसोर्सेज प्रा.लि. संस्था के सहयोग से एक दिवसीय वर्कशॉप आयोजित किया गया।
5. ट्रैफिक नियंत्रण पर वर्कशॉप।
6. रायपुर संभाग के विभिन्न स्कूल, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों एवं रामकृष्ण केयर हास्पिटल, रायपुर में अपराध के रोकथाम और सिटीजन कॉप - मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोगिता संबंधी 25 से अधिक वर्कशॉप/प्रशिक्षण आयोजित कर जन जागरूकता लाया गया। सिटीजन कॉप संबंधी कार्यशाला संबंधित संस्थान में ही आयोजित किये गये। प्रतिभागियों को श्री जितेन्द्र कोरी, श्री हुलेश्वर जोशी, श्री दिवाकर मिश्रा एवं युथ फेडरेशन रायपुर के अध्यक्ष श्री दिपेश मिश्रा द्वारा जागरूक किया गया।
7. दिनांक 30/09/2015 को पुलिस ट्रांजिट मेस रायपुर में बैंक/एटीएम/क्रेडिट कार्ड के धोखाधडी विषय पर 01 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन एक्सिस बैक के एक्सपर्ट के माध्यम से कराया गया।
8. मानव तस्करी पर कार्यशाला - शक्तिवाहिनी रायपुर के एक्सपर्ट के सहयोग से पुलिस ट्रांजिट मेस रायपुर में कार्यशाला आयोजित किया गया।
9. वर्ष-2020 में पुलिस ऑफिसर मेस में ईओडब्ल्यू के द्वारा फारेंसिंक साईंस पर आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लेकर भागीदारी का निर्वहन किया।

2020 जिला पुलिस बल, नारायणपुर स्थानांतरण पर कार्यभार ग्रहण - पुलिस मुख्यालय, रायपुर के आदेशानुसार व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर से जिला पुलिस बल, जिला नारायणपुर में स्थानांतरण पर कार्यभार ग्रहण किया। इस रक्षित केन्द्र नारायणपुर में रीडर के रूप में कार्य किया तथा थाना एडका में पदस्थ हुआ।

2021 अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2021 के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर एवं जिला प्रशासन के द्वारा जन सहयोग से सीएसआर मद के अंतर्गत अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2021 के आयोजन एवं मैराथन के प्रमोशन हेतु आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2021 बस्तर फाईटर्स भर्ती एवं उप निरीक्षक भर्ती पूर्व आयोजित प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर द्वारा डीएफएम मद अंतर्गत सहयोग से संचालित आरक्षक (बस्तर फाईटर्स) भर्ती एवं उप निरीक्षक भर्ती पूर्व आयोजित प्रशिक्षण में प्रशिक्षण प्रभारी के रूप में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। इसके अंतर्गत लगभग 1200 से अधिक युवक युवतियों को फिजिकल अभ्यास एवं लिखित परीक्षा की निःशूल्क तैयारी कराया गया।

2021 हिन्दी - गोण्डी संक्षिप्त शब्दकोश का पुनः प्रकाशन एवं वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - नारायणपुर पुलिस द्वारा संग्रहित ‘‘हिन्दी - गोण्डी संक्षिप्त शब्दकोश’’ के द्वितीय संशोधित संस्करण नवंबर 2021 का प्रकाशन करते हुए जिला के 1000 युवाओं को निःशूल्क वितरण हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2021 अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। जिला प्रशासन, नारायणपुर द्वारा आयोजित मावली मेला स्थल में दिनांक 12/03/2021 को नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन किया गया। यह नाटक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर और सुश्री आरती गर्ग के कॉन्सेप्ट पर आधारित तथा श्री हुलेश्वर जोशी द्वारा रचित है। नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन जिला पुलिस बल द्वारा सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर थीम ‘सुपोषित महिला, खुसहाल परिवार’ के तहत किया गया।

2023 रक्तदान शिविर के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - नारायणपुर पुलिस द्वारा दिनांक 28.03.2023 को सामुदायिक पुलिसिंग के तहत् आयोजित रक्तदान शिविर के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए स्वयं के साथ-साथ 30पुलिस जवानों एवं परीयना प्रशिक्षणार्थियों से रक्तदान कराने में योगदान दिया।

2023 “ऐ नारी” नाटक का मंचन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - नारायणपुर पुलिस द्वारा ‘‘अभिव्यक्ति जागरूकता कार्यक्रम’’ एवं ‘‘हमर बेटी, हमर मान कार्यक्रम’’ के तहत संचालित महिला जागरूकता सप्ताह के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया इसदौरान दिनाँक 19-03-2023 को समापन समारोह के दौरान जिला प्रशासन एवं नारायणपुर पुलिस द्वारा संचालित परीयना -प्रशिक्षण के प्रशिक्षु युवतियों एवं युवकों ने मेरे द्वारा लिखित/निर्देशित नाटक ‘‘एै नारी’’ का मंचन करते हुए कार्यक्रम में सम्मिलित महिलाओं को महिलाओं को जागरूकता किया गया।

2023-24 ‘‘परीयना प्रशिक्षण’’ अंतर्गत सेना, सशस्त्र बल और पुलिस में भर्ती के लिए 286 युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वूपर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला नारायणपुर में जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के तत्वाधान में ‘‘परीयना’’ प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया गया। मेरे रक्षित निरीक्षक के नेतृत्व में मेरी टीम के द्वारा जिसमें जिले के युवक- युवतियों को सेना, सशस्त्र बल और पुलिस में भर्ती के लिए निःशुल्क शारीरिक अभ्यास एवं लिखित परीक्षा का प्रशिक्षण दिया गया। इस योजनान्तर्गत जिले के कुल 286 युवक-युवतियों को 3-3 माह का शारीरिक एवं लिखित परीक्षा का प्रशिक्षण दिया गया।

2025 - अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2025 के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर एवं जिला प्रशासन के द्वारा जन सहयोग से सीएसआर मद के अंतर्गत अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2025 के आयोजन एवं मैराथन के प्रमोशन हेतु आयोजित दर्जनों बड़े कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2026 अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2026 के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जिला पुलिस बल नारायणपुर एवं जिला प्रशासन के द्वारा जन सहयोग से सीएसआर मद के अंतर्गत अबूझमाड़ हॉफ पीस मैराथन-2026 के आयोजन एवं मैराथन के प्रमोशन हेतु आयोजित दर्जनों बड़े कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2020-26 अबूझमाड़ को नक्सल मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन - जूलाई 2020 से मई 2026 तक जिला पुलिस बल नारायणपुर में पदस्थापना के दौरान रक्षित निरीक्षक के रीडर के रूप में तैनात रहा।
ऽ जिला नारायणपुर में तैनाती के दौरान लगभग 45 नवीन जन सुविधा एवं सुरक्षा कैम्प स्थापित करने हेतु प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में योगदान दी गई।
ऽ नक्सल उन्मूलन के अंतर्गत 50 से अधिक नक्सली शव बरामद करने हेतु लॉजिस्टिक सहयोग प्रदान करने हेतु प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में योगदान दी गई।
ऽ नक्सल उन्मूलन हेतु प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से नारायणपुर पुलिस की उपलब्धियों को प्रचारित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2025-26 आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म में ऑनबोर्डिंग एवं प्रशिक्षण कराने में महत्वपूर्ण योगदान - जिला पुलिस बल, नारायणपुर में तैनाती के दौरान जिला के शतप्रतिशत पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को आरक्षक-डीएसएफ श्री कमलेश साहू के सहयोग से आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म में ऑनबोर्डिंग कराने तथा रक्षित केन्द्र में तैनात समस्त पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को अपने सहायक/महिला आरक्षक के सहयोग से आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफार्म के माध्यम से तीनों नवीन कानून में प्रशिक्षण कराने हेतु प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया गया।

2025 आरक्षक जीडी संवर्ग भर्ती हेतु विशेष कोचिंग के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान - परीयना प्रशिक्षण के अंतर्गत आरक्षक जीडी संवर्ग भर्ती के अंतर्गत लिखित परीक्षा की तैयारी के लिए रक्षित केन्द्र, नारायणपुर में विशेष कोचिंग का आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।

2026 - स्थानांतरण पर व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में कार्यभार ग्रहण पुलिस मुख्यालय, रायपुर के आदेशानुसार जिला पुलिस नारायणपुर से व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, माना-रायपुर में कार्यभार ग्रहण किया।

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