पुलिस को मिली बडी सफलता- नक्सलियों का नेशनल को-आर्डिनेटर नक्का वेंकेट राव हुआ गिरफतार

पुलिस को मिली बडी सफलता- नक्सलियों का नेशनल को-आर्डिनेटर नक्का वेंकेट राव हुआ गिरफतार
गिरफतार नक्सली भारत सरकार के केन्द्रीय उपक्रम नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीटयूट, हैदराबाद में सीनियर टेक्नीकल आफिसर के पद पर कार्यरत है तथा विस्फोटक विशेषज्ञ है।
पत्नी हेमललिता आंध्रप्रदेश में एडव्होकेट है तथा उपकार नामक एनजीओ संस्था चलाती है।
श्री जी. पी. सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज, दुर्ग ने आज दिनांक 23.12.2018 को रेंज कार्यालय में ली गई प्रेस कान्फ्रेस में मीडिया को बताया कि काफी लंबे समय से जंगल के अंदर नक्सलियों को आम्र्स-एम्युनेशन एवं लाजिस्टिक सपोर्ट, नक्सलियों के अंडर ग्राउण्ड शहरी नेटवर्क द्वारा सप्लाई करने की जानकरी प्राप्त हो रही थी। आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा भी शहरी नेटवर्क के माध्यम से नक्सलियों को मदद मिलने का अहम खुलासा किया गया था। अतएव शहरी नेटवर्क के संबंध में जानकारी संकलित करने का काम लंबे समय से लगातार चल रहा था तथा विगत एक माह से अनेक महत्वपूर्ण सूचनायें पुलिस को मिल रही थी। इसी दौरान यह सूचना मिली थी कि नक्सलियों के नेशनल को-आर्डिनेटर, जिसे नक्सली मूर्ति के नाम से पुकारते हैं, एमएमसी जोन के सेन्ट्रल कमेटी मेम्बर दीपक तेलतुमड़े को सामान पहुंचाने के लिये आने वाला है। चूंकि नेशनल को-आर्डिनेटर के हमेशा मोटर साइकिल से मूव्हमेंट करने की सूचना थी, अतएव संवेदनशील क्षेत्रों में कई दिनों से एमसीपी लगाकर, लगातार चेकिंग कराई जा रही थी। इसी के तहत दिनांक 23.12.2018 को जिला राजनांदगांव के थाना बागनदी क्षेत्रान्तर्गत चाबुकनाला मोड़ के पास बागनदी पुलिस द्वारा लगाये गये एमसीपी में चेकिंग के दौरान नक्का वेंकट राव उर्फ मूर्ति वेंकटराव वल्द साहेब वेंकटराव, उम्र 54 वर्ष, निवासी ग्राम व थाना कुत्तापेठ, जिला ईस्ट गोदावरी, आंध्रप्रदेश को गिरफतार किया गया है।
गिरफतार नक्सली के कब्जे से 08 नग नक्सली साहित्य एवं कई दस्तावेज, 01 नग मोबाईल, 02 नग मैनपेक सेट मय चार्जर (HTRF) एवं 23 नग डेटोनेटर जप्त किया गया है। पूछताछ में इसने बताया है कि वह नक्सलियों के शहरी नेटवर्क में काम करता है तथा राजनांदगांव जिले में किसी बडी वारदात को अंजाम देने के लिये डेटोनेटर की सप्लाई दीपक तेलतुमडे़ को करने के लिये आया है। इस संबंध में थाना बागनदी में अपराध क्रमांक 51/18 धारा 4,5 विस्फो. अधि. 38, 39 विधि विरूद्ध क्रियाकलाप अधि. के तहत पंजीबद्ध किया गया है तथा गिरफतार नक्सली से पूछताछ जारी है।
श्री सिंह ने बताया कि गिरफतार नक्सली भारत सरकार के केन्द्रीय उपक्रम नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीटयूट, हैदराबाद में सीनियर टेक्नीकल आफिसर के पद पर कार्यरत है तथा विस्फोटक विशेषज्ञ है। यह वर्ष 1985 से रेडिकल छात्र आंदोलन आंध्रप्रदेश में सक्रिय रहकर माओवादी विचारधारा से प्रेरित हुआ है। वर्ष 2016 में टांडा एरिया के कौरूवा जंगल में सीसीएम दीपक, देवजी के साथ तथा दिसम्बर 2017 में भी टांडा एरिया के ही बागरझोला जंगल में दीपक के साथ इसकी बैठक हुई थी। नक्सल प्रभावित अन्य इलाकों में भी इसकी सक्रिय आमदरफ्त की जानकारी है, ये नक्सलियों के मध्य कोआर्डिनेट कर संदेश पहुंचाने के साथ-साथ गुरिल्ला जोन को लाजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराता है। यह नक्सली देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले किसान आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, दलित आंदोलन, मंडला-चुटका परमाणु परियोजना विरोध आंदोलन, एलगार परिषद (भीमा कोरेगांव), एसईजेड के विरोध में चलने वाले आंदोलन, विभिन्न स्थानों पर विस्थापन के खिलाफ होने वाले आंदोलन में सक्रिय भागीदारी कर आंदोलनों को भडकाने व स्थाईरूप देने का काम करता है।
इसकी पत्नी हेमललिता आंध्रप्रदेश में एडव्होकेट है तथा उपकार नामक एनजीओ संस्था चलाती है। गिरफतार नक्सली का छोटा भाई नारायण राव भी माओवादी विचारधारा से प्रभावित है तथा सिविल लिबर्टीज कमेटी तेलांगना राज्य का महासचिव है। पूछताछ में गिरफतार नक्सली ने खुलासा किया है कि उसके कब्जे से बरामद वायरलेस सेट को इसके भाई नारायण राव द्वारा ही इसे दिया गया है। स्पष्ट है कि इसका भाई नारायण राव भी नक्सली संगठन का सक्रिय सदस्य है। गौरतलब है कि गिरफतार नक्सली नक्का के ही दिशा निर्देशन में पेसा द्वारा विस्फोटकों का ट्रासंपोर्टेसन देश के विभिन्न हिस्सों में किया जाता है, इससे संबंधित समस्त पत्राचार पेसा के साथ इसी के द्वारा किया जाता रहा है। संभावना है कि इसके द्वारा नक्सलियों को व्यापक पैमाने पर अवैध रूप से विस्फोटक सप्लाई की गई है, जिसका खुलासा आगे पूछताछ में हो सकता है। केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण उपक्रम में जिम्मेदार अधिकारी होने से इसके उपर किसी तरह के शक की कोई गुंजाइश न होने से, इसने अपने पद एवं हैसियत का गलत इस्तेमाल करते हुए camouflage रहकर, नक्सलियों को आम्र्स-एम्युनेशन एवं लाजिस्टिक मदद करते आ रहा है।
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मै थक जाउं तो भारत रूक जाएगी, मै हार जाउं तो स्वाभिमान हार जाएगी - Poem

मै थक जाउं तो भारत रूक जाएगी, मै हार जाउं तो स्वाभिमान हार जाएगी

मै थक जाउं तो भारत रूक जाएगी, मै हार जाउं तो स्वाभिमान हार जाएगी
रूक कर एक कहानी सुनाती हूं, हकीकत की बात बताती हूं

महिला सेना खडा करने का बीडा एक उठाती हूं
‘मणिकर्णिका’ से ’लक्ष्मीबाई’ बनने की राज बताती हूं
हारना जो सीखी नही, उस चुलबुल ’मनु’ की गौरव गाती हूं
जिसने हमें आजादी दी, उसकी आहूति के किस्से सुनाती हूं
रूक कर एक कहानी सुनाती हूं, हकीकत की बात बताती हूं

लॉर्ड डलहौजी के हडप नीति का विरोध कर जाती हूं
स्वयंसेवक सेना बनाकर महिलाओं को युद्ध सिखाती हूं
हमषक्ल ’झलकारी बाई’ को सेनाध्यक्ष बनाती हूं
ओरछा और दतिया के राजाओं को धूल चटाती हूं
रूक कर एक कहानी सुनाती हूं, हकीकत की बात बताती हूं

स्वतंत्र भारत का सपने हर आखों को दिखलाती हूं
‘तात्या टोपे‘ से मिलकर ग्वालियर के किले में कब्जा कर जाती हूं
बारंबार फिरंगियों को गुमराह कर चालाकी दिखाती हूं
कभी गोरों से नही हारी, ऐसी नारी की पाठ पढाती हूं
रूक कर एक कहानी सुनाती हूं, हकीकत की बात बताती हूं

भारतीय स्वतंत्रता का अध्याय नया बनाती हूं
अंग्रजो को भारत से भगाने, एक समाज नया बनाती हूं
लक्ष्य प्राप्ति में सारंगी, पवन, और बादल को हमराही बनाती हूं
कदम-कदम चलती रही मैं, नारीषक्ति की याद दिलाती हूं
रूक कर एक कहानी सुनाती हूं, हकीकत की बात बताती हूं

मै थक जाउं तो भारत रूक जाएगी, मै हार जाउं तो स्वाभिमान हार जाएगी
रूक कर एक कहानी सुनाती हूं, हकीकत की बात बताती हूं


Poet Shri HP Joshi
Dated 17 Dec 2018

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पत्नी ज़हर और अमृत का एक विशिष्ट मिश्रण - शोध

पत्नी ज़हर और अमृत का एक विशिष्ट मिश्रण

जानें, क्या है लॉ ऑफ बेजा कब्जा

पत्नी के संबंध में आपने अरबों-खरबों जोक्स सुना होगा, जो सत्य के नज़दीक या सत्य हो सकता है। परंतु आप पत्नी के तत्वरूप से आप परिचित नही होंगे। इसलिए आपको इस रिसर्च को अंत तक जरूर पढ़ना चाहिए। विश्वप्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक एवम दार्शनिक हुलेश्वर जोशी व उसके टीम ने अपने 34 वर्षों के निरंतर शोध से पता लगाया है कि *पत्नी छठवें तत्व के रूप में विकसित हो रही है।* यदि मनुष्य इसकी अनिवार्यता के विकल्प को नही अपनाया तो यह तेईसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक पूर्णरूप से छठवें तत्व के रूप में स्वयं को स्थापित कर लेगी।

एक अन्य शोध में उन्होंने पाया है कि *पत्नी ज़हर और अमृत का एक विशिष्ट प्रकार का मिश्रण है।* जो एक ओर आपको खुशियां देती है आपके सफलता और सुविधाओं के लिए समर्पित रहती हैं तो दूसरी ओर आपके ऊपर बेजा कब्जा कर लेती है किसी भी शर्त में अपने स्वयं एवम अपने गर्भ से जन्मे बच्चों तथा कतिपय मामलों में अपने भाई-बहन के अलावा किसी भी अन्य के लिए उपयोगी नही रहने नही देती। पत्नी स्वतः आपके लिए इतनी कल्याणकारी होगी कि आपको ऐसा लगने लगेगा कि आपके जीवन के लिए केवल वही अनिवार्य है बाकि कुछ और नही, जबकि *लॉ ऑफ बेजा कब्जा*  के तहत वह आपको अन्य के लिए कल्याणकारी रहने नही देगी, आपकी व्यक्तिगत इच्छा और जीवन को समाप्त कर देगी अर्थात *लॉ ऑफ बेजा कब्जा के पालन करने के कारण ही पत्नी ज़हर के समान है।*

Enjoy with Wife, it's a Joke.
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’’सिटीजन काॅप’’ मोबाईल एप्प पुलिस थाना का ही डिजिटल स्वरूप है - श्री जी.पी.सिंह, आईजी दुर्ग

’’सिटीजन काॅप’’ मोबाईल एप्प पुलिस थाना का ही डिजिटल स्वरूप है - श्री जी.पी.सिंह, आईजी दुर्ग

श्री जी.पी. सिंह, दुर्ग आईजी ने लौटाये 25 नग मोबाईल फोन 

सिटीजन काॅप ने लगभग 16 लाख, 92 हजार रूपये के मोबाईल फोन रिकवर किये


श्री जी.पी. सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज, दुर्ग के निर्देशन में संचालित सिटीजन काॅप सेल द्वारा सिटीजन काॅप - मोबाईल एप्लीकेशन पर दर्ज मोबाईल फोन के गुम होने की शिकायतों पर कार्यवाही करते हुये 25 नग मोबाईल फोन रिकवर किया गया। श्री सिंह द्वारा इन 25 नग मोबाईल फोन को उनके मूल मालिको को आवश्यक दस्तावेज देखकर आज दिनांक 08/12/2018 को अपने कार्यालय में वापस सुपुर्द किया गया। गौरतलब है कि ये मोबाईल फोन दीगर राज्य जैसे मध्यप्रदेष के शहडोल, बालाघाट एवं महाराष्ट्र के गोंदिया से रिकवर किये गये है तथा कुछ मोबाईल फोन राज्य के रायपुर, बिलासपुर, मुंगेली, धमतरी, महासमुंद, पाटन, बेमेतरा, बालोद, गरियाबंद एवं राजनांदगांव से भी रिकवर किये गये हैं।

उल्लेखनीय है कि दुर्ग संभाग में सिटीजन काॅप - मोबाइल एप्लीकेशन के अपग्रेडेड वर्जन के साथ मार्च 2018 में लाॅंच किया गया था, तब से अभी तक सिटीजन काॅप के माध्यम से कुल 151 नग मोबाईल फोन बरामद कर संबंधित मोबाईल धारको को लौटाया जा चुका है। अब तक रिकवर किये गये सभी मोबाईल फोन की कीमत लगभग 16 लाख 92 हजार रूपये के करीब है।

गुम/चोरी हुए मोबाईल फोन वापस मिलने के कारण लोगों ने मोबाईल फोन वापस मिलने पर खुषी जाहिर करते हुए सिटीजन काॅप मोबाईल एप्प व रेंज पुलिस महानिरीक्षक के द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना की है। मो. फहीम खान अपने भाई मो. वसीम खान का मोबाईल ओप्पो एफ-7 वापस पाकर सिटीजन काॅप के कार्यषैली की सराहना करते हुए अपने फीडबैक में लिखा है ’सिटीजन काॅप एप्प छत्तीसगढ़ पुलिस की सराहनीय पहल है। यह एप्प हमारी सुरक्षा विषेषकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए अत्यंत कारगर है आवष्यकता पडने पर हम इनकी सहायता ले सकते हैं और भविष्य में होने वाले अपराध एवं अपराधियों पर रोक भी लगा सकते हैं। मेरे मोबाईल के गुम हो जाने पर मुझे अत्यंत मानसिक कष्ट हुआ था, जिसे आज आईजी दुर्ग द्वारा मुझे लौटाया गया। मै आईजी श्री सिंह और पुलिस प्रषासन का आभारी हूं।’’ 

श्री सिंह ने बताया किया है कि ’’सिटीजन काॅप’’ मोबाईल एप्प पुलिस थाना का एक डिजिटल स्वरूप है जिसका उपयोग करके आम नागरिकों अपनी समस्याएं/सूचनाएं पुलिस से साझा कर सकते हैं सबसे खास बात यह है एप्प के माध्यम से उपयोगकर्ता की पहचान गोपनीय रहती है। सिटीजन काॅप एप्प आम नागरिकों को यह सुविधा प्रदान करता है कि किसी भी गुम वस्तु की षिकायत घर बैठे एन्ड्रायड मोबाईल का उपयोग कर सिटीजन काॅप एप्प के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। संज्ञान में आया है कि आम नागरिक अपनी खोई हुई वस्तु जैसे मोबाईल फोन, लैपटाॅप, पासपोर्ट, बैंक पासबुक व अन्य आवष्यक दस्तावेज के गुम हो जाने पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिये पुलिस थाना एवं वरिष्ठ कार्यालयों का चक्कर लगाते हैं, जिससे उनका समय बरबाद होता है। 

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गुरू घासीदास जयंति कैसे मनाएं ?

गुरू घासीदास जयंति कैसे मनाएं ?

दूनिया का सबसे सर्वोच्च ज्ञान ’’मनखे-मनखे एक समान’’ का संदेश देने वाले परमपुज्यनीय गुरू घासीदास बाबा जी का जन्म 18 दिसम्बर सन् 1756 में ग्राम गिरौदपुरी, जिला रायपुर (वर्तमान जिला बलौदाबाजार) में हुआ था। उनके संदेशों एवं जनजागरूकता का ही परिणाम है कि आज मानव समुदाय यह स्वीकारने लगा है कि सभी मनुष्य एक समान हैं, कोई उच्च अथवा कोई नीच नही है, उनके जनआंदोलनों के प्रभाव से ही आज देश का बडा वर्ग शोषित होने से बच पाया है। गुरू घासीदास के जन्म के पूर्व मानव-मानव के बीच केवल असमानता, शोषण और अत्याचार जैसे ही संबंध थे।

गुरू घासीदास के जन्मदिवस को देशवासी गुरू घासीदास जयंति के रूप में बनाते हैं। हम संत समाज से आग्रह करते है कि संत समाज इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले। संतों ज्ञातव्य हो कि गुरू घासीदास की जयंती प्रत्येक वर्ष 18 दिसम्बर से प्रायः 31 दिसम्बर तक लगातार ही मनाया जाता है। कतिपय मामलों में इसके बाद भी लोग अपने आस्था के अनुरूप जयंति मनाते रहते है। इस संबंध में कुछ विशेष सुझाव मैं संत समाज शेयर करना चाहता हूँ:-

1 समाज द्वारा आयोजित जयंती कार्यक्रम में क्रमशः पदयात्रा, चैकपूजा, ध्वजारोहण, पंथी नृत्य, भंडारा व प्रसाद वितरण व रात्रिकाल में सतनाम भजन/सतनाम प्रवचन अथवा गुरु बाबा के जीवन पर आधारित लीला ही कराया जावे। किसी भी प्रकार से नाचा - गम्मत या सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से सतनामी संस्कृति को भ्रष्ट न किया जावे न ही अनैतिक नृत्य व गान कराया जावे। ऐसा करना पूर्णतः निंदनीय व गुरु बाबा का अपमान है।’

2 समय समय पर साहू, यादव, मरार व गोंड़ समाज के मित्रों द्वारा आपत्ति दर्ज कराया गया है कि सतनामी संतों द्वारा बाबा जी पर एकाधिकार जमाते हुए हमें बाबाजी के जयंती में आमंत्रित नही किया जाता है न जयंती कराने के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में बुलाया जाता है और न तो जयंती कार्यक्रम कराने पर योगदान (चंदा, इत्यादि) लिया जाता। बाबा जी तो लोककल्याणकारी हैं उनकी पूजा समस्त मानव समाज के द्वारा की जाती है, इसलिए कुछ लोग बिना पूछे ही जयंती कार्यक्रम में भाग लेकर बाबा जी का पूजन करते हैं तो कुछ बाबा जी के आशीष नही ले पाते और समाज में यह भ्रांति भी फॅल रही है कि गुरू घासीदासबाबा केवल सतनामियों के गुरू है, इसलिए इस संबंध में अमल करने की जरूरत है।

इसलिए संत समाज से निवेदन है कि बाबा जी के जयंती पर कमसेकम उपरोक्त समाज को जरूर शामिल करें। बाबाजी के पूजा करने का सबको अधिकार है, न कि केवल सतनामी को। ’यदि हम नेता, मंत्री व कुछ प्रभावशाली लोगो को आमंत्रित करते हैं तो उनके समाज के सभी लोगो को क्यों नही? मनखे मनखे एक समान’

ऐसे लोगों को किसी भी शर्त में समाजिक आयोजन में माईक न दिया जावे, जो सतनामी समाज त्याग दिए हों। वे सतनामियों को भड़काकर धर्मपरिवर्तन कराने और दीगर समाज से लड़ाने का ही प्रयास करते हैं।


हुलेश्वर जोशी 
कार्यकारिणी सदस्य, 
सतनामी एवम सतनाम धर्म विकास परिषद्, 
रायपुर (छत्तीसगढ़)
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आईजी दुर्ग ने ली रेंज के पुलिस अधीक्षकों की मीटिंग-मतगणना के लिये पुख्ता पुलिस बंदोबस्त करने तथा लंबित प्रकरणों के निकाल के दिये निर्देश

आईजी दुर्ग ने ली रेंज के पुलिस अधीक्षकों की मीटिंग-मतगणना के लिये पुख्ता पुलिस बंदोबस्त करने तथा लंबित प्रकरणों के निकाल के दिये निर्देश

श्री जी. पी. सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज द्वारा आज दिनांक 05.12.2018 को रेंज कार्यालय, दुर्ग में रेंज के पुलिस अधीक्षकों की क्राइम मीटिंग ली गई। मीटिंग में सभी पुलिस अधीक्षकगण एवं अन्य राजपत्रित अधिकारी उपस्थित रहे। मीटिंग में सभी जिलों के आपराधिक स्थिति तथा दिनांक 11.12.2018 को मतगणना स्थल पर लगाये जाने वाले पुलिस बंदोबस्त की समीक्षा की गई। 

श्री सिंह द्वारा मतगणना स्थल पर पुलिस बंदोबस्त लगाने के संबंध में पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया  कि:-
दिनांक 11.12.2018 को मतगणना के दौरान मतगणना स्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में एक्सेस कंट्रोल के सिद्धान्त का पालन करते हुए zero error पुलिस बंदोबस्त लगाया जावे। धारा 144 का पालन सुनिश्चित किया जावे। मतगणना स्थल पर जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से यथोचित पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जावे। पत्रकारों, सुरक्षा बलों, प्रत्याशियों एवं राजनीतिक दलों के एजेण्टों के मतगणना स्थल पर प्रवेश के लिये स्पेसिफिक व्यवस्था हो, अलग-अलग स्थलों के लिये अलग-अलग रंग के प्रवेशपत्रों की व्यवस्था रखी जावे, ताकि किसी तरह की भ्रांति न हो। पार्किंग के लिये भी प्रवेशपत्र की व्यवस्था रखी जावे। मतगणना स्थल के आसपास प्रतिबंधित स्थलों पर अनाधिकृत व्यक्तियों को न तो प्रवेश दिया जावे न ही आसपास व मार्ग में कहीं पर भीड एकत्रित होने दी जावे। सुनिश्चित किया जावे कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देशों के अनुरूप प्रतिबंधित वस्तुयें मतगणना स्थल के अंदर न ले जाया जा सके। इसके लिये जिला प्रशासन, राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों व एजेण्टों के साथ संयुक्त मीटिंग लेकर पूर्व से सुनिश्चित कर लिया जावे। मीटिंग में पुलिस द्वारा की जा रही सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी दी जावे, ताकि सब को व्यवस्था की जानकारी रहे तथा स्टेक होल्डरों के कार्य में किसी तरह की बाधा न हो। पुलिस व्यवस्था एवं प्रतिबंधित वस्तुओं के संबंध में भी मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार प्रसार कराया जावे। विजयी प्रत्याशियों के जुलूस, शहर की कानून व्यवस्था एवं आपात स्थितियों के लिये भी पृथक से व्यवस्था रखी जावे, ताकि शहर में अथा मतगणना स्थल मंे किसी तरह की अव्यवस्था न हो। सुनिश्चित किया जावे कि आदर्श आचरण संहिता का पालन करते हुए विधिवत अनुमति के उपरांत ही जुलूस निकाली जावे, इस बाबत् मीटिंग में प्रत्याशियों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया जावे कि वैध अनुमति के बिना जुलूस निकाले जाने की स्थिति में किस तरह की वैधानिक कार्यवाही हो सकती है। 

रेंज पुलिस महानिरीक्षक द्वारा रेंज के जिलों में लंबित अपराधों, चालानों एवं मर्ग आदि की समीक्षा कर निर्देशित किया गया कि:-
जिला दुर्ग में लंबित 1413, राजनांदगांव में लंबित 1172, कबीरधाम में लंबित 288, बेमेतरा में लंबित 423 तथा बालोद मंे लंबित 452 इस प्रकार रेंज स्तर पर कुल लंबित 3748 अपराधो का विशेष अभियान चलाकर 15 दिवस के भीतर निकाल सुनिश्चित किया जावे। इस हेतु संबंधित पुलिस अधीक्षक अपने जिले के संबंधित पर्यवेक्षणीय अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों की मीटिंग लेकर निकाल हेतु समुचित पहल करें तथा सुनिश्चित करें कि वर्ष की समाप्ति पर थानों में 10 प्रतिशत से अधिक प्रकरण लंबित न हो। इसी तरह लंबित चालानों तथा मर्गों का भी 15 दिवस के भीतर निकाल कराया जावे। 
एफएसएल में लंबित प्रकरणों की सूची एफएसएल अधिकारी को उपलब्ध कराकर, लंबित प्रकरणों में प्राथमिकता से रिपोर्ट प्राप्त कर माननीय न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का निराकरण कराया जावे।
थाना प्रभारीगण थाने में अधिक से अधिक समय तक उपस्थित रहें। प्रातः समय पर थाना आयें और प्रार्थियों को सुनें। उनकी रिपोर्टों पर सार्थक कार्यवाही करावें। थानों में आये आवेदकों के साथ सदव्यवहार हो।  किसी भी पीडित को थाना सीमा के नाम पर इधर-उधर भागना न पडे अर्थात  बार्डरलेस पुलिसिंग कराई जावे, ताकि प्रार्थी अपने निकट के थाने में जाकर अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सके, अन्य थाना क्षेत्र का मामला होने की स्थिति में जीरो पर अपराध कायम कर प्रारंभिक जांच उपरांत डायरी संबंधित थाने को भेजी जावे।
पीड़ित पक्ष को जिन प्रकरणों में शासन स्तर पर राहत राशि अथवा मुआवजा देने का प्रावधान है, वैसे प्रकरएाों में पीडित पक्ष को जानकारी देकर औपचारिकताओं की पूर्ति कराकर मुआवजा प्रकरण समय पर तैयार कर भिजवायें, ताकि पीडितो कों समय पर राहत राशि प्राप्त हो सके।
पुलिस की व्हिजिबिलिटी में सुधार लायें। सघन एवं प्रभावी गश्त/पेट्रोलिंग कराई जावे।स्वयं थाना प्रभारी अपने स्टाफ के साथ प्रतिदिन शाम को पैदल अपने क्षेत्र के भ्रमण पर निकलें, अडडेबाजी एवं मजमेबाजी करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही करें। पैदल गश्त के दौरान 
समंस/वारंटो, विशेषकर स्थाई वारंटों की तामीली में सुधार लायें। वारंटों का वर्गीकरण किया जाकर गंभीर प्रकरणों के वारंटों की तामीली प्राथमिकता से करायी जावे। 
नशे के आदी नाबालिग बच्चों के द्वारा अपराध करने की प्रवृत्ति समाज के लिये घातक है, अतएव नशे के सौदागरों के विरूद्ध सार्थक कार्यवाही की आवश्यकता है। अवैध शराब विक्रय, गांजा-ड्रग्स तस्करी, कबाडी, जुंआ-सटटा एवं संगठित देह व्यापार के विरूद्ध सघन अभियान चलायें, गुण्डों के विरूद्ध जीरो टालरेंस की नीति के तहत कार्य करें, अर्थात सूचीबद्ध गुण्डों के विरूद्ध अदम चेक रिपोर्ट होने पर कम से कम प्रभावी प्रतिबंधात्मक कार्यवाही अवश्य हो। धारा 110 जाफौ, जिला बदर एवं रासुका के तहत बदमाशों के विरूद्ध सख्त एवं प्रभावी कार्यवाही करें।
शराब दुकानों के आसपास संचालित अवैध अहाते, अवैध हुक्का बार एवं रेव पार्टी के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जावे। अवैध हुक्का बार एवं रेव पार्टी में नाबालिग बच्चों को भी शामिल कर नशीले पदार्थो का सेवन कराया जाता है तथा शराब दुकानों में भी शराब खरीदने के लिये नाबालिग बच्चों का उपयोग किया जाता है। 
थाना उतई में पंजीबद्ध अपराध का उदाहरण देते हुए श्री सिंह ने पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि विस्फोटकों के दुरूपयोग की रोकथाम के लिये विस्फोटक अधिनियमों एवं विस्फोटक नियमों का पालन कराया जाना आवश्यक है। इसके लिये थाना प्रभारियोें को सजग किया जावे। थाना प्रभारीगण अपने-अपने क्षेत्र में लायसेंसी विस्फोटक भडारो की जांच कर सुनिश्चित करें कि विस्फोटकों का वैध एवं सुरक्षित भडारण हो। विस्फोट प्रशिक्षितों की सूची थाने में उपलब्ध हो। समय-समय पर जांच कराई जावे एवं विस्फोट करने में विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की सूची थाने में रखी जावे, ताकि इन पर समुचित निगाह रखी जावे तथा विस्फोटकों तक असमाजिक तत्वों की पहुंच न हो पाये।
सभी पर्यवेक्षणीय अधिकारी सुनिश्चित करें कि आपराधिक प्रकरणों की कार्बन केस डायरी संधारित हो, ताकि आवश्यकता पडने पर उसका उपयोग किया जा सके।
अधिकारियों/कर्मचारियों की दक्षता बढाने के लिये जिला स्तर पर तथा रेंज स्तर पर विभिन्न विषयों पर सीमित अवधि के प्रशिक्षण आयोजित करायें। विशेषकर विस्फोटक अधिनियम के तहत की जाने वाली कार्यवाहियों के संबंध में पेसा के सहयोग से विवेचकों का प्रशिक्षण अतिशीघ्र रेंज स्तर पर कराया जावे। 
निजी सुरक्षा एजेंसी में कार्यरत कर्मचारियों की भी संलिप्तता अनेक आपराधिक प्रकरणों में पाया गया है। अतएव निजी सुरक्षा एजेंसियों में कार्यरत व्यक्तियों के चरित्र सत्यापन एवं उनके आम्र्स लायसेंस की जांच/तसदीकी सुनिश्चित की जावे।

रेंज पुलिस महानिरीक्षक द्वारा जिलों में लंबित विभागीय जांच एवं शिकायतों के निराकरण की भी समीक्षा की गई एवं निर्देशित किया गया कि:-
वर्ष 2017 एवं उससे पूर्व के लंबित शिकायतों का निकाल 15 दिवस के भीतर तथा वर्ष 2018 के लंबित शिकायतों का 30 दिवस की समयावधि में निकाल सुनिश्चित किया जावे।
6 माह से उपर अवधि के लंबित विभागीय जांचों का भी निकाल एक माह की समयावधि में कराया जावे।

श्री सिंह द्वारा पुलिस अधीक्षकों को जवानों एवं पुलिस परिवारों के वेलफेयर की ओर भी समुचित ध्यान देने का निर्देश दिया गया:-
वेलफेयर के तहत पुलिस लाईन, दुर्ग में एक उत्तम जिम स्थापित किया गया है। जिसका पुलिस परिवार के लगभग 100 लोग प्रतिदिन लाभ ले रहे हैं। इसी तरह का जिम सभी जिला पुलिस लाईनों में स्थापित कराया जावे, जिसके लिए सभी पुलिस अधीक्षकों को बजट उपलब्ध कराया जा चुका है।
परोपकार निधि के तहत मृत कर्मचारी के परिजनों को 24 घण्टे के भीतर सहायता राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जिसका पालन किया जावे। किसी भी मृत अथवा शहीद कर्मचारी के परिजनों को किसी तरह की कठिनाई न हो इसका ध्यान रखें।
जहां पर पुलिस पेट्रोल पम्प संचालित नहीं है, उसके लिये प्रस्ताव भेजकर स्वीकृति लेकर पुलिस पेट्रोल पंप संचालित किया जावे।
संकल्प हास्पिटल रायपुर पुलिस परिवारों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करना चाहती है, अतएव स्थल एवं दिनांक निर्धारित कर सूचित करें। 
रेंज स्तर पर अलग-अलग खेलो के लिये खिलाडियों की उपलब्धता अनुसार अलग-अलग टीम गठित की जावे। प्रत्येक टीम के लिये अलग-अलग पुलिस अधीक्षकों को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा, जो अपनी टीम के लिये संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। 

श्री सिंह द्वारा जिलों को उपलब्ध कराये गये बजट की भी समीक्षा की गई एवं निर्देशित किया गया कि:- 
प्राप्त बजट के समानुपातिक उपयोग के लिये निर्देशित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के समस्त देयकों का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जावे, किसी भी स्थिति में इस वित्तीय वर्ष के बिलों को अगले वित्तीय वर्ष में भुगतान के लिये लंबित न रखा जावे। यदि अतिरिक्त बजट की आवश्यकता हो तो पर्याप्त समय पूर्व मांग पत्र भेजें। जिस बजट का उपयोग संभव न हो उसे समय पर समर्पित करें, ताकि अन्य जिलों को आवश्यकतानुसार बजट आबंटित हो सके।

श्री सिंह द्वारा पुलिस अधीक्षकों को सिटीजन काप एप की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा सिटीजन काप एप के जिला दुर्ग में लंबित 277, कबीरधाम में लंबित 22, राजनांदगांव में लंबित 12, जिला बालोद में लंबित 21 तथा बेमेतरा में लंबित 38 कुल 370 शिकायतों का त्वरित निराकरण कराने के लिये निर्देशित किया गया।

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