केन्द्रीय शासन के भ्रष्ट अधिकारी पर एसीबी की कार्यवाही - दिनांक 30.04.2020

केन्द्रीय शासन के भ्रष्ट अधिकारी पर एसीबी की कार्यवाही 
दिनांक 30.04.2020
आवेदक श्री नीरज कुमार ठाकुर पिता श्री इन्द्र बहादूर सिंह, उम्र 28, वर्ष, पता-मकान नंबर-51/1, कैलाशपुरी चैंक, वार्ड नंबर-56, बुढ़ा तालाब रायपुर, जिला-रायपुर (छ0ग0) ने दिनांक 06.04.2020 को एक लिखित शिकायत पत्र पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो, रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया कि संदीप राय बिलासपुर निवासी ने रेल्वे काॅलोनी सफाई का कार्य टेंडर पर लिया गया है। संदीप राय का फर्म श्री सांई छाया वेयर हाऊस बिलासपुर का प्रोपाईटर है जिसके कार्य करने के लिये आवेदक को अधिकार पत्र एवं मुख्तयार दिया गया है। 

आवेदक ने माह जुलाई से दिसम्बर तक का किये कार्य का बिल 15,96,000/-रूपये जमा किया है। माह जनवरी 2020 से मार्च 2020 तक के कार्य भुगतान के लिये शुंभाशीष सरकार, पिता स्व0 गोपाल चन्द्र सरकार उम्र-54 वर्ष, पद-मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, खारून रेल विहार कालोनी, फाफाड़ीह चैक, दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे (एस0ई0सी0आर0) रायपुर द्वारा 8 प्रतिशत के हिसाब से रिश्वत की मांग की गई है। कार्य के शुरू से ही भुगतान हेतु काफी प्रताड़ित किया गया है, और लगतार बेखौफ होकर रेल्वे के अधिकारी द्वारा प्रार्थी से रिश्वत मांगी जा रही है और न देने पर उसका भुगतान रोका जाता है। 

प्रार्थी द्वारा रिश्वत की प्रताड़ना से तंग आकर एसीबी कार्यालय में आकर पुलिस अधीक्षक रायपुर को अपनी व्यथा बताई गयी। जिस पर संज्ञान लेते हुये शिकायत का सत्यापन कराया गया । जिसमें पाया गया कि आरोपी अधिकारी द्वारा प्रार्थी से 1,20,000/- रूपये की रिश्वत मांगी है। जिसे प्रार्थी को तीन किस्तों में देना है। सत्यापन उपरांत ट्रेप टीम का गठन किया गया एवं विधिवत कार्यवाही उपरांत आज दिनांक 30.04.2020 को अनावेदक ने आवेदक से प्रथम किस्त के रूप में 30,000/-रूपये रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों पकड़ा गया । 

एसीबी छत्तीसगढ़ द्वारा केन्द्र सरकार के भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने का यह दूसरा मामला है। 

आरोपी का फोटो
























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कोरोना संक्रमण से बचाव आवश्यक क्यों, कितना खतरनाक है कोरोना, कोरोना के उपाय क्या-क्या हैं और लॉक डाउन में क्या करें : HP Joshi

कोरोना संक्रमण से बचाव आवश्यक क्यों, कितना खतरनाक है कोरोनाकोरोना के उपाय क्या-क्या हैं और लॉक डाउन में क्या करें : HP Joshi

आज महामारी कोरोना के संक्रमण से लगभग पूरी दुनिया प्रभावित है, संसार के सारे देश कोरोना से लड़ाई लड़ने की अथक प्रयास कर रहे हैं। सारे विश्व के वैज्ञानिक, चिकित्सक, फार्मासिस्ट, पैथोलोजिस्ट, सरकार, सेना, सशस्त्रबल और पुलिस पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पित भाव से अपनी पूरी ताकत कोरोना से लड़ाई में झोंक रहे हैं। इसमें समाजसेवी संगठन और दानदाताओं का भी अच्छा योगदान है जो जरूरतमंद लोगों के आवश्यता को पूरा करने में बिना व्यक्तिगत स्वार्थ के लगे हुए हैं।

सरकारें आम नागरिकों से उनके और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए केवल एक ही सहयोग चाह रहे हैं कि वे अपने घरों में ही रहें, अत्यंत आवश्यक हो तभी आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए घर से निकलें। अर्थात जब घर से निकलें तो मास्क, रुमाल अथवा गमछे से मुह और नाक को ढकें, हाथों में सेनेटाइजर लगाएं, किसी भी शर्त में दूसरे व्यक्ति से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष फिजिकल संपर्क से बचें। यदि आप अधिक समय के लिए घर से निकल रहे हों तो सेनेटाइजर अपने जेब में ही रख लें और बार बार सेनेटाइजर से हाथ धोएं; व्यर्थ ही किसी भी वस्तु को स्पर्श करने से बचें। क्योंकि यही उपाय आपको और आपके परिवार को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकते हैं। हालांकि ऐसा कोई शोध सामने नही आया है जिसमें यह बोला गया हो कि पशु पक्षियों से भी कोरोना संकमण का फैलाव हो सकता है, इसके बावजूद आपको एहतियात के रूप में इनसे भी फिजिकल डिस्टेंस बनाने की जरूरत है; क्या पता आप जिस पशु पक्षियों को छू रहे हैं वह किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो।

अभी तक ज्ञात रिसर्च के अनुसार "कोरोना संक्रमण का फैलाव हवा से नहीं होता।" यह मानवता की जीत के लिए अत्यंत सकारात्मक है इसलिए इसके संक्रमण पर आसानी से रोक लगाया जा सकता है। केवल जरूरत है तो सरकारों के दिशा निर्देश का पालन करते हुए फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धान्तों का पालन करने की।

एक वेबसाइट में संकलित जानकारी के अनुसार आज 16/4 के 7 बजे तक दुनियाभर के लगभग 20 लाख लोग कोरोना के चपेट में आ चुके हैं, जिसमें से 1.34 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है; वहीं लगभग 5.10 लाख लोग उपचार के बाद स्वस्थ्य हो चुके हैं। ये आंकड़े हमें गहराई से सोचने और सुरक्षित रहने को मजबूर करती है। इसलिए आपसे अनुरोध है सरकार के दिशा निर्देश का पालन करें और घर मे ही सुरक्षित रहें। यदि सरकार के दिशा निर्देश का पालन नही किया जाता है, यदि फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धांत और सरकार द्वारा सुरक्षा मापदंड का उल्लंघन किया जाता है तो वह दिन दूर नही जब सन 1346-1353 की "प्लेग" से भी खतरनाक परिणाम भुगतने के लिए हम मजबूर होंगे; प्राप्त जानकारी के अनुसार महामारी प्लेग, मानवता को 7साल तक समाप्त करने का प्रयास करते हुए दुनियाभर से लगभग 7 से 20 करोड़ लोगों को मौत के मुह में ढकेल दी थी। दूसरी सबसे बड़ी महामारी थी "स्पेनिश फ्लू" जो लगभग 1918-1920 में आई थी, जो 3साल में अपने साथ 5करोड़ लोगों को मार डाली थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बहुत जल्द ही कोरोना का टीका खोज लिया जाएगा, तो भी टेस्टिंग, निर्माण और टीकाकरण करने में साल भर से कम नहीं लगेगा।

आज जरूरत है तो केवल:-
1- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए रखने की।
2- लक्षण दिखाई देने पर तत्काल एहतियात बरतने और उपचार के लिए कोरोना अस्पतालों जाने की।
3- न्यूनतम आवश्यक वस्तुओं का उपयोग करते हुए घर में ही रहने की।
4- प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष फिजिकल डिस्टेंस बनाने की।
5- यदि किसी अत्यावश्यक काम से बाहर निकलना पड़े तो मास्क, रुमाल या गमछे से नाक और मुह को ढकें, हाथ में सेनेटाइजर लगाएं। अधिक समय तक यदि आपको घर से बाहर रहने की जरूरत है तो सेनेटाइजर अपने जेब में रखें और समय समय में लगाते रहें।
6- पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन पर रोक लगाएं।
7- केवल सरकार के दिशा निर्देश पर ध्यान दें। अन्य स्त्रोत से प्राप्त जानकारी अफ़वाह हो सकती है, इसलिए इससे बचें; क्योंकि अफ़वाह हमेशा घातक होता है।
8- कोरोना के संबंध में सोशल मीडिया अथवा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त जानकारी को शेयर करने से बचें; यदि आपके पास पर्याप्त कारण हो कि यह जानकारी सरकार द्वारा दी गई है तभी अन्य व्यक्ति को शेयर करें।
9- आपसे निवेदन है कि यदि आप सक्षम हों तो सरकार के रिलीफ फण्ड में दान करें अथवा अपने आसपास के जरूरत मंदों की सहायता करें; यदि आप मकान मालिक हैं तो किराएदार को किराए के लिए परेशान न करें, यदि आप सक्षम दुकानदार हैं तो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पुराने उधारी चुकाने के लिए मजबूर न करें बल्कि जरूरत के आधार पर कम से कम अतिआवश्यक सामग्री उन्हें उधारी भी दें।
10- लॉक डाउन के दौरान समय का सदुपयोग करें, पूरे परिवार मिलकर चर्चा करें, अपने अनुभव शेयर करें, Books पढ़ें, Online माध्यम से कुछ सीखें, शिक्षा ग्रहण करें।
11- शिक्षकों और विशेषज्ञों से अनुरोध है कि वे यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव इत्यादि के माध्यम से अपने स्टूडेंट्स के लिए काम करते रहें। छत्तीसगढ़ के शिक्षक सरकारी वेबसाइट CGSchool.in में अपना योगदान दें।
12- क्लास 1 से 12 के स्टूडेंट्स यूट्यूब में Bodhaguru चैनल के माध्यम से अपना पढ़ाई जारी रखें, छत्तीसगढ़ के स्टूडेंट्स cgschool में जाकर भी अपना पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
13- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी अनेकों यूट्यूब चैनल हैं जिसके माध्यम से आप अपना तैयारी जारी रख सकते हैं।
14- संविधान और केंद्रीय व राज्य सरकार द्वारा लागू अधिनियम और नियमों का अध्ययन करें; आप चाहें तो साहित्य भी पढ़ सकते हैं।
15- स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए पूरे परिवार मिकलर घर अथवा आंगन में ही योग और व्यायाम करें; ऐसा न भी करें तो आंगन, छत अथवा बालकनी में जाकर शरीर को धूप जरूर दें।
16- आज इतने बड़े संकट के बावजूद जो आपके सुरक्षा में लगे हैं, अर्थात चिकित्साकर्मी, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिसकर्मी, किसान और वैज्ञानिक यही सही मायने में ईश्वर हैं इनका आजीवन सम्मान करने का संकल्प लें।
17- सरकार सदैव कल्याणकारी होती है इसे स्वीकार करें और हैसियत के अनुसार सरकार का सहयोग करें।
18- मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा अतिरिक्त्त चीजों के उपयोग में कमी लाने का संकल्प लें।
19- स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल, भोजन, साफ सुथरे कपड़े और आवास, दाल चावल सब्जी रोटी जैसे भोज्य पदार्थ, चिकित्सालय और चिकित्साकर्मी, स्कूल कॉलेज और शिक्षक, वैज्ञानिक, विद्युत और जल आपूर्ति में लगे लोग, वैज्ञानिक, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, सरकार और समाजसेवी संगठन, इत्यादि आवश्यक हैं।
20- मानवता सर्वोपरि है। यदि जाति, वर्ण, धर्म, सीमा और धार्मिक स्थल यदि मानवता के खिलाफ हो जाएं तो इसका त्याग करें।
21- घर में रहें, जिंदा रहें
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लॉक डाउन स्पेशल पनीर की खीर (रेसिपी) - HPJoshi

लॉक डाउन स्पेशल पनीर की खीर (रेसिपी) - HPJoshi

आज हम सब कोरोना संक्रमण से बचने के लिए शासन के निर्देश पर लॉक डाउन का पालन कर रहे हैं, ऐसे में इस संकट की घड़ी में भी लॉक डाउन को मज़ेदार और यादगार बनाने के लिए आप पनीर की खीर बनाकर खाएं, इसे पुरुष वर्ग बनाए तो और भी अधिक मज़ेदार हो सकता है, क्योंकि स्वाद में कुछ कमी भी रही तो आप पूरे परिवार इसे एन्जॉय कर सकते हैं।
पनीर की खीर बनाना अत्यंत आसान और स्वाद में बहुत ही लाज़वाब होता है। इसे आप आसानी से घर मे ही बना सकते हैं वह भी मार्केट से पनीर खरीदे बिना ही।
पनीर की खीर इंस्टेन्टली तैयार किया जा सकता है अधिकतम 10 मिनट में, बिना कस्टर्ड पॉवडर, बिना चावल के; आप इसे खुझरी या कतरा का भी नाम दे सकते हैं।
पनीर की खीर बनाने के लिए आवश्यक सामग्री, 3 व्यक्ति के अनुसार :-
1- दूध 500ML
2- गुड़ 150Gram
3- 10-12 बून्द नीबू रस।
4- 3 इलाईची के दाने।
5- केसर - 5कली।
6- आप चाहें तो काजू, किसमिस, बादाम, छोहारा और चिरौंजी भी डाल सकते हैं।

घर में रहें, सुरक्षित और जीवित रहें।
पनीर की खीर बनाने की विधि :-
1- सबसे पहले आप फटे हुए दूध लें या ताजा दूध को गर्म करने के बाद थोड़ी देर के लिए गैस से उतार कर ठंडा कर लें फिर उसमें नीबू रस डालकर फटा लें।
2- काजू, बादाम, छोहारा को छोटे छोटे टुकड़े कर लें, आप चाहें तो इसे भूनकर या पीसकर रख सकते हैं। गुड़ को छोटे छोटे टुकड़े में तोड़ लें।
3- किसी बर्तन में फटे हुए दूध को हल्के आंच में पकने के लिये डालें, जब गर्म फटी हुई दूध गर्म हो जाये तो टुकड़े किए हुए या पीसे हुए काजू, बादाम, छोहारा सहित गुड़, किसमिस और चिरौंजी को मिलाकर हल्के आंच में ही पकने दें।
4- जब ड्राई फ्रूट्स पक जाएं तो केसर डालकर 2 मिनट पुनः पकने दें।
5- आपकी खीर तैयार हो चुकी है, अब गैस बंद करके थोड़ी देर खीर को ठंडा होने दें, फिर सर्व करें।
ध्यान रखें- पनीर की खीर पकाने के दौरान कम से कम खोएं।
आपसे अनुरोध है यह एक नौसिखिया किचनमेन द्वारा तैयार किया गया रेसिपी है आप अपने अनुभव के अनुसार इसे अधिक बेहतर बना सकते हैं। इस रेसिपी की उत्पत्ति फटे हुए दूध को बर्बाद करने से रोकने के उद्देश्य से हुई थी, लेखक के परिवार में कई दशक से फटे हुए दूध में गुड़ मिलाकर उसे पकाकर खाने की परंपरा चली आ रही है।
#StayHome for #SafeLife
HP Joshi
Nava Raipur
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आइये आज कोरोना से लड़ने के लिए घर मे ही रहें और समय का सदुपयोग करते हुए अपने मौलिक कर्तव्य को जानें ...

आइये आज कोरोना से लड़ने के लिए घर मे ही रहें और समय का सदुपयोग करते हुए अपने मौलिक कर्तव्य को जानें ....  एच पी जोशी

देश के प्रत्येक नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों के साथ साथ अपने मूल कर्तव्य से भी भलीभांति परिचित होना चाहिए। प्रायः देखने मे आता है, चाहे वह किसी भी देश के नागरिक हों अक्सर वे अपने अधिकारों के लिए अधिक सजग रहते हैं, उसे पाने के लिए लंबी लड़ाइयां लड़ते रहते हैं जबकि अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक भी नहीं होना चाहते, यही दुर्भाग्यजनक कारण देश में वर्ग संघर्ष और हिंसा का कारण बनता है। अतः आइए हम अपने मूल कर्तव्य को जानें और  इन्हें अपने जीवनशैली में शामिल करें।

भारत का संविधान, अध्याय-19 मूल कर्तव्य {अनुच्छेद 51 (क)} में विद्यमान है इसके तहत हमारा राष्ट्र भारत आपसे आह्वान है, आप आप सदैव :-
(क) संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
(ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखें और उसका पालन करें।
(ग) - भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें और अक्षणु बनाए रखें।
(घ) देश की रक्षा करें एयर आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
(ङ) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें, जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हों; ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हों।
(च) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें और उसका परिरक्षण करें।
(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की; जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव भी शामिल हैं, रक्षा करें, उसका संवर्धन करें तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखें।
(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
(झ) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
(Eya) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों मे उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें,  जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊंचाइयों को छू ले।
(ट) अपने 6-14 वर्ष के बच्चे के माता पिता और प्रतिपाल्य उन्हें शिक्षा का अवसर प्रदान करें।

साथियों, अब आप अपने मौलिक कर्तव्य से भली भांति अवगत हो चुके हैं। अतः आपसे अनुरोध है अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में इन बातों का ख्याल रखें जिससे देश में एकता और अखंडता  स्थापित किया जा सके।
लेखक शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर है, वर्तमान में IGNOU से मानव अधिकार में सर्टिफिकेट कोर्स कर रहा है।
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महामारी कोरोना के बीच सालगिरहा - व्यंग

महामारी कोरोना के बीच सालगिरहा - व्यंग
व्यंगकार- श्री एचपी जोशी
















बूडत ले बूडत तक, जिनगी के राहत तक; रहे बर परही।
लागथे एकरे संग, मया पिरित के बानी; लगाए बर परही।
99साल के डोकरी बर, लागथे जुन्ना ढेखरा होए ल परही।
2096 तक एकर जियत ले, कलहरत कलहरत जिए परही।।1।।


कोरोना वायरस के बारे में कितना जानते हैं आप और क्या जानना है जरूरी - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय


कोनो बीमारी होहि मोला, ईलाज कराए बर परही।
99साल के डोकरी के, आंसू बोहाए बर; जिए ल परही।
कोरोना महामारी के परकोप ले, बाचे बर परही।
मान सनमान बचाए खातिर, घर म रहे बर परही।।2।।


हावय हमर संकल्प, अब कोरोना ले लडबो - (कविता)


दुःख सुख के चक्कर ले, डरे बर नई परही।
चाहे बिहान के होवत ले, एहर लड़त रइही।
जेन मन एखर, एहर करत रइही, फेर ....
पहिली बता, कोरोना ले तो बाचे बर परही।।3।।


Janta Curfew (Home Isolation) देश के हर नागरिक की सुरक्षा के लिए आवश्यक - HP Joshi

दाई ददा के सनमान बर, लड़े बर परही।
लइका डउकी के अधिकार बर, जीए परही।
कहइया के का हे संगी ...........
बूडत ले बूडत तक, जिनगी के राहत तक; जीए बर परही।।4।।

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सालगिरहा इस्पेशल समोसा, खाने का नहीं; देखने का।
बिन चटनी समोसा, खाने का; नही है ये बेचने का।।
होम मेड समोसा, फ़ॉर लवर; ख़राब होते लिवर का।।।
कोरोना से डर, बचके रह; हसी खुशी से जीने का।।end।।


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कोरोना वायरस के बारे में कितना जानते हैं आप और क्या जानना है जरूरी - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

कोरोना वायरस के बारे में कितना जानते हैं आप और क्या जानना है जरूरी - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

नोवेल कोरोना वायरस के बारे में कई तरह की बातें सोशल मीडिया, वाट्सऐप और इंटरनेट के माध्यम से फैल रही हैं। इनमें से कुछ सही हैं, तो बहुत-सी बातें बिल्कुल निराधार हैं। ऐसे समय में जब कोरोना वायरस महामारी बनकर दुनियाभर में हजारों लोगों की जान ले चुका है, तो इससे जुड़े कुछ अनिवार्य पहलुओं के बारे में जानना जरूरी है। विभिन्न शोध निष्कर्षों पर आधारित विज्ञान प्रसार में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ टीवी वेंकटेश्वरन का यह आलेख.

संक्रमण: वायरस गले और फेफड़ों में उपकला (epithelial) कोशिकाओं को संक्रमित करता है। SARS-CoV-2 मानव कोशिकाओं के संपर्क में आने पर ACE2 रिसेप्टर्स से बंध जाता है, जो अक्सर गले और फेफड़ों में पाए जाते हैं। हालाँकि, त्वचा पर चिपकने के बावजूद वायरस नुकसान नहीं पहुँचाता क्योंकि बाहरी त्वचा पर उसका संपर्क ACE2 से नहीं होता है। यह वायरस नाक, आँखों और मुँह से होकर शरीर में प्रवेश करता है। हमारे हाथ इसका मुख्य साधन हो सकते हैं, जो हमारे मुँह, नाक और आँखों तक वायरस को पहुँचा सकते हैं। जितनी बार संभव हो 20 सेकंड तक साबुन के पानी से हाथ धोना संक्रमण को रोकने में मदद करता है।







संक्रामक खुराक: मैकाक बंदर को संक्रमित करने के लिए सात लाख पीएफयू खुराक की आवश्यकता पड़ती है। पीएफयू (प्लाक बनाने की इकाई) नमूना संक्रामकता के मापन की एक इकाई है। हालाँकि, बंदर में कोई नैदानिक लक्षण नहीं देखे गए हैं, नाक और लार के द्रव कणों में वायरल लोड था। मनुष्य को इस वायरस से संक्रमित होने के लिए सात लाख पीएफयू से अधिक खुराक की आवश्यकता होगी। ACE2 रिसेप्टर्स वाले आनुवंशिक रूप से संशोधित चूहों पर एक अध्ययन से पता चला है कि वह केवल 240 पीएफयू खुराक से SARS से संक्रमित हो सकता है। इसकी तुलना में, चूहों को नये कोरोना वायरस से संक्रमित होने के लिए 70,000 पीएफयू की आवश्यकता होगी।

संक्रामक अवधि: यह अभी पूरी तरह ज्ञात नहीं है कि कोई व्यक्ति कितनी अवधि तक दूसरों को संक्रमण पहुँचा सकता है, लेकिन अब तक यह माना जा रहा है कि यह अवधि 14 दिन की हो सकती है। संक्रामक अवधि को कृत्रिम रूप से कम करना समग्र संचरण को कम करने का एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति को अस्पताल में एकांत कमरे में भर्ती करना, दूसरे लोगों से अलगाव और लॉकडाउन संक्रमण रोकने के प्रभावी तरीके हो सकते हैं।

कौन कर सकता है संक्रमित: वायरस से संक्रमित कोई भी व्यक्ति लक्षण प्रकट होने से पहले ही दूसरों को संक्रमित कर सकता है। खाँसी या छींक आने पर हमारे मुँह और नाक को ढंकने से संक्रमण को कम करने में मदद मिल सकती है। वायरस पूरी संक्रामक अवधि में संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक और मल में मौजूद रहता है।

हम कैसे करते हैं संक्रमित: संक्रमण प्रायः द्रव कणों के माध्यम से होता है। इसके लिए, छह फीट से कम नजदीकी संपर्क की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि यह सिफारिश की जाती है कि हम सार्वजनिक स्थानों जैसे- सब्जी बाजार या सुपरमार्केट में एक-दूसरे से 1.5 मीटर दूर रहें। हांगकांग में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि सामाजिक दूरी बनाए रखकर 44% तक संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। फोन, दरवाजे की कुंडी और दूसरी सतहें वायरस के संचरण का संभावित स्रोत हो सकती हैं, लेकिन इसके बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है। दरवाजे की कुंडी, लिफ्ट का बटन और सार्वजनिक स्थानों पर काउंटर को छूने के बाद हाथों को सैनेटाइज करना बचाव का सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

हम कितने लोगों को संक्रमित करते हैं: एक विशिष्ट संक्रामक व्यक्ति के कारण होने वाले नए संक्रमणों की औसत संख्या मानव संक्रामकता सीमा 2.2 से 3.1 के बीच है। सरल शब्द में, एक संक्रमित व्यक्ति औसतन लगभग 2.2 से 3.1 व्यक्तियों को संक्रमित करता है। एक-दूसरे से दूरी बनाए रखकर हम वास्तविक संचरण क्षमता को कृत्रिम रूप से कम कर सकते हैं, इस प्रकार संक्रमण की दर को धीमा कर सकते हैं।

वायरस कहां से आया: यह चमगादड़ का सूप पीने से तो नहीं हुआ है। जब खाद्य उत्पादों को उबाला जाता है, तो वायरस नष्ट हो जाता है। प्रारंभ में, यह अनुमान लगाया गया था कि SARS-CoV-2 वायरस चमगादड़ से मनुष्यों में पहुँचा है। लेकिन, हाल ही में हुए जीनोम के अध्ययन से पता चलता है कि इनसानों में पहुँचने से पहले इसे किसी मध्यस्थ प्रजाति तक जाना चाहिए था। एक अन्य अध्ययन से संकेत मिलता है कि SARS-CoV-2 वायरस का एक वंश बीमारी फैलने से पहले मनुष्यों में मौजूद था।

कैसे विकसित हुआ वायरस: मनुष्यों में पहुँचने से पहले SARS-CoV-2 या तो किसी जंतु मेजबान में वायरल रूप के प्राकृतिक चयन या फिर जूनोटिक ट्रांसमिशन के बाद मनुष्यों में वायरल रूप के प्राकृतिक चयन से उभरा है। केवल अधिक अध्ययन से पता चलेगा कि दोनों में से कौन-सा तथ्य सही है। यह अभी भी स्पष्ट नहीं हैं कि SARS-CoV-2 में कौन से रूपांतरण हैं, जिन्होंने मानव संक्रमण और संचरण को बढ़ावा दिया है।

SARS-CoV2 कब सामने आया: दिसंबर 2019 से पहले SARS-CoV2 के कोई दस्तावेजी मामले सामने नहीं आए हैं। हालाँकि, प्रारंभिक जीनोमिक विश्लेषण बताता है कि SARS-CoV-2 के पहले मानव मामले मध्य अक्तूबर से मध्य दिसंबर 2019 के बीच सामने आए थे। इसका मतलब है कि प्राथमिक जूनोटिक घटना और मनुष्यों में इसके प्रकोप के फैलने के बीच की अवधि के बारे में जानकारी नहीं है।

क्या यह जानवरों को संक्रमित कर सकता है: आणविक मॉडलिंग से पता चलता है कि SARS-CoV-2 मानव के अलावा, चमगादड़, सिवेट, बंदर और सुअर की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है। हालाँकि, यह घरेलू पशुओं को संक्रमित नहीं करता है। अंडे या अन्य पॉल्ट्री उत्पादों का सेवन करने से भी SARS-CoV-2 संक्रमण नहीं होता।

क्या कोई दो बार संक्रमित हो सकता है: एक बार खसरा होने के बाद अधिकतर लोगों में जीवन भर के लिए इस बीमारी के प्रति प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है। इसके बाद शायद ही उन्हें फिर से खसरा होता है। प्रायोगिक रूप से संक्रमित मैकाक बंदर में दोबारा इससे संक्रमित होने के मामले नहीं देखे गए हैं। इसी तरह, मनुष्यों में भी SARS-CoV-2 से उबरने के बाद दोबारा इससे संक्रमित होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालाँकि, यह प्रतिरक्षा कब तक बनी रह सकती है, यह कहना मुश्किल है।

कितनी गंभीर है बीमारी: COVID-19 मौत की सजा नहीं है। इसके अधिकांश मामले हल्के (81%) हैं, लगभग 15% मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है और 5% को महत्वपूर्ण देखभाल की आवश्यकता होती है। अधिकतर संक्रमित लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

कौन हैं सबसे अधिक संवेदनशील : हेल्थकेयर कार्यकर्ता इस वायरस के खतरे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। लोम्बार्डी, इटली में लगभग 20% स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करते हुए संक्रमित हो रहे हैं। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धों, हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और साँस संबंधी रोगों से ग्रस्त लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।

मौत का कारण क्या है: अधिकांश मौतें श्वसन तंत्र फेल होने या फिर श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानी एवं हृदय संबंधी समस्याओं के संयुक्त प्रभाव के कारण होती हैं। फेफड़ों में द्रव का रिसाव, जो श्वसन को रोकता है और रुग्णता को बढ़ावा देता है। वर्तमान में, COVID-19 के लिए उपचार मुख्य रूप से सहायक देखभाल है, यदि आवश्यक हो तो वेंटिलेशन उपयोग किया जा सकता है। फिलहाल, कई चिकित्सीय परीक्षण जारी हैं, और परिणामों की प्रतीक्षा की जा रही है।

क्या वायरस दूध के पाउच या समाचार पत्रों द्वारा प्रेषित होते हैं: SARS-CoV-2 प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील सतहों पर 3 दिनों तक बना रह सकता है। जब वायरल लोड 10,000 पीएफयू था, तो यह केवल 5 मिनट के लिए अखबार और सूती कपड़े पर रह सकता था। हालाँकि, वायरस को हटाने के लिए दूध के पाउच को धोना पर्याप्त है।

क्या यह हवा में फैल सकता है: हवा में, वायरस केवल 2.7 घंटे तक जीवित रह सकता है। इसलिए, घर की बालकनी या छत जैसे खुले स्थानों में इससे होने वाले नुकसान का खतरा नहीं होता है।

क्या कोई कम प्रभावकारी रूप है: इस वायरस के विभिन्न उपभेदों की पहचान की जा रही है, लेकिन अब तक के अध्ययनों में किसी भी रूपांतरण का संकेत नहीं मिला है, जो संचरण या रोग की गंभीरता से जुड़ा हो।

क्या गर्मी या बरसात से मिल सकती है राहत : तापमान और आर्द्रता में वृद्धि के साथ संचरण में कमी को दर्शाने के कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है।

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