पुलिस और सशस्त्र बल के जवान नक्सल क्षेत्रों के विकास की रीढ़ हैं: श्री मोहित गर्ग, SP नारायणपुर

अबूझमाड़ में बिछ रही है पक्की सड़कों का जाल, आजादी के 73 साल बाद पहली बार अबुझमाड़ के लोग उन्नति के राह पर

पुलिस और सशस्त्र बल के जवान नक्सल क्षेत्रों के विकास की रीढ़ हैं: श्री मोहित गर्ग

आजादी के 73 साल बाद अब पल्ली (ओरछा) - बारसूर - गीदम के रास्ते बस चलना प्रारंभ हुआ है, इसके पहले अबुझमाड़ के लोगों को रोड़ और बस सुविधा नहीं होने के कारण न सिर्फ अनेकों प्रकार के कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था बल्कि वे उन्नति से भी कोसों दूर थे, बस सुविधा नहीं होने के कारण त्वरित चिकित्सकीय उपचार नहीं हो पाता था परिणाम स्वरूप हर साल सैकड़ों लोगों उपचार के अभाव में भी अपनी जान गवां रहे थे। यह सरकार और पुलिस प्रशासन के विशेष प्रयास का ही परिणाम है कि लोगों को अब असुविधाओं का सामना नहीं करना पड़ रहा है। एक ओर जहां विकास विरोधी नक्सली इन कार्यों में व्यवधान पैदा करने में लगे हैं वहीं आम नागरिक पुलिस/प्रशासन के कार्यों से प्रभावित होकर नक्सलवाद के खिलाफ आवाज उठाने एकजूट होने लगे हैं। नक्सलवाद द्वारा फैलाये गये मृत्यु के भय और आतंक के कारण आम नागरिक खूद को उन्नति से परे रखने को मजबूर थे परन्तु अब सरकार के लोेक कल्याणकारी योजनाओं, पुलिस व सशस्त्र बल से प्राप्त सुरक्षा कव्हर ने आम नागरिकों को शिक्षा, रोजगार और उन्नति से जोड़ने का काम किया है। केवल शासन तंत्र ही नहीं वरन् बुद्धजीवियों और पत्रकारों का भी मानना है कि बस्तर में विकास की गति तेज होने से वह दिन दूर नहीं जब समूचे बस्तर लाल आतंक के हिंसा से मुक्त हो जाएगा।

नारायणपुर - पल्ली (ओरछा) - बारसूर मार्ग 2-लेन चौड़ीकरण एवं उन्नयन:- प्रथम चरण में नारायणपुर से बारसूर की ओर (जिला नारायणपु की सीमा क्षेत्रांतर्गत) 43 कि.मी. रोड़ का निर्माण दिनांक 20/06/2012 से प्रारंभ हुआ है, यह रोेड़ 83.2849 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। द्वितीय चरण में बारसूर से पल्ली (ओरछा) की ओर शेष 18.4 कि.मी. रोड़ निर्माण का कार्य दिनांक 25/04/2016 से प्रारंभ हुआ है, जो 54.2579 करोड़ रूपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। दोनो चरण में कुल - 137.5428 करोड़ रूपय की लागत से तैयार हो रही कुल 61.4 कि.मी. लम्बाई के इस रोड़ में  48.4 कि.मी. रोड़ का निर्माण पूरी हो चूकी है तथा 13 कि.मी. रोड़ का निर्माण कार्य प्रगति पर है वहीं 122 पुल-पुलिया में से 67 पुल-पुलिया का निर्माण पूर्ण हो चूका है वहीं 55 पुल-पुलिया का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस रोड़ के दिनांक 30/12/2021 तक पूर्ण होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इस रोड़ के निर्माण हेतु जिला पुलिस बल के अलावा सीपीएफएफ की 03 और छसबल की 01 कंपनी के लगभग 500 जवानों की सुरक्षा कव्हर में तैयार किया जा रहा है यह रोड़। इस मार्ग के निर्माण के दौरान नक्सलियों ने 04 आईईडी विस्फोट, आगजनी की 01 घटना और डकैती का भी 01 घटना घटित किया है सड़क के निर्माण के दौरान 05 जवान शहीद और 08 जवान घायल हुए हैं वहीं 13 आईईडी बरामद किये गये हैं।

छोटेड़ोंगर (धौड़ाई/पल्ली) - ओरछा मार्ग (2-लेन) चौड़ीकरण एवं उन्नयन कार्य:- 31 कि.मी. रोड़ का निर्माण दिनांक 18/11/2015 से प्रारंभ हुआ है, यह रोेड़ 58.7465 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। 31 कि.मी. की लम्बी इस रोड़ में 26 कि.मी. रोड़ निर्माण का कार्य पूर्ण हो चूकी है तथा 05 कि.मी. रोड़ निर्माण कार्य प्रगति पर है वहीं इस मार्ग में पड़ने वाली 70 पुल में से 65 पुल का निर्माण हो चूका है, शेष 05 पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जो 30/06/2021 तक पूरी होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इस रोड़ के निर्माण हेतु जिला पुलिस बल के अलावा सीपीएफएफ और छसबल की 02 कंपनी के लगभग 250 जवानों की सुरक्षा कव्हर में तैयार किया जा रहा है यह रोड़। इस मार्ग के निर्माण के दौरान नक्सलियों ने 11 आईईडी विस्फोट और आगजनी की 03 घटना घटित किया है सड़क के निर्माण के दौरान 08 जवान घायल हुए हैं वहीं 13 आईईडी बरामद किये गये हैं।

नारायणपुर - सोनपुर - मरोड़ा मार्ग 2-लेन चौड़ीकरण एवं उन्नयन कार्य:- 78 कि.मी. रोड़ का निर्माण दिनांक 24/12/2014 से प्रारंभ हुआ है, यह रोेड़ 49.6923 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। 78 कि.मी. की लम्बी इस रोड़ में 27 कि.मी. रोड़ निर्माण का कार्य पूर्ण हो चूकी है तथा 51 कि.मी. रोड़ निर्माण कार्य प्रगति पर है वहीं इस मार्ग में पड़ने वाली 200 पुल-पुलिया में से 59 पुल-पुलिया का निर्माण हो चूका है, शेष 141 पुल-पुलिया का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जो 30/12/2021 तक पूरी होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इस रोड़ के निर्माण हेतु जिला पुलिस बल के अलावा सीपीएफएफ और छसबल की 04 कंपनी के लगभग 500 जवानों की सुरक्षा कव्हर में तैयार किया जा रहा है यह रोड़। इस मार्ग के निर्माण के दौरान नक्सलियों ने 09 आईईडी विस्फोट, आगजनी की 03 व तोडफोड की 01 घटना घटित किया है इस सड़क के निर्माण के दौरान 01 जवान शहीद और 07 जवान घायल हुए हैं वहीं 08 आईईडी बरामद किये गये हैं।

नारायणपुर से गारपा (आरडी 20किमी) से कच्चापाल (कुदला से कोहकामेटा) मार्ग:- 17.75 कि.मी. रोड़ का निर्माण दिनांक 14/06/2019 से प्रारंभ हुआ है, यह रोेड़ 1091.71 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। 17.75 कि.मी. की लम्बी इस रोड़ में 07 कि.मी. रोड़ निर्माण का कार्य पूर्ण हो चूकी है तथा 10.75 कि.मी. रोड़ निर्माण कार्य प्रगति पर है वहीं इस मार्ग में पड़ने वाली सभी 03 पुल-पुलिया का निर्माण हो चूका है यह मार्ग जो 30/05/2021 तक पूरी होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इस रोड़ के निर्माण हेतु जिला पुलिस बल के अलावा सीपीएफएफ की 01 कंपनी के लगभग 150 जवानों की सुरक्षा कव्हर में तैयार किया जा रहा है यह रोड़। इस मार्ग के निर्माण के दौरान नक्सलियों ने 05 आईईडी विस्फोट और आगजनी की 01 घटना घटित किया है सड़क के निर्माण के दौरान 01 जवान शहीद और 03 जवान घायल हुए हैं वहीं 03 आईईडी बरामद किये गये हैं।

ब्रेहबेड़ा (नारायणपुर) से कंदाड़ी - कीहकाड़ - मुरनार - बेचा मार्ग:- 31.80 कि.मी. रोड़ का निर्माण दिनांक 31/01/2020 से प्रारंभ हुआ है, यह रोेड़ 1870.06 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। 31.80 कि.मी. की लम्बी इस रोड़ में 02 कि.मी. रोड़ निर्माण का कार्य पूर्ण हो चूकी है तथा 29.80 कि.मी. रोड़ निर्माण कार्य प्रगति पर है वहीं इस मार्ग में पड़ने वाली 07 पुल-पुलिया में से 05 पुल-पुलिया का निर्माण हो चूका है, शेष 02 पुल-पुलिया का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस मार्ग के निर्माण के दौरान नक्सलियों ने आगजनी की 01 घटना घटित किया है।

श्री मोहित गर्ग, पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर ने बताया कि पुलिस और सशस्त्र बल के जवान नक्सल क्षेत्रों के विकास की रीढ़ हैं इनके योगदान और बलिदान का ही परिणाम है कि आज अबुझमाड़ सहित समूचे बस्तर देश-दुनिया में अपना नया किर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। हमारे जवान न सिर्फ कानून व्यवस्था स्थापित करने और नक्सल हिंसा मुक्त बस्तर के लिए अपने जान की बाजी लगाकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं बल्कि  बस्तर के विकास के लिए स्कूल, काॅलेज, अस्पताल, प्रशासकीय भवनों, मोबाईल टाॅवर, विद्युत कनेक्टिीविटी और सड़क निर्माण कार्यों को भी सुरक्षा दे रहे हैं। वर्तमान में कोविड-19, कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए जवानों के योगदान अत्यंत सराहनीय, अविस्मरणीय और अतुलनीय है।
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सामाजिक संस्था "नव संचार फाउंडेशन" कोरोना वारियर्स को बांट रही है फूड पैकेट्स

सामाजिक संस्था "नव संचार फाउंडेशन" कोरोना वारियर्स को बांट रही है फूड पैकेट्स
जिला नारायणपुर में कार्यरत सामाजिक संस्था 'नव संचार फाउंडेशन' द्वारा कोविड-19, कोरोना महामारी के रोकथाम हेतु फ्रंटलाइन वारियर्स के रूप में कार्यरत कर्मियों और अन्य जरूरतमंद लोगों को 1 सप्ताह तक फ़ूड पैकेट्स बांटने जा रही है; इसके अंतर्गत प्रथम एवं द्वितीय दिवस दिनांक 13/05/2021 और 14/05/2021 को पुलिस बल के लगभग 100-100 जवानों को पुलाव, सलाद और  हलुआ बांटा गया वहीं तीसरे दिवस दिनांक 15/05/2021 को पुलिस बल के जवानों और नगरपालिका के सफाई कर्मियों सहित मानसिक रूप से विक्षिप्त और घर से बाहर घूम रहे अन्य जरूरतमंद लोगों को मिलाकर लगभग 150 लोगों को पुलाव, सलाद और हलुआ बांटा गया। फूड पैकेट्स वितरण करने में संस्था के अध्यक्ष श्रीमती सीमा गर्ग, सचिव श्रीमती जागृति गर्ग, सचिव सुश्री आरती गर्ग, कोषाध्यक्ष श्री रोशनलाल गर्ग, सदस्य श्री मधुकरराव, श्रीमती मनु चंद्राकर, श्रीमति श्रुति उपाध्याय और श्रीमती गौरी साव का अहम योगदान है।

नव संचार फाउंडेशन के सचिव श्रीमती जागृति गर्ग ने देशभर के पंजीकृत और गैर पंजीकृत सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि सभी एनजीओ यथासंभव जरूरतमंद लोगों और कोरोना वायरस के रोकथाम में लगे फ्रंटलाइन वारियर्स की सहायता करें।
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पत्नी को काबू में कैसे रखें, पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत करने के 15 बेहतरीन उपाय : धर्मगुरु हुलेश्वर बाबा

पत्नी को काबू में कैसे रखें, पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत करने के 15 बेहतरीन उपाय : धर्मगुरु हुलेश्वर बाबा
मौजूदा समय में हम परिवार को लेकर इस बात के लिए आशान्वित रहते हैं कि हमारा परिवार सुखमय, शांतिपूर्ण तथा समृद्धियुक्त हो। यदि आप भी इसीतरह के कुछ आशाओं से प्रेरित हैं तो आपको इस बात का ख्याल रखना होगा कि परिवार के सुख, शांति और समृद्धि के लिए परिवार में एकता हो तथा एकता के लिए परिवार का Centralized होना भी जरूरी है जबकि परिवार को Centralized रखने के लिए परिवार का एक अपना Rules हो, DisciplineSet हो तथा इसके लिए बाकायदा JudiciarySystem भी तैयार होनी चाहिए। 

यदि आप इंसानियत के धर्म को समझते हों तो आप किसी एक मानसिकता से ग्रसित होकर परिवार के कम शक्तिशाली लोगों खासकर स्त्री को गुलाम, सेविका या दासी समझने की भूल नहीं करेंगे। इसका तात्पर्य यह है कि आपके परिवार में व्यक्तिगत रूप से शक्ति और आय के आधार पर निर्णय लेने के अधिकार तय नहीं होंगे बल्कि निर्णय का अधिकार परिवार के साझे हित और सर्वांगीण विकास के ध्येय से समानता और न्याय के सिद्धांत पर आधारित होगा। अब तक आप समझ चुके होंगे कि परिवार का मुखिया सबसे अधिक उम्र, सबसे अधिक ताकत अथवा सबसे अधिक आय के आधार पर निर्धारित नहीं होना चाहिए, खासकर लिंग के आधार पर मुखिया होने की मानसिकता तो नैसर्गिक न्याय, नैसर्गिक सौंदर्य, Equality और Rules of Peace के खिलाफ है। यदि आपके परिवार में मुखिया अथवा निर्णय के अधिकार इन आधारों पर तय होते हैं तो आपका परिवार परिवार नहीं बल्कि GoverningBody है वैसे मैं साफ शब्दों में कहूँ तो तानाशाही सरकार है।

अब पत्नी को नियंत्रण करने अथवा काबू या कब्जे में रखने की बात शुरू करने के पहले मैं एक कहानी बताना आवश्यक समझता हूं। मेरे बाप, दादा और परदादाओं के द्वारा निरंतर गाय-बैल, भैसी-भैसा पाला जाता था क्योंकि ये दुग्धपदार्थ और जीवन यापन हेतु कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी जानवर हैं। आम मनुष्यों की भांति मेरे बाप दादा भी इन्हें नियंत्रण अथवा कब्ज़े/काबू में रखते थे, मेरे पूर्वज निरंतर भूमि, जमीन जायजाद पर भी अपना कब्जा रखते आ रहे हैं। मेरे परदादाओं का सैकड़ों एकड़ जमीन था हजारों गाय, बैल और भैंस थे जिनका कब्जा वे अन्य लोगों को हस्तांतरित कर लेते थे, दान में अथवा दाम में बेच देते थे; मैं भी भूमि, सामग्री और पशुओं जैसे चल अचल संपत्ति के क्रय विक्रय करने और उसे कब्जा में रखने की मानसिकता को उचित समझकर ऐसा करता हूँ। "मैं मानता हूं कब्जा का हस्तांतरण और विक्रय किया जा सकता है।" सरकारें भी बाकायदा कानून बनाकर कब्जा हस्तातंरण करने और बेचने का नियम बना रखा है जो लगभग सभी देश में संवैधानिक भी है। आपको भी पता है "चल अचल संपत्ति को क्रय विक्रय अथवा दान में देकर इसके कब्जा को हस्तांतरित किया जा सकता है मगर परिवार के सदस्य ही नहीं वरन कोई भी इंसान चल-अचल संपत्ति अथवा वस्तु नहीं है।" 

अब आपको पता है कि आपके परिवार के सदस्य; (माँ-बाप, पति-पत्नी, भाई-बहन और बच्चे) सहित आप स्वयं भी कोई वस्तु नहीं हैं, कोई चल-अचल संपत्ति अथवा जानवर नहीं हैं। इसलिए आप पर कोई कब्जा भी नहीं कर सकता, न आप पर से कोई अपना कब्जा क्रय विक्रय अथवा दान के माध्यम से हस्तांतरित भी कर सकता है। इसका मतलब ये कि पति-पत्नी ही नहीं वरन संतान भी कब्जा में रखने की वस्तु नहीं हैं। यदि आपमें अब भी अपनी पत्नी को काबू में रखने की मानसिकता है तो आप उन्हें जानवर या गुलाम समझने की भूल कर रहें यदि ऐसा भूल कर रहे हैं तो ख्याल रखना आपकी बहन और बेटी भी किसी की...... है; आपकी माँ भी आपके बाप की गुलाम है, दासी है, सेविका है और आपके बाप के लिए हस्तांतरण योग्य वस्तुएं।

हाँ; यदि आप अपनी पत्नी अथवा पति को सदैव आकर्षित रखना चाहते हैं, आप दोनों के मध्य प्रेम और समर्पण की भावना को बरकरार रखना चाहते हैं तो इसके लिए मैं अपना सुझाव देता हूँ:-
1- अपने जीवनसाथी के साथ दोस्त बनकर जीवन जीएं; पत्नी को गुलाम, सेविका या दासी न समझें। (पति-पत्नी में कोई एक महान नहीं बल्कि दोनों बराबर हैं; पति परमेश्वर नहीं होता।)
2- हर स्थिति में सहभागिता बरकरार रखें; भोजन और सब्जी बनाने, बर्तन और कपड़े धोने,  तेल मालिश और हाथ पांव दबाने से न हिचकिचाएं।
3- अपने जीवनसाथी के छोटे मोटे गलतियों की अनदेखी करें।
4- जीवनसाथी को बेजा-कब्जा की वस्तु न समझें, बल्कि उन्हें उनके समुचित मानव अधिकारों के इस्तेमाल के लिए जागरूक करते रहें।
5- नियमित रूप से Picnic Spot, सार्वजनिक स्थानों और Tour's में जाएं और आवश्यक आजादी/स्वतंत्रता प्रदान करें। हर विषय में खुलकर विचार विमर्श करें, अपनी भावनाएं और विचार सादगीपूर्ण तरीके से एक दूसरे से शेयर करें।
6- शारीरिक श्रम में दोनों बराबर का योगदान दें, खासकर जब आपकी अवकाश हों आप भी घर का आधा काम अनिवार्य रूप से करें; जीवनसाथी का पसंदीदा भोजन स्वयं बनाएं, अपने हाथों से खिलाएं और सारे बर्तन धोएं।
7- आकश्मिक स्थिति में यदि लड़ाई झगड़े की स्थिति निर्मित हो रही हो तो माफी मांग लें, अन्यथा हानि आपको ही अधिक होने वाली है।
8- समय समय पर Gifts देते रहें, जब भी आपके जीवनसाथी तारीफ योग्य काम करे तारीफ और धन्यवाद जरूर ज्ञापित करें।
9- यथासंभव समय समय पर उन्हें मायके जरूर ले जाएं, उनके मायके वालों का अपने माता पिता के बराबर सम्मान करें।
10- पत्नी को संभोग करने और बच्चे जन्म देने की Machine न समझें।
11- पत्नी के साथ कभी मारपीट न करें; यदि आप मारपीट करते हैं मतलब आपके गलती पर आपकी पत्नी को भी पीटने का अधिकार है जिसे आपको स्वीकार करना होगा।
12- कभी भी दूसरे पक्ष को इतना प्रताड़ित न करें कि वह आपसे तंग आकर आपके साथी आत्महत्या करने पर मजबूर हो। यदि आप जीवनसाथी से परेशान हैं तो आत्महत्या कदापि न करें बल्कि तत्काल तलाक ले लें।
13- घरेलू शारीरिक काम से राहत दें परंतु खुद व्यस्त रहें और उन्हें भी व्यस्त रखें। अर्थात उच्च शिक्षा और Resurch के लिये अध्ययन करते/कराते रहें, यदि ऐसा संभव न हो तो महान लोगों की जीवनी, आत्मकथा और अन्य किताब पढ़ें और अपने जीवनसाथी को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
14- Social Media Sites, Mobile से मिलने वाले Notifications, धारावाहिक और धार्मिक राजनैतिक समाचार से बचें।
15- Life में Romance बरकरार रखें; जब भी अवसर मिले जीवनसाथी के साथ खिलखिला कर हँसे, जीवनसाथी को मुस्कराने का अवसर दें।
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