गुरू घासीदास जयंती विशेषांक: गुरु घासीदास बाबा के सात सिद्धांत और प्रचलित 42 अमृतवाणी (उपदेश)

गुरू घासीदास जयंती विशेषांक: गुरु घासीदास बाबा के सात सिद्धांत और प्रचलित 42 अमृतवाणी (उपदेश)
संकलन: श्री हुलेश्वर जोशी

"धार्मिक होये के (सतनामियत दिखाए के) लाख उदिम कर लेवव फेर कहूँ तुमन गुरु घासीदास बाबा के बताए रसदा म नई चलहू त फेर तुहर सतनामी होय के कोनों फायदा नई हे। अइसनहा चरित्तर ह दिखावा अऊ ढोंग ले बढ़के काहीं नोहे।" - स्वर्गीय श्री मालिकराम जोशी 

गुरु घासीदास के सात सिद्धांत -
1- सतनाम पर अडिग विश्वास रखो।
2 - मूर्ति पूजा मत करो।
3 - जाति-पाती के प्रपंच में मत पडो।
4 - जीव हत्या मत करो।
5 - नशा का सेवन मत करो।
6 - पराई स्त्री को माता-बहन मानो।
7 - चोरी और जुआ से दूर रहव।

गुरु घासीदास बाबा के प्रचलित 42 अमृतवाणी (उपदेश) -
1 - सत ह मनखे के गहना आय। (सत्य ही मानव का आभूषण है।)
2 - जन्म से मनखे मनखे सब एक बरोबर होथे फेर कर्म के आधार म मनखे मनखे गुड अऊ गोबर होथे। (मनखे-मनखे एक बरोबर)
3- सतनाम ल जानव,समझव, परखव तब मानव।
4 - बइला-भईसा ल दोपहर म हल मत चलाव।
5 - सतनाम ल अपन आचरण में उतारव।
6 - अंधविश्वास, रूढ़िवाद, परंपरावाद ल झन मानव।
7 - दाई-ददा अउ गुरू के सनमान करिहव।
8 - सतनाम ह घट घट में समाय हे, सतनाम ले ही सृष्टि के रचना होए हावय।
9 - मेहनत के रोटी ह सुख के आधार आय।
10 - पानी पीहु जान के अउ गुरू बनावव छान के।
11 - मोर ह सब्बो संत के आय अउ तोर ह मोर बर कीरा ये। (चोरी अउ लालच झन करव।)
12- पहुना ल साहेब समान जानिहव।
13 - इही जनम ल सुधारना साँचा ये। (पुनर्जन्म के गोठ झूठ आय।)
14 - गियान के पंथ किरपान के धार ये।
15 - दीन दुःखी के सेवा सबले बड़े धरम आय।
16 - मरे के बाद पीतर मनई मोला बईहाय कस लागथे। पितर पूजा झन करिहौ, जीते-जियात दाई ददा के सेवा अऊ सनमान करव। 
17 - जतेक हव सब मोर संत आव।
18 - तरिया बनावव, कुआँ बनावव, दरिया बनावव फेर मंदिर बनई मोर मन नई आवय। ककरो मंदिर झन बनाहू।  
19 - रिस अउ भरम ल त्यागथे तेकरे बनथे।
20 - दाई ह दाई आय, मुरही गाय के दुध झन निकालहव।
21 - बारा महीना के खर्चा सकेल लुहु तबेच भले भक्ति करहु नई ते ऐखर कोनो जरूरत नई हे।
22 - ये धरती तोर ये येकर सिंगार करव।
23 - झगरा के जर नइ होवय ओखी के खोखी होथे।
24 - नियाव ह सबो बर बरोबर होथे।
25 - मोर संत मन मोला काकरो ल बड़े कइही त मोला सूजगा मे हुदेसे कस लागही।
26 - भीख मांगना मरन समान ये न भीख मांगव न दव, जांगर टोर के कमाए ल सिखव।
27 - सतनाम ह जीवन के आधार आय।
28 - खेती बर पानी 
अऊ संत के बानी ल जतन के राखिहव।
29 - पशुबलि अंधविश्वास ये एला कभू झन करहु।
30 - जान के मरइ ह तो मारब आएच आय फेर कोनो ल सपना म मरई ह घलो मारब आय।
31 - अवैया ल रोकन नहीं अऊ जवैया ल टोकन झन।
32 - चुगली अऊ निंदा ह घर ल बिगाडथे।
33 - धन ल उड़ावव झन, बने काम में लगावव।
34 - जीव ल मार के झन खाहु।
35 - गाय भैंस ल नागर म झन जोतहु।
36 - मन के स्वागत ह असली स्वागत आय।
37 - जइसे खाहु अन्न वैसे बनही मन, जइसे पीहू पानी वइसे बोलहु बानी।
38 - एक धुबा मारिच तुहु तोर बराबर आय।
39 - काकरो बर काँटा झन बोहु।
40 - बैरी संग घलो पिरीत रखहु।
41 - अपन आप ल हीनहा अउ कमजोर झन मानहु, तहु मन काकरो ले कमती नई हावव।
42 - मंदिरवा म का करे जईबो अपन घट के ही देव ल मनईबो।

【श्री हुलेश्वर जोशी, लेखक, दार्शनिक एवम वरिष्ठ समाजसेवक द्वारा जनहित में प्रचारित।】
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