भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री, केबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं राज्य मंत्रियों के नाम व विभाग .............

माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने जारी किया आदेश, 2019-2024 हेतु केन्द्रीय मंत्रियों के नाम व विभाग जानने के लिए क्लिक करें

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की सलाह पर राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्‍द ने केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद के निम्‍नलिखित सदस्‍यों के बीच विभागों के बंटवारे का निर्देश दिया है :-


श्री नरेन्‍द्र मोदी, प्रधानमंत्री कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाण ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग। सभी महत्‍वपूर्ण नीतिगत मुद्दे तथा वे सभी विभाग, जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।



कैबिनेट मंत्री
1. श्री राजनाथ सिंह - रक्षा मंत्री
2. श्री अमित शाह - गृह मंत्री
3. श्री नितिन जयराम गडकरी - सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्री
4. श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा - रसायन एवं उर्वरक मंत्री
5. श्रीमती निर्मला सीतारमन - वित्‍त मंत्री और कॉरपोरेट कार्य मंत्री
6. श्री रामविलास पासवान - उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री
7. श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर - कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री; ग्रामीण विकास मंत्री और पंचायती राज मंत्री
8. श्री रविशंकर प्रसाद - कानून एवं न्‍याय; संचार; इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
9. श्रीमती हरसिमरत कौर बादल - खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री
10. श्री थावर चंद गेहलोत - सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री
11. डॉ. सुब्रह्मण्‍यम जयशंकर - विदेश मंत्री
12. श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ - मानव संसाधन विकास मंत्री
13. श्री अर्जुन मुंडा - जनजातीय कार्य मंत्री
14. श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी - महिला एव बाल विकास और वस्‍त्र मंत्री
15. डॉ. हर्षवर्धन - स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्‍वी विज्ञान मंत्री
16. श्री प्रकाश जावड़ेकर - पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्री
17. श्री पीयूष गोयल - रेल और वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री
18. श्री धर्मेन्‍द्र प्रधान - पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्‍पात मंत्री
19. श्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी - अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्री
20. श्री प्रहलाद जोशी - संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री
21. डॉ. महेन्‍द्र नाथ पांडेय - कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री
22. श्री अरविन्‍द गणपत सावंत - भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्री
23. श्री गिरिराज सिंह - पशुपालन, दुग्‍ध उत्‍पादन एवं मत्‍स्‍यपालन मंत्री
24. श्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत - जल शक्ति मंत्री



राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)  
1. श्री संतोष कुमार गंगवार - श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार)
2. श्री राव इन्‍द्रजीत सिंह - सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्‍वयन मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार); और आयोजना मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार)
3. श्री श्रीपद येसो नाइक - आयुर्वेद, योगा और नेचरोपैथी, यूनानी,सिद्धा और होम्‍योपैथी (आयुष) मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार); और रक्षा मंत्रालय
4. डॉ. जितेन्‍द्र सिंह - पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय; कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग
5. श्री किरेन रिजिजु - युवा मामले एवं खेल मंत्रालय और अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्रालय
6. श्री प्रह्लाद सिंह पटेल - संस्‍कृति मंत्रालय  तथा पर्यटन मंत्रालय
7. श्री राजकुमार सिंह - विद्युत मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय  और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
8. श्री हरदीप सिंह पुरी - आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
9. श्री मनसुख मांडविया - जहाजरानी और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय  



राज्‍य मंत्री
1. श्री फग्गनसिंह कुलस्ते - इस्‍पात मंत्रालय
2. श्री अश्विनी कुमार चौबे - स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
3. श्री अर्जुनराम मेघवाल - संसदीय कार्य मंत्रालय; और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय
4. जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह - सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
5. श्री कृष्‍ण पाल गुर्जर - सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
6. श्री दानवे रावसाहब दादाराव - उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
7. श्री जी. किशन रेड्डी - गृह मंत्रालय
8. श्री पुरुषोत्तम रूपाला - कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
9. श्री रामदास अठावले - सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
10. साध्वी निरंजन ज्योति - ग्रामीण विकास मंत्रालय
11. श्री बाबुल सुप्रियो - पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
12. श्री संजीव कुमार बालियान - पशुपालन, दुग्‍ध उत्‍पादन एवं मत्‍स्‍यपालन मंत्रालय
13. श्री धोत्रे संजय शामराव - मानव संसाधन विकास, संचार और  इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
14. श्री अनुराग सिंह ठाकुर - वित्‍त और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
15. श्री अंगड़ी सुरेश चन्नबसप्पा - रेल मंत्रालय
16. श्री नित्‍यानंद राय - गृह मंत्रालय
17. श्री रतन लाल कटारिया - जल शक्ति; सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
18. श्री वी. मुरलीधरन - विदेश मंत्रालय; संसदीय कार्य मंत्रालय
19. श्रीमती रेणुका सिंह सरुता CG - जनजातीय कार्य मंत्रालय
20. श्री सोम प्रकाश - वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
21. श्री रामेश्‍वर तेली - खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय
22. श्री प्रताप चंद्र सारंगी - सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय;और पशुपालन, दुग्‍ध उत्‍पादन एवं मत्‍स्‍यपालन मंत्रालय
23. श्री कैलाश चौधरी - कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
24. श्रीमती देबाश्री चौधरी - महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

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प्रकृति का सिद्धान्त अर्थात नैसर्गिक सिद्धान्त ही न्याय है, सच्चा धर्म और सर्वोच्चतम् जीवन शैली है - HP Joshi

प्रकृति का सिद्धान्त अर्थात नैसर्गिक सिद्धान्त ही न्याय है, सच्चा धर्म और सर्वोच्चतम् जीवन शैली है - एचपी जोशी

समग्र ब्रम्हाण्ड में लाखों ज्ञात/अज्ञात धर्म हैं, जो छोटे छोटे कबिलों के सरदार से लेकर ईश्वर द्वारा स्थापित माना जाता हैं। निःसंदेह ये सभी धर्म स्थापना के दौरान प्रकृति के सिद्धान्त के अनुकूल ही रहे होंगे, परन्तु बाद में अच्छे-बूरे लोगों के सम्पर्क में आने के बाद लगातार बदलते रहे हैं इसलिए हम कुछ धर्मों को नैसर्गिक सिद्धान्तों के विपरित पाते हैं। वर्तमान में अधिकांश धर्मों के तथाकथित रखवाले भी है जो मौजूदा स्थिति में व्याप्त बुराईयों, अधार्मिक सिद्धान्तों को बदलने के स्थान पर संरक्षित करने के लिए हिंसा फैलाने के लिए उत्तरदायी हैं। 

ऐसे स्थिति में सच्चे मानव धर्म की पुनस्र्थापना के लिए मैं धार्मिक नेताओं से अपील करता हूं कि वे मौजूदा धर्म में व्याप्त बुराईयों, अधार्मिक सिद्धान्तों को बदलने का आवश्यक पहल करें। ताकि उनका धर्म मौलिक धर्म अर्थात प्रकृति के सिद्धान्त के अनुकूल हो सके।

मै मानव समाज से भी अनुरोध करता हूं कि वे अपने अंतरात्मा के अनुकूल धर्म को मानें, तथाकथित धर्म के चक्कर में आकर मानवता के खिलाफ, मानव-मानव के बीच भेदभाव, छूआछूत, घृणा और नफरतें न करें। क्योंकि समस्त मनुष्य का जन्म समान प्रक्रिया से होती है जो एक ही प्रकृति द्वारा पोषित हैं, जिस प्रकृति द्वारा हम अभिसिंचित हैं वह प्रकृति हम सभी मानव से समान व्यवहार करती है, किसी से भेद नही करती है। यह प्रकृति ही देवता है जो सबको समान रूप से देती है, ईश्वर है जो समस्त ऐश्वर्य का कारण है, परमात्मा है जो समस्त आत्माओं की हेतु है। 

आपसे पुनः अनुरोध है आओ आज संकल्प लें कि हम प्रकृति के सिद्धान्तों के अनुकूल ही व्यहार करेंगे, इसके विपरित कृत्य नही करेंगे। मानव-मानव को एक समान मानेंगे और सच्चे अर्थों में मनुष्य बनकर रहेंगें नैसर्गिक सिद्धान्त को अपने धर्म में शामिल करेंगे। क्योंकि प्रकृति का सिद्धान्त अर्थात नैसर्गिक सिद्धान्त ही न्याय है, सच्चा धर्म और सर्वोच्चतम् जीवन शैली है।

जो किसी दूसरे व्यक्ति/मनुष्य से घृणा अथवा नफ़रत करते हैं, उन्हें कारणों/मापदण्ड की समीक्षा करनी चाहिए, कि क्या उनका मापदण्ड नैसर्गिक (प्रकृति) के सिद्धांत के अनुकूल है?

यदि, आपका आचरण नैसर्गिक सिद्धांतों के अनुकूल है तभी आप सच्चे अर्थों में मानव हैं। अन्यथा आपसे अनुरोध है कि आप नैसर्गिक सिद्धांत को समझें, यही न्याय है, यही सच्चा धर्म है और यही सर्वोत्तम मानव जीवन शैली भी है। 


(एचपी जोशी)
अटल नगर, रायपुर
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संवैधानिक निकायों को कमजोर करने के खिलाफ सचेत किया : उपराष्ट्रपति

केंद्रीय सर्तकता आयोग, नियंत्रक‍ और महालेखा परीक्षक और निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक निकायों को कमजोर करने के खिलाफ सचेत किया : उपराष्ट्रपति

भारत विश्‍वभर के निवेशकों के लिए एक आकर्षक लक्ष्य के रूप में उभरा है: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने प्रबंधन संस्थानों से वैश्विक परंपराओं को अपनाने के लिए कहा;

छात्रों को ज्ञान और उन्नयन कौशल से अपने आपको लैस करने के लिए कहा;

ग्रेट लेक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत विश्‍वभर के निवेशकों के लिए एक आकर्षक लक्ष्य के रूप में उभरा है। उन्‍होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को उच्च मानकों को बनाए रखना चाहिए और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना चाहिए। श्री नायडू आज चेन्नई में ग्रेट लेक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस बात की चर्चा करते हुए कि भारत अगले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है,  श्री नायडू ने बताया कि आर्थिक असंतुलन, शहरी-ग्रामीण विभाजन, स्‍त्री-पुरूष भेदभाव और सामाजिक भेदभाव को दूर करने तथा सभी संस्थानों की प्रतिष्ठा बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी), नियंत्रक‍ और महालेखा परीक्षक (कैग) और निर्वाचन आयोग, संसद और राज्य विधानसभाएँ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की पवित्रता को कमजोर करने के लिए किसी को भी कुछ नहीं कहना या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई शिकायत हो तो उसके निवारण के लिए उपयुक्त मंच भी उपलब्‍ध हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है और प्रभावी चुनाव प्रणाली और नियमित आधार पर चुनाव कराने का ट्रैक रिकॉर्ड है। चुनावों को  ‘लोकतंत्र का त्योहार’ बताते हुए, उन्होंने निर्वाचन आयोग को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संचालन के लिए बधाई दी।

संस्‍थान से उतीर्ण होने वाले छात्रों को अपने अल्मा मेटर का सम्मान करने और हमेशा अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए काम करने का आह्वान करते हुए, श्री नायडू ने उन्हें अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने और सामाजिक रूप से कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के परिसरों पर माहौल को बाहरी मुद्दों से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए और उन्होंने प्रसन्‍नता व्यक्‍त करते हुए कहा कि कुछ को छोड़कर, अधिकांश 900 विश्वविद्यालय किसी भी व्‍यवधान से मुक्त हैं।

उपराष्ट्रपति ने उन्हें अपने माता-पिता, मातृभाषा, मूल स्थान, मातृभूमि और गुरु (शिक्षक) की उपेक्षा नहीं करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें मातृभूमि की सुरक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा के लिए भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, "साथी इंसानों का ख्याल रखना राष्ट्रवाद है और केवल वंदे मातरम या जय हिंद कहना राष्‍ट्रवाद नहीं है।" उन्होंने छात्रों में नैतिकता और नैतिक मूल्यों को विकसित करने के लिए शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

यह बताते हुए कि प्रबंधन केवल कॉर्पोरेट क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, श्री नायडू ने कहा कि प्रबंधन अध्ययन का दायरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और संबद्ध उद्योग तक बढ़ाना चाहिए और इन क्षेत्रों को व्यवहार्य और जीवंत बनाने के लिए समाधान प्रदान करना चाहिए।

कृषि को संकट में बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि को लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए संरचनात्मक बदलाव लाने और नई रणनीतियों और कार्यक्रमों की जरूरत है। कर्म योग कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों के साथ बातचीत करने के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए ग्रेट लेक इंस्टीट्यूट की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण समस्याओं को जानना और समझना उनके लिए महत्वपूर्ण है।

श्री नायडू ने भारतीय प्रबंधन संस्थानों के लिए वैश्विक रूप से स्वीकृत शिक्षण परपंराओं, कार्यप्रणाली और पाठ्यक्रम को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे छात्रों को वैश्विक रोजगार बाजार में विधिवत मान्यता मिले। भारतीय संस्थानों को वैश्विक प्रमुखता प्राप्त करने और अन्य प्रबंधन संस्थानों के साथ तालमेल कायम करने के लिए विश्व स्तर पर स्वीकृत मापदंड अपनाने होंगे। उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के संस्थानों के साथ इस तरह के अकादमिक संबंध छात्रों को शिक्षण अनुभव प्रदान करने का एक शानदार तरीका है"।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को बताया कि वे एक बहुत ही रोमांचक मोड़ पर भारत की विकास की गाथा में शामिल हो रहे हैं। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और स्टार्टअप के लिए दूसरा सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र बन गया है।

यह बताते हुए कि चौथी औद्योगिक क्रांति तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित थी, श्री नायडू ने संस्‍थान से उतीर्ण होने वाले छात्रों से कहा कि प्रबंधकों के रूप में उन्हें औद्योगिक प्रक्रियाओं और प्रथाओं में प्रौद्योगिकी संचालित परिवर्तनों का प्रबंधन करने की आवश्यकता होगी। उपराष्ट्रपति ने कहा ”प्रत्येक परिवर्तन संभावित रूप से विघटनकारी है। आपको इस व्यवधान को नियंत्रित और प्रबंधित करना होगा। इसलिए अपने आप को ज्ञान से लैस करें और अपने कौशल को लगातार उन्नत करें” ।

उपराष्ट्रपति ने अपना संदेश दिया, उन्होंने थिरुक्कलुर के हवाले से कहा: “जो सीखा है उसे अच्छी तरह से जानो। और जो अधिक महत्वपूर्ण है, वह है उस शिक्षा के प्रति सच्चा रहना।

अपनी कक्षा 12 की परीक्षाओं में शानदार युवा छात्रों की प्रभावशाली शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा “जैसा कि हम उनकी उपलब्धियों का आनंद लेते हैं, यह हमारी पूरी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें वैश्विक मानकों की सर्वोत्तम और सस्ती उच्च शिक्षा प्रदान करें जिससे उन्हें वैश्विक रोजगार ब
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खुशखबरी-बधाई हो; आपका रिजल्ट जारी हो गया ...... कक्षा-10वीं/12वीं का रिजल्ट देखनें के लिए यहां क्लिक करें - HP Joshi


छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल से कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं के छात्र छात्राएं अपना परीक्षा परिणाम निम्न लिंक को क्लिक करके जान सकते हैं, उन्हें कहीं इंटरनेट कैफे वगैरह में भटकने की जरूरत नही।

लू और गर्मी से बचें, घर से बाहर निकलने से परहेज करें।

कक्षा-10वीं के रिजल्ट के लिए Server1  या  Server2 में क्लिक करें l

कक्षा-12वीं के  रिजल्ट के लिए Server1  या  Server2 में क्लिक करें l



आपसे आग्रह है अच्छी तरह सोच विचार कर ही विषय का चयन करें। गर्मी के दिनों में आगामी कक्षा की पढाई जारी रखें और पिछले 5वर्षों के अनसाल्ड पेपर को साल्व करते रहें।


कैसे देखें रिजल्ट :- उपर नीले रंग या लाल रंग में लिखे सर्वर Server में क्लिक करने पर एक नया पेज खुलेगा जिसमें निम्नानुसार जानकारी दर्ज कर अपना रिजल्ट देखें।
  • Enter Your Roll Number(*) - के सामने खाली स्थान (बाक्स में) अपना रोलनंबर डालें।
  • Enter Captcha(*) - के सामने खाली स्थान (बाक्स में) कैप्चा कोड Captcha डालें जो बाक्स के पीछे 06 अंकों में लिखा होगा।
  • उपरोक्त दोनो बाक्स में रोलनंबर व कैप्चा कोड डालने के बाद, Submit (सबमिट बटन) पर क्लिक करें।

परीक्षा में असफल होने वाले छात्र-छात्राओं से मेरा निवेदन है कि वे किसी भी शर्त में आत्मघाती कदम नही उठायें, अगले वर्ष के लिए प्रयास करें, मन लगाकर पढेंगे तो आगे चलकर अवश्य सफल होंगे। परीक्षा में असफल होने का मतलब जीवन में असफल होना नही होता। ऐसे लाखों प्रकरण है जिसमें परीक्षा में सदैव अव्वल आने वाले भी सुखमय जीवन नही जी पाते है जबकि 2-3 साल में एक कक्षा पास होने वाले भी सुखमय और सफलतम जीवन जीते हैं।


(HP Joshi)
Atal Nagar, Raipur, (Chhattisgarh)


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विधवाओं के लिए मौजूदा समाजिक नियम अमानवीय और अत्याचार है जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन करती है - HP Joshi

विधवाओं के लिए मौजूदा समाजिक नियम अमानवीय और अत्याचार है जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन करती है - HP Joshi

समाजिक नियमों के नाम पर पति के देहांत होने पर रोती बिलखती महिला को पहले जबरदस्ती अच्छे कपडे पहनाया जाता है सोलह श्रृंगार किया जाता है और फिर कतार में तलाब अथवा नदी ले जाकर उनके सारे श्रृंगार को हमेशा हमेशा के लिए जबरदस्ती और अमानवीय तरीके से छीन लिया जाता है। उसके बाद भी हमारा जी नही भरता और जीवनभर के लिए छद्म समाजिक नियम के नाम पर सैकडों प्रतिबंध लगा देते हैं जिसपर उसका पूरा अधिकार होता है। 

कतिपय मामलों में विधवा पुनर्विवाह के प्रकरण को छोडकर, संबंधित महिला को जीवनपर्यंत अपने इच्छाओं का दमन करना पडता है, समाजिक अत्याचार और शोषण का शिकार होना पडता है। समाजिक रिवाज के नाम पर विधवा महिलाओं के साथ हो रही कृत्य केवल समाजिक बुराई मात्र ही नही है जिसे हमें जल्द ही रोकना चाहिए, बल्कि यह संबंधित महिला के साथ अत्याचार, प्रताडना और अमानवीय कृत्य है। कल तक जब समाज का अधिकांश सदस्य अशिक्षित था तब तक ऐसे कृत्य को समाजिक नियम और रितिरिवाज के नाम पर बर्दास्त किया जाता रहा है। परन्तु अब समाज शिक्षित है और वह अच्छे-बूरे का ज्ञान रखती है। इसलिए ऐसी व्यवस्थाओं को तत्काल समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

समाजिक नियम के नाम पर हम अपनी माताएं, बहनें, बेटियों, बहुएं और पत्नी के साथ हम कितना अत्याचार कर रहे हैं? क्या हमें ऐसी अमानवीय सामाजिक नियम को तत्काल समाप्त नही कर देना चाहिए? 

आपसे अनुरोध है आइये सकारात्मक पहल करें ताकि हमारी माताएं, बहनें, बेटियों, बहुएं और पत्नी विधवा होने के स्वाभीमानपूर्ण जीवन जी सकें। विधवा महिलाओं को अत्याचार और अमानवीय शोषण से मुक्त करने में आपका योगदान आवश्यक है।

कुछ प्रश्न ???

  • अगले जन्म में यदि आप विधवा हुए तो क्या आप इसे बर्दास्त करेंगे?
  • क्या ऐसे समाजिक नियमों का काई औचित्य है? जिसमें हम किसी के साथ अमानवीय अत्याचार करते हों।



एचपी जोशी
अटल नगर, रायपुर

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