विशेष महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा पहुंचे नारायणपुर तीनों जिला नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव में संचालित नक्सल अभियानों की समीक्षा की

विशेष महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा पहुंचे नारायणपुर तीनों जिला नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव में संचालित नक्सल अभियानों की समीक्षा की

★ श्री अशोक जुनेजा, विशेष पुलिस महानिदेशक, (नक्सल ऑपरेशन) पहुंचे नारायणपुर।

★ तीन जिलों नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव में संचालित नक्सल अभियानों की समीक्षा की।

★ नक्सल अभियान की समीक्षा में आईजी (बीएसएफ) श्री एस.के. त्यागी, बस्तर आईजी श्री सुन्दरराज पी., डीआईजी (बीएसएफ) श्री एस.एस. दबास, डीआईजी (बीएसएफ, ऑप्स) श्री अनिल कुमार ठाकूर, डीआईजी (बीएसएफ) श्री संजय शर्मा, डीआईजी (आईटीबीपी) श्री पी.एस. डंगबाल, डीआईजी (एसएसबी) श्री सुधीर कुमार, डीआईजी कांकेर श्री बालाजी सोमावार, एसपी कांकेर श्री शलभ सिन्हा, एसपी कोंडागांव श्री सिद्धार्थ तिवारी और एसपी नारायणपुर श्री यू. उदय किरण, सेनानी (बीएसएफ) श्री अनंत, सेनानी (आईटीबीपी) श्री समर बहादुर, सेनानी (आईटीबीपी) श्री पवन सिंह, सेनानी (बीएसएफ) श्री राजीव शर्मा, सेनानी (आईटीबीपी)  श्री पंकज वर्मा, सेनानी (आईटीबीपी) श्री भानुप्रताप सिंह और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नारायणपुर श्री नीरज चन्द्राकर सहित केन्द्रीय सशस्त्र बल और पुलिस के राजपत्रित अधिकारी उपस्थित  रहे।

आज दिनांक 24.08.2021 को श्री अशोक जुनेजा, विशेष पुलिस महानिदेशक (नक्सल ऑप्स.) छत्तीसगढ़ द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय नारायणपुर के सभाकक्ष में जिला पुलिस बल, बीएसफ और आईटीबीपी के अधिकारियों की समीक्षा बैठक लिया गया। बैठक में विगत वर्षो में घटित नक्सल अपराध एवं घटनाओं पर चर्चा के साथ-साथ जिले की कानून व्यवस्था एवं नक्सल उन्मूलन को लेकर योजनाओं एवं रणनीति की समीक्षा की। श्री जुनेजा द्वारा आगामी दिनों में माओवादी नक्सलियों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करने एवं नक्सलियों को बैकफुट पर लाने के लिये अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया।

श्री जुनेजा ने नक्सल विरोधी अभियान, जैसे आरओपी, एरिया डाॅमिनेशन और नक्सल गस्त-सर्चिंग के दौरान पुलिस एवं केन्द्रीय बलों द्वारा बेहतर कम्युनिकेशन और गुणवत्तायुक्त समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर, कांकेर और कोण्डागांव द्वारा अपने-अपने जिले में संचालित नक्सल अभियानों की रूपरेखा को रेखांकित करते हुए पाॅवर प्वाईंट प्रजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी गई।

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स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए आवश्यक समुदाय के प्रति सम्मानजनक नजरिया बनाये रखना आवश्यक है - श्री हुलेश्वर जोशी

स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए आवश्यक समुदाय के प्रति सम्मानजनक नजरिया बनाये रखना आवश्यक है - श्री हुलेश्वर जोशी 

सर्वप्रथम मैं हुलेश्वर जोशी समस्त भारतीय नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई देता हूँ






जैसा कि आपको ज्ञात है, कि आज 15 अगस्त 2021 को हम भारतीय नागरिक 75वीं स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। संभव है आपने उन लाखों वीर शहीद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को भी नहीं भूला होगा जिन्होनें आपकी आजादी के लिये अपने प्राणों की आहूति दे दी। आपको पता होनी चाहिये कि आपको स्वतंत्र कराने के लिए लाखो महापुरूषों ने दर्जनों बार जेलों और कालापानी में यातनाएँ भी सहा है। हमें स्मरण होनी चाहिये कि ये आजादी इतनी आसान नहीं हैं बल्कि लाखों शहादतों की परिणाम है। हमारी संवैधानिक ढ़ाचे इतने बेहतरीन तरीके से तैयार किये गये हैं कि हम अपनी स्वतंत्रता को हमेशा बरकरार रख सकते हैं। हमारे आजादी पर कोई आँच नहीं आ सकती है।

आप जिन मौलिक अधिकारों और मानव अधिकारों सहित सैंकड़ो अधिकारों का लुफ्त उठा रहे हैं इसमें हमारे तीनों सेनाओं के सैनिकों, केन्द्रीय और राज्य सशस्त्र बल तथा सिविल पुलिस सहित अन्य समस्त सुरक्षा एजेंसियों के जवानों की बलिदान, प्राणों की समर्पण तक संकल्पि तत्परतापूर्ण कठोर ड्यूटी भी शामिल है। आपकी स्वतंत्रता को बनाये रखने के साथ ही आपकी सम्पुर्ण सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन के लिए ये जवान निरंतर मुरूतैद हैं। सायद मेरे जैसे ही आपको भी दुःख होता होगा जब आप देखते होंगे कि कुछ असमाजिक तत्व कतिपय कारणों से हमारे जवानों के योगदान को भूलकर अहसानफरामोशी करते हुए इन्हें अपमानित करने का कारण खोजते हैं। काल्पनिक, झूठे और आधारहीन आरोप के द्वारा अपराधी प्रमाणित कर जाते हैं। कुछ अपराधिक प्रवृत्ति के लोग जवानों के साथ अभद्रता और बत्तमीजी करने में अपनी शान समझने की भूल करते हैं। अतः आपसे अनुरोध है, कि आईये आज संकल्प लें कि हम अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, वीर शहीदों और जवानों के प्रति सच्ची श्रद्धा और सम्मान की भावना का विकास करेंगे।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हमारे लिये ये संकल्प लेना आवश्यक है कि ‘‘हम अपनी आजादी को बनाये रखेंगे। हम स्वतंत्रता को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सेना के जवानों, पुलिस-प्रशासन और न्यायालयों को इम्पाॅवर करने के लिये तत्पर रहेंगे।’’ ख्याल रखियेगा, संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढ़ाचे को किसी भी स्थिति में कमजोर करने का प्रयास करना न सिर्फ हमारे अपने लिये वरन् आने वाली पीढ़ी के लिये भी आत्मघाती होने वाली है।
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पोदला उररकना कार्यक्रम के तहत् बस्तर आईजी श्री सुन्दरराज पी. ने पुलिस थाना और कैम्पों में वृक्षारोपण की शुरूआत की

पोदला उररकना कार्यक्रम के तहत् बस्तर आईजी श्री सुन्दरराज पी. ने पुलिस थाना और कैम्पों में वृक्षारोपण की शुरूआत की

बस्तर आईजी श्री सुन्दरराज पी. दिनांक 06 अगस्त 2021 को जिला नारायणपुर के प्रवास पर रहे। प्रवास के दौरान सर्वप्रथम ‘‘पोदला उररकना कार्यक्रम’’ के तहत उन्होने 29वीं बटालियन आईटीबीपी, कैम्प नेलवाड़ के जवानों और स्कूली बच्चों के साथ मिलकर पुलिस थाना और कैम्प में वृक्षारोपण की शुभारंभ की। वृक्षारोपण के दौरान छात्र-छात्राओं से बात करते हुए उन्हें प्रकृति की संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित करते हुए वृक्षारोपण के फायदे बताये साथ ही स्कूली शिक्षा और जीवन में सफलता के टिप्स दिये तथा बच्चों को ख़ुद ही चाॅकलेट और बिस्कुट वितरित किये। आईजी से मिलकर छात्र-छात्राओं ने खुशी जाहिर करते हुए प्रकृति की संरक्षण के लिए तत्पर रहने की बात कही। वृक्षारोपण उपरांत जवानों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रखने के लिए आईटीबीपी कैम्प, नेलवाड़ के जवानों को जीम सामग्री प्रदाय करते हुए जिला नारायणपुर क्षेत्रांतर्गत 15 पुलिस थाना और कैम्प में जीम स्थापना की शुरूआत की।

आईटीबीपी कैम्प नेलवाड़ में वृक्षारोपण सह जीम शुभारंभ के बाद आईजी बस्तर श्री सुरन्दराज पी. द्वारा 193वीं बटालियन बीएसएफ कैम्प एवं थाना भरण्डा का विजिट किया गया। बीएसएफ के जवानों से मिलकर आईजी ने कुशलक्षेम जाना और जवानों की उत्साहवर्धन के लिए टिप्स दिये। इसके उपरांत ‘‘पोदला उररकना कार्यक्रम’’ के तहत् आईजी बस्तर ने जवानों और ग्रामीणों के साथ मिलकर कैम्प में वृक्षारोपण की तथा जवानों को जीम सामग्री प्रदाय किये। इस दौरान ग्रामीणों खासकर महिलाओं को पुलिस और फोर्स को अपनी समस्याओं से अवगत कराने तथा पुलिस द्वारा त्वरित निराकरण एवं सहयोग प्रदान करने की आश्वासन दिया।

इस दौरान श्री उदय किरण (पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर), श्री समर बहादूर सिंह (सेनानी, 29वीं बटालियन आईटीबीपी), श्री राजीव शर्मा (सेनानी, 193वीं बटालियन बीएसएफ), श्री नीरज चन्द्राकर (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक), सुश्री उन्नति ठाकूर (उप पुलिस अधीक्षक), श्री अभिनव उपाध्याय (उप पुलिस अधीक्षक), श्री अर्जुन कुर्रे (उप पुलिस अधीक्षक), श्री दीपक साव (रक्षित निरीक्षक, नारायणपुर), श्री प्रदीप जोशी (रक्षित निरीक्षक), श्री मनोज बंजारे (थाना प्रभारी, बेनुर) सहित दर्जनों पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

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इंग्लिश मीडियम के स्टूडेंट्स और हिन्दी माध्यम के पालक; समस्या और निदान : श्री हुलेश्वर जोशी

इंग्लिश मीडियम के स्टूडेंट्स और हिन्दी माध्यम के पालक; समस्या और निदान : श्री हुलेश्वर जोशी

यदि आपका बच्चा इंग्लिश मीडियम स्कूल में अध्ययनरत है और आप हिन्दी माध्यम से कम पढ़े लिखे व्यक्ति हैं; इसका तात्पर्य ये कि आपके बच्चे की बेसिक स्कूलिंग/ लर्निंग में पिछड़ने की लगभग गारंटी है। इन समस्याओं के निराकरण पर आधारित इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
आपसे अनुरोध है कि इसे अन्य पालकों को भी फारवर्ड करें अथवा जो पालक स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं करते उनका उचित मार्गदर्शन करें...

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि जिस इंग्लिश (गैरमातृभाषा) को आप लगभग ग्यारह साल की उम्र में कक्षा छठवीं से पढ़ना शुरू किए, जब आप पूरी तरह से स्थानीय बोली/भाषा और मातृभाषा हिन्दी में पूरी तरह से परिपक्व हो चुके थे। आपके बच्चों के साथ ऐसा कदापि नहीं है; हालाँकि आपने छः-सात साल की उम्र में सीधे कक्षा पहली में प्रवेश लिया था; जबकि आपका बच्चा ढ़ाई से तीन साल की उम्र में ही फर्स्ट क्लास से तीन साल पहले नर्सरी में एडमिशन लेता है। आपसे आपके बचपन की यादें ताज़ा करने को कहा जाए तो लज्जा से आप लाल हो जाएं हालाँकि कुछ कम ही सही मगर नर्सरी के दौरान आपका बच्चा भी ठीक वैसे ही एक्ट करता है जैसे आप ढ़ाई तीन साल के उम्र में करते थे। आपको हँसी नहीं आना चाहिए कि हम जब तीन साल के थे तो बिना माँ-पापा, दादा-दादी अथवा बुआ-चाचा या चाची के सहयोग के बिना भूखे-प्यासे, मुँह में धूल धक्कड़ और कीचड़ से सने ही नहीं बल्कि कपड़े रहित ठीक जैसे जन्म लिए थे अपने मटमैले आँगन में घूमते थे। कई पड़ोसी तो गली के नल और कुआँ तक ऐसे ही निर्वस्त्र चले जाते थे। ऐसी घटनाएँ सायद आपने भी देखी हो, मैं जब कक्षा दूसरी में पढ़ता था तब एक 9वर्षीय सहपाठी क्लासरूम में सुसु कर दिया था। वैसे डिसिप्लिण्ड टीचर के होमवर्क के भय के कक्षा 5th के स्टूडेंट्स के बारे में भी अनेक रोचक बातें जानता हूँ।

अब आप ज़रा विचार करिये, जिस उम्र में आप खुद के कपड़े पहन नहीं पाते थे उस उम्र में अपने बच्चों से एक साथ तीन तीन लैंग्वेज सीखने की अपेक्षा रखते हैं तो ये आपकी गलती है। मैं दावे से कह सकता हूँ आप में से कुछ पालक आज भी अपने बच्चे को नर्सरी क्लास के लिए मेनिपोको पैंट पहनाकर भेजते होंगे। मगर अपेक्षा, दबाव और प्रताड़ना इतनी की एक दिन में ही पटवारी बनने जितना उनका बच्चा सीख जाए। प्रेसर मत दीजिये, प्रताड़ित मत करिये बालकों को, उन्हें मेरिट के घानी में मत फांदिये; थोड़ा बचपन भी जीने दीजिए।

आप इंग्लिश मीडियम के या बहुत पढ़े लिखे न हों तो दावे से कह सकता हूँ आप इंग्लिश मीडियम फर्स्ट क्लास की होमवर्क करके देखिए, आपकी औकात का पता चल जाएगा। मैं हिन्दी मीडियम के 40+ उम्र के ऐसे साथियों को भी जानता हूँ जो अंग्रेजी में स्नातकोत्तर अर्थात मास्टर डिग्री प्राप्त हैं; ये लोग भी PP2/LKG की होमवर्क के लिए गूगल ट्रांसलेट और ऑक्सफ़ोर्ड की डिक्शनरी की सहायता लेते हैं। अंग्रेजी में स्नातकोत्तर आप अंग्रेजी में एक सादा आवेदन नहीं लिख पाते और अपने 10साल के बच्चे से फर्राटेदार इंग्लिश बोलने की अपेक्षा रखते हैं।

आप समझिए; बिना सहयोग, बिना कोचिंग के ख़ासकर उन विषयों के लिए जो आपके बच्चे की मातृभाषा अथवा मातृबोली न हो उसके लिये प्रेसर मत दीजिये, प्रताड़ित मत करिये। 

आप नर्सरी से क्लास थ्री तक के बच्चे को कोचिंग में भेज रहे हों चाहे न भेज रहे हों उनके होमवर्क में स्पोर्ट के लिए आपकी अंग्रेजी भी अच्छी होनी चाहिये। मगर कैसे? ये तो संभव नहीं है कि आप अपना कामधंधे, कृषि मजदूरी अथवा नौकरी/रोजगार छोड़कर इंग्लिश स्पीकिंग सीख लें। इसका तात्पर्य ये है कि आपको कुछ आसान उपाय जानना चाहिए जिससे अंग्रेजी माध्यम के सिलेबस में से आप होमवर्क आसानी से करा सकें।

निदान:
भाग-1, स्मार्टफोन और गूगल आधारित
1- अपने स्मार्टफोन में गूगल ट्रांसलेट डाऊनलोड कर लीजिए।
2- गूगल ट्रांसलेट में होमवर्क में दिए गए प्रश्नों को इंग्लिश में टाइप करके अपनी मातृभाषा में अनुवाद करें..
3- जिस यूनिट/लेसन से होमवर्क मिला हो उसे टाइप करके मातृभाषा में अनुवाद करें...
4- अपनी समझ के आधार पर प्रश्नों का उत्तर लिखने में आपको सहायता मिलेगी।
5- यूट्यूब में सिलेबस और ग्रामर इत्यादि उपलब्ध है, यूट्यूब में सर्च करके इसका लाभ उठा सकते हैं। यूट्यूब में कई ऐसे चैनल हैं जो आपकी काफ़ी हद तक मदद कर सकती है।

भाग-2, किताब आधारित समझ वृद्धि
(यदि आपके पास स्मार्टफोन न हो अथवा इंटरनेट की व्यवस्था न हो)
1- ऑक्सफोर्ड अथवा किसी अच्छे प्रकाशक की हिन्दी से इंग्लिश और इंग्लिश से हिन्दी की बड़ी डिक्सनरी खरीद लें। यदि आपकी मातृभाषा हिन्दी न हो तो अपनी मातृभाषा से सम्बंधित डिक्सनरी खरीदें।
2- अब्दुस सलाम चाउस, की "इंस्टेंट इंग्लिश" नामक किताब अथवा अन्य किताब खरीद लें और इसका नियमित अध्ययन करें।
3- इंग्लिश ग्रामर के लिए 9th से 12th के बीच किसी भी क्लास की युगबोध प्रकाशन की इंग्लिश की गाइड खरीद लें। आप चाहें तो दूसरी कोई अच्छी क़िताब भी खरीद सकते हैं।
4- बच्चे को होमवर्क कराने के साथ साथ आप भी अपने स्किल्स में वृद्धि करने के लिए बच्चे के पाठ्यपुस्तक को कम से कम एक घंटा जरूर पढ़ें।

विशेष: लेखक शिक्षाशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त हैं परंतु हिन्दी माध्यम की शिक्षा प्राप्त करने तथा इंग्लिश मीडियम के बच्चे का पेरेंट्स होने के कारण स्वयं समस्याओं से सरवाइव कर रहा है।
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व्यापार सुझाव : "कॉर्न फ्लेक्स" का व्यापार, ऐसा व्यापार जो आपको 500% का मुनाफ़ा देने को तैयार है - श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी

व्यापार सुझाव : "कॉर्न फ्लेक्स" का व्यापार, ऐसा व्यापार जो आपको 500% का मुनाफ़ा देने को तैयार है - श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी

यदि आप व्यापारी हैं या व्यापार करने के इच्छुक हैं तो CORN Flakes का व्यापार आपको 300% से 500% तक की शुद्ध आमदनी दे सकता है। हालांकि मैं  व्यापार के नाम पर आपको ग्राहकों से लूट करने की सहमति नहीं दे रही हूँ। आपसे अनुरोध है कि आप मल्टी नेशनल कंपनी का विकल्प बनकर ग्राहकों को कम दामों में आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराएं। मेरी यही उद्देश्य  है।  

Corn Flakes का वैट और मूल्य :
उदाहरण के लिए Kellogg CORN FLAKES की एमआरपी चेक कर लीजिये; जो अधिकतर दुकानों और मेडिकल स्टोर में एमआरपी में ही मिलती है। 250 ग्राम कॉर्न फ्लेक्स का एमआरपी 95/- पंचानबे रुपये है।

जोंधरी/भुट्टा से CORN FLAKES बनाने की विधि :
1- बस्तर से ₹10/kg में CORN (जोंधरी/भुट्टा) खरीद लें।
2- भुट्टा (CORN) को साफ़ करवा लें।
3- साबुत भुट्टा (CORN) को उबाल लें।
4- उबले हुए भुट्टा (CORN) को मशीन की सहायता से प्रेस कर चपटी कर लें अर्थात फ्लेक्स का आकार दे दें।
(नोट: इसके लिए संभव है पोहा बनाने की मशीन भी काम में लायी जा सकती है या कॉर्न फ्लेक्स के साथ आप पोहा बनाने का भी व्यापार एक ही मशीन से कर सकते हैं।)
5- चपटी भुट्टा (CORN Flakes) को हल्के से सेंक लें; अर्थात Toast कर दें।
6- अपने ब्रांड के नाम लगे पैकेट्स में वजन करके पैकेजिंग करें।
7- बधाई हो! आपकी व्यापार निकल पड़ी। आप ₹10/-KG वाले भुट्टा को ₹400/-KG में बेचने वाले व्यापारी बन चुके हैं।


सलाहकार :
श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी,
नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
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What is Merit? : मेरिट की बात, कहीं कुछ स्टूडेंट्स और प्रतियोगी उम्मीदवारों के साथ अन्याय तो नहीं!

What is Merit? : मेरिट की बात, कहीं कुछ स्टूडेंट्स और प्रतियोगी उम्मीदवारों के साथ अन्याय तो नहीं!
"सर्कस के शेर, हाथी, कुत्ते और अन्य जानवर सर्कस में अधिकतर एक्ट बेहतर कर सकते हैं। यदि अन्य स्वजातीय जानवरों के साथ इनकी एक मानक टेस्ट या परीक्षा ली जाये तो सर्कस के ये जानवर अन्य जानवरों से अच्छे या कहें तो अधिक अंक लाएंगे। ख्याल रखना इन नम्बर्स के आधार पर आप इन सर्कस वाले जानवरों को स्किल्ड समझ सकते हैं मगर इन्हे मेरिटधारी समझना आपकी गलती होगी।" HP Joshi

चलिए अब मनुष्यों के भी भ्रम को तोड़ते हुए मेरिट के बारे में कुछ बातें कर लेते हैं, क्योंकि  एक वर्ग खुद को मेरिटधारी समझने की गलती कर रहा है और अपनी मानसिकता में गैर मेरिट लोगों को देश के उन्नति के लिए घातक प्रमाणित करने की कोशिशें कर रहे हैं।  

What is this merit?
सबसे पहले हम "व्हाट इस मेरिट?" को ही जान लेते हैं : "मेरिट वह है मानक है जो किसी भी टेस्टिंग थ्योरी में सर्वाधिक अंक हासिल करने वालों को दी जाती है।"  हालाँकि अब तक की थ्योरी के आधार पर यह उचित थ्योरी है मगर इसमें निहित अन्याय को हम अनदेखी कर जाते हैं। हम मेरिट सिस्टम की कमी क्या है इसे जानने और दूर करने की कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं ये अत्यंत दुर्भाग्यजनक है। 

आप कहेंगे, फिर कमी क्या है ? 
मैं पुनः प्रश्न करूँगा क्या टेस्ट अथवा एग्जामिनेशन में शामिल समस्त प्रतिभागियों की स्टार्टिंग लाइन समानांतर थी? 
आप कह सकते हैं "हाँ" क्योकि आपका दर्शन सिमित है।  
मैं कहूंगा- नहीं, क्योंकि सभी प्रतिभागियों को उनके स्टार्टिंग ऑफ़ लाइफ से अवसर की समानता नहीं मिलती है। 

आपको कोई ताज्जुब नहीं होगी कि मोटी फ़ीस वाली बड़ी स्कूलों, एक्सपर्ट्स कोचिंग, व्यक्तिगत ट्यूटर सहित घरेलु काम, पारिवारिक समस्याओं से मुक्त लोग ख़ुद को मेरिट वाले बताते हैं। जबकि यह जांचने की न्यायोचित तकनीक नहीं है; क्योंकि मेरिट और ग़ैरमेरिट का सवाल तब न्यायोचित होगा, जब सभी प्रतिभागियों की शिक्षा और जीवन में अवसर की समानता हो।

वे ग़ैरमेरिट हो ही नहीं सकते जो:
1- असुविधाओं से युक्त जीवन जीने को मजबूर हों।
2- जिन्हें अपनी स्किल्स बढ़ाने का अवसर न मिला हो।
3- जिन्हें अच्छी स्कूल, कोचिंग और निजी ट्यूटर न मिला हो।
4- जिनके पास अच्छे प्रकाशको की किताबें, गाइड, स्मार्टफोन, TV, AC, कूलर, बड़े बंगले न हों।
5- जिनके स्कूल जाने के लिए Ac वाहन न हो।
6- जिनके होमवर्क के लिये घर में सदस्य न हों।
7- जिनके घर में हाई स्पीड Free WiFi न हो।

यदि आप भी मेरिट की ढिंढोरा पीटने वालों में से हैं तो आओ अपनी औकात आजमा लो हम मूलनिवासी, खासकर आदिवासियों के साथ। आओ तो भला कम से कम 01 साल ही अबूझमाड़ में जीकर देखो... तुम्हारी पूरी मेरिट बासी हो जाएगी।

मेरा मानना है सामाजिक न्याय के लिए केवल आरक्षण अथवा जनसंख्या के आधार पर सामाजिक प्रतिनिधित्व का अधिकार ही पर्याप्त नहीं है बल्कि सभी स्टूडेंट्स को समान अवसर उपलब्ध कराया जाना भी आवश्यक है। हालाँकि मैं कुछ ख़ास स्टूडेंट्स को ख़ास ट्रीटमेंट मिलने का विरोध कर सकता था, मगर मैं मानव समुदाय के उन्नति का विरोधी नहीं हूँ।

HP Joshi, Narayanpur (Chhattisgarh)
लेखक "अंगूठाछाप लेखक" नमक किताब के लेखक हैं। 
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