पापा वीरप्पन सामाजिक सम्मान के लिए अधिसूचना जारी - HP Joshi

पापा वीरप्पन सामाजिक सम्मान के लिए अधिसूचना - HP Joshi

एतद्दवारा "पापा वीरप्पन सामाजिक सम्मान" के लिए अधिसूचना जारी किया जाता है। इसलिए आइएं आज हम एक ऐसे पिता के बारे में जानते हैं जैसा लगभग हर गांव में और हर मोहल्ले में ही नहीं वरन् हर परिवार में एक दो मिल ही रहे हैं।

मैं उन माता - पिता के बारे में बताने के पहले उन्हें एक उपाधि/सम्मान देने की घोषणा कर देना चाहता हूं, क्योंकि हर विशिष्ट कार्य करने वालों की अधिकार है उपाधि पाना, सम्मान पाना। ऐसे में उनके विशेष कार्य के लिए विशेष उपाधि देना भी आवश्यक है। पूरे दुनिया की परम्परा रही है जो सबसे पहले अपने संबंधित काम में फेमस होते हैं उनके नाम से ही उपाधियों की शुरुआत होती है। 

अब मैं उपाधि/सम्मान के लिए कुछ नाम प्रस्तावित करता हूं :-
# वीरप्पन के औलाद
# वीरप्पन के वंशज
# पापा वीरप्पन सामाजिक सम्मान

उपरोक्त तीनों नामांकन में से एक का चयन करना मेरे लिए अत्यंत कठिन था, इसलिए मैंने सोचा अपनी पत्नी विधि से इन तीनों नाम में से चयन करने का सुझाव मांगा, वह बोलने लगी "वीरप्पन का औलाद" कहना थोड़ा अशोभनीय प्रतीत होता है तो वहीं "वीरप्पन के वंशज" कहने से संबंधित के पूरे परिवार को उपाधि मिल जाएगी, जबकि ऐसे महान कार्य करने में परिवार के लगभग 2 - 3 सदस्य ही योगदान होता है तो अन्य जिनका योगदान न हो उन्हें उपाधि देना, उपाधि का दुरुपयोग होगा, इसलिए "पापा वीरप्पन सामाजिक सम्मान" की उपाधि अच्छा रहेगा। मैं उनके सुझाव से शीघ्र ही सहमत हो गया।

"पापा वीरप्पन सामाजिक सम्मान" किसे दी जाएगी??? इसके लिए पात्रता सुनिश्चित कर लिया जाए, अरे नहीं, थोड़ी देर रुककर वीरप्पन की ही बात कर लें।

वीरप्पन को केवल विख्यात हिंसावादी और चंदन तस्कर होने के कारण ही जाना जाना पर्याप्त नहीं है, उन्हें ऐसे पिता के रूप में भी जाना जाना चाहिए जिन्होंने अपने प्राण संकट में न पड़ जाए, उनके रोने से उनकी लोकेशन उजागर न हो जाए, या उसके रोने से पुलिस उन्हें पकड़ न लें, केवल इतनी सी बात के लिए उन्होंने अपनी कुछ ही महीने के शिशु (बेटी) की हत्या कर दिया था। वीरप्पन तो कुख्यात हिंसक आदमी था, उसे हम जानते है कि वह गलत आदमी था, परन्तु हम उन्हें नहीं जानते जो हमारे बीच रहकर अपनी बेटियों को मार डालते हैं या उनके मां के गर्भ में ही मरवा देते हैं। वे जो हमारे समाज में रहते हैं, वे जो हमारे गांव में रहते हैं वे जो हमारे परिवार में रहते हैं और अपनी ही बेटियों को जन्म लेने के पहले या बाद मरवा देते हैं और धार्मिक होने, सभ्य समाज के सम्माननीय व्यक्ति होने की गौरव, अपने दोहरे चरित्र के बदौलत ही प्राप्त कर लेते हैं उन्हें "पापा वीरप्पन सामाजिक सम्मान" की उपाधि दी जावेगी। आप पाठक से अनुरोध है इस उपाधि की भरपूर प्रचार करें, ताकि इस सम्मान/उपाधि के पात्र लोगों को बराबर सम्मान मिल सके।

आइए भ्रूणहत्या और बालिका वध को रोकने में अपना योगदान दें। बालक और बालिकाओं (महिला/पुरुष) के लिए तैयार दोहरे नियमों को एक समान बनाए, भेद मिटाएं।

आलेख
(HP Joshi)
Atal Nagar, Raipur, Chhattisgarh
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अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस पर पुलिस ने किया योगाभ्यास, व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, 4थी बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल और 20वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के लगभग 300 अधिकारी/कर्मचारी हुए शामिल

अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस पर पुलिस ने किया योगाभ्यास, व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, 4थी बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल और 20वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के लगभग 300 अधिकारी/कर्मचारी हुए शामिल


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी, 4थी बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल और 20वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के लगभग 300 अधिकारी/कर्मचारियों ने 4थी वाहिनी के परेड ग्राउंड में योगाभ्यास किया। योगाभ्यास में व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी के सेनानी श्री मनोज कुमार खिलारी, 4थी वाहिनी के सेनानी श्री रामकृष्ण साहू, सहायक सेनानी श्री विनय भास्कर और सहायक सेनानी श्री जावेद अहमद अंसारी उपस्थित रहकर शामिल हुए। योग की शुरुआत ईश्वर की प्रार्थना से किया गया और योगाभ्यास का समापन अल्लाह का आभार प्रकट करते हुए किया गया। योग शिक्षक एपीसी श्री जयंत पाल ने सभी अधिकारी/कर्मचारियों को योग कराया और योग के फायदे और कायदे के बारीकियों से संबंधित टिप्स दिए।

इस दौरान व्हीआईपी सुरक्षा वाहिनी माना के सेनानी श्री मनोज कुमार खिलारी सर ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा ‘‘हम भारतीय योग के जनक है, हमारे महर्षियों ने योग के माध्यम से हमें स्वस्थ, निरोगी और खुश रहने की कला सीखाया है।’’ भारत सरकार के प्रयास से 21 जून 2015 से अंतरराष्ट्रीय स्तर सभी राष्ट्र ने योग को जीवन के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मानना शुरू किया है। उन्होंने जवानों से आह्वान किया कि वे स्वस्थ रहने के लिए योग को अपने दिनचर्या में शामिल करें।

4थी वाहिनी छत्तीसगढ सशस्त्र बल माना रायपुर के सेनानी श्री रामकृष्ण साहू सर ने जवानों संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने दिनचर्या में पी. टी. के साथ योगा और खेल को शामिल करें, इसके लिए इकाई स्तर पर सभी प्रकार के सुविधाएं मुहैया कराया जाएगा।

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राज्य के सबसे काबिल, सक्रिय और कनिष्ठ कर्मचारियों के हितैषी आईजी में से एक आईपीएस श्री जीपी सिंह हुए पदोन्नत

राज्य के सबसे काबिल, सक्रिय और कनिष्ठ कर्मचारियों के हितैषी आईजी में से एक आईपीएस श्री जीपी सिंह हुए पदोन्नत

राज्य सरकार द्वारा भारतीय पुलिस सेवा के 03 अधिकारियों को आबंटन वर्ष से 25 वर्ष सेवा पूर्ण करने वाले आईजी श्री जीपी सिंह, श्री हिमांशु गुप्ता और एसआरपी कल्लूरी को दिनांक 1 जनवरी 2019 की स्थिति में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद पर पदोन्नत किया गया है।

उल्लेखनीय है कि एडीजी श्री जीपी सिंह राज्य के सबसे काबिल, सक्रिय और आम लोगों, कनिष्ठ कर्मचारियों के कल्याण के लिए जाने जाते हैं। श्री सिंह ही वह अधिकारी है जो रायगढ़ एसपी रहने के दौरान सबसे पहले जवानों और उनके बच्चो के लिए कंप्यूटर सीखने की व्यवस्था सुनिश्चित किए थे, श्री सिंह के महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी  कार्यों में से कुछ कार्य इस प्रकार है :-
# जवानों और उनके परिजन के लिए कंप्यूटर सेंटर।
# जवानों और उसके परिवार के लिए राज्य में सीपीसी केंटीन की शुरुआत।
# जवानों के स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए कामर्शियल स्तर के जिम की स्थापना।
#डिजिटल पुलिसिंग के तहत सिटीजन कॉप- मोबाइल एप्लिकेशन की शुरुआत, इस संबंध में उल्लेखनीय है कि श्री सिंह को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल इंडिया और फीक्की अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया है। वर्तमान में पूरे छत्तीसगढ़ में लगभग एक लाख से अधिक उपयोगकर्ता के रूप में सक्रिय होकर अपराध मुक्त राज्य की स्थापना में अपना योगदान दे रहे हैं। यह एप्प पूरे देश में पुलिस द्वारा संचालित सिक्योरिटी एप्प में सबसे अव्वल दर्जे में है, इस एप्प के माध्यम से आम नागरिकों के गुम/चोरी हुए लगभग 500 मोबाइल फोन रिकवर कर उसके मूल मालिकों को लौटाया जा चुका है। मोबाइल चोर  दसहत में थे, जब वे रायपुर और दुर्ग आइजी रहे तब चोर मोबाइल चोरी करना कम कर दिए थे, वहीं अगर किसी को मिल जाता तो वे लोग संबंधित को वापस करने के लिए प्रयास भी करते थे।
#रायपुर में पुलिस स्कूल की निर्माण कराया, जो इस वर्ष से संचालित हो रही है।
#अराजपत्रित अधिकारियों, other rank और महिलाओं के लिए रायपुर में ट्रांजिट मेश की शुरुआत।
#जवानों के किट पेटी को बंद कर उसके स्थान पर राशि देने का प्रस्ताव, पुलिस मुख्यालय में लंबित है।
# राष्ट्रीय स्तर के बड़े नक्सलियों का आत्मसमर्पण।
#नक्सली मारने पर अनिवार्य पदोन्नति।
#बॉर्डरलेश (सीमा के बंधन से मुक्त) पुलिसिंग।
#आरक्षक व प्रधान आरक्षक को पुलिस की रीढ़ मानते थे।

वहीं एडीजी श्री एसआरपी कल्लूरी सर ने ही सरगुजा रेंज से नक्सलियों का सफाया किया था, बस्तर में नक्सलियों के उपद्रव में रोक लगा दिए थे, लोगों का मानना है वे लंबे समय free hand होते तो बस्तर से नक्सलियों का नामो निशान मिट चुका होता।

राज्य सरकार द्वारा जारी पदोन्नति आदेश -

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ईश्वर कौन - HP Joshi

ईश्वर कौन - HP Joshi

मनुष्य स्वयं के निर्णय से जीवन जिए तो श्रेयस्कर होगा, पर प्रेरणा से जीवन जीने वाले अधिकांश व्यक्ति दुःखी ही रह जाता है वहीं अधिकांश खुशी भी हो जाते हैं। ऐसा मैं पहला व्यक्ति कदापि नहीं जो कह रहा है "जिस प्रकार से आपका एक निर्णय आपकी पूरी जिंदगी बदल देती है वैसे ही आपका एक निर्णय/एक संकल्प आपको जीवनपर्यंत के लिए ख़ुश रख सकता है।"  

इस संदर्भ में मैं एक पुरानी कहानी लिखना चाहता हूं "जापान में एक बहुत खुशमिजाज व्यक्ति, चाहें तो आप संत मान सकते हैं, वे अपने जीवन के लगभग 25 वर्ष को यूं ही स्ट्रेस और दुःख में बर्बाद कर लिया था। आप सबको भलीभांति ज्ञात है जापान में बहुत भयंकर और बार बार भूकंप आते रहते हैं। एक दिन वोको जी सुबह सुबह उठे तो उसके मन में एक विचार आया ईश्वर ने एक दिन और जीने के लिए दिया है तो बताओ वोको जी क्या तुम आज ख़ुश रहना चाहते हो???
भीतर से ही वोको जी चिल्ला पड़ा - हां, हां मै आज ख़ुश रहना चाहता हूं।
बस इतने से विचार के कारण वह पूरे दिन ख़ुश रहा, जबकि उसके दिनचर्या अथवा आसपास के परिवेश में कोई बदलाव ही नहीं हुआ था। रात्रि में सोने के पहले वह सोचने लगा, निष्कर्ष में पहुंचा कि वह रोज प्रातः जागेगा तो स्वयं को आवाज लगाएगा, वोको जी क्या तुम आज ख़ुश रहना चाहते हो???
फिर स्वयं ही जवाब देगा, हां, हां ज़रूर, मैं जरूर ख़ुश रहूंगा।
इसी तरह वह रोज इसे दोहराने लगा, कई बार वह तनावग्रस्त हो जाता, कई बार कुछ ऐसी कोई घटना सामने आ जाती जो उन्हें परेशान करने लगती, फिर उन्हें याद आता कि सुबह उसने क्या संकल्प लिया है?
फिर स्वयं ही बोलता, बेटा बताओ आपको ख़ुश रहना कि नहीं???
फिर बोलता, हां, हां मैंने तो सुबह ही ख़ुश रहने का संकल्प लिया है, जरूर ख़ुश रहूंगा।"

ऐसे ही एक छोटा सा विचार, छोटा सा संकल्प आपके जीवन को केवल सफल ही नहीं वरन् सुखमय भी बना देगी, आप भी रोज इसे दोहरा सकते हैं, आप भी वोको जी की भांति ख़ुश हो सकते हैं। VOKO जी को एक बार अपना गुरु बना कर देखिए, VOKO ही आपको सुख का भगवान प्रतीत होने लगेंगे।

HP Joshi
Atal Nagar
Nawa Raipur Chhattisgarh
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ईश्वर को कौन कौन से काम दूं ?? - HP Joshi

ईश्वर को कौन कौन से काम दूं ?? - HP Joshi

कल की ही बात है मैं सोच रहा था कि ईश्वर को सभी पाने की लालसा रखते हैं, मुझे भी ईश्वर से मिलने की सोचना चाहिए। ठीक इतने में ही एक विचार आया, ये तो ठीक है ईश्वर से मिल लूंगा, मगर मिलूंगा तो क्या बात होगी ?
उनसे किस प्रकार से मिला जाए?
कहां? मिला जाए
क्यों? मिलूं
किस प्रयोजन से मिलूं?
सोचता रहा, सोचता रहा....... इतने में विचार आया, कुछ बड़ा, उपयोगी अथवा अमूल्य वस्तुएं मांग लूंगा। फिर ये निर्धारित करने में लग गया, ऐसी क्या, और कौन कौन सी वस्तुएं है, जिसे मांगा जा सकता है? उनकी उपयोगिता क्या होगी? बड़ी लम्बी लिस्ट बना लिया, फिर देखा कि लिस्ट 9 पन्ने का हो गया, मगर मेरी अपेक्षाएं समाप्त नहीं हुई। इसी बीच सोचा यदि ईश्वर मिलकर बोलेंगे कि मै तुम्हे निर्धारित संख्या में ही आशीर्वाद दूंगा, तो??
फिर लिस्ट में कटौती करने लगा, उसकी उपयोगिता और विकल्प खोजने लगा। पता चला जो 9 पन्ने की मांग पत्र थी, उसमें सबको स्वयं ही पा सकता था। एक विचार आया स्वर्ग मांग लेता हूं, वहां मौज करूंगा, सुख से रहूंगा। मगर मेरी पत्नी, मेरी दुर्गम्या, मेरा तत्वम, मेरे माता - पिता, भाई - बहन और सगे संबंधियों, और मित्रों, गुरुजनों का क्या करूं ??
सोचा सबको ले जाऊंगा। अब लिस्ट बनाने लगा, किसको किसको ले जाऊंगा??
क्यों, ले जाऊंगा??
क्या, मेरे साथ वे सभी स्वर्ग में खुश रहेंगे।
मैंने अपने सभी परिजनों को लेे जाने की सूची में शामिल कर लिया, फिर दोस्तों, गुरुजनों और आसपास के विद्वान लोग जिन्हें मै जानता हूं उन्हें भी सूचीबद्ध करने लगा। इसी बीच ख्याल आया कि तत्वम के जन्मदिवस पर कुछ साथियों को काल किया था, तो वे आवश्यक काम बताकर, अथवा अन्य काम से व्यस्त होने का हवाला देकर आने से असमर्थता जाहिर किए थे। बड़े भैया को बुलाया तो बोले उनकी सासू मां की आज डायलिसिस हो रही है, इसलिए वे अस्पताल में हैं। मैंने सोचा ऐसे ही अधिकांश लोगो का महत्वपूर्ण कार्य अथवा जिम्मेदारियां होंगी, उन्हें लेे जाऊंगा, तो उनका धर्म खतरे में चला जाएगा, सोचा उनके अपने लोगों को भी लेे चलूंगा तो अच्छा होगा। सोचते सोचते रात दो बज गए, नींद आ रही थी, एलर्जी का दवाई भी खाया था, सुबह आवश्यक कार्यों को निपटाने ऑफिस भी जाना है, बाकि कल करूंगा, फिर सोचा कहीं आज ही भगवान आ गए तो???
मैंने फिर निद्रा त्यागने का संकल्प ले लिया, आगे चलकर पूरे भारत भर के लोग शामिल हो गए, याद आया समाज के प्रतिष्ठत व्यक्ति और मेरे आदर्श समाज सेवक साथी श्री बंजारे जी जो आबूधाबी में रहते छूट रहे हैं। मैं उसके बारे में सोचते सोचते, देश के अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक पहुंच गया, निष्कर्ष में पहुंचा कि समूचे पृथ्वी के सभी मानव ही नहीं, वरन् सभी जीव जंतु भी स्वर्ग जाएंगे। तभी याद आया, कुछ लोग, आतंकवादी हैं, कुछ नक्सलवादी हैं, कुछ अपराधी हैं, कुछ असामाजिक तत्व भी हैं उनका क्या किया जाए??
उन्हें छोड़ देता हूं, फिर याद आया कि कुछ लोग धार्मिक वैमनस्यता को फैलने वाले धार्मिक नेताएं है, उनका क्या करूं??
चलो उन्हें भी छोड़ देता हूं, कुछ लोग ऐसे धार्मिक नेताओ को अपना गुरु मार्गदर्शक और भगवान मानते हैं, उनका क्या करूं?? सोचा इनको भी छोड़ देता हूं। फिर सोचा कुछ लोगों के भीतर स्लीपिंग क्रिमिनल्स हैं तो उनका क्या करूं??
सोचा छोड़ देता हूं। आगे खोजने लगा, किसमे किसमे स्लीपिंग क्रिमिनल्स है, असमंजस में पड़ गया, मेरे आसपास के लोगों में भी मिला, मुझमें भी स्लीपिंग क्रिमिनल्स मिल गया। इतने में ही मेरी पुत्र तत्वम जाग गया, आकर बोला पापा सूसू करना है। मैंने उन्हें सूसू करवाया, उसके बाद वह मेरे गोद में ही सोने का प्रयास करने लगा, मैंने सुलाया, तब तक रात्रि के साढ़े तीन बज गया था। निष्कर्ष में पहुंचे बिना ही सो गया।

HP Joshi
Nawa Raipur, Chhattisgarh
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ब्रह्माजी से संवाद : - HP Joshi

ब्रह्माजी से संवाद : - HP Joshi

यह झूठी कहानी या बनावटी बात नहीं, सत्य है। ब्रम्हाजी से संवाद के बाद मैंने सितम्बर 2007 में ही उनके बताए अनुसार सामाजिक जागरूकता का काम शुरू कर दिया। इस दौरान मेरे आसपास के कुछ तथाकथित ज्ञानियों से बात हुई, चर्चा के दौरान उन्होंने मेरे तर्क को समर्थन दिया गया, परन्तु लोग चलने को तैयार नहीं हो पाए। एक महोदय को मैंने बताया, वे मानने को तैयार ही नहीं हुए, कि ऐसा मेरा विचार हो सकता है फिर मैंने अपने ब्रम्हा जी से हुए संवाद के बारे में उन्हें बताया। वे बौखला गए, बोलने लगे मेरा जन्म उनके शिर से हुई है मै ही इस धर्म का बुद्धि हूं, मुझसे पहले ऐसा ज्ञान आपको नहीं मिलना चाहिए, इसलिए मैं आपको मिले ज्ञान को आत्मार्पित नहीं करूंगा। मै ब्रम्हा जी को इसलिए पूजता नहीं हूं, क्योंकि वे सबको समान रूप से बनाते हैं, वो तो हमारे समूह के लोग बुद्धजीवी हैं, भविष्य को समझते हैं इसलिए क्यों न, कुटिलता ही सही परंतु अपना वर्चस्व बरकरार रख पाए हैं। फिर मै सभी को अपना भाई कैसे मान लूं? ब्रम्हा जी को चाहिए कि यह ज्ञान आकर मुझे दे, नहीं आएंगे, मुझे नहीं देंगे, तो आपके संवाद को मै प्रकृति के सिद्धान्त के विपरित समझता हूं।

एक व्यक्ति से बात हुई बोले इतना गहरा और सटीक ज्ञान आपको कैसे हुआ ?
मैंने कहा - ब्रम्हा जी से कुछ दिन पहले मेरी संवाद हुई थी। महोदय इतना सुनते ही बौखला गए, बोले ब्रम्हा जी पुराने दिनों की बातें है अब वे नहीं है। तुम झूठ बोल रहे हो, तुम झूठे हो। अगली बार ऐसी अफवाह लेकर मेरे पास मत आना। मैंने कहा आप क्षेत्र के प्रमुख मंदिर के पुजारी हैं, आपको ब्रम्हा में विश्वास नहीं? उन्होंने कहा तुम यहां से चले जाओ.... वरना अच्छा नहीं होगा।

मैंने कुछ परिचित लोगों, सहकर्मियों और दोस्तो से भी ब्रम्हा जी संवाद के बारे में बताया, अधिकांश लोगों ने मान लिया कि "मेरा तर्क सही है, परन्तु उन्होंने ब्रम्हा जी से संवाद को असत्य घोषित कर दिया।" कुछ लोगों को मेरे बातों में विश्वास हो गया तो कुछ मुझे ढोंगी कहने लगे थे।

एक दिन मैंने अपने दादा जी से बात करी, उन्हें बताया कि  दादाजी, कुछ दिन पहले ब्रम्हा जी मेरे पास आए थे, उनसे मेरी लंबी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा है "आप सभी मनुष्य ही नहीं वरन् सभी जीव मुझ ब्रम्हा के ही संतान हो, कोई पराया नहीं, सभी सगे भाई - बहन हो। यह तो सृष्टि के संचालन के कारण, तुम केवल इस जन्म में अमुक (मेरे पिता जी का नाम लेकर बोले) का पुत्र हो, अन्यथा अरबों खरबों जन्मों से मेरे पुत्र ही हो, ऐसे ही सभी जीव जंतु भी मेरे संतान हैं अर्थात आप सभी भाई - बहन हो। कुछ झूठे और पापी लोग, इस सत्य को जानते हुए भी अपने स्वार्थ से प्रभावित होकर, झूठी कहानियां सुना सुना कर मुझे बदनाम कर दिया है। जिस प्रकार से आपके माता पिता आप भाई बहनों में कोई भेद नहीं रखते, उसी प्रकार से मै स्वयं प्रकृति अर्थात ब्रम्हा किसी से भेद नहीं करता। मै किसी मनुष्य से पूजन का अभिलाषा नहीं रखता, मैं आपका पिता हूं, आप अपने इस जन्म के पिता की भांति ही, व्यवहार करें, मै प्रकृति हूं, मै ही ब्रम्हा हूं। जब प्रकृति नहीं होगी, तो आप नहीं होंगे, मानव समाज नहीं होगी, धर्म नहीं होगा, जीव जंतु नहीं होंगे।  इसलिएआप धार्मिक उन्हें जानना जो प्रकृति के पूजक हों, धार्मिक होने के लिए आपके समाज या तथाकथित धर्म का अनुयाई होना आवश्यक नहीं। चाहे मनुष्य कोई भी देश काल अथवा जाति, धर्म का हो उनके लिए प्रकृति की संरक्षण आवश्यक है। प्रकृति ही देवता है, प्रकृति पूजा का प्रेमी नहीं है।परन्तु समस्त जीव को उनका आदर करना चाहिए, उसके प्रति सम्मान का भाव होनी चाहिए, प्रकृति ही नहीं, वरन् वे सभी जीव जंतु जो आपको देते हैं वे देवता हैं। इत्यादि ........." इस संबंध में अमुक अमुक (कुछ मंदिरों के पुजारियों का नाम लेकर) से बात करी वे इसे स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। मेरे दादा जी को समझने में देर नहीं लगी, उन्होंने झट से एक सुझाव दिया कि ब्रम्हा जी से मिले ज्ञान को एक वाक्य में समेट लो, और उसका प्रचार करो, जब कोई इसपर विचार करने को तैयार रहे तभी उन्हें आगे विस्तार से बताना, संभव है जो मूर्ख होंगे उन्हें छोड़कर आपके वाक्य को सभी मानने लगेंगे, कुछ अपने जीवन में शामिल भी करेंगे।

मैंने निर्देश प्राप्त कर एक वाक्य बनाने की जुगत करता रहा, अंत में एक वाक्य "जम्मो जीव के भाई बराबर" अर्थात "सभी जीव भाई - बहन के समान हैं" बताने में सफल हो गया हूं।

(HP Joshi)
Atal Nagar, Raipur
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बुद्धजीवी कौन ??? - HP Joshi

बुद्धजीवी कौन ???

सदियों से बुद्धजीवी कौन है? यह जानना महत्वपूर्ण विषय रहा है क्योंकि बुद्धजीवी ही सही मायने में ईश्वर, परमात्मा, भगवान और देवताओं का प्रतिनिधि है वहीं सही मायने में सच्चा धर्मगुरु है। जिनके मार्गदर्शन और बताए रास्ते पर चलना सच्चा धर्म है या यह कि उनके बताए मार्ग और नियम के अनुरूप जीवन जीना ही धार्मिक होना है।

यदि हम किसी बुद्धजीवी के सानिध्य में है मतलब हमसे कोई अपराध, हिंसा अथवा पाप होने की संभावना कम हो जाती है। बुद्धजीवियों के सानिध्य का लाभ जानकर मै बुद्धजीवियों के खोज में लगा रहा, लंबी यात्रा के बाद यह जान पाया कि बुद्धजीवी कौन है?? उन्हें कैसे पहचाना जा सकता है?? और क्या बुद्धजीवी का ढोंग करने वाले कुछ लोग भी बुद्धजीवी हैं?

आइये हम बुद्धजीवी कौन है कैसे होते हैं उन्हें जानने के पहले थोड़ा सा बुद्ध को जान लें, यदि आप बुद्ध को जानते हों तो आपको बुद्धजीवी खोजने में या बनने में कोई कठिनाई नहीं होगी क्योंकि बुद्ध जैसे, बुद्ध के सिद्धांतो के अनुरूप जीवन जीने वाले ही बुद्धजीवी हैं। बुद्ध की जीवन शैली और सिद्धांत क्या और कैसा था यह किसी साहित्य का पुस्तकों में खोजेंगे तो उसमे सत्य के बजाय बनावटी भी हो सकती है, तो हम बुद्ध को जानें कैसे??

बुद्ध स्वयं को ज्ञानी, महात्मा या भगवान अथवा ईश्वर नहीं मानते थे, वे स्वयं को साधारण सा मनुष्य मानते थे और इसके लिए वे केवल प्रकृति के सिद्धांत के अनुरूप आचरण व कार्य करते थे। हमें ज्ञात है बुद्ध का नाम बुद्ध नहीं था, वे बुद्ध बने थे। अब पहले हमें बुद्ध बनने का राज ही जान लेना चाहिए।

प्रकृति बड़ी भोली और सच्ची होती है जो किसी से दुर्भावना नहीं रखती, किसी से भेद नहीं करती, किसी से परहेज़ नहीं करती, किसी को अपना पराया नहीं मानती, किसी के लिए अपने आचरण में परिवर्तन नहीं करती, चाहे वह कोई भी हो। प्रकृति को आप नुकसान पहुंचाएंगे तब भी वे आपसे बदला नहीं लेंगे। बस इतनी सी सच्चाई, इतने से साधारण व्यवहार को अपनाने के कारण ही एक गौतम नाम का बालक आगे चलकर बुद्ध बन गया। प्रकृति के भोलेपन अपनाने के बाद कोई भी मनुष्य बुद्ध, बुद्धू, भोला या बुद्धजीवी हो सकता है। इतनी सी बात को जान लेने के बाद  पृथक से यह जानने की आवश्यकता नहीं होती कि बुद्धजीवी कौन है? वे कैसे होते हैं? उन्हें कैसे पहचानें? क्योंकि प्रकृति के भोलेपन ही बुद्ध है और उसी भोलेपन से जीवन जीना, या ऐसे ही भोलेपन का व्यवहार करना ही बुद्धजीवियों की आधारशिला है पहचान है। कुछ ग्रंथ या पुस्तकें आपको बहलाएगी, बेवकूफ बनाएगी, कुछ मार्गदर्शन भी करेगी मगर आप प्रकृति के व्यवहार, प्रकृति से सिद्धांत और प्रकृति के न्याय को जानकर  पूर्ण हो सकते हैं बुद्ध और बुद्धजीवियों को जान सकते हैं अलग से आपको लाखों पन्नों की ग्रंथ/पुस्तकें पढ़ने की जरूरत नहीं। बस आप "प्रकृति के व्यवहार, प्रकृति से सिद्धांत और प्रकृति के न्याय" को आत्मर्पित कर लें, फिर केवल अपने भीतर के आवाज को सुनें, उसके अनुरूप ही जीवन जिएं। यही सच्चा मानव धर्म भी है। किसी धर्म के अनुयायियों के आस्था तक बात न पहुंच जाए, वे चिढ़ न जाएं मेरा सही, तुम्हारा गलत ये न कहने लगें, इसलिए बुद्ध और बुद्धजीवी बनने बनाने की आज की लेख समाप्त करता हूं।

(हुलेश्वर जोशी)
नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
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देशवासियों को ईद-उल-फितर की बधाई - हुलेश्वर जोशी

देशवासियों को ईद-उल-फितर की बधाई - हुलेश्वर जोशी

ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर मै देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति पर ईद-उल फितर का त्‍यौहार मनाया जाता है जो ईश्‍वर के प्रति अनुराग, प्रेम, भाईचारे और कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। इस त्‍यौहार का सारांश एक-दूसरे को प्रेम और खुशियां बांटना है। मुझे उम्‍मीद है कि ईद-उल-फितर हम भारतीय के भीतर उदारता की भावना को मजबूत करेगा और हमें एक-दूसरे के करीब लाकर मैत्री, भाईचारे, आपसी सम्‍मान, सहानुभूति और प्रेम के बंधन में बांधेगा। 

आप कोई भी धर्म के हों, यदि आपका व्यवहार किसी भी धर्म के अनुयायी के लिए सौतेला है तो आपसे अनुरोध है कि कृपया प्रकृति के सिद्धांत के अनुरूप अपना आचरण रखें। हमें प्रकृति के व्यवहार को ही अपने व्यवहार में शामिल करना चाहिए, हम सभी मनुष्य एक ही ईश्वर के संतान हैं चाहे हम उन्हें किसी भी रूप या नाम से जानें। इसका तात्पर्य है कि हम सभी जीव भाई-बहन के समान है।

(हुलेश्वर जोशी)
नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
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