Monday, October 26, 2020

आज दशहरा है, आओ अपने भीतर के रावण और राम की समीक्षा करें... अपने गुण अवगुणों का समुचित प्रबंध करें।

दशहरा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं....

आज दशहरा है, आओ अपने भीतर के रावण और राम की समीक्षा करें... अपने गुण अवगुणों का समुचित प्रबंध करें।

आज दशहरा है, तो क्या आप केवल हजारों साल पहले मृत हो चुके महात्मा, ज्ञानी, प्रकाण्ड विद्वान ब्राम्हण राजा रावण का ही पुतला दहन करेंगे?? मैं तो ऐसा कदापि नहीं करने वाला क्योंकि मेरे भीतर सैकड़ों रावण हैं और लाखों राम हैं। इसलिए पहले अपने भीतर के अवगुण को समाप्त करने का प्रयास करूंगा और सद्गुणों को दूसरों के वैचारिक सिद्धांत में प्रवाहित करने का प्रयास करूंगा।

आप आजाद भारत के नागरिक हैं जैसा चाहें अपने आस्था और विश्वास के अनुसार चाहे जो करें, मगर मैं केवल कुछ संकल्प लूंगा...

# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं किसी भी स्त्री का अपहरण नहीं करूंगा और न तो किसी स्त्री को अपमानित करने के लिए उनका अंगभंग करूँगा"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं चाहे कितना ही महान/ श्रेष्ठ होऊं उसका घमंड नहीं करूंगा।"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं चाहे कितना ही क्यों न शक्तिशाली होऊं उसका दुरुपयोग नहीं करूंगा।"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "पराए स्त्री को माता/बहन मानूंगा, स्त्री के शारीरिक बनावट को निहारूँगा नहीं। अर्थात स्त्री को केवल भोग विलास की वस्तु नहीं समझूंगा।"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं ऐसे दोस्तों और परिजनों का त्याग कर दूंगा जो विश्वासघात करने में माहिर हैं।"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं किसी भी शर्त में महिलाओं के मानवाधिकार का हनन नहीं करूंगा, अर्थात उन्हें गुलाम या दासी नहीं समझूंगा। मैं अपनी पत्नी या बेटी को अपना प्रॉपर्टी समझकर शर्त में नहीं लगाऊंगा, न उन्हें दान में किसी अन्य को दूंगा।
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं दूसरों के अवगुणों की निंदा करने के पहले अपने अवगुणों को समाप्त करने का प्रयास करूंगा।"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं किसी दूषित मानसिकता का शिकार नहीं रहूंगा बल्कि स्वच्छ आत्मा से मानवीय व्यवहार को अपने जीवन मे शामिल करूँगा।"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं किसी के बहकावे में आकर किसी भी प्रकार से अमानवीय निर्णय नही लूना और न तो अपनी 'विधि' का त्याग नहीं करूंगा।"
# मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि "मैं किसी भी शर्त में हिंसा, बदले की भावना और दुर्भवना जैसे अमानवीय आचरण से ग्रसित होकर कोई काम नहीं करूंगा, बल्कि अपराधमुक्त समाज की पुनर्स्थापना में अपना योगदान दूंगा।"

HP Joshi 
Narayanpur, Chhattisgarh
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"करा समर्पण" हल्बी गीत

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