पत्नी को काबू में कैसे रखें, पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत करने के 15 बेहतरीन उपाय : धर्मगुरु हुलेश्वर बाबा

पत्नी को काबू में कैसे रखें, पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत करने के 15 बेहतरीन उपाय : धर्मगुरु हुलेश्वर बाबा
मौजूदा समय में हम परिवार को लेकर इस बात के लिए आशान्वित रहते हैं कि हमारा परिवार सुखमय, शांतिपूर्ण तथा समृद्धियुक्त हो। यदि आप भी इसीतरह के कुछ आशाओं से प्रेरित हैं तो आपको इस बात का ख्याल रखना होगा कि परिवार के सुख, शांति और समृद्धि के लिए परिवार में एकता हो तथा एकता के लिए परिवार का Centralized होना भी जरूरी है जबकि परिवार को Centralized रखने के लिए परिवार का एक अपना Rules हो, DisciplineSet हो तथा इसके लिए बाकायदा JudiciarySystem भी तैयार होनी चाहिए। 

यदि आप इंसानियत के धर्म को समझते हों तो आप किसी एक मानसिकता से ग्रसित होकर परिवार के कम शक्तिशाली लोगों खासकर स्त्री को गुलाम, सेविका या दासी समझने की भूल नहीं करेंगे। इसका तात्पर्य यह है कि आपके परिवार में व्यक्तिगत रूप से शक्ति और आय के आधार पर निर्णय लेने के अधिकार तय नहीं होंगे बल्कि निर्णय का अधिकार परिवार के साझे हित और सर्वांगीण विकास के ध्येय से समानता और न्याय के सिद्धांत पर आधारित होगा। अब तक आप समझ चुके होंगे कि परिवार का मुखिया सबसे अधिक उम्र, सबसे अधिक ताकत अथवा सबसे अधिक आय के आधार पर निर्धारित नहीं होना चाहिए, खासकर लिंग के आधार पर मुखिया होने की मानसिकता तो नैसर्गिक न्याय, नैसर्गिक सौंदर्य, Equality और Rules of Peace के खिलाफ है। यदि आपके परिवार में मुखिया अथवा निर्णय के अधिकार इन आधारों पर तय होते हैं तो आपका परिवार परिवार नहीं बल्कि GoverningBody है वैसे मैं साफ शब्दों में कहूँ तो तानाशाही सरकार है।

अब पत्नी को नियंत्रण करने अथवा काबू या कब्जे में रखने की बात शुरू करने के पहले मैं एक कहानी बताना आवश्यक समझता हूं। मेरे बाप, दादा और परदादाओं के द्वारा निरंतर गाय-बैल, भैसी-भैसा पाला जाता था क्योंकि ये दुग्धपदार्थ और जीवन यापन हेतु कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी जानवर हैं। आम मनुष्यों की भांति मेरे बाप दादा भी इन्हें नियंत्रण अथवा कब्ज़े/काबू में रखते थे, मेरे पूर्वज निरंतर भूमि, जमीन जायजाद पर भी अपना कब्जा रखते आ रहे हैं। मेरे परदादाओं का सैकड़ों एकड़ जमीन था हजारों गाय, बैल और भैंस थे जिनका कब्जा वे अन्य लोगों को हस्तांतरित कर लेते थे, दान में अथवा दाम में बेच देते थे; मैं भी भूमि, सामग्री और पशुओं जैसे चल अचल संपत्ति के क्रय विक्रय करने और उसे कब्जा में रखने की मानसिकता को उचित समझकर ऐसा करता हूँ। "मैं मानता हूं कब्जा का हस्तांतरण और विक्रय किया जा सकता है।" सरकारें भी बाकायदा कानून बनाकर कब्जा हस्तातंरण करने और बेचने का नियम बना रखा है जो लगभग सभी देश में संवैधानिक भी है। आपको भी पता है "चल अचल संपत्ति को क्रय विक्रय अथवा दान में देकर इसके कब्जा को हस्तांतरित किया जा सकता है मगर परिवार के सदस्य ही नहीं वरन कोई भी इंसान चल-अचल संपत्ति अथवा वस्तु नहीं है।" 

अब आपको पता है कि आपके परिवार के सदस्य; (माँ-बाप, पति-पत्नी, भाई-बहन और बच्चे) सहित आप स्वयं भी कोई वस्तु नहीं हैं, कोई चल-अचल संपत्ति अथवा जानवर नहीं हैं। इसलिए आप पर कोई कब्जा भी नहीं कर सकता, न आप पर से कोई अपना कब्जा क्रय विक्रय अथवा दान के माध्यम से हस्तांतरित भी कर सकता है। इसका मतलब ये कि पति-पत्नी ही नहीं वरन संतान भी कब्जा में रखने की वस्तु नहीं हैं। यदि आपमें अब भी अपनी पत्नी को काबू में रखने की मानसिकता है तो आप उन्हें जानवर या गुलाम समझने की भूल कर रहें यदि ऐसा भूल कर रहे हैं तो ख्याल रखना आपकी बहन और बेटी भी किसी की...... है; आपकी माँ भी आपके बाप की गुलाम है, दासी है, सेविका है और आपके बाप के लिए हस्तांतरण योग्य वस्तुएं।

हाँ; यदि आप अपनी पत्नी अथवा पति को सदैव आकर्षित रखना चाहते हैं, आप दोनों के मध्य प्रेम और समर्पण की भावना को बरकरार रखना चाहते हैं तो इसके लिए मैं अपना सुझाव देता हूँ:-
1- अपने जीवनसाथी के साथ दोस्त बनकर जीवन जीएं; पत्नी को गुलाम, सेविका या दासी न समझें। (पति-पत्नी में कोई एक महान नहीं बल्कि दोनों बराबर हैं; पति परमेश्वर नहीं होता।)
2- हर स्थिति में सहभागिता बरकरार रखें; भोजन और सब्जी बनाने, बर्तन और कपड़े धोने,  तेल मालिश और हाथ पांव दबाने से न हिचकिचाएं।
3- अपने जीवनसाथी के छोटे मोटे गलतियों की अनदेखी करें।
4- जीवनसाथी को बेजा-कब्जा की वस्तु न समझें, बल्कि उन्हें उनके समुचित मानव अधिकारों के इस्तेमाल के लिए जागरूक करते रहें।
5- नियमित रूप से Picnic Spot, सार्वजनिक स्थानों और Tour's में जाएं और आवश्यक आजादी/स्वतंत्रता प्रदान करें। हर विषय में खुलकर विचार विमर्श करें, अपनी भावनाएं और विचार सादगीपूर्ण तरीके से एक दूसरे से शेयर करें।
6- शारीरिक श्रम में दोनों बराबर का योगदान दें, खासकर जब आपकी अवकाश हों आप भी घर का आधा काम अनिवार्य रूप से करें; जीवनसाथी का पसंदीदा भोजन स्वयं बनाएं, अपने हाथों से खिलाएं और सारे बर्तन धोएं।
7- आकश्मिक स्थिति में यदि लड़ाई झगड़े की स्थिति निर्मित हो रही हो तो माफी मांग लें, अन्यथा हानि आपको ही अधिक होने वाली है।
8- समय समय पर Gifts देते रहें, जब भी आपके जीवनसाथी तारीफ योग्य काम करे तारीफ और धन्यवाद जरूर ज्ञापित करें।
9- यथासंभव समय समय पर उन्हें मायके जरूर ले जाएं, उनके मायके वालों का अपने माता पिता के बराबर सम्मान करें।
10- पत्नी को संभोग करने और बच्चे जन्म देने की Machine न समझें।
11- पत्नी के साथ कभी मारपीट न करें; यदि आप मारपीट करते हैं मतलब आपके गलती पर आपकी पत्नी को भी पीटने का अधिकार है जिसे आपको स्वीकार करना होगा।
12- कभी भी दूसरे पक्ष को इतना प्रताड़ित न करें कि वह आपसे तंग आकर आपके साथी आत्महत्या करने पर मजबूर हो। यदि आप जीवनसाथी से परेशान हैं तो आत्महत्या कदापि न करें बल्कि तत्काल तलाक ले लें।
13- घरेलू शारीरिक काम से राहत दें परंतु खुद व्यस्त रहें और उन्हें भी व्यस्त रखें। अर्थात उच्च शिक्षा और Resurch के लिये अध्ययन करते/कराते रहें, यदि ऐसा संभव न हो तो महान लोगों की जीवनी, आत्मकथा और अन्य किताब पढ़ें और अपने जीवनसाथी को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
14- Social Media Sites, Mobile से मिलने वाले Notifications, धारावाहिक और धार्मिक राजनैतिक समाचार से बचें।
15- Life में Romance बरकरार रखें; जब भी अवसर मिले जीवनसाथी के साथ खिलखिला कर हँसे, जीवनसाथी को मुस्कराने का अवसर दें।
Share:

7 comments:

  1. सादर अभिनंदन सर

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया लेख के लिए बधाई हो भैया जी

    ReplyDelete
  3. Excellent nirdesh h bhaiya

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर लेख

    ReplyDelete
  5. Lockdown पीरियड में आपका सुझाव लगभग 70 % लागु हो जाता होगा...ऐसा मेरा मानना है।

    ReplyDelete


प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें?


यह वेबसाइट /ब्लॉग भारतीय संविधान की अनुच्छेद १९ (१) क - अभिव्यक्ति की आजादी के तहत सोशल मीडिया के रूप में तैयार की गयी है।
यह वेबसाईड एक ब्लाॅग है, इसे समाचार आधारित वेबपोर्टल न समझें।
इस ब्लाॅग में कोई भी लेखक/व्यक्ति अपनी मौलिक पोस्ट प्रकाशित करवा सकता है। इस ब्लाॅग के माध्यम से हम शैक्षणिक, समाजिक और धार्मिक जागरूकता लाने तथा वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रयासरत् हैं। लेखनीय और संपादकीय त्रूटियों के लिए मै क्षमाप्रार्थी हूं। - श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी

सबसे अधिक बार पढ़ा गया लेख