"जीवन बचाओ मुहिम"

हत्यारा और मांसाहार नहीं बल्कि जीवों की रक्षा करने वाला बनो।


गुरुवार, अप्रैल 05, 2018

जंगलों को आग से बचाने सक्रिय सहयोग करें : डॉ. रमन सिंह

जंगलों को आग से बचाने सक्रिय सहयोग करें :  डॉ. रमन सिंह


छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के हरे-भरे जंगलों को आग से बचाने के लिए सभी लोगों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। उन्होंने आज यहां जारी संदेश में कहा है कि बेशकीमती वन सम्पदा की दृष्टि से छत्तीसगढ़ काफी सम्पन्न है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 44 प्रतिशत अर्थात 59 हजार 772 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा वनों का है। डॉ. सिंह ने कहा-इस प्राकृतिक सम्पन्नता को बचाए रखना और उसके विकास के लिए निरंतर प्रयास करना हम सबकी सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यह बहुत आवश्यक है।

उन्होंने कहा-वनों को आग से बचाना इसलिए भी बहुत जरूरी है कि ये वन हमारे लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका और अतिरिक्त आमदनी का एक बहुत बड़ा माध्यम है। तेन्दूपत्ता, साल बीज, महुआ, लाख, चिरौंजी आदि लघु वनोपजों के संग्रहण के जरिए हमारे वनवासी भाई-बहनों को मौसमी रोजगार मिलता है । मुख्यमंत्री ने कहा- गर्मी के इस मौसम में वन क्षेत्रों में कई कारणों से आग लगने और फैलने की अधिक आशंका रहती है। कई बार वनों से गुजरने वाले लोग वहां खाना बनाते हैं और जलती हुई लकड़ी को बिना बुझाए छोड़ देते हैं। इसी तरह धूम्रपान करने वाले कई राहगीर जलती हुई बीड़ी या सिगरेट को वृक्षों के आसपास लापरवाही से फंेक देते हैं। इसके फलस्वरूप वनों में आग फैल जाती है और हमारी बहुमूल्य वन सम्पदा को गंभीर नुकसान पहुंचता है। डॉ. सिंह ने कहा कि साल, सागौन और मिश्रित प्रजातियों के मूल्यवान वृक्षों तथा बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का अनमोल खजाना छत्तीसगढ़ के वनों में है। मुख्यमंत्री ने कहा-वनों में आग लगने पर बहुमूल्य वन सम्पदा के साथ-साथ वन्य प्राणियों के जीवन पर भी संकट आ जाता है और प्रदेश के जंगलों की नैसर्गिक जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है।
    उन्होंने कहा-राज्य सरकार ने संयुक्त वन प्रबंधन योजना के तहत प्रदेश के 19 हजार 720 गांवों में से वन क्षेत्रों की सीमा के पांच किलोमीटर के भीतर स्थित लगभग ग्यारह हजार 185 गांवों में ग्रामीणों की भागीदारी से सात हजार 887 वन प्रबंधन समितियों का गठन किया है। इन समितियों में 27 लाख 63 हजार सदस्य हैं। इन समितियों को प्रदेश के कुल वन क्षेत्रफल में से 55 प्रतिशत अर्थात 33 हजार 190 वर्ग किलोमीटर के वनों की रक्षा का दायित्व सौंपा गया है। इनमें महिलाओं की संख्या 14 लाख से अधिक है। वनों की सुरक्षा के एवज में जंगलों से मिलने वाली लकड़ी और बांस के उत्पादन पर वन विभाग को जो राशि मिलती है, उसमें से 15 प्रतिशत हिस्सा वन प्रबंधन समितियों को दिया जाता है। विगत 14 वर्ष में इन समितियों को गांवों के विकास के लिए 301 करोड़ रूपए का लाभांश दिया गया। इसके अलावा 901 लघु वनोपज सहकारी समितियों में भी लाखों वनवासी सदस्य हैं, जिनके द्वारा तेन्दूपत्ता और अन्य लघु वनोपजों का संग्रहण किया जाता है।

मुख्यमंत्री ने वन प्रबंधन समितियों और लघु वनोपज समितियों के सदस्यों से भी वनों की रक्षा के लिए हमेशा सजग रहने और अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की है। उन्होंने इन समितियों से ग्रामीणों के बीच वनों को आग से बचाने के लिए और भी ज्यादा जागरूकता लाने का भी आव्हान किया है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों से भी कहा है कि वे संयुक्त वन प्रबंधन समितियों और वनोपज समितियों के साथ निरंतर सम्पर्क और समन्वय बनाकर वनों को आग बचाने के लिए गंभीरता से काम करें।

बाबा साहब अम्बेडकर से मिला जल शक्ति पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा - प्रधानमंत्री

बाबा साहब अम्बेडकर से मिला जल शक्ति पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा - प्रधानमंत्री 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को राष्ट्रीय समुद्री दिवस की शुभकामनाएं दीं।

पीएम ने कहा, ‘भारत में समुद्री क्षेत्र का संपन्न इतिहास रहा है। इसमें राष्ट्र के बदलाव को ऊर्जा देने की पूरी संभावनाएं हैं। राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर हम राष्ट्र की संपन्नता के लिए अपनी समुद्री ताकत को और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर करते हैं।’

समुद्री क्षेत्र के विकास की दिशा में हमें डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर से प्रेरणा मिली थी। उन्होंने कहा, ‘यह बाबा साहब ही थे, जिन्होंने जल शक्ति, नौवहन, सिंचाई, नहरों के जाल और बंदरगाहों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी। इस क्षेत्र में उनके कार्य मुख्य रूप से देश के लोगों की भलाई के लिए थे।’

बुधवार, अप्रैल 04, 2018

दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 


दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक महत्‍वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्‍य गरीबों के सतत सामुदायिक संस्था‍नों की स्‍थापना करना तथा इसके माध्यम से ग्रामीण गरीबी समाप्त करना तथा आजीविका के विविध स्रोतों को प्रोत्‍साहन देना है। केन्‍द्र द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम को राज्‍यों के सहयोग से लागू किया गया है। इस मिशन को 2011 में लॉंच किया गया था। पिछले तीन वर्षों में इस मिशन का तेजी से विस्‍तार हुआ है। वित्‍त वर्ष 2017-18 के दौरान 820 अतिरिक्‍त प्रखंडों को इस योजना से जोड़ा गया है। यह मिशन 29 राज्‍यों और 5 केन्‍द्र शासित प्रदेशों के 586 जिलों के अंतर्गत 4,459 प्रखंडों में लागू किया गया है।

सामुदायिक संस्‍थान का निर्माण
वित्‍त वर्ष 2017-18 के दौरान पूरे देश में 6.96 लाख स्‍वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्‍यम से 82 लाख परिवारों को जोड़ा गया। 40 लाख स्‍वयं-सहायता समूहों के माध्‍यम से 4.75 करोड़ महिलाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा गया। इन सामुदायिक संस्‍थानों को 4,444 करोड़ रुपये की धनराशि परिव्‍यय हेतु आवंटित की गई।

वित्‍तीय समावेश
वित्‍तीय समावेश रणनीति के तहत मिशन, एसएचजी को बैंक ऋण उपलब्‍ध कराने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), वित्‍त सेवा विभाग (डीएफएस) तथा भारतीय बैंक महासंघ (आईबीए) के साथ मिलकर कार्य करता है। एसएचजी को दिया जाने वाला ऋण जो वित्‍त वर्ष 2013-14 में 22,238 करोड़ रुपये था, बढ़कर फरवरी, 2018 में 64,589 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले पांच वर्षों के दौरान स्‍वयं-सहायता समूहों-एसएचजी को कुल मिलाकर 1.55 लाख करोड़ रुपये का बैंक ऋण उपलब्‍ध कराया गया है। मिशन प्रारंभ होने के पूर्व बैंकों का फंसा कर्ज (एनपीए) 23 प्रतिशत था, जो चालू वर्ष में घटकर 2.4 प्रतिशत हो गया।

सुदूर क्षेत्रों में वित्‍तीय सेवाएं
वित्‍तीय सेवाओं को अंतिम व्‍यक्ति तक उपलब्‍ध कराने में भी मिशन को महत्‍वपूर्ण सफलता मिली है। स्‍वयं-सहायता समूहों के 1518 सदस्‍यों को बैंक एजेंट के रूप में कार्य करने का मौका दिया गया है। ये एजेंट वित्‍तीय सेवा जैसे धनराशि जमा करना या निकालना, पेंशन, छात्रवृत्ति का भुगतान करना, मनरेगा पारिश्रमिक का भुगतान करना आदि उपलब्‍ध कराते है। फरवरी, 2018 तक 1.78 लाख स्‍वयं-सहायता समूहों के सदस्‍यों ने इन बैंक एजेंटों के माध्‍यम से 8.9 लाख लेनदेन के कार्य किये, जिनका मूल्‍य 187.92 करोड़ रुपये है।

ब्‍याज भुगतान में आर्थिक सहायता
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) महिला स्‍वयं सहायता समूहों को ब्‍याज भुगतान में आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराता है। इससे ऋण का ब्‍याज भुगतान सात प्रतिशत प्रति वर्ष हो जाता है। इसके अलावा 250 जिलों में समय पर ऋण भुगतान की स्थिति में ब्‍याज में तीन प्रतिशत की अतिरिक्‍त कमी की जाती है। इससे प्रभावी ब्‍याज दर चार प्रतिशत वार्षिक हो जाती है। ब्‍याज भुगतान में आर्थिक सहायता के तौर पर कुल 2,324 करोड़ रुपये की धनराशि का परिव्‍यय किया गया है।

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना और मूल्‍यवर्द्धन श्रृंखला
कृषि-पर्यावरण गतिविधियों को प्रोत्‍साहन देने के उद्देश्‍य से मिशन ने महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना लागू किया है, जो महिला किसानों की आमदनी को बढ़ाएगा और कृषि लागत तथा जोखिम में कमी लाएगा। इस योजना के तहत 33 लाख महिला किसानों को सहायता उपलब्‍ध कराई गई हैं (मार्च-2018)। मूल्‍यवर्द्धन गतिविधियों के अंतर्गत कृषि, बागवानी, डेयरी, मत्‍स्‍य पालन, वन उत्‍पाद (गैर-काष्‍ठ) आदि को शामिल किया गया हैं। छोटे और सीमांत किसानों द्वारा उगाये जाने वाली फसल जैसे मक्‍का, आम, फूल की खेती, डेयरी आदि को मूल्‍यवर्द्धन गतिविधियों में शामिल किया गया है। फरवरी-2018 तक 1.05 लाख स्‍वयं सहायता समूहों के सदस्‍यों को इन गतिविधियों से जोड़ा गया है।

सामुदायिक आजीविका
मिशन का महत्‍वपूर्ण लक्ष्‍य है-समुदाय आधारित कार्यान्‍वयन। इसके लिए 1.72 लाख सामुदायिक सदस्‍यों को प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे सामुदायिक संस्‍थानों को सहायता प्रदान कर सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम में लेनदेन का हिसाब रखने, क्षमता निर्माण करने, वित्‍तीय सेवा उपलब्‍ध कराने जैसी गति‍विधियों को शामिल किया गया हैं। इसमें 22 हजार सामुदायिक आजीविका संसाधन व्‍यक्ति (सीएलपीआर) जैसे कृषि सखी, पशु सखी शामिल हैं, जो चौबीसों घंटे सेवा उपलब्‍ध कराते है।

स्‍टार्टअप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम तथा आजीविका ग्रामीण एक्‍सप्रेस योजना
गैर कृषि आजीविका रणनीति के तहत दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन स्टार्टअप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी) तथा आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (एजीईवाई) लागू कर रही है। एसवीईपी का उद्देश्‍य स्‍थानीय स्‍तर पर उद्यम स्‍थापित करने के लिए ग्रामीण उद्यमियों की सहायता करना है। इस योजना के तहत 17 राज्‍यों में लगभग 16,600 उद्यमों को सहायता प्रदान की गई है। इससे 40 हजार लोगों को रोजगार मिला है।

आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (एजीईवाई) को अगस्‍त 2017 में लॉंच किया गया था। इसका उद्देश्‍य सुदूर गांवों को ग्रामीण परिवहन व्‍यवस्‍था से जोड़ना है। मार्च 2018 तक 17 राज्‍यों के प्रस्‍तावों को मंजूरी दी गई है और 288 वाहन संचालन में हैं।


दीनदयाल उपाध्‍याय ग्रामीण कौशल्‍या योजना
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की उपयोजना है - दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयूजीकेवाई)। इस उपयोजना का उद्देश्‍य ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करके उन्‍हें अधिक वेतन वाले रोजगार दिलाना है।

दसवीं कक्षा की गणित की परीक्षा दिल्‍ली-एनसीआर, हरियाणा समेत देश के किसी भी हिस्‍से में दोबारा नहीं होगी: सीबीएसई

दसवीं कक्षा की गणित की परीक्षा दिल्‍ली-एनसीआर, हरियाणा समेत देश के किसी भी हिस्‍से में दोबारा नहीं होगी: सीबीएसई


केन्‍द्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड ने यह निर्णय लिया है कि दसवीं कक्षा की गणित की परीक्षा दिल्‍ली-एनसीआर तथा हरियाणा में दोबारा नहीं होगी। इसलिए दसवीं कक्षा की गणित की पुनर्परीक्षा देश के किसी भी हिस्‍से में नहीं होगी। इससे पहले 30 मार्च, 2018 को सीबीएसई ने एक अधि‍सूचना जारी कर कहा था कि यदि जांच के बाद आवश्‍यक हुआ तो दसवीं कक्षा की गणित की परीक्षा दिल्‍ली-एनसीआर तथा हरियाणा में दोबारा होगी।

बोर्ड ने कहा है कि आंतरिक जांच तथा उपलब्‍ध प्रपत्र/सामग्री के विश्‍लेषण और पुलिस जांच से मिली जानकारी इंगित करते है कि पेपर लीक कुछ ही छात्रों तक सीमित था। दसवीं कक्षा की गणित की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्‍यांकन किसी असामान्‍य पैटर्न या अंकों की असामान्‍य बढ़ोतरी नहीं दर्शाता है। इससे पता चलता है कि पेपर लीक बड़े पैमाने पर नहीं हुआ है। बोर्ड के संज्ञान में यह तथ्‍य आया है कि सोशल मीडिया पर जाली प्रश्‍न पत्र अपलोड किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्‍य छात्रों, अभिभावकों और विद्यालयों में घबराहट फैलाना है।

गणित परीक्षा की अनिश्‍चितता को लेकर विभिन्‍न हितधारक बोर्ड के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं। इसके अतिरिक्‍त बोर्ड के हेल्‍पलाइन डेस्‍क पर गणित की पुनर्परीक्षा से संबंधित 1000 से ज्‍यादा फोन आए हैं।

छात्र हित को सर्वाधिक महत्‍व देते हुए बोर्ड ने यह निर्णय लिया है कि दसवीं कक्षा की गणित की पुनर्परीक्षा दिल्‍ली-एनसीआर और हरियाणा में आयोजित नहीं की जाएगी। पेपर लीक मामले में जांच के पश्‍चात जो दोषी पाए जाएंगे उन पर सीबीएसई परीक्षा के उप नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

भारत बंद के दौरान हुई हिंसा पर लोकसभा में केन्‍द्रीय गृह मंत्री का बयान

भारत बंद के दौरान हुई हिंसा पर लोकसभा में केन्‍द्रीय गृह मंत्री का बयान


गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदया, भारत बंद के दौरान सारे देश में हुई हिंसा की घटनाओं के संबंध में, मैं अपना वक्‍तव्‍य देने के लिए खड़ा हुआ हूं।

मैं बहुत ही गंभीर विषय पर स्‍टेटमेंट देने के लिए खड़ा हुआ हूं, इसलिए मैं सभी सम्‍मानित सदस्‍योंसे अपील करना चाहता हूं कि कृपया सदन में शांति व्‍यवस्‍था बनाये रखें।

महोदया, कल देश के कई हिस्‍सों में हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं। भारत बंद के दौरान हिंसा की घटनाओं में आठ लोगों की मृत्‍यु हुई है। मध्‍य प्रदेश में 6, उत्तर प्रदेश में एक तथा राजस्‍थान में एक व्‍यक्ति की मृत्‍यु के अलावा बंद के दौरान भीड़ तथा पुलिस में कई जगहों पर टकराव की घटनाएं भी हुई हैं।

मैं सबसे पहले इन घटनाओं में मृत लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करना चाहता हूं।

मैं ये भलीभांति समझता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोगों के मन में व्‍यापक रोष है। इस केस में भारत सरकार पार्टी नहीं थी। इस फैसले के विरुद्ध लोग चिंतित होकर सड़कों पर उतर आए हैं। मैं यह भारत सरकार की तरफ से कहना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट तथा एससी एवं एसटी समुदाय के लोगों को संविधान द्वारा जो प्रोटेक्‍शन दिया गया है, सरकार उसके प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

मैं इस सदन के माध्‍यम से आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि हमारी सरकार ने एससी/एसटी प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्‍ट में कोई भी डायलूशन नहीं किया है, बल्कि हमारी सरकार ने कार्यभार संभालते ही, इस संदर्भ में एससी/एसटी प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्‍ट के मौजूदा प्रावधानों का अवलोकन किया और निर्णय लिया कि इनको और भी स्‍ट्रेन्‍देन किया जाए।

अत: वर्ष 2015 में हमारी सरकार ने एससी/एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) अमेंडमेंड एक्‍ट भी पारित किया इसके द्वारा इस एक्‍ट में नये ऑफेंसेज को जोड़ा गया, जो पहले नहीं थे। यह भी पाया गया कि दोषियों को सजा देने में विलंब होता है या चार्ज इस्‍टैब्लिश ही नहीं हो पाता है क्‍योंकि विक्टिम अथवा विट्नेस जो कि पहले ही शोषित है, पर जोर’-दवाब देकर चुप कराने का प्रयास किया जाता है। इसलिए इस संशोधन द्वारा विट्नेस प्रोटेक्‍शन का प्रावधान भी हमारी सरकार ने किया है। इतना ही नहीं हमारी सरकार ने यह भी किया है कि पीडि़तों को दी जाने वाली राशि में भी बढ़ोतरी की है। हमने यह भी प्रावधान किया कि इस कानून को लागू करने में लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

मैं यह विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि हमारी सरकार एससी/एसटी के हितों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

माननीय सर्वोच्‍चय न्‍यायालय के फैसले के तुरंत बाद यह निर्णय लिया गया कि हमारी सरकार इसके विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी और मैं सदन को सूचित करना चाहता हूं कि यह याचिका 2 अप्रैल को दाखिल कर दी गई है।

लर्नेड अटॉर्नी जनरल ने गवर्नमेंट के बिहाफ पर माननीय सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि याचिका पर शीघ्र सुनवाई प्रारंभ की जाए। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमति जताते हुए आज 2 बजे से ही रिव्‍यू पिटिशन की सुनवाई का समय तय कर दिया है। इससे सरकार की तत्‍परता पर किसी प्रकार के संदेह की गुंजाइश शेष नहीं रह जाती है। मैं यह भी स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट 20 मार्च, 2018 को आया। इसके उपरांत मात्र छह वर्किंग डेज के अंदर पूरी तत्‍परता और प्रतिबद्धता के साथ समस्‍त प्रक्रियाओं और कानूनी परामर्श की कार्रवाई को पूरा करते हुए 2.04.2018 को केन्‍द्र सरकार की ओर से रिव्‍यू पिटिशन दायर कर दी गई।

मैं यह भी बताना चाहता हूं कि आरक्षण को लेकर जो तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से बेबुनियाद और निराधार है।

हमारी सरकार एससी/एसटी के हितों के रक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और अध्‍यक्ष महोदया मैं सभी देशवासियों से अपली करता हूं कि वे शांति और संयम बनाए रखें। हमने सभी राज्‍यों को शांति बनाए रखने के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। शांति बहाल करने के लिए राज्‍यों ने जो भी मदद मांगी है हमने तत्‍परतापूर्वक उसे उपलब्‍ध भी कराया है। 

गृह मंत्रालय इस मामले पर नजर बनाए हुए है तथा हम राज्‍य सरकारों के लगातार संपर्क में हैं।

अध्‍यक्ष महोदया, मैं सदन के माध्‍यम से समस्‍त देशवासियों से शांति व्‍यवस्‍था बनाए रखने तथा आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील करता हूं। साथ ही मैं राजनीतिक दलों से भी अपील करना चाहता हूं कि वह देश में शांति व्‍यवस्‍था तथा भाईचारा बनाए रखने में पूरी तरह सहयोग करें।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में दिए गए सभी वर्तमान प्रावधान प्रबल होंगे और सबके लिए बाध्यकारी होंगे

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में दिए गए सभी वर्तमान प्रावधान प्रबल होंगे और सबके लिए बाध्यकारी होंगे


मीडिया प्लेटफार्मों के विस्तार और विविधता को देखते हुए और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुच्छेद 126 में उल्लिखित पिछले 48 घंटों की अवधि के दौरान निर्वाचन सामग्री के प्रदर्शन के नियमन और नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए आयोग ने जनवरी, 2018 में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के अतिरिक्त सूचना और प्रसारण मंत्रालय, विधि और न्याय मंत्रालय, इलेक्ट्रोनिक्स तथा आईटी मंत्रालय, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया तथा न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन के एक-एक प्रतिनिधि भी इस समिति के सदस्य हैं।

समिति अनुच्छेद 126 के वर्तमान प्रावधानों का अध्ययन और समीक्षा करेगी। समिति जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के संबंधित अनुच्छेदों का अध्ययन करेगी और अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन, विशेषकर 48 घंटें की निषेधाज्ञा अवधि के दौरान उल्लंघन, को नियमों के दायरे में लाने के लिए कठिनाइयों/महत्वपूर्ण अंतरों की पहचान करेगी और आवश्यक संशोधन सुझाएगी।

समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट पेश किए जाने के साथ ही आयोग इस पर विचार करेगा और अनुच्छेद 126 के वर्तमान प्रावधानों तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के संबंधित अनुच्छेदों में आवश्यक संशोधन के लिए विधि और न्याय मंत्रालय को अग्रसारित करेगा।

इस अवधि के दौरान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में दिए गए सभी वर्तमान प्रावधान प्रबल होंगे और सभी के लिए बाध्याकारी होंगे। इसलिए 3 अप्रैल, 2018 के आयोग की प्रेस नोट संख्या ईसीआई/पीएन/27/2018 के माध्यम से जारी दिशा निर्देशों का अक्षरशः पालन कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान सभी मीडिया कवरेज में किया जाना चाहिए।



विवरणः

कर्नाटक विधानसभा के साधारण चुनाव के लिए कार्यक्रम की घोषणा 27-03-2018 को की गई है। मतदान एक चरण में 12.05.2018 को होगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुच्छेद 126 के अनुसार एक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव संपन्न होने के 48 घंटे पहले की अवधि में टेलीविजन तथा समान माध्यमों से चुनाव सामग्री प्रदर्शित करने की मनाही है। अनुच्छेद 126 के प्रासंगिक भाग इस प्रकार हैं-

(126. चुनाव संपन्न होने के 48 घंटे पहले की अवधि में सार्वजनिक सभा की मनाही)

(1)    कोई व्यक्ति

      (अ)...................

      (ब) सिनेमाटोग्राफ, टेलीविजन तथा अन्य समान उपकरणों से निर्वाचन सामग्री सार्वजनिक रूप से दिखाना।

      (स) .............

      मतदान क्षेत्र में किसी चुनाव के लिए चुनाव संपन्न होने के समय से समाप्त 48 घंटे की अवधि के दौरान।

(2)    उप-अनुच्छेद (1) का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को जेल की मियादी सज़ा दी जा सकती है, जो बढ़कर 2 वर्ष हो सकती है या दंड हो सकता है या दोनों।

(3)    इस अनुच्छेद में निर्वाचन सामग्री का अर्थ वैसी किसी भी सामग्री से है, जिसकी मंशा चुनाव परिणामों को प्रभावित करना या उन पर असर डालना है।

चुनाव के दौरान टीवी चैनलों द्वारा अपने पैनल, चर्चा/बहस के प्रसारण तथा अन्य खबरों और सामयिक कार्यक्रमों के प्रसारण में अनुच्छेद 126 के उल्लंघन के आरोप लगाए जाते रहे हैं। जैसा कि कहा गया है अनुच्छेद 126 एक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव संपन्न होने के समय से 48 घंटे पहले टेलीविजन या अन्य माध्यमों से निर्वाचन सामग्री का प्रदर्शन की मनाही करता है।

आयोग एक बार फिर दोहराता है कि टीवी/रेडियो चैनल और केबल नेटवर्क अनुच्छेद 126 में उल्लिखित 48 घंटे की अवधि के दौरान टेलीकास्ट/प्रसारण के विषयवस्तु में ऐसी सामग्री शामिल नहीं करेंगे, जो किसी पार्टी या उम्मीदवार की संभावना को प्रोत्साहित करने वाले लगे या चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाले लगे।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुच्छेद 126ए की ओर ध्यान आकर्षित किया जाता है, जो अनुच्छेद मतदान शुरू होने के समय से मतदान समाप्ति के आधे घंटे बाद की अवधि के दौरान एक्जिट पोल करने और उनके परिणामों के प्रसार का निषेध करता है।

सोमवार, अप्रैल 02, 2018

पुलिस को रिएक्टिव नही बल्कि प्रोएक्टिव पुलिसिंग करना चाहिए

पुलिस को रिएक्टिव नही बल्कि प्रोएक्टिव पुलिसिंग करना चाहिए 


श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज द्वारा आज दिनांक 31/03/2018 के प्रातः 8ः00 बजे से 11ः00 बजे तक जिला दुर्ग का वार्षिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान परेड में शामिल जिन जवानों का टर्नआउट और प्रदर्शन उच्चकोटी का था ऐसे 92 अधिकारी/कर्मचारियों को ईनाम देकर पुरुस्कृत किया गया। परेड के बाद किट परेड, एमटी शाखा, शस्त्रागार का निरीक्षण करने के उपरांत दरबार लिया गया। आईजी श्री सिंह ने दरबार में जवानों की गुजारिशें सुनी और समस्याओं के समाधान करने के निर्देश दिए:-

जवानों के समस्या का निराकरण:-
जवानों द्वारा अवगत कराया गया है कि उन्हें अपने वेतन, भत्तों एवं एरियर्स इत्यादि की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में श्री सिंह ने जवानों को जागरूक होने की आवश्यकता बल दिया व जवानों को बताया कि वर्तमान में वेतन भुगतान की कार्यवाही ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे बैंक खाते में की जाती है जिसकी जानकारी बैंक के माध्यम से मोबाईल नंबर पर प्राप्त की जा सकती है। PaySleep, GPF, DPF व CPS की जानकारी शासन के वेबपोर्टल e-Kosh पर उपलब्ध है।

कुछ अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा अवगत कराया गया कि उनका गुम कटौत्रा है और लंबी अवधि होने के बाद भी डीपीएफ से जीपीएफ समायोजन नही हो पाया है। इस संबंध में आईजी दुर्ग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाने हेतु निर्देश दिए गए। यह टीम एक सप्ताह के भीतर महालेखाकार कार्यालय रायपुर से समन्वय स्थापित कर अधिकारी/कर्मचारियों के समस्या निराकरण कराएगी।

जवानों द्वारा आग्रह किया गया कि उन्हें विशेष उपलब्धि के फलस्वरूप मिलने वाले ईनाम की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में आईजी श्री जीपी सिंह ने एक विशेष अभियान चलाकर जवानों को उनके सेवा-पुस्तिका अवलोकन कराने हेतु पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया गया है तथा जवानों के मनोबल एवं कार्यशैली में सुधार लाने के उद्देश्य से ईनाम एवं अन्य आदेश सर्वसंबंधितों को अनिवार्य रूप से पृष्ठांकन करने कहा। 


जवानों का वेलफेयर:-
पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही सारे भुगतान और पेंशन संबंधी आदेश प्रदान किया जाए। 
वर्तमान में दुर्ग जिले के लगभग 50 फीसदी जवानों को शासकीय आवासगृह उपलब्ध कराया गया है। जिले के शेष कर्मचारियों के लिए सुनियोजित, बेहतर एवं पर्याप्त संख्या में आवास निर्माण की व्यवस्था पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से कराया जाएगा तथा शीघ्रता शीघ्र निर्माण कार्य की कार्यवाही प्रारम्भ की जाएगी। 
थाना स्तर पर टाॅयलेट निर्माण हेतु शासन स्तर पर संचालित ओडीएफ स्कीम के तहत सुविधायुक्त टाॅयलेट/बाथरूम बनाने हेतु निर्देशित किया।
जवानों के मनोबल को बढ़ाने हेतु खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, फिटनेस एवं योग जैसे रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित किये जाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों के वेलफेयर एवं प्रशासनिक आदेशों को उनके मोबाईल के माध्यम से उपलब्ध कराने हेतु पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा एसएमएस पोर्टल तैयार किया जाएगा। 

श्री जीपी सिंह ने पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस को रिएक्टिव नही बल्कि प्रोएक्टिव पुलिसिंग करना चाहिए, ताकि अपराधिक तत्व किसी भी प्रकार से घटना को अंजाम न दे सकें। यह तभी संभव है जब पुलिस को सभी छोटी बडी सूचनाओं की खबर हो। इसके लिए आवश्यक है कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारियों को सूचना संकलन के कार्य में लगाया जाए। पव्लिक की विश्वसनीयता हासिल करने के संबंध में जवानों को टिप्स देते हुए आईजी ने कहा कि आमजन से मधुर संबंध बनाए रखें ताकि समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि बनी रहे और घटनाओं को रोकने के लिए आसानी से सूचना संकलन किया जा सके। पुलिस विभाग में लगभग 80 प्रतिशत आरक्षक और प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारी हैं जो पुलिस विभाग की रीढ़ है। अतः इनकी कार्यकुशलता, कार्यप्रणाली एवं क्षमता विकास को बेहतर बनाने के लिए पर्यवेक्षणीय अधिकारियों को निर्देश दिए। शीघ्र ही जिले के पुलिस थानों एवं सीएसपी/एसडीओपी कार्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा।

वेतन, भत्तों एवं एरियर के सम्बन्ध में जवानों को जागरूक होने की आवश्यकता

वेतन, भत्तों एवं एरियर के सम्बन्ध में जवानों को जागरूक होने की आवश्यकता 


श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज द्वारा आज दिनांक 31/03/2018 के प्रातः 8ः00 बजे से 11ः00 बजे तक जिला दुर्ग का वार्षिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान परेड में शामिल जिन जवानों का टर्नआउट और प्रदर्शन उच्चकोटी का था ऐसे 92 अधिकारी/कर्मचारियों को ईनाम देकर पुरुस्कृत किया गया। परेड के बाद किट परेड, एमटी शाखा, शस्त्रागार का निरीक्षण करने के उपरांत दरबार लिया गया। आईजी श्री सिंह ने दरबार में जवानों की गुजारिशें सुनी और समस्याओं के समाधान करने के निर्देश दिए:-

जवानों के समस्या का निराकरण:-
जवानों द्वारा अवगत कराया गया है कि उन्हें अपने वेतन, भत्तों एवं एरियर्स इत्यादि की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में श्री सिंह ने जवानों को जागरूक होने की आवश्यकता बल दिया व जवानों को बताया कि वर्तमान में वेतन भुगतान की कार्यवाही ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे बैंक खाते में की जाती है जिसकी जानकारी बैंक के माध्यम से मोबाईल नंबर पर प्राप्त की जा सकती है। PaySleep, GPF, DPF व CPS की जानकारी शासन के वेबपोर्टल e-Kosh पर उपलब्ध है।

कुछ अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा अवगत कराया गया कि उनका गुम कटौत्रा है और लंबी अवधि होने के बाद भी डीपीएफ से जीपीएफ समायोजन नही हो पाया है। इस संबंध में आईजी दुर्ग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाने हेतु निर्देश दिए गए। यह टीम एक सप्ताह के भीतर महालेखाकार कार्यालय रायपुर से समन्वय स्थापित कर अधिकारी/कर्मचारियों के समस्या निराकरण कराएगी।

जवानों द्वारा आग्रह किया गया कि उन्हें विशेष उपलब्धि के फलस्वरूप मिलने वाले ईनाम की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में आईजी श्री जीपी सिंह ने एक विशेष अभियान चलाकर जवानों को उनके सेवा-पुस्तिका अवलोकन कराने हेतु पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया गया है तथा जवानों के मनोबल एवं कार्यशैली में सुधार लाने के उद्देश्य से ईनाम एवं अन्य आदेश सर्वसंबंधितों को अनिवार्य रूप से पृष्ठांकन करने कहा। 


जवानों का वेलफेयर:-
पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही सारे भुगतान और पेंशन संबंधी आदेश प्रदान किया जाए। 
वर्तमान में दुर्ग जिले के लगभग 50 फीसदी जवानों को शासकीय आवासगृह उपलब्ध कराया गया है। जिले के शेष कर्मचारियों के लिए सुनियोजित, बेहतर एवं पर्याप्त संख्या में आवास निर्माण की व्यवस्था पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से कराया जाएगा तथा शीघ्रता शीघ्र निर्माण कार्य की कार्यवाही प्रारम्भ की जाएगी। 
थाना स्तर पर टाॅयलेट निर्माण हेतु शासन स्तर पर संचालित ओडीएफ स्कीम के तहत सुविधायुक्त टाॅयलेट/बाथरूम बनाने हेतु निर्देशित किया।
जवानों के मनोबल को बढ़ाने हेतु खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, फिटनेस एवं योग जैसे रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित किये जाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों के वेलफेयर एवं प्रशासनिक आदेशों को उनके मोबाईल के माध्यम से उपलब्ध कराने हेतु पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा एसएमएस पोर्टल तैयार किया जाएगा। 

श्री जीपी सिंह ने पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस को रिएक्टिव नही बल्कि प्रोएक्टिव पुलिसिंग करना चाहिए, ताकि अपराधिक तत्व किसी भी प्रकार से घटना को अंजाम न दे सकें। यह तभी संभव है जब पुलिस को सभी छोटी बडी सूचनाओं की खबर हो। इसके लिए आवश्यक है कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारियों को सूचना संकलन के कार्य में लगाया जाए। पव्लिक की विश्वसनीयता हासिल करने के संबंध में जवानों को टिप्स देते हुए आईजी ने कहा कि आमजन से मधुर संबंध बनाए रखें ताकि समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि बनी रहे और घटनाओं को रोकने के लिए आसानी से सूचना संकलन किया जा सके। पुलिस विभाग में लगभग 80 प्रतिशत आरक्षक और प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारी हैं जो पुलिस विभाग की रीढ़ है। अतः इनकी कार्यकुशलता, कार्यप्रणाली एवं क्षमता विकास को बेहतर बनाने के लिए पर्यवेक्षणीय अधिकारियों को निर्देश दिए। शीघ्र ही जिले के पुलिस थानों एवं सीएसपी/एसडीओपी कार्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा।

एक सप्ताह के भीतर गुम कटौत्रा और डीपीएफ से जीपीएफ समायोजन पूर्ण कराएं

एक सप्ताह के भीतर महालेखाकार कार्यालय रायपुर से समन्वय स्थापित कर गुम कटौत्रा और डीपीएफ से जीपीएफ समायोजन पूर्ण कराएं 


श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज द्वारा आज दिनांक 31/03/2018 के प्रातः 8ः00 बजे से 11ः00 बजे तक जिला दुर्ग का वार्षिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान परेड में शामिल जिन जवानों का टर्नआउट और प्रदर्शन उच्चकोटी का था ऐसे 92 अधिकारी/कर्मचारियों को ईनाम देकर पुरुस्कृत किया गया। परेड के बाद किट परेड, एमटी शाखा, शस्त्रागार का निरीक्षण करने के उपरांत दरबार लिया गया। आईजी श्री सिंह ने दरबार में जवानों की गुजारिशें सुनी और समस्याओं के समाधान करने के निर्देश दिए:-

जवानों के समस्या का निराकरण:-
जवानों द्वारा अवगत कराया गया है कि उन्हें अपने वेतन, भत्तों एवं एरियर्स इत्यादि की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में श्री सिंह ने जवानों को जागरूक होने की आवश्यकता बल दिया व जवानों को बताया कि वर्तमान में वेतन भुगतान की कार्यवाही ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे बैंक खाते में की जाती है जिसकी जानकारी बैंक के माध्यम से मोबाईल नंबर पर प्राप्त की जा सकती है। PaySleep, GPF, DPF व CPS  की जानकारी शासन के वेबपोर्टल e-Kosh पर उपलब्ध है।

कुछ अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा अवगत कराया गया कि उनका गुम कटौत्रा है और लंबी अवधि होने के बाद भी डीपीएफ से जीपीएफ समायोजन नही हो पाया है। इस संबंध में आईजी दुर्ग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाने हेतु निर्देश दिए गए। यह टीम एक सप्ताह के भीतर महालेखाकार कार्यालय रायपुर से समन्वय स्थापित कर अधिकारी/कर्मचारियों के समस्या निराकरण कराएगी।

जवानों द्वारा आग्रह किया गया कि उन्हें विशेष उपलब्धि के फलस्वरूप मिलने वाले ईनाम की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में आईजी श्री जीपी सिंह ने एक विशेष अभियान चलाकर जवानों को उनके सेवा-पुस्तिका अवलोकन कराने हेतु पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया गया है तथा जवानों के मनोबल एवं कार्यशैली में सुधार लाने के उद्देश्य से ईनाम एवं अन्य आदेश सर्वसंबंधितों को अनिवार्य रूप से पृष्ठांकन करने कहा। 


जवानों का वेलफेयर:-
पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही सारे भुगतान और पेंशन संबंधी आदेश प्रदान किया जाए। 
वर्तमान में दुर्ग जिले के लगभग 50 फीसदी जवानों को शासकीय आवासगृह उपलब्ध कराया गया है। जिले के शेष कर्मचारियों के लिए सुनियोजित, बेहतर एवं पर्याप्त संख्या में आवास निर्माण की व्यवस्था पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से कराया जाएगा तथा शीघ्रता शीघ्र निर्माण कार्य की कार्यवाही प्रारम्भ की जाएगी। 
थाना स्तर पर टाॅयलेट निर्माण हेतु शासन स्तर पर संचालित ओडीएफ स्कीम के तहत सुविधायुक्त टाॅयलेट/बाथरूम बनाने हेतु निर्देशित किया।
जवानों के मनोबल को बढ़ाने हेतु खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, फिटनेस एवं योग जैसे रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित किये जाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों के वेलफेयर एवं प्रशासनिक आदेशों को उनके मोबाईल के माध्यम से उपलब्ध कराने हेतु पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा एसएमएस पोर्टल तैयार किया जाएगा। 

श्री जीपी सिंह ने पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस को रिएक्टिव नही बल्कि प्रोएक्टिव पुलिसिंग करना चाहिए, ताकि अपराधिक तत्व किसी भी प्रकार से घटना को अंजाम न दे सकें। यह तभी संभव है जब पुलिस को सभी छोटी बडी सूचनाओं की खबर हो। इसके लिए आवश्यक है कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारियों को सूचना संकलन के कार्य में लगाया जाए। पव्लिक की विश्वसनीयता हासिल करने के संबंध में जवानों को टिप्स देते हुए आईजी ने कहा कि आमजन से मधुर संबंध बनाए रखें ताकि समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि बनी रहे और घटनाओं को रोकने के लिए आसानी से सूचना संकलन किया जा सके। पुलिस विभाग में लगभग 80 प्रतिशत आरक्षक और प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारी हैं जो पुलिस विभाग की रीढ़ है। अतः इनकी कार्यकुशलता, कार्यप्रणाली एवं क्षमता विकास को बेहतर बनाने के लिए पर्यवेक्षणीय अधिकारियों को निर्देश दिए। शीघ्र ही जिले के पुलिस थानों एवं सीएसपी/एसडीओपी कार्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा।

आईजी श्री जीपी सिंह नें दुर्ग जिला में वार्षिक निरीक्षण किया, दरबार लेकर जवानों की समस्या का निराकरण करते हुए 92 अधिकारी/कर्मचारियों को दी ईनाम

आईजी श्री जीपी सिंह ने दुर्ग जिला में वार्षिक निरीक्षण किया, दरबार लेकर जवानों की समस्या का निराकरण करते हुए 92 अधिकारी/कर्मचारियों को दी ईनाम 


श्री जीपी सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज द्वारा आज दिनांक 31/03/2018 के प्रातः 8ः00 बजे से 11ः00 बजे तक जिला दुर्ग का वार्षिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान परेड में शामिल जिन जवानों का टर्नआउट और प्रदर्शन उच्चकोटी का था ऐसे 92 अधिकारी/कर्मचारियों को ईनाम देकर पुरुस्कृत किया गया। परेड के बाद किट परेड, एमटी शाखा, शस्त्रागार का निरीक्षण करने के उपरांत दरबार लिया गया। आईजी श्री सिंह ने दरबार में जवानों की गुजारिशें सुनी और समस्याओं के समाधान करने के निर्देश दिए:-

जवानों के समस्या का निराकरण:-
जवानों द्वारा अवगत कराया गया है कि उन्हें अपने वेतन, भत्तों एवं एरियर्स इत्यादि की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में श्री सिंह ने जवानों को जागरूक होने की आवश्यकता बल दिया व जवानों को बताया कि वर्तमान में वेतन भुगतान की कार्यवाही ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे बैंक खाते में की जाती है जिसकी जानकारी बैंक के माध्यम से मोबाईल नंबर पर प्राप्त की जा सकती है। PaySleep, GPF, DPF व CPS  की जानकारी शासन के वेबपोर्टल e-Kosh पर उपलब्ध है।

कुछ अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा अवगत कराया गया कि उनका गुम कटौत्रा है और लंबी अवधि होने के बाद भी डीपीएफ से जीपीएफ समायोजन नही हो पाया है। इस संबंध में आईजी दुर्ग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाने हेतु निर्देश दिए गए। यह टीम एक सप्ताह के भीतर महालेखाकार कार्यालय रायपुर से समन्वय स्थापित कर अधिकारी/कर्मचारियों के समस्या निराकरण कराएगी।

जवानों द्वारा आग्रह किया गया कि उन्हें विशेष उपलब्धि के फलस्वरूप मिलने वाले ईनाम की जानकारी प्राप्त नही होती है। इस संबंध में आईजी श्री जीपी सिंह ने एक विशेष अभियान चलाकर जवानों को उनके सेवा-पुस्तिका अवलोकन कराने हेतु पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया गया है तथा जवानों के मनोबल एवं कार्यशैली में सुधार लाने के उद्देश्य से ईनाम एवं अन्य आदेश सर्वसंबंधितों को अनिवार्य रूप से पृष्ठांकन करने कहा। 


जवानों का वेलफेयर:-
पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही सारे भुगतान और पेंशन संबंधी आदेश प्रदान किया जाए। 
वर्तमान में दुर्ग जिले के लगभग 50 फीसदी जवानों को शासकीय आवासगृह उपलब्ध कराया गया है। जिले के शेष कर्मचारियों के लिए सुनियोजित, बेहतर एवं पर्याप्त संख्या में आवास निर्माण की व्यवस्था पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से कराया जाएगा तथा शीघ्रता शीघ्र निर्माण कार्य की कार्यवाही प्रारम्भ की जाएगी। 
थाना स्तर पर टाॅयलेट निर्माण हेतु शासन स्तर पर संचालित ओडीएफ स्कीम के तहत सुविधायुक्त टाॅयलेट/बाथरूम बनाने हेतु निर्देशित किया।
जवानों के मनोबल को बढ़ाने हेतु खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, फिटनेस एवं योग जैसे रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित किये जाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों के वेलफेयर एवं प्रशासनिक आदेशों को उनके मोबाईल के माध्यम से उपलब्ध कराने हेतु पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा एसएमएस पोर्टल तैयार किया जाएगा। 

श्री जीपी सिंह ने पुलिसिंग पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस को रिएक्टिव नही बल्कि प्रोएक्टिव पुलिसिंग करना चाहिए, ताकि अपराधिक तत्व किसी भी प्रकार से घटना को अंजाम न दे सकें। यह तभी संभव है जब पुलिस को सभी छोटी बडी सूचनाओं की खबर हो। इसके लिए आवश्यक है कि आरक्षक एवं प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारियों को सूचना संकलन के कार्य में लगाया जाए। पव्लिक की विश्वसनीयता हासिल करने के संबंध में जवानों को टिप्स देते हुए आईजी ने कहा कि आमजन से मधुर संबंध बनाए रखें ताकि समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि बनी रहे और घटनाओं को रोकने के लिए आसानी से सूचना संकलन किया जा सके। पुलिस विभाग में लगभग 80 प्रतिशत आरक्षक और प्रधान आरक्षक स्तर के कर्मचारी हैं जो पुलिस विभाग की रीढ़ है। अतः इनकी कार्यकुशलता, कार्यप्रणाली एवं क्षमता विकास को बेहतर बनाने के लिए पर्यवेक्षणीय अधिकारियों को निर्देश दिए। शीघ्र ही जिले के पुलिस थानों एवं सीएसपी/एसडीओपी कार्यालयों का निरीक्षण किया जाएगा।

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