Saturday, March 13, 2021

अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर नाटक "दसरी" का मंचन

नाटक "दसरी" का मंचन

जिला प्रशासन, नारायणपुर द्वारा आयोजित मावली मेला स्थल में आज दिनांक 12/03/2021 को नाटक "दसरी" का मंचन किया गया। यह नाटक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर और सुश्री आरती गर्ग के कॉन्सेप्ट पर आधारित तथा श्री हुलेश्वर जोशी द्वारा रचित है। नाटक ‘‘दसरी’’ का मंचन जिला पुलिस बल द्वारा सामाजिक संस्था नव संचार फाउण्डेशन और करूणा फाउण्डेशन के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला सप्ताह पर थीम ‘सुपोषित महिला, खुसहाल परिवार’ के तहत किया गया।

इस नाटक के माध्यम से नन्हे छात्र - छात्राओं और पुलिस के जवानों द्वारा बेटियों के साथ होने वाले सौतेले व्यवहार, बेटी के खिलाफ सामाजिक मानसिकता, भ्रूण हत्या, कुपोषण और बालविवाह जैसे सामाजिक बुराइयों को चित्रांकित करते हुए नाटक के माध्यम से इन सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने की अपील की गई। हम किस तरह से बेटियों को उपेक्षित रखकर उनके मानव अधिकारों का हनन करते हैं उन्हें उपेक्षित रखते हैं, कैसे हम अपने बेटा को शिर में चढ़ाकर उन्हें अपराध की दुनिया मे ढकेल देते हैं, हम बेटा के लिए क्या क्या सपने देखते हैं और कैसे उन सपनों को आखिरकार बेटियाँ साकार करती है इसे दिखाने का प्रयास किया गया है। कैसे लछमी जो खुद एक स्त्री है भ्रूण हत्या के लिए कैसे उतावली होकर अपनी झुमका बेच देती है, रमेसर और लछमी कितने क्रूरता से कोख में ही बेटी की हत्या करने का आपराधिक षड्यंत्र रचते हैं। गांव का गौटिया कैसे नाबालिग दसरी के लिए रिश्ते लाकर उसे पढ़ाई से वंचित करने और दसरी के मानव अधिकारों के हनन का प्रयास करता है और रमेसर को दुत्कारता है अपने पॉवर का रौब दिखता है। मगर इन सभी के बीच संतोषी हमेशा अपने खुद के साथ साथ अपनी दीदी के हक और अधिकार के लिए लड़ती रहती है, वहीं जेंटलमैन सत्यवान और प्रोफेसर कृष्णकांत द्वारा दसरी को उसके शिक्षा के अधिकार, विवाह के लिए वर चुनने के अधिकार को संरक्षित करते हुए नाबालिग दसरी की शादी 18 साल के बाद ही करने के लिए समझाइस दी जाती है। उपेक्षाओं के बावजूद दसरी, संतोषी और कारी आइकोनिक बेटी बनकर समाज में मिशाल बनती है, माता पिता को सहारा देती है। अंत मे जब बेटा ललित गैंगस्टर बन जाता है तब रमेसर को पश्चाताप होता है और फिर गर्व करता है अपनी बेटियों के सफलता और जिम्मेदारियों पर... नाटक लोगों को हर क्षण अपने आगे के एक्ट और डायलॉग के लिए बांधकर रखता है, नाटक में हृयविदारक डायलॉग हैं जो दर्शकों के केवल रोंगटे ही खड़े नहीं करते बल्कि रुला भी देता है।

सबसे खास बातः
जब खुल मच में किसी नाटक मंचन या कार्यक्रम हो रहा हो और इस दौरान पानी गिर जाए तो भगदड मच जाती है मगर नाटक ‘‘दसरी’’ लोगों को इतना मुग्ध कर रखा था कि पानी गिरने के बावजूद खूले मंच में हजारों अतिथिगण और दर्शक इसका मंचन देखते रहे, किसी एक ने भी नाटक छोडकर खूद को भींगने से बचाने का प्रयास नहीं किया। नाटक के पात्र नन्हे छात्र कलाकारों और पुलिस अधिकारियों ने इसे अपना अप्रत्यासित सफलता के रूप में अभिव्यक्त किया।

पात्र परिचय:
इस नाटक में रमेसर (पिता) का रोल - श्री हरीश उइके, लछमी (माता) का रोल - चंद्रक्रान्ति, बेटी दसरी का रोल - कु. नेहा मंडावी, बेटी संतोषी का रोल - कु. रिया दुग्गा, बेटी कारी का रोल - कु. बिनेश्वरी यादव, बेटा ललित का रोल - ललित जुर्री, काकी का रोल - श्रीमती पूर्णिमा ठाकुर, भुरवा काका, गांव के गौटिया और वक्ता का रोल - श्री हुलेश्वर जोशी, लड़का सत्यवान का रोल - श्री कन्हैया वैष्णव, लड़के के पिता प्रोफेसर कृष्णकांत का रोल - श्री चेतन बघेल, डॉक्टर का रोल - श्री दिलीप निर्मलकर, नर्स का रोल - कु.कृष्टि राठौर और पुलिस अधिकारी का रोल - श्री सतीश दर्रो द्वारा निभाया गया।

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