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मंगलवार, सितंबर 22, 2026

हार्ट अटैक के मुख्य कारण और बचाव के लिए आहार प्रबंधन



हार्ट अटैक के मुख्य कारण और बचाव के लिए आहार प्रबंधन
- लेखक : श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी

हार्ट अटैक अर्थात तीव्र मायोकार्डियल इन्फार्क्शन एक गंभीर हृदयवाहिका आपातस्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशी तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है। सामान्यतः इसका संबंध कोरोनरी धमनियों में एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक के टूटने और उसके स्थान पर रक्त का थक्का बनने से होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, “Cardiovascular diseases (CVDs) are the leading cause of death globally.” वर्ष 2022 में अनुमानित 19.8 मिलियन लोगों की मृत्यु हृदयवाहिका रोगों के कारण हुई, जो विश्व की कुल मौतों का लगभग 32 प्रतिशत थी। इनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं।

हार्ट अटैक का जोखिम केवल आनुवंशिक या उम्र संबंधी कारकों पर निर्भर नहीं करता। अस्वास्थ्यकर आहार, उच्च रक्तचाप, रक्त में असामान्य लिपिड, बढ़ा हुआ रक्त ग्लूकोज, अधिक वजन एवं मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और तंबाकू सेवन जैसे अनेक परिवर्तनीय कारक इसके जोखिम को प्रभावित करते हैं। डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट कथन है, “Most heart attacks can be prevented by controlling a small number of behavioural and metabolic risk factors.”

आहार प्रबंधन हार्ट अटैक की प्राथमिक रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से नमक, संतृप्त वसा, औद्योगिक ट्रांस-फैट और मुक्त शर्करा का सेवन सीमित करना तथा साबुत अनाज, दालों, फलियों, सब्जियों और फलों का सेवन बढ़ाना रक्तचाप, शरीर के वजन और रक्त लिपिड जैसे परिवर्तनीय जोखिम कारकों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।

हृदय शरीर के प्रत्येक अंग तक रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने का कार्य करता है। हृदय की मांसपेशियों को स्वयं रक्त की आपूर्ति कोरोनरी धमनियों के माध्यम से होती है। इन धमनियों में एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक जमा होने पर उनका मार्ग संकरा हो सकता है। यदि प्लाक टूट जाता है और वहां रक्त का थक्का बन जाता है, तो रक्त प्रवाह अचानक रुक सकता है और हार्ट अटैक हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, “A heart attack occurs when one of the coronary arteries that supply blood to the heart muscle becomes blocked, usually by a blood clot that forms where a fatty deposit (atherosclerotic plaque) has ruptured.”

इस प्रक्रिया को केवल अचानक घटने वाली घटना मानना पर्याप्त नहीं है। कोरोनरी धमनियों में एथेरोस्क्लेरोसिस का विकास कई वर्षों में हो सकता है और इसके पीछे जीवनशैली, आहार, रक्तचाप, रक्त लिपिड, रक्त शर्करा और तंबाकू जैसे कारकों का संयुक्त प्रभाव रहता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू सेवन और हानिकारक शराब सेवन प्रमुख व्यवहारगत जोखिम कारक हैं, जबकि उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त ग्लूकोज, असामान्य रक्त लिपिड और अधिक वजन या मोटापा महत्वपूर्ण मेटाबोलिक जोखिम कारक हैं।

📂 हार्ट अटैक के प्रमुख कारण
हार्ट अटैक का जोखिम सामान्यतः किसी एक कारण से निर्धारित नहीं होता। विभिन्न जोखिम कारक एक-दूसरे को प्रभावित करते हुए कुल कार्डियोवैस्कुलर जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

☀️ उच्च रक्तचाप
लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप रक्तवाहिकाओं की दीवारों पर अतिरिक्त दबाव डालता है और लंबे समय में वैस्कुलर डैमेज तथा एथेरोस्क्लेरोसिस के विकास में योगदान कर सकता है। उच्च सोडियम सेवन भी रक्तचाप बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आहार संबंधी कारक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, “high intake of sodium (salt) is associated with increased blood pressure which can lead to cardiovascular disease.”

☀️ असामान्य रक्त लिपिड
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और अन्य असामान्य लिपिड स्तर एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ के महत्वपूर्ण कारकों में शामिल हैं। आहार में संतृप्त वसा और ट्रांस-फैट की अधिकता तथा आवश्यकता से अधिक कैलोरी का सेवन लिपिड प्रोफाइल और शरीर के वजन को प्रभावित कर सकता है।

☀️ तंबाकू सेवन
धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पाद कार्डियोवैस्कुलर जोखिम को बढ़ाते हैं। तंबाकू छोड़ना हार्ट अटैक की प्राथमिक रोकथाम का एक महत्वपूर्ण उपाय है। डब्ल्यूएचओ कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ की रोकथाम में तंबाकू छोड़ने को प्रमुख उपायों में शामिल करता है।

☀️ मधुमेह और उच्च रक्त ग्लूकोज
लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्त ग्लूकोज रक्तवाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ का जोखिम बढ़ा सकता है। अधिक वजन, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित आहार टाइप-2 डायबिटीज़ के जोखिम से जुड़े महत्वपूर्ण कारक हैं।

☀️ अधिक वजन और मोटापा
मोटापा अपने आप में तथा उच्च रक्तचाप, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज़ और असामान्य लिपिड प्रोफाइल जैसे अनेक जोखिम कारकों के साथ जुड़ा है। इसलिए स्वस्थ बॉडी वेट बनाए रखना कार्डियोवैस्कुलर प्रिवेंशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

☀️ शारीरिक निष्क्रियता
नियमित शारीरिक गतिविधि का अभाव वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम को बढ़ा सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ के जोखिम को कम करने की महत्वपूर्ण रणनीति है।

☀️ अस्वास्थ्यकर आहार
अधिक नमक, फ्री शुगर, सैचुरेटेड फैट, इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड वाला आहार तथा फल, सब्जियों, दालों और साबुत अनाज का कम सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल डाइटरी पैटर्न बना सकता है।


📂 आहार और हार्ट अटैक का संबंध
आहार सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से हृदयवाहिका स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। भोजन की गुणवत्ता रक्तचाप, रक्त ग्लूकोज, रक्त लिपिड, शरीर का वजन और मेटाबोलिक हेल्थ को प्रभावित कर सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार स्वस्थ आहार के मूल सिद्धांत “adequacy, balance, moderation and diversity” अर्थात पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता पर आधारित हैं। डब्ल्यूएचओ वयस्कों को प्रतिदिन कम-से-कम 400 ग्राम फल और सब्जियों का सेवन करने की सलाह देता है।

इसलिए हृदय-सुरक्षात्मक आहार का उद्देश्य केवल किसी एक पोषक तत्व को कम करना नहीं, बल्कि संपूर्ण भोजन-पैटर्न की गुणवत्ता में सुधार करना होना चाहिए।

📂 नमक: छोटा घटक, बड़ा प्रभाव
भारतीय भोजन में नमक केवल ऊपर से डाले जाने वाले टेबल सॉल्ट तक सीमित नहीं है। अचार, पापड़, नमकीन, पैकेज्ड स्नैक्स, सॉस, इंस्टेंट फूड और कई प्रोसेस्ड फूड भी सोडियम के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वयस्कों को प्रतिदिन “less than 5 grams of salt per day” का सेवन करना चाहिए, जो लगभग 2 ग्राम सोडियम के बराबर है। इस सीमा को ध्यान में रखते हुए भोजन में अतिरिक्त नमक घटाना, पैकेज्ड नमकीन खाद्य पदार्थों को कम करना और भोजन के स्वाद के लिए नींबू, जड़ी-बूटियों तथा मसालों का उपयोग करना व्यावहारिक रणनीति हो सकती है।

📂 वसा की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है वसा की गुणवत्ता
यह धारणा कि हृदय की सुरक्षा के लिए हर प्रकार की वसा को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। शरीर को आवश्यक फैटी एसिड और फैट-सॉल्युबल विटामिन के लिए कुछ मात्रा में डाइटरी फैट की आवश्यकता होती है। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि किस प्रकार की वसा और कितनी मात्रा में ली जा रही है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार सैचुरेटेड फैट कुल ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम और ट्रांस-फैट 1 प्रतिशत से कम होना चाहिए। डब्ल्यूएचओ विशेष रूप से इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट से बचने की सलाह देता है। इसका व्यावहारिक अर्थ है कि अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थ, कुछ पैकेज्ड बेकरी प्रोडक्ट्स और ऐसे प्रोसेस्ड फूड जिनमें इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट हो, उन्हें सीमित किया जाना चाहिए। इसके स्थान पर अनसैचुरेटेड फैट वाले खाद्य स्रोतों को उचित मात्रा में शामिल किया जा सकता है।

📂 फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज
हृदय-सुरक्षात्मक भोजन में प्लांट-बेस्ड फूड्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। सब्जियां और फल डाइटरी फाइबर, पोटैशियम, विटामिन, मिनरल तथा विभिन्न बायोएक्टिव कंपाउंड प्रदान करते हैं। दालें और अन्य लेग्यूम्स प्रोटीन तथा फाइबर के उपयोगी स्रोत हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार कार्बोहाइड्रेट मुख्यतः “whole grains, vegetables, fruits and pulses” से प्राप्त होने चाहिए। भारतीय भोजन प्रणाली में इसका अर्थ हो सकता है कि अत्यधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट पर निर्भरता घटाकर दलिया, ओट्स, साबुत गेहूं, विभिन्न मिलेट्स, ब्राउन राइस, दालें, चना, राजमा और अन्य लेग्यूम्स को भोजन का हिस्सा बनाया जाए।

📂 अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और कार्डियोवैस्कुलर जोखिम
आधुनिक खाद्य व्यवस्था में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन तेजी से बढ़ा है। इनमें कुछ पैकेज्ड स्नैक्स, प्रोसेस्ड मीट, शुगर-स्वीटेंड बेवरेज और अन्य अत्यधिक इंडस्ट्रियल रूप से तैयार खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।

2024 में प्रकाशित एक बड़े सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में 22 प्रोस्पेक्टिव स्टडीज को शामिल किया गया। इसमें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ तथा कोरोनरी हार्ट डिजीज़ के जोखिम के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया।

एक अन्य डोज-रिस्पॉन्स मेटा-एनालिसिस में 20 स्टडीज और 1,101,073 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के सेवन और कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के बीच सकारात्मक संबंध पाया गया।

हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि ऐसे अधिकांश अध्ययन ऑब्जर्वेशनल होते हैं। इसलिए किसी संबंध को सीधे कारण-परिणाम के रूप में नहीं माना जा सकता। फिर भी उपलब्ध साक्ष्य अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करने और कम प्रोसेस्ड, प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं।

📂 मेडिटेरेनियन डाइट से मिलने वाले संकेत
मेडिटेरेनियन डाइटरी पैटर्न में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, नट्स, सीड्स तथा मुख्यतः अनसैचुरेटेड फैट को प्राथमिकता दी जाती है और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड तथा अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित किया जाता है।

2024 में प्रकाशित रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स की सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में मेडिटेरेनियन डाइट के कार्डियोवैस्कुलर प्रिवेंशन प्रभावों का मूल्यांकन किया गया। उपलब्ध क्लिनिकल ट्रायल एविडेंस में मायोकार्डियल इन्फार्क्शन और स्ट्रोक सहित विभिन्न कार्डियोवैस्कुलर आउटकम का अध्ययन किया गया।

भारतीय परिस्थितियों में मेडिटेरेनियन डाइट को हूबहू अपनाना आवश्यक नहीं है। इसके मूल सिद्धांतों—अधिक सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज तथा हेल्दी फैट और कम प्रोसेस्ड फूड—को भारतीय खाद्य परंपरा के अनुरूप अपनाया जा सकता है।

📂 डब्ल्यूएचओ आधारित हृदय-सुरक्षात्मक आहार के प्रमुख लक्ष्य
डब्ल्यूएचओ की वर्तमान हेल्दी-डाइट गाइडेंस के आधार पर सामान्य वयस्कों के लिए निम्न लक्ष्य महत्वपूर्ण हैं:
🌼 फल एवं सब्जियां: कम-से-कम 400 ग्राम प्रतिदिन।
🌼 नमक: 5 ग्राम प्रतिदिन से कम।
🌼 सोडियम: 2 ग्राम प्रतिदिन से कम।
🌼 फ्री शुगर: कुल दैनिक ऊर्जा का 10 प्रतिशत से कम। अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे लगभग 5 प्रतिशत तक कम करना लाभकारी हो सकता है।
🌼 सैचुरेटेड फैट: कुल ऊर्जा का 10 प्रतिशत से कम।
🌼 ट्रांस-फैट: कुल ऊर्जा का 1 प्रतिशत से कम तथा इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट से बचाव।

📂 भारतीय संदर्भ में एक व्यावहारिक आहार मॉडल
🌼 नाश्ता: दलिया, ओट्स, वेजिटेबल पोहा या अन्य होल-ग्रेन आधारित विकल्प।
🌼 मध्य-सुबह: एक मौसमी पूरा फल।
🌼 दोपहर: पर्याप्त सब्जियां + दाल/चना/राजमा जैसी दालें या फलियां + साबुत अनाज आधारित रोटी या अन्य अनाज + सलाद।
🌼 शाम: कम नमक वाला मिनिमली प्रोसेस्ड स्नैक तथा बिना अतिरिक्त चीनी वाला पेय।
🌼 रात्रि: हल्का भोजन, पर्याप्त सब्जियां और दाल/फलियां या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत।

 

💡 भोजन तैयार करने की विधि में डीप-फ्राइंग की जगह स्टीमिंग, बॉइलिंग, रोस्टिंग या कम तेल में कुकिंग को प्राथमिकता दी जा सकती है।

 ⚠️ यह सामान्य प्रिवेंटिव डाइटरी फ्रेमवर्क है, किसी विशेष रोगी के लिए मेडिकल डाइट प्रिस्क्रिप्शन नहीं। पहले से हार्ट डिजीज़, किडनी डिजीज़, डायबिटीज़, हाइपरटेंशन या अन्य क्रॉनिक डिजीज़ वाले व्यक्ति के लिए डाइट को चिकित्सक या रजिस्टर्ड डायटिशियन की सलाह के अनुसार व्यक्तिगत रूप से निर्धारित करना आवश्यक है।


📂 भोजन के साथ जीवनशैली में परिवर्तन
हार्ट अटैक की रोकथाम को केवल भोजन तक सीमित नहीं किया जा सकता। तंबाकू से पूर्ण परहेज, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ बॉडी वेट, ब्लड प्रेशर और ब्लड ग्लूकोज का नियंत्रण तथा आवश्यकता के अनुसार लिपिड प्रोफाइल की जांच समग्र कार्डियोवैस्कुलर प्रिवेंशन का हिस्सा हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, “Most cardiovascular diseases can be prevented by addressing behavioural and environmental risk factors such as tobacco use, unhealthy diet ... obesity, physical inactivity.” इसलिए स्वस्थ भोजन तभी अधिक प्रभावी प्रिवेंटिव स्ट्रेटेजी बनता है जब उसके साथ सक्रिय जीवनशैली और आवश्यक मेडिकल स्क्रीनिंग भी जुड़ी हो।

📂 निष्कर्ष
हार्ट अटैक किसी एक भोजन, एक दिन की गलती या केवल उम्र का परिणाम नहीं है। इसके पीछे वर्षों में विकसित होने वाले एथेरोस्क्लेरोटिक और मेटाबोलिक जोखिम कारकों का योगदान हो सकता है। उच्च रक्तचाप, असामान्य रक्त लिपिड, डायबिटीज़, तंबाकू सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वास्थ्यकर आहार इसके महत्वपूर्ण परिवर्तनीय जोखिम कारक हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार इन जोखिम कारकों को नियंत्रित करके हार्ट अटैक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर डिजीज़ के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हृदय-सुरक्षात्मक आहार का मूल सिद्धांत किसी एक “सुपरफूड” की खोज नहीं, बल्कि संपूर्ण डाइटरी पैटर्न में सुधार है। अधिक सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज; पर्याप्त डाइटरी फाइबर; नियंत्रित नमक और फ्री शुगर; तथा सैचुरेटेड और इंडस्ट्रियल ट्रांस-फैट में कमी इस रणनीति के प्रमुख घटक हैं।

डब्ल्यूएचओ का “at least 400 grams of fruits and vegetables per day” और “less than 5 grams of salt per day” वाला लक्ष्य इस दिशा में स्पष्ट और व्यावहारिक आधार प्रदान करता है।

अतः हार्ट अटैक की रोकथाम को एक दीर्घकालिक लाइफस्टाइल स्ट्रेटेजी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, तंबाकू से दूरी, स्वस्थ बॉडी वेट और समय पर स्वास्थ्य जांच एक-दूसरे के पूरक हैं। भोजन का उद्देश्य केवल पेट भरना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मेटाबोलिक और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को बनाए रखना भी होना चाहिए।

लेखक:
(श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी) 
बी.एससी./डिप्लोमा इन इलेक्ट्रोपेथी साइंस
श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी राष्ट्रीय सेवा से जुड़ी हुई एक समाजसेवी महिला हैं जो पिछले 10 वर्षों से निरंतर WWW.THEBHARAT.CO.IN के माध्यम से देश के आम नागरिकों खासकर युवाओं का मार्गदर्शन करती हैं। श्रीमती जोशी सामाजिक न्याय, सामाजिक समरसता और कमजोर वर्ग तथा महिलाओं की उचित प्रतिनिधित्व की वकालत करती हैं।

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