"जीवन बचाओ मुहिम"

हत्यारा और मांसाहार नहीं बल्कि जीवों की रक्षा करने वाला बनो।


रविवार, अगस्त 05, 2018

सिटीजन काॅप हर नागरिक को पुलिस अधिकारी के रूप में कार्य करने की सुविधा देती है - आईजी दुर्ग

सिटीजन काॅप हर नागरिक को पुलिस अधिकारी के रूप में कार्य करने की सुविधा देती है - आईजी दुर्ग

प्रेसक्लब राजनांदगांव द्वारा आयोजित कार्यक्रम ’प्रेस से मिलिए’ में शामिल हुए आईजी श्री जीपी सिंह

दुर्ग आईजी श्री जीपी सिंह दिनांक 5 अगस्त 2018 को प्रेसक्लब राजनांदगांव द्वारा आयोजित कार्यक्रम ’प्रेस से मिलिए’ में शामिल हुए। ’प्रेस से मिलिए’ कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस के मोबाइल एप्लीकेशन सिटीजन कॉप पर विशेष चर्चा हुई जहां उन्होने सिटीजन काॅप के उपयोग एवं वर्तमान परिदृश्य में सिटीजन काॅप की उपयोगिता से मीडिया साथियों को रूबरू कराया। उन्होंने सिटीजन काॅप की उपयोगिता बताते हुए कहा कि ’यह एप्लीकेशन हर नागरिक को पुलिस अधिकारी के रूप में कार्य करने की सुविधा देती है।’  कार्यक्रम के दौरान श्री सिंह ने कहा कि ’मैं मानता हूं कि प्रेस के माध्यम से प्राप्त सूचनाएं सही होती है।’ इसलिए मेरी अपेक्षा मीडिया साथियों से है कि वे अपराध मुक्त राज्य की स्थापना में अपना अमूल्य योगदान दें। 

उन्होनें बताया कि सिटीजन कॉप में आमनागरिकों से सारगर्भित सूचनाएं/शिकायतें प्राप्त हो रही है। चूंकि यह एप्प आम नागरिकों के पहचान की गोपनीयता पर आधारित है इसलिए अब आम नागरिक भी अपराधियों के खिलाफ पुलिस को सूचनाएं देने के लिए आगे आ रहे हैं। 

श्री सिंह ने आगे बताया कि "सिटीजन काॅप एप्लीकेशन broken window theory पर कार्य करती है।" क्योंकि आम नागरिक बडे अपराधों से नही वरन् छोटे-छोटे अपराधों से अत्यधिक परेशान है, यदि छोटे अपराधियों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए प्रतिबंध लगा लें तो बडी अपराध घटित ही नही होगी। सही समय पर अपराधिक तत्वों पर कार्यवाही नही होने से ही ऐसे तत्व की मनोबल बढता और आगे बडे-बडे अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में सक्षम होता चला जाता है।

Citizen COP - Mobile Application के प्रमुख फीचर .......

Citizen COP - Mobile Application के प्रमुख फीचर .......


1. “Report an Incident” feature के माध्यम से अपनी पहचान बिना बताए अपने क्षेत्र और समाज में हो रहे विभिन्न प्रकार के अपराध (जैसे - चोरी/हत्या/लूट/ डकैती/शोषण/ छेडखानी), यातायात संबंधी अपराध/घटनाओं की सूचनाएं तथा नगर निगम संबंधी समस्याओं को सीधे पुलिस को उपलब्ध कराया जा सकता है। 
2. इस एप्लीकेशन में जनता की सुविधा हेतु Call Police और Call Administration के अंतर्गत थाना प्रभारियों सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों का नंबर भी उपलब्ध कराया गया है। 
3. “My Safe Zone” feature के माध्यम से गुगल मैप पर सुरक्षा घेरा बनाया जाकर अपने बच्चों तथा नजदीकी रिश्तेदारों की सुरक्षार्थ निगरानी की जा सकती है तथा उनके द्वारा चिन्हांकित घेरा से बाहर जाते ही आपको संदेश प्राप्त होगा। 
4. आकस्मिक परिस्थिति में संकट के समय SoS (Help Me) के माध्यम से एक क्लिक पर अपने 04 नजदीकी रिश्तेदारो व पुलिस को सूचना दी जा सकती है। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस द्वारा आवश्यक सहयोग/सुरक्षा प्रदान की जाती है। 
5. “Travel Safe” feature के माध्यम से आम नागरिक अपने सुरक्षित यात्रा की सुनिश्चितता पूर्व निर्धारित कर सकता है। 
6. “Report Lost Article” feature के माध्यम से किसी भी प्रकार के दस्तावेज और सामग्री खो जाने अथवा चोरी होने की स्थिति में पुलिस थाना जाए बिना ही अपनी सूचना दर्ज कराते हुए ई-मेल के माध्यम से पावती प्राप्त की जा सकती है। 
7. “Vehicle Search” feature के माध्यम से किसी भी वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से उसके मालिक व वाहन संबंधी पूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 8. इस एप्लीकेशन में जिलों के विभिन्न इमरजेंसी नंबर दिये गये है, नागरिकगण जिसका उपयोग कर सकते है। 
 9. “Nearby Places” feature के माध्यम से पुलिस द्वारा समय-समय पर जारी सूचनाओं को सीधे अपने मोबाईल पर प्राप्त किया जा सकता है। 
10. “Nearby Places” feature के माध्यम से अपने नजदीकी स्थल जैसे पुलिस थाना, बस स्टैण्ड, बैक, एटीएम, अस्पताल, डाॅक्टर, मुवी-थियेटर, रेस्तरां और पेट्रोल पम्प की जानकारी लोकेशन व दूरी सहित प्राप्त की जा सकती है। 
11. “My Close Group” feature के माध्यम से अपने नजदीकी रिश्तेदारों, परिजन व अन्य लोगों का समूह बनाकर गुगल मैप में उनका लोकेशन प्राप्त किया जा सकती है। 
12. Towing Vehicle Search के माध्यम से नो-पार्किंग में खडे किये वाहनों, लावारिस वाहनों और एक्सिडेंटल वाहनों को पुलिस द्वारा क्रेन से उठाने की स्थिति में वाहन के स्वबंजपवद की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 
13. “Verification/Inform Police” feature के माध्यम से घरेलु नौकर/नौकर, किरायेदार, सिनियर सिटीजन व शहर से बाहर जाने की जानकारी पुलिस थाना जाए बिना ही दिया जा सकता है, साथ ही चरित्र सत्यापन प्राप्त करने में समय की बचत होगी। 
14. “Track My Location” feature के माध्यम से आम नागरिक अपना वर्तमान लोकेशन जान सकता है।
15. “Fare Calculation” feature  के माध्यम से आम नागरिक दो स्थानों के बीच की दूरी व आॅटो रिक्शा के किराया की गणना स्वयं कर सकता है।
16. “Your Reports” feature के माध्यम से सिटीजन काॅप के उपयोगकर्ता द्वारा पुलिस को दिये सूचना/शिकायत पर की गई पुलिस कार्यवाही की जानकारी हासिल कर सकता है साथ ही अपना फीडबैक भेज सकता है।
17. “Reports Lookup” feature के माध्यम से किसी भी उपयोगकर्ता द्वारा किये गये शिकायत पर पुलिस कार्यवाही की जानकारी हासिल कर सकता है।

बुधवार, अगस्त 01, 2018

जनहित याचिका क्या है, क्यों और कैसे दायर किया जाता है ?

जनहित याचिका क्या  है, क्यों और  कैसे  दायर  किया  जाता है ?


जनहित याचिका (PIL - Public Interest Litigation) वह याचिका है, जो कि आम नागरिकों के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए न्यायालय में दायर की जाती है। कोई भी व्यक्ति जनहित (प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन) या सार्वजनिक महत्व के किसी मामले के विरूद्ध, जिसमें किसी वर्ग या समुदाय के हित या उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हों, जनहित याचिका (पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन) के जरिए न्यायालय की शरण ले सकता है।

विदित हो कि 1981 में अखिल भारतीय शोषित कर्मचारी संघ (रेलवे) बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी. आर. कृष्णाय्यर ने अपने फैसले में कहा था कि कोई गैर-रजिस्टर्ड असोसिएशन ही संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत रिट दायर कर सकता है। इसके बाद अपने एक जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘‘आम लोगों के अधिकारों को नकारा नहीं जा सकता।’’ जिसे देखते हुए अगर कोई शख्स हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर करना चाहे तो वह अधिवक्ता के माध्यम से अथवा लेटर लिखकर भी समस्या के बारे में सूचित कर सकता है जिसपर अदालत चाहे तो लेटर को जनहित याचिका में बदल सकती है। 

पीआईएल दो प्रकार के होते हैं, एक प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन और दूसरा पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन। प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन में पीड़ित खुद याचिका दायर करता है। इसके लिए उसे संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट और अनुच्छेद-226 के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता को अदालत को बताना होता है कि उसके मूल अधिकार का कैसे उल्लंघन हो रहा है। पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (जनहित याचिका) दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को यह बताना होगा कि कैसे आम लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है? कोई भी व्यक्ति जो सामाजिक हितों के बारे में सोच रखता हो, वह जनहित याचिका दायर कर सकता है। इसके लिये यह जरूरी नहीं कि उसका व्यक्तिगत हित भी सम्मिलित हो। 

जनहित याचिका को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय के समक्ष और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की जा सकती है। जनहित याचिका दायर करने के लिए यह जरूरी है, कि लोगों के सामूहिक हितों जैसे सरकार के कोई फैसले या योजना, जिसका बुरा असर लोगों पर पड़ा हो। किसी एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन होने पर भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है। जनहित याचिका केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, नगर पालिका परिषद और किसी भी सरकारी विभाग के विरूद्ध दायर की जा सकती है। ज्ञातव्य हो कि यह याचिका किसी निजी पक्ष के विरूद्ध दायर नहीं की जा सकती। लेकिन अगर किसी निजी पक्ष या कम्पनी के कारण जनहितों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा हो, तो उस पक्ष या कम्पनी को सरकार के साथ प्रतिवादी के रूप में सम्मिलित किया जा सकता है। 

संविधान में मिले मूल अधिकार के उल्लंघन के मामले में दायर की जाने वाली याचिका में सरकार को प्रतिवादी बनाया जाता है क्योंकि मूल अधिकार की रक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती है। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत सरकार को नोटिस जारी करती है और तब सुनवाई शुरू होती है।

जनहित याचिका ठीक उसी प्रकार से दायर की जाती है, जिस प्रकार से रिट (आदेश) याचिका दायर की जाती है। उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने के लिये याचिका की पाँच छाया प्रति दाखिल करनी होती हैं। जिस संबंध में प्रतिवादी को याचिका की छाया प्रति सूचना आदेश के पारित होने के बाद ही दी जाती है।

प्रश्न: क्या साधारण पत्र के जरिये भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है?
उत्तर: हां, जनहित याचिका खत या पत्र के द्वारा भी दायर की जा सकती है। पत्र के माध्यम से जनहित याचिका दायर करने हेतु माननीय चीफ जस्टिस महोदय, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, तिलक मार्ग, नई दिल्ली- 110001 अथवा छत्तीसगढ़ राज्य के निवासी राज्य क्षेत्र में जनहित के लिए माननीय चीफ जस्टिस महोदय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर को प्रकरण के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य एवं तथ्य के तर्क में प्रमाणित दस्तावेज की काॅपी संलग्न कर भेज सकते हैं।


प्रश्न: क्या जनहित याचिका को दायर करने व उसकी सुनवाई के लिये वकील आवश्यक है?
उत्तर: जनहित याचिका के लिये वकील होना जरूरी है परन्तु राष्ट्रीय/राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अन्तर्गत सरकार के द्वारा वकील की सेवाएं प्राप्त कराए जाने का भी प्रावधान है।

जनहित याचिका से संबंधित उच्चतम न्यायालय के कुछ महत्वपूर्ण निर्णय:
ऽ  रूरल लिटिगेशन एण्ड इंटाइटलमेंट केन्द्र बनाम् उत्तर प्रदेश राज्य, और रामशरण बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय के कहा कि जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान न्यायालय को प्रक्रिया से संबन्धित औपचारिकताओं में नहीं पड़ना चाहिए।
ऽ  शीला बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जनहित याचिका को एक बार दायर करने के बाद वापस नहीं लिया जा सकता।

मंगलवार, जुलाई 31, 2018

व्हाट्सएप्प में नया फीचर, एक साथ 4 लोगों से कर सकते है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

व्हाट्सएप्प में नया फीचर, एक साथ 4 लोगों से कर सकते है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग



व्हाट्सएप्प नें जोडा एक नया फीचर, एक साथ 4 लोगों से कर सकते है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात

Group Video Call on Whatsapp


क्या है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ?
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधुनिक संचार तकनीक है, जिसके माध्यम से दो या इससे अधिक स्थानों से एक साथ ऑडियो-वीडियो माध्यम से कई लोग जुड़ सकते हैं। इसे वीडियो टेलीकॉन्फ्रेंस भी कहा जाता है। इसका प्रयोग खासकर किसी बैठक या सम्मेलन के लिए तब किया जाता है, जब कई लोग अलग-अलग स्थानों में बैठे हों। 

आम लोगों के पहुंच में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग 
वाट्सएप्प के द्वारा इस फीचर को जोडने के बाद यह आम लोगों में भी प्रचलि हो जाएगी। इसके माध्यम से अगल अलग स्थानों में रहने वाले अपने परिवार के सदस्यों से एक साथ मिलकर वार्तालाप करना संभव हो गया है। वाट्सएप्प ने इसे ग्रुप विडियो काॅल का नाम दिया है।

इस फीचर के जुड़ने के बाद अब कोई भी व्हाट्सएप्प यूजर एक साथ 4 लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लाइव कनेक्ट होकर बात कर सकता है। बता दें, व्हाट्सएप्प अपने यूजर्स के लिए इस फीचर को पहले ही जोड़ने का घोषणा कर चुका था।

आप भी ट्राई करें, अच्छा लगेगा।

शनिवार, जुलाई 28, 2018

परछाइहा - एक सोच, पुरखौति मुक्तांगन की तर्ज पर

परछाइहा - एक सोच, पुरखौति मुक्तांगन की तर्ज पर


भारतीय प्राच्य ग्रंथों में स्पष्ट रूप से मानव के विकास, सुख और शांति की संतुष्टि व ज्ञान के लिए पर्यटन को अति आवश्यक माना गया है। भारतीय ऋषि मुनियों ने पर्यटन को सबसे अत्यधिक महत्व दिया है। उनका मानना था कि ‘‘बिना पर्यटन मानव अन्धकार प्रेमी होकर रह जायेगा।’’ पाश्चात्य विद्वान् संत आगस्टिन ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘‘बिना विश्व दर्शन ज्ञान ही अधुरा है।’ इसी सोंच पर आधारित छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नया रायपुर में पुरखौति मुक्तांगन की नींव रखी गई है। पुरखौति मुक्तांगन में छत्तीसगढ़ राज्य के प्राचीन, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की सुन्दरता और विविधता का संक्षिप्त दर्शन प्राप्त होता है। राज्य सरकार के इस सराहनीय प्रयास से प्रेरित पुरखौति मुक्तांगन की तर्ज पर परछाइहा (भारत छांया/दर्शन) की नींव रखने की स्वतंत्र सोच जन्म लेती है।
परछाइहा (भारत छांया/दर्शन) के माध्यम से समूचे राष्ट्र के प्राचीन धरोहर, प्रमुख धार्मिक स्थलों, दार्शनिक स्थलों, पर्यटकों को एक ही स्थान में उपलब्ध कराने का प्रयास हो, इसके अलावा देश के बाहर के भी कतिपय धार्मिक स्थलों जैसे कम्बोडिया के शिव मंदिर, मक्का-मदिना के मस्जिद को शामिल किया जा सकता है। जिससे छत्तीसगढ़ का गरीब से गरीब जनता भी सम्पूर्ण भारत भ्रमण का सुखद अनुभव कर सके। इससे न केवल राज्य के लोगों की समय व धन की बचत होगी वरन् राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि भी होगी। यदि ऐसे परिकल्पना पर आधारित किसी नये पर्यटन स्थल की नींव रखी जाती है तो संभव है ऐसा स्थल "परछाइहा" (भारत छांया/दर्शन) अंतर्राष्ट्रीय ख्याति को प्राप्त करेगा और देश विदेश के लोग भारत दर्शन के लिए यहां एक बार अवश्य आना चाहेंगे।


HP Joshi
Naya Raipur, Chhattisgarh

सारे ब्रम्हाण्ड में माता के अलावा कोई ईश्वर नही - परमपूज्यनीय मालिक जोशी

सारे ब्रम्हाण्ड में माता के अलावा कोई ईश्वर नही - परमपूज्यनीय मालिक जोशी


बात उन दिनों की है जब मै कक्षा 8वीं में अध्ययनरत् था, उन दिनों मेरे दादा जी की गौटियानी ही नही बल्कि उसके बाद घोर गरीबी भी समाप्त चूकी थी। हमारा परिवार वनोपज, गाय/भैंस पालन और डेयरी उत्पादन के लाभ से सुखमय स्थिति में आ चूका था। इसी सुखयम अहसास को अधिक गौरवान्वित करने उद्देश्य से मेरे पिता श्री शैल जोशी नें सन् १९९९ में दादाश्री (परमपूज्यनीय मालिक जोशी) को चारधाम यात्रा कराने के लिए अपनी इच्छा जाहिर किया था, तब दादाजी ने यह कहकर मना कर दिया कि ‘‘मेरे लिए कली (मेरी पत्नी) समस्त धामों से श्रेष्ठ व दर्शनीय है।’’ 

उनका मानना था कि ‘‘सारे ब्रम्हाण्ड में माता के अलावा कोई ईश्वर नही है। भौतिक रूप से स्वर्ग की कल्पना मुर्खता है सुखमय परिवार को ही स्वर्ग की संज्ञा दी गई है।’’


संस्मरण - हुलेश्वर जोशी
दिनांक 27/07/2018

बुधवार, जुलाई 18, 2018

नक्सली मारने वाले जवानों को गारंटी मेडल, आउट आॅफ टर्न प्रमोशन व नगद ईनाम से पुरस्कृत किया जाएगा

नक्सली मारने वाले जवानों को गारंटी मेडल, आउट आॅफ टर्न प्रमोशन व नगद ईनाम से पुरस्कृत किया जाएगा


18/07/2018 आईजी दुर्ग के आदेश पर अमल, राजनांदगांव पुलिस ने 5लाख रूपये के ईनामी महिला नक्सली जरीना पोटाई को मार गिराया

आईजी दुर्ग के निर्देशों पर अमल करते हुए जिला पुलिस बल, डीआरजी सीतागांव और आईटीबीपी की दो संयुक्त टीम आज दिनांक 18 जूलाई के प्रातः 4 बजे से नक्सल आॅपरेशन पर निकली थी। इस दौरान थाना कोहका क्षेत्रांतर्गत कोण्डाल पहाडी में लगभग 8ः30 बजे पुलिस की एक टीम के उपर नक्सलियों ने अंधा-धुंध फायर कर दी, जवानों ने त्वरित जवाबी कार्यवाही करते हुए महिला नक्सली जरीना पोटाई को मार गिराया। संयुक्त टीम के जवाबी के कार्यवाही से भयभीत होकर घने जंगल और पहाडियों का लाभ उठाकर उनके नक्सली साथी फरार हो गये।

मुठभेड के बाद सर्चिग के दौरान 01 महिला नक्सली का शव, 01 नग 12 बोर बंदूक, पोच-पिट्इू, नक्सली साहित्य सहित दैनिक उपयोग की वस्तुएं प्राप्त हुई है।


जरीना पोटाई, वर्ष 2005 से मोहला-औंधी क्षेत्र में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थी। इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में 16 अपराध पंजीबद्ध है वहीं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इनके उपर 5 लाख रूपये का ईनाम घोषित है।

ज्ञातव्य हो कि हाल ही में दुर्ग आईजी श्री जीपी सिंह ने दिनांक 04/07/2018 को दक्षिण राजनांदगांव के संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रमण कर कैम्प सुरक्षा व्यवस्था एवं नक्सल अभियान का जायजा लिया था। इस दौरान श्री सिंह ने जवानों से चर्चा कर समस्याओं की जानकारी लेकर जवानों को नक्सल अभियान में अच्छा कार्य करने के लिए प्रेरित करते हुए उनकी हौसला अफजाई की थी। तत्पश्चात् मानपुर में पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, केन्द्रीय बल एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर बरसात के मौसम में नक्सल अभियान में आने वाली कठिनाई एवं समस्याओं पर चर्चा कर, नक्सल अभियान को तेज करने की बात कही। आईजी श्री सिंह ने बारिश के कारण नक्सल अभियान प्रभावित न हो इसके लिए नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों को अभियान के लिए समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया था। 


आईजी श्री सिंह ने जिला पुलिस बल, डीआरजी सीतागांव और आईटीबीपी के जवानों को उनके उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। उन्होनें बताया कि मुठभेड में अच्छा प्रदर्शन करने वाले जवानों को गारंटी मेडल, आउट आॅफ टर्न प्रमोशन व नगद ईनाम से पुरस्कृत किया जाएगा।

आईजी दुर्ग के आदेश पर अमल, राजनांदगांव पुलिस ने 5लाख रूपये के ईनामी महिला नक्सली जरीना पोटाई को मार गिराया

आईजी दुर्ग के आदेश पर अमल, राजनांदगांव पुलिस ने 5लाख रूपये के ईनामी महिला नक्सली जरीना पोटाई को मार गिराया


जवानों को गारंटी मेडल, आउट आॅफ टर्न प्रमोशन व नगद ईनाम से पुरस्कृत किया जाएगाl

आईजी दुर्ग के निर्देशों पर अमल करते हुए जिला पुलिस बल, डीआरजी सीतागांव और आईटीबीपी की दो संयुक्त टीम आज दिनांक 18 जूलाई के प्रातः 4 बजे से नक्सल आॅपरेशन पर निकली थी। इस दौरान थाना कोहका क्षेत्रांतर्गत कोण्डाल पहाडी में लगभग 8ः30 बजे पुलिस की एक टीम के उपर नक्सलियों ने अंधा-धुंध फायर कर दी, जवानों ने त्वरित जवाबी कार्यवाही करते हुए महिला नक्सली जरीना पोटाई को मार गिराया। संयुक्त टीम के जवाबी के कार्यवाही से भयभीत होकर घने जंगल और पहाडियों का लाभ उठाकर उनके नक्सली साथी फरार हो गये।

मुठभेड के बाद सर्चिग के दौरान 01 महिला नक्सली का शव, 01 नग 12 बोर बंदूक, पोच-पिट्इू, नक्सली साहित्य सहित दैनिक उपयोग की वस्तुएं प्राप्त हुई है।

जरीना पोटाई, वर्ष 2005 से मोहला-औंधी क्षेत्र में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थी। इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में 16 अपराध पंजीबद्ध है वहीं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इनके उपर 5 लाख रूपये का ईनाम घोषित है।

ज्ञातव्य हो कि हाल ही में दुर्ग आईजी श्री जीपी सिंह ने दिनांक 04/07/2018 को दक्षिण राजनांदगांव के संवेदनशील क्षेत्रों में भ्रमण कर कैम्प सुरक्षा व्यवस्था एवं नक्सल अभियान का जायजा लिया था। इस दौरान श्री सिंह ने जवानों से चर्चा कर समस्याओं की जानकारी लेकर जवानों को नक्सल अभियान में अच्छा कार्य करने के लिए प्रेरित करते हुए उनकी हौसला अफजाई की थी। तत्पश्चात् मानपुर में पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, केन्द्रीय बल एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर बरसात के मौसम में नक्सल अभियान में आने वाली कठिनाई एवं समस्याओं पर चर्चा कर, नक्सल अभियान को तेज करने की बात कही। आईजी श्री सिंह ने बारिश के कारण नक्सल अभियान प्रभावित न हो इसके लिए नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों को अभियान के लिए समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया था। 
आईजी श्री सिंह ने जिला पुलिस बल, डीआरजी सीतागांव और आईटीबीपी के जवानों को उनके उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। उन्होनें बताया कि मुठभेड में अच्छा प्रदर्शन करने वाले जवानों को गारंटी मेडल, आउट आॅफ टर्न प्रमोशन व नगद ईनाम से पुरस्कृत किया जाएगा।

सोमवार, जुलाई 16, 2018

पुलिस परिवारों के लिए खुशखबरी, राज्य के सभी 27 जिलों में खुलेगी पुलिस कैन्टीन

पुलिस परिवारों के लिए खुशखबरी, राज्य के सभी 27 जिलों में खुलेगी पुलिस कैन्टीन


वर्तमान में राज्य के लगभग सभी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बटालियन मुख्यालयों में  "पुलिस  कैन्टीन" संचालित है जिसमें पुलिस के अधिकारियों/कर्मचारियों को कम दर में सामग्री उपलब्ध कराया जाता है। राज्य में पुलिस कैन्टीन की स्थापना तत्कालीन योजना प्रबन्ध के आईजी श्री जीपी सिंह के अथक प्रयासों की देन है। पुलिस कैन्टीन का उपयोग राज्य में तैनात छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल जिला पुलिस बल सहित केंद्रीय पुलिस बल के जवान और उनके परिवार भी कर रहे हैं। 4थी वाहिनी माना रायपुर में संचालित पुलिस कैन्टीन समूचे राज्य में ख्यातिप्राप्त है। जिलाबल के अधिकांश अधिकारी/कर्मचारी पुलिस कैन्टीन से लाभान्वित हो रहे हैं। जिला बल के जवानों को CAF बटालियन मुख्यालयों में संचालित पुलिस कैंटीन का लाभ लेना चाहिए।



बता दें कि आईजी श्री सिंह पुलिस आधुनिकीकरण एवं जवानों के वेफेयर के माने जाने आईजी हैं। उनके द्वारा आमजन को पुलिस सुविधा उनके स्मार्टफोन में उपलब्ध कराने के लिए Citizen COP - mobile application तैयार कराया है जो वर्तमान में राज्य के 11 जिलों में संचालित है। केंद्रसरकार ने एप्लीकेशन को बहुउपयोगी मानते हुए Digital India Award से सम्मानित किया है।



ज्ञातव्य हो कि आईजी श्री सिंह ने योजना प्रबंध में पोस्टिंग के दौरान राज्य के सभी 27 जिलों में पुलिस कैंटीन की स्थापना के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसके अलावा हाल ही में १० जुलाई को आईजी दुर्ग ने दुर्ग संभाग के सभी पुलिस अधीक्षकों का बैठक लेकर उन्हें निर्देशित किया है कि "पुलिस जवानों के लिये 4थी बटालियन माना में स्थापित केंटिन की तरह सभी जिलों में पुलिस केेंटिन खोलने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय को भेजकर स्वीकृति प्राप्त करें।" 

शुक्रवार, जुलाई 13, 2018

अब छत्तीसगढ़ पुलिस परिवार का आंदोलन हो सकती है बंद, आईजी दुर्ग ने भेजा प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए खुशखबरी, आईजी दुर्ग का प्रस्ताव 


अब छत्तीसगढ़ पुलिस परिवार का आंदोलन हो सकती है "बंद"

जवानों के लिए खुशखबरी अवकाश के दौरान भत्तों में कटौती नही होगी

ड्यूटि के दौरान मृत्यु होने पर जवानों को शहीद के समकक्ष पेंशन इत्यादि प्राप्त होगी

विश्वसनीय सूत्र से ज्ञात हुआ है कि पुलिस परिवार के आंदोलन के कुछ दिन पूर्व ही दुर्ग संभाग के आईजी श्री जी पी सिंह द्वारा केन्द्रीय कल्याण समिति एवं परामर्शदात्री समिति की बैठक हेतु पुलिस बल, एसपीओ, स्टेनो और बाबुओं के लिए कल्याणकारी एजेण्डा प्रस्ताव तैयार किया है। पुलिस परिवार के सदस्यों की मानें तो यह प्रस्ताव वास्तव में पुलिस बल के लिए आदर्श प्रस्ताव है। उन्हें विश्वास है कि राज्य सरकार ऐसे प्रस्ताव को स्वीकृत करेगा। आदर्श प्रस्ताव पर चर्चा करने पर पुलिस परिवार ने खुशी जाहिर करते हुए आईजी श्री सिंह को धन्यवाद दिया है। प्रस्ताव के कुछ अंश इसप्रकार हैं:-

वेतन विसंगति:- आरक्षक, प्रधान आरक्षक, एएसआई की वेतन विसंगतियों को दूर करते हुए सहायक आरक्षकों के वेतन में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में छठवे वेतनमान के आधार पर आरक्षकों का ग्रेड-पे 2200/- करने की अनुसंशा की गई है।

नये भत्तों की स्वीकृति:- 
  • वर्तमान में आरक्षक एवं प्रधान आरक्षकों को विभाग द्वारा किट वितरण किया जाता है जिसे समाप्त करते हुए प्रतिवर्ष 3 हजार रूपये एकमुस्त देने की बात कही गई है। 
  • मुलजिम पेशी में जाने वाले जवानों के लिए मुलजिम खुराक भत्ता देने एवं 15 साल एवं 20 साल सेवा पूर्ण कर मेडल प्राप्त करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों के लिए मेडल भत्ता देने की अनुसंशा की गई है।
  • पेट्रोल भत्ता के रूप में 1 हजार रूपये अथवा सप्ताह में 5 लिटर पेट्रोल देने, टाॅप-अप सहित सीयूजी सिम प्रदान करने की अनुसंशा की गई है। 
  • प्रशिक्षण भत्ता के दौरान प्रतिदिन 60 रूपये मिलने वाले भत्ते को कम से कम 200 रूपये बढ़ाने की अनुसंशा की गई है। 
भत्तों में वृद्धि:- 
  • समस्त अधिकारी/कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के आधार पर 15 प्रतिशत गृहभाडा भत्ता प्रदान करने की अनुशंसा की गई है। इससे नये भर्ती जवानों को उनके वेतन में लगभग 3500/- रूपये का लाभ होगा।
  • जवानों के ड्यूटि में मिलने वाले यात्रा भत्ता जो वर्तमान में महानगर में 80 रूपये एवं अन्य स्थान के लिए 60 रूपये का प्रावधान है जिसे क्रमशः 300 एवं 200 रूपये बढ़ाने की बात कही गई है।
  • वर्तमान में वर्दी भत्ता के रूप में आर./प्रआर को 60 रूपये एवं सउनि/उनि/निरीक्षकों को 80 रूपये प्रतिमाह की दर से देय है जिसे क्रमशः 500 एवं 1000 रूपये बढ़ाने की बात कही गई है।
  • अधिकारियों को तीन वर्ष में एक बार वर्दी अनुदान के रूप में 800 रूपये मिलती है जिसे प्रतिवर्ष 2 हजार रूपये करने की अनुसंशा की गई है।
  • पौष्टिक आहार भत्ता के रूप में जवानों को मात्र 100 रूपये प्राप्त हो रही है जिसे 1,500 रूपये करने की अनुसंशा की गई है।
  • एफटीए के रूप में 30 रूपये प्राप्त होने वाले भत्ते को 1 हजार रूपये करने की अनुसंशा की गई है।
  • चिकित्सा भत्ता के रूप में 200 रूपये प्रतिमाह प्राप्त होने वाले भत्ते को 500 रूपये करने की अनुसंशा की गई है।
  • राशन भत्ता, बिगुलर, आर्मोरर एवं चालक भत्ता को बढ़ाने बात कही गई है। यदि प्रस्ताव स्वीकृत कर लिया जाता है तो इन सभी भत्तों में 300 प्रतिशत से 1000 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। 
  • त्यौहार अग्रिम के रूप में मिलने वाली रकम को 20 हजार करने की बात कही गई है।

कल्याणकारी योजनाएं:- 
  • जवानों एवं परिवार के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा का प्रावधान करने हेतु स्मार्ट कार्ड की तर्ज पर पुलिस मेडिक्लेम कार्ड की बनाने अनुसंशा की गई है। 
  • समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए आवासगृह तैयार कराने की प्रस्ताव रखते हुए आवासगृह की आकृति बढ़ाने की बात कही गई है।  
  • पुलिस परिवार के बच्चों के स्कूल आने जाने के लिए वाहन व्यवस्था की अनुसंशा की गई है।   
  • समस्त जिला मुख्यालय में 4थी वाहिनी माना रायपुर के तर्ज पर पुलिस केन्टीन संचालन की अनुसंशा की गई है। 
  • प्रत्येक जिले में जवानों एवं उनके परिवार की सुविधा के दृष्टिगत पुलिस गैस एजेंसी, पुलिस पेट्रोल पम्प, पुलिस अस्पताल, पुलिस स्कूल, प्ले स्कूल, झूला घर, पार्क, मनोरंजन गृह, खेलकूद ग्राउण्ड एवं जिम बनाने की अनुसंशा की गई है।
पदोन्नति:- 
  • पदोन्नति के लिए थाना में पदस्थापना की अनिवार्यता समाप्त करने की अनुसंशा की गई है।
  • आरक्षक से प्रआर एवं प्रआर से सउनि ‘‘ब’’ संवर्ग पदोन्नति के लिए शारीरिक परीक्षा अनिवार्य समाप्त करने की अनुसंशा की गई है। इसके साथ ही पीपी कोर्स नही करने के कारण के कारण पदोन्नति प्रभावित नही होने की बात कही है।
  • स्टेनो संवर्ग के कर्मचारियों के लिए लिपिक संवर्ग के तर्ज में पदोन्नति का प्रावधान प्रावधानित करने की अनुसंशा की गई है।
  • जिला/इकाई स्तर में कार्यरत् अनुसचिविय कर्मचारियों को लंबे अवधि तक प्रमोशन के लिए इंतिजार करना पडता है इसलिए पुलिस मुख्यालय एवं इकाई स्तर के कर्मचारियों के कैडर को मर्ज करने की अनुसंशा की गई है।
अन्य महत्वपूर्ण सुझाव:- 
  • अवकाश के दौरान किसी भी प्रकार के भत्तों में कटौती नही किया जाना चाहिए।
  • ड्यूटि के दौरान मृत्यु होने पर जवानों को शहीद के समकक्ष असाधारण पेंशन/स्वत्व एवं विशेष एक्सग्रेसिया प्रदान करने की अनुसंशा की गई है।
  • केन्द्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर जवानों के बच्चों को प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये तक प्रशिक्षण शूल्क प्रदान किया जाना चाहिए।
  • जिला बल के जवानों को बैरट कैप पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए।
  • बल की कमी एवं सुरक्षा कारणों से सेशन ट्रायल में मुजलिमों की पेशी वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से हो।
  • पुलिस के कार्य की अधिकता को देखते हुए प्रत्येक वाहन के लिए 02 आरक्षक (चालक) तैनात किया जाना चाहिए।
  • प्रत्येक थाना में कम से कम आरक्षक (चालक) का 01 पद स्वीकृत हो, इन्हे शारीरिक परीक्षा में छूट देते हुए आईटीआई से डिजल मेकेनिक/मोटर मेकेनिक का प्रमाणपत्र की अनिवार्यता लागू कर दिया जाना चाहिए।

"अब देखना यह है कि पुलिस के इस आदर्श प्रस्ताव पर राज्य सरकार कितना अमल करती है और यह प्रस्ताव छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारी/कर्मचारियों, एसपीओ, स्टेनो और बाबुओं के लिए कितना कल्याणकारी साबित होता है।"


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