जातक प्रश्न : मेरी पत्नी मुझसे झगड़ा करती है और चैन की नींद सो जाती है, परन्तु मुझे नींद नहीं आती है। ऐसा क्या करूँ कि मुझे भी कोई फर्क न पड़े?

जातक प्रश्न : मेरी पत्नी मुझसे झगड़ा करती है और चैन की नींद सो जाती है, परन्तु मुझे नींद नहीं आती है। ऐसा क्या करूँ कि मुझे भी कोई फर्क न पड़े?

"पति-पत्नी का झगड़ा दो या दो से अधिक राजाओं के बीच की युद्ध नहीं है, जिसमें आपके लिए किसी भी शर्त में युध्द जीतना आवश्यक हो।" माता श्यामा देवी

माता श्यामा देवी की तर्क पढ़ने के बाद आपको पता चल चुका होगा कि आपको अपने जीवनसाथी से जीतने की जरूरत नहीं है। मैं आपको दूसरा परिभाषा भी बता देना चाहता हूँ जिसमें श्री मालिक जोशी ने कहा था "मेरे लिये मेरी पत्नी और मेरी माँ समस्त तीर्थों से अधिक श्रेष्ठ और पवित्र है।" उन्होंने ये भी कहा था कि "सामान्यतः जीवनसाथी के बिना बेहतर जीवन की कल्पना मूर्खतापूर्ण है।" मेरा व्यक्तिगत रूप से यही मानना है कि "हर इंसान की सामान्यतः एक जैसी प्राकृतिक आचरण होती है, समय काल और परिस्थितियों के अनुसार हम जिन आचरण को सही या ग़लत समझने की अवधारणा बना लेते हैं अधिकतर मामलों में हमारा दर्शन या यह कहें कि हमारा पैमाना अधूरा अथवा गलत होता है।"

आपको किसी निष्कर्ष में ले जाने के पहले यह भी क्लीयर बता देना चाहता हूँ कि यदि आप ये सोचते हों कि आपकी जीवनसाथी गलत है तो ख़्याल रखिए ये आपकी भ्रम मात्र है। यदि आप विवाह विच्छेद के विकल्प का चुनाव करने की सोच रहे हैं तो आपको बता देना चाहता हूँ कि आप जिनसे विवाह करने की सोच रहे हैं वह किसी नेटवर्क प्रदाता कंपनी का रिचार्ज वाउचर नहीं है जो यह गारंटी देता हो कि अमुक रिचार्ज में कितने दिन की वैधता होगी, कितने घंटे या कितने मिनट की कॉलिंग फैसिलिटी और कितना MB या GB डेटा होगी।

अब आपके पास प्रमुख रूप से तीन परिभाषा और अँगूठाछाप लेखक, अबोध विचारक के बईसुरहा दर्शन का तर्क हैं। इन सभी बिंदुओं पर बुद्धि लगाने से सम्भव है आपको भी यही निष्कर्ष मिले कि आपकी यही जीवनसाथी बेहतर साबित हो सकता है। थोड़ा प्रयास करिये उन्हें थोड़ा समय दीजिये, थोड़ा विश्वास करिये। मैं एक अच्छे शुभचिंतक के रूप में आपको यही सलाह दूँगा कि अपने जीवनसाथी के छोटी मोटी गलतियों को अनदेखा करने, उन्हें माफ़ करने और बिना गलती के माफ़ी मांगने की आदतों को अपने आचरण में शामिल कर लीजिए। मैं आपको पुनः सलाह देने के पूर्व बता देना चाहता हूँ कि "किसी भी युध्द में आपके प्रतिद्वंद्वी को कितना अधिक हानि अथवा क्षति पहुंची ये परिणाम मायने नहीं रखता; बल्कि मायने तो इस बात की है कि इससे आपको क्या-क्या हानि हुआ।" पति-पत्नी के बीच की झगड़े में तो आप ही अपने सेनापति हैं और आपकी जीवनसाथी आपके अपने ही सैनिक हैं फिर युध्द का परिणाम चाहे जो भी हो, हानि तो आपको ही होनी है।

मैं अंत में आपको यही सलाह देना चाहता हूँ कि आप युध्द की स्थिति से बचें; घर से बाहर उद्यान घूमने चले जाएं। बच्चों के साथ खेलने लग जाये या फिर कपिल शर्मा के शो देख लें। आप चाहें तो अपने मोबाइल में हैडफोन लगाकर भारी भरकम आवाज में आँख बंद करके अपनी पसंदीदा गाने सुनें।

स्पेसिली जब आपको नींद न आये तब भी आप अपने मोबाइल में हैडफोन लगाकर भारी भरकम आवाज में आँख बंद करके या कम्बल ओढ़कर अपनी पसंदीदा गाने सुनें।

धर्मगुरु हुलेश्वर बाबा
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5 comments:

  1. मैं न केवल सहमत हूँ बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन में यही रणनीति अपनाता भी हूँ

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  2. Mai aapki bato se pudtah sahmat hu,kyunki is yukti se aap aapsi vivad ko kafi had tak control kar skate hai.

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