Image generated by AI
छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में बड़ा बदलाव: 2026 के नए सेवा नियमों से भर्ती और पदोन्नति व्यवस्था को मिला स्पष्ट वैधानिक ढांचा
राजपत्र पढने के लिए यहाँ क्लिक करें
छत्तीसगढ़ के सशस्त्र पुलिस बल के अराजपत्रित कर्मचारियों और इस सेवा में प्रवेश की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए वर्ष 2026 महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग ने “छत्तीसगढ़ सशस्त्र कार्यपालिक बल (अराजपत्रित) सेवा (भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा की शर्तें) नियम, 2026” अधिसूचित कर दिए हैं। अधिसूचना 27 अगस्त 2026 को जारी की गई है और नियमों का राजपत्र में प्रकाशन हो चुका है। संविधान के अनुच्छेद 309 के अंतर्गत बनाए गए इन नियमों ने सशस्त्र कार्यपालिक बल के अराजपत्रित पदों पर भर्ती, पदोन्नति और सेवा संबंधी व्यवस्थाओं को एक समेकित वैधानिक ढांचे में रखा है।
इन नए नियमों का महत्व केवल नई भर्ती तक सीमित नहीं है। इनका सीधा संबंध सेवा में पहले से कार्यरत कर्मचारियों के कैडर, पदोन्नति की पात्रता, विभागीय पदोन्नति समिति, आरक्षण रोस्टर, चयन/योग्यता सूची और पदोन्नति-पूर्व प्रशिक्षण से भी है। इसलिए यह नियमावली अभ्यर्थियों के साथ-साथ वर्तमान आरक्षक, प्रधान आरक्षक और अन्य संबंधित अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गई है।
1. भर्ती के लिए तीन प्रमुख माध्यम
नए नियमों में सेवा में भर्ती के तीन प्रमुख माध्यम निर्धारित किए गए हैं—प्रतियोगिता परीक्षा/चयन के माध्यम से सीधी भर्ती, सेवा के सदस्यों की पदोन्नति तथा निर्धारित परिस्थितियों में स्थानांतरण अथवा प्रतिनियुक्ति। विभिन्न पदों पर इन माध्यमों से भर्ती की सीमा और प्रक्रिया संबंधित अनुसूचियों के अनुसार निर्धारित होगी।
2. शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा का महत्वपूर्ण स्थान
सीधी भर्ती प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होगी। आवेदन-पत्रों की छानबीन, शारीरिक मापतौल, शारीरिक दक्षता परीक्षा और आवश्यकतानुसार व्यावसायिक दक्षता परीक्षा/ट्रेड टेस्ट के बाद लिखित परीक्षा की व्यवस्था की गई है। इससे चयन प्रक्रिया में शारीरिक क्षमता के साथ बौद्धिक एवं व्यावसायिक दक्षता को भी महत्व दिया गया है।
3. पदोन्नति के लिए निर्धारित अर्हकारी सेवा जरूरी
विभागीय पदोन्नति के लिए कर्मचारी को संबंधित फीडर पद या समकक्ष घोषित पद पर अनुसूची-4 में निर्धारित अवधि की सेवा पूरी करना आवश्यक होगा। अर्हकारी सेवा की गणना संबंधित वर्ष की 1 जनवरी को की जाएगी और नियमों में इसकी गणना की विधि भी स्पष्ट की गई है।
4. डीपीसी और आरक्षण रोस्टर की महत्वपूर्ण भूमिका
पदोन्नति के लिए पात्र कर्मचारियों के मामलों पर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) विचार करेगी। पदोन्नति प्रक्रिया में लागू आरक्षण प्रावधानों और आरक्षण रोस्टर का पालन किया जाएगा। पदोन्नति हेतु पात्र कर्मचारियों की चयन/योग्यता सूची तैयार करने की व्यवस्था भी नियमों में निर्धारित है।
5. पदोन्नति से पहले प्रशिक्षण
उच्च पद पर पदोन्नति के लिए चयनित कर्मचारियों को निर्धारित पदोन्नति-पूर्व प्रशिक्षण से गुजरना होगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा योग्यता सूची जारी की जाएगी और उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार नियमानुसार पदोन्नति की जाएगी।
क्या है 2026 के नए नियमों का व्यापक महत्व?
छत्तीसगढ़ सशस्त्र कार्यपालिक बल के लिए बनाए गए नए नियमों ने भर्ती और पदोन्नति को अलग-अलग बिखरे हुए प्रावधानों के बजाय एक व्यवस्थित सेवा-नियमावली के अंतर्गत लाने का प्रयास किया है। नियमों में सेवा के अंतर्गत आने वाले पदों के वर्गीकरण, पदों की संख्या और उनसे संबंधित वेतनमान को अनुसूचियों के माध्यम से निर्धारित किया गया है। शासन को आवश्यकता के अनुसार स्वीकृत पदों की संख्या तथा वेतनमान में समय-समय पर वृद्धि या कमी करने का अधिकार भी दिया गया है।
भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक क्षमता के साथ दक्षता का मूल्यांकन
सशस्त्र पुलिस बल की प्रकृति को देखते हुए शारीरिक दक्षता भर्ती प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नए नियमों में प्रथम चरण के अंतर्गत आवेदन-पत्रों की छानबीन, शारीरिक मापतौल, शारीरिक दक्षता परीक्षा और व्यावसायिक दक्षता परीक्षा/ट्रेड टेस्ट को शामिल किया गया है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है।
इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य ऐसे अभ्यर्थियों का चयन करना है जो संबंधित पद की शारीरिक आवश्यकताओं के साथ-साथ निर्धारित बौद्धिक एवं व्यावसायिक मानकों को भी पूरा करते हों। विशेष ट्रेड वाले पदों के लिए संबंधित कार्य की दक्षता को भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। नियमों में आरक्षक के विभिन्न ट्रेडों जैसे मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, कारपेंटर, प्लम्बर, पेंटर, वेल्डर, टेलर, कुक, धोबी, नाई, मोची आदि पदों का भी उल्लेख है।
स्वास्थ्य परीक्षण भी नियुक्ति का महत्वपूर्ण चरण
नियमों में नियुक्ति से पहले स्वास्थ्य परीक्षण का भी स्पष्ट प्रावधान है। अभ्यर्थी को निर्धारित स्वास्थ्य परीक्षण में मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ तथा संबंधित पद के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने वाले दोष से मुक्त पाया जाना आवश्यक होगा।
इसका अर्थ है कि चयन सूची में स्थान प्राप्त करना नियुक्ति की अंतिम शर्त नहीं है। निर्धारित अन्य औपचारिकताओं के साथ स्वास्थ्य संबंधी पात्रता भी पूरी करनी होगी।
पदोन्नति व्यवस्था: वर्तमान कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा
नए नियमों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया है। पदोन्नति के लिए कर्मचारी को संबंधित फीडर संवर्ग में निर्धारित अर्हकारी सेवा पूरी करनी होगी। नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित वर्ष की 1 जनवरी को आवश्यक सेवा अवधि पूरी करने वाले और निर्धारित विचारण क्षेत्र में आने वाले कर्मचारियों के मामलों पर विभागीय पदोन्नति समिति विचार करेगी।
अर्हकारी सेवा की गणना के संबंध में भी नियमों में विशेष व्यवस्था की गई है। संबंधित वर्ष की 1 जनवरी को सेवा अवधि की गणना उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें कर्मचारी फीडर संवर्ग के संबंधित पद/वेतनमान में आया हो। इस प्रावधान के कारण पदोन्नति की पात्रता निर्धारित करते समय केवल सेवा की सामान्य अवधि ही नहीं, बल्कि नियमों में निर्धारित गणना-पद्धति भी महत्वपूर्ण होगी।
रिक्तियों का निर्धारण और आरक्षण रोस्टर
पदोन्नति प्रक्रिया में रिक्तियों का निर्धारण भी महत्वपूर्ण चरण है। संबंधित वर्ष में उपलब्ध रिक्तियों के साथ सेवानिवृत्ति तथा उच्चतर संवर्ग में पदोन्नति के कारण संभावित रिक्तियों को ध्यान में रखते हुए रिक्तियों का निर्धारण किया जाएगा। नियमों में अप्रत्याशित रिक्तियों को ध्यान में रखने के लिए अतिरिक्त प्रावधान भी किया गया है। इसके बाद रिक्त पदों का निर्धारण आरक्षण रोस्टर के अनुसार किया जाएगा।
इस व्यवस्था का सीधा प्रभाव पदोन्नति की संख्या और संबंधित आरक्षित श्रेणियों के पदों पर पड़ता है। इसलिए कर्मचारियों के लिए केवल अपनी अर्हकारी सेवा पूरी करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित वर्ष की स्वीकृत/उपलब्ध रिक्तियों और लागू रोस्टर की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
विभागीय पदोन्नति समिति की भूमिका
नियमों के अनुसार पात्र कर्मचारियों के संवर्गवार प्रारंभिक चयन के लिए विभागीय पदोन्नति समिति गठित की जाएगी। समिति लागू आरक्षण प्रावधानों और शासन के निर्देशों के अनुरूप कार्य करेगी।
इसके बाद पदोन्नति हेतु चयन/योग्यता सूची तैयार की जाएगी। नियमों में विशेष पुलिस महानिदेशक/अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल द्वारा अंतिम रूप से अनुमोदित सूची को निर्धारित फीडर पद से उच्च पद पर पदोन्नति के लिए चयन/योग्यता सूची माना गया है। आवश्यकता होने पर रिव्यू डीपीसी की व्यवस्था भी नियमों में रखी गई है।
पदोन्नति-पूर्व प्रशिक्षण: नई व्यवस्था का अहम पहलू
नए नियमों में पदोन्नति के बाद की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति-पूर्व प्रशिक्षण को भी महत्व दिया गया है। चयनित कर्मचारियों को उच्च पद पर पदोन्नति से पहले निर्धारित प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा योग्यता सूची जारी की जाएगी और रिक्त पदों पर संवर्गवार उसी क्रम में पदोन्नति की जाएगी।
यह व्यवस्था इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि उच्च पद पर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारी को नई जिम्मेदारियों, नेतृत्व, प्रशासनिक दायित्वों और संबंधित पद की कार्यप्रणाली के अनुरूप तैयार किया जा सके।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी जोर
नियमों में चयन समिति द्वारा योग्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार करने और उसे सार्वजनिक जानकारी के लिए प्रकाशित करने का प्रावधान भी है। चयन समिति द्वारा निर्धारित स्तर पर अर्ह पाए गए अभ्यर्थियों की योग्यता क्रम में सूची तैयार की जाएगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों के संबंध में भी नियमों में विशेष व्यवस्था की गई है।
इससे भर्ती प्रक्रिया में मेरिट, पात्रता और निर्धारित चयन मानकों को औपचारिक आधार मिलता है।
कर्मचारियों और अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियम?
2026 के ये नियम दो स्तरों पर महत्वपूर्ण हैं। पहला, वे भविष्य में होने वाली सीधी भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए चयन प्रक्रिया, पात्रता और परीक्षा व्यवस्था का आधार तैयार करते हैं। दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वर्तमान कर्मचारियों के लिए इन नियमों में पदोन्नति की पात्रता, अर्हकारी सेवा, डीपीसी, रिक्तियों का निर्धारण, आरक्षण रोस्टर, चयन/योग्यता सूची और पदोन्नति-पूर्व प्रशिक्षण की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
इसलिए किसी कर्मचारी की पदोन्नति संबंधी पात्रता का मूल्यांकन करते समय केवल उसकी वरिष्ठता देखना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित पद के लिए निर्धारित फीडर संवर्ग, आवश्यक अर्हकारी सेवा, संबंधित वर्ष की स्थिति, उपलब्ध रिक्तियां, आरक्षण रोस्टर, विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया और निर्धारित योग्यता मानदंडों को भी देखना आवश्यक होगा।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सशस्त्र कार्यपालिक बल (अराजपत्रित) सेवा (भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा की शर्तें) नियम, 2026 केवल एक नई भर्ती नियमावली नहीं, बल्कि सशस्त्र बल के अराजपत्रित कर्मचारियों के सेवा-प्रबंधन और कैडर विकास का महत्वपूर्ण वैधानिक दस्तावेज है।
इन नियमों के माध्यम से भर्ती के लिए सीधी भर्ती, प्रतियोगिता परीक्षा, शारीरिक दक्षता, व्यावसायिक दक्षता और लिखित परीक्षा जैसी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित किया गया है। वहीं विभागीय पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा, डीपीसी, आरक्षण रोस्टर, रिक्तियों का निर्धारण, चयन/योग्यता सूची और पदोन्नति-पूर्व प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाओं को स्पष्ट रूप दिया गया है।
27 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना और इसके बाद हुए राजपत्र प्रकाशन के साथ यह व्यवस्था अब केवल प्रस्तावित सुधार नहीं रह गई है, बल्कि लागू सेवा नियमों का हिस्सा है। इसलिए सशस्त्र बल में कार्यरत कर्मचारियों, पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कार्मिकों तथा आगामी भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इन नियमों का अध्ययन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
स्रोत: छत्तीसगढ़ शासन, गृह (पुलिस) विभाग, अधिसूचना क्रमांक ESTB/13889/2026-HOME SECTION, दिनांक 27 अगस्त 2026।







कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें