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शनिवार, अक्टूबर 17, 2026

“सशस्त्र बल की पहचान केवल उसकी शक्ति और अनुशासन से नहीं; बल्कि जवानों के सम्मान, सुरक्षा, कल्याण और संवेदनशील नेतृत्व से होती है।”

सशस्त्र बल में संवेदनशील एवं प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व
अनुशासन, जवानों का कल्याण, तनाव प्रबंधन और सुरक्षित कार्यसंस्कृति की दिशा में पहल

प्रशासनिक नेतृत्व का मूल मंत्र “सशस्त्र बल की पहचान केवल उसकी शक्ति और अनुशासन से नहीं; बल्कि जवानों के सम्मान, सुरक्षा, कल्याण और संवेदनशील नेतृत्व से होती है।” (श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी)

सशस्त्र बल की वास्तविक शक्ति उसके अनुशासित, प्रशिक्षित और कर्तव्यनिष्ठ जवान हैं। बल की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रशासन के साथ जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक जीवन और सम्मानजनक कार्य वातावरण पर भी ध्यान देना आवश्यक है। प्रशासनिक नेतृत्व का उद्देश्य केवल ड्यूटी का संचालन करना नहीं, बल्कि ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना भी है, जिसमें अनुशासन, मानवीय संवेदनशीलता, निष्पक्षता और पारस्परिक विश्वास साथ-साथ आगे बढ़ें।

1. न्यायालयों के निर्णय और जवानों के हित
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने Prakash Singh बनाम Union of India (2006), (2006) 8 SCC 1 में पुलिस सुधारों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इस निर्णय में पुलिस व्यवस्था की व्यावसायिक स्वतंत्रता, संस्थागत जवाबदेही, सेवा-संबंधी मामलों के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड और निर्धारित कार्यकाल जैसे विषयों पर बल दिया गया। यह निर्णय पुलिस प्रशासन को अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। 

इसी प्रकार, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने Arun Kumar Bhadoria बनाम State of Uttarakhand (15 मई 2018) में पुलिसकर्मियों की कठिन कार्य परिस्थितियों, अवकाश, कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं और तनाव प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश दिए। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने Hardam Singh बनाम State of Punjab (12 सितंबर 2019) में लंबे एवं अनियमित ड्यूटी घंटों, पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य और पुलिसकर्मियों की सेवा-स्थितियों में सुधार की आवश्यकता पर विचार किया। ये निर्णय पुलिसकर्मियों के कल्याण और कार्य-जीवन संतुलन के संबंध में उपयोगी न्यायिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इनके विशिष्ट निर्देश संबंधित राज्यों और मामलों के संदर्भ में हैं; छत्तीसगढ़ में उनका क्रियान्वयन लागू कानूनों, नियमों और सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों के अनुरूप किया जाना चाहिए।


2. सुचारु ड्यूटी और समय पर अवकाश
ड्यूटी का निर्धारण करते समय उपलब्ध बल, कार्य की प्रकृति, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं और जवानों की कार्यक्षमता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। जहाँ संभव हो, ड्यूटी का उचित वितरण, पर्याप्त विश्राम, साप्ताहिक अवकाश और समय पर छुट्टी की व्यवस्था की जाए। अवकाश एवं अनुमति संबंधी आवेदनों का निस्तारण निर्धारित नियमों और वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार समयबद्ध ढंग से किया जाना चाहिए। आपातकालीन आवश्यकता में ड्यूटी संबंधी बदलाव आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में पूर्व नियोजन से जवानों को अपने पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व निभाने में सुविधा मिल सकती है।


3. अनुशासन ऐसा हो जो जिम्मेदारी बढ़ाए
अनुशासन सशस्त्र बल की पहचान है। इसे मजबूत बनाने के लिए स्पष्ट निर्देश, उचित मार्गदर्शन, निष्पक्ष समीक्षा और निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक है। सुधारात्मक सुझाव, कार्य संबंधी समीक्षा या नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई का उद्देश्य कार्यक्षमता और जवाबदेही को बेहतर बनाना होना चाहिए। यह प्रयास किया जाना चाहिए कि अनुशासन के नाम पर अनावश्यक मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार या व्यक्तिगत प्रताड़ना की स्थिति उत्पन्न न हो। सम्मानपूर्ण संवाद और निष्पक्ष व्यवहार से अनुशासन के साथ विश्वास भी मजबूत होता है।

4. तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य
पुलिस सेवा में अनियमित ड्यूटी, कठिन तैनाती, पारिवारिक दूरी और निरंतर सतर्कता की आवश्यकता तनाव पैदा कर सकती है। इसलिए तनाव प्रबंधन को जवानों के कल्याण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए। समय-समय पर स्वास्थ्य परामर्श, तनाव प्रबंधन संबंधी जागरूकता, गोपनीय मनोवैज्ञानिक सहायता, आपसी सहयोग और आवश्यक विश्राम की व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। मानसिक परेशानी के संकेतों को कमजोरी मानने के बजाय समय पर सहायता उपलब्ध कराने की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।

5. आत्महत्या और साथी जवानों के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम
आत्महत्या अथवा साथी जवानों के विरुद्ध गंभीर हिंसा की किसी भी घटना को रोकने के लिए संवेदनशील, व्यवस्थित और समयबद्ध प्रयास आवश्यक हैं। इसके लिए तनाव, निराशा, असामान्य व्यवहार, गंभीर पारिवारिक विवाद या लगातार मानसिक परेशानी के संकेत मिलने पर उचित सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। जवानों को बिना भय या कलंक के अपनी समस्या बताने का अवसर मिले तथा आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही, तनावपूर्ण परिस्थितियों में तत्काल सहायता की स्पष्ट व्यवस्था, गोपनीय शिकायत एवं परामर्श माध्यम, प्रशिक्षित सहयोगी कर्मियों की उपलब्धता और जोखिम की स्थिति में नियमानुसार सुरक्षा उपाय अपनाना उपयोगी होगा। शस्त्रों एवं अन्य संवेदनशील संसाधनों से संबंधित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए केवल घटना के बाद की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; नियमित संवाद, शुरुआती पहचान, समय पर हस्तक्षेप और निरंतर कल्याणकारी प्रयास आवश्यक हैं।


6. पारिवारिक जिम्मेदारियों और जवानों के सम्मान का ध्यान
जवान भी परिवार और समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बच्चों की शिक्षा, माता-पिता की देखभाल, जीवनसाथी की जिम्मेदारियाँ और आकस्मिक पारिवारिक परिस्थितियाँ उनके जीवन को प्रभावित करती हैं। जहाँ प्रशासनिक आवश्यकता और लागू नियम अनुमति दें, वहाँ ऐसी परिस्थितियों में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना उपयोगी होगा। जवानों को अपनी समस्याएँ उचित माध्यम से रखने और नियमानुसार समाधान प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। अच्छे कार्य की सराहना, निष्पक्ष व्यवहार और संवाद की सहज व्यवस्था से संगठन के प्रति विश्वास तथा कर्तव्यनिष्ठा मजबूत होती है।


छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में प्रभावी नेतृत्व का उद्देश्य अनुशासन, कार्यक्षमता और जवानों के कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना है। समयबद्ध ड्यूटी प्रबंधन, उचित अवकाश, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सम्मानजनक व्यवहार और निष्पक्ष प्रशासन ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित कर सकते हैं, जिसमें जवान अधिक आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य निभाएँ।

मजबूत बल वही है, जहाँ अनुशासन के साथ संवेदनशीलता, जिम्मेदारी के साथ सम्मान और कर्तव्य के साथ कल्याण को भी महत्व दिया जाता है। जवानों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संतुलन को प्राथमिकता देना न केवल मानवीय दायित्व है, बल्कि एक सक्षम, विश्वसनीय और प्रभावी सशस्त्र बल के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

(श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी)
बी.एससी./डिप्लोमा इन इलेक्ट्रोपेथी साइंस
श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी राष्ट्रीय सेवा से जुड़ी हुई एक समाजसेवी महिला हैं जो पिछले 10 वर्षों से निरंतर WWW.THEBHARAT.CO.IN के माध्यम से देश के आम नागरिकों खासकर युवाओं का मार्गदर्शन करती हैं। श्रीमती जोशी सामाजिक न्याय, सामाजिक समरसता और कमजोर वर्ग तथा महिलाओं की उचित प्रतिनिधित्व की वकालत करती हैं।

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