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बुधवार, मार्च 04, 2020

ISRO युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम 2020 - ऑनलाइन पंजीकरण शुरू है अपने बच्चे को बनाएं वैज्ञानिक

ISRO युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम 2020 - ऑनलाइन पंजीकरण शुरू है अपने बच्चे को बनाएं वैज्ञानिक 
युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम 2020 - ऑनलाइन पंजीकरण
YUVIKA 2020ऑनलाइन पंजीकरण एवं हस्ताक्षरित आवेदनों को जमा करने की तिथि 05 मार्च 2020 तक बढ़ाई गई है।



युवा विज्ञानी कार्यक्रम (युविका) 2020
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने वर्ष 2019 से स्कूली बच्चों के लिए “युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम” “युवा विज्ञानी कार्यक्रम” (युविका) नामक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के द्वितीय सत्र का आयोजन मई 2020 के दौरान किया जाएगा।

इस कार्यक्रम का मुख्‍य लक्ष्‍य युवाओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोगों पर मौलिक ज्ञान देना है, ताकि अंतरिक्ष गतिविधियों के उभरते क्षेत्रों में उनकी रुचि बढ़ाई जा सके। इस प्रकार, इस कार्यक्रम का लक्ष्‍य युवाओं में जागरूकता फैलाना है, जो हमारे राष्‍ट्र के भविष्‍य की निर्माण कड़ी हैं। इसरो ने उन्‍हें “युवा रूप में ही चयनित” करने की योजना बनाई है।

यह कार्यक्रम गर्मी की छुट्टियों (11-22 मई 2020) के दौरान 2 सप्‍ताह की अवधि का होगा तथा कार्यक्रम में प्रमुख वैज्ञानिकों से आमंत्रित व्‍याख्‍यान, उनके द्वारा अनुभव साझा करना, सुविधाओं एवं प्रयोगशालाओं को देखने जाना, विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श हेतु विशेष सत्र, व्‍यावहारिक एवं प्रतिपुष्टि सत्र शामिल होंगे।

इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सी.बी.एस.ई., आई.सी.एस.ई. तथा राज्‍य पाठ्यक्रम को सम्मिलित करते हुए प्रत्‍येक राज्‍य/संघशासित प्रदेश से तीन विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। देश भर से प्रवासी भारतीय नागरिक       (ओ.सी.आई.) अभ्यर्थियों के लिए 5 अतिरिक्त सीटें आरक्षित हैं।

चयन ऑनलाइन पंजीकरण द्वारा किया जाएगा। 3 से 24 फरवरी 2020 तक ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया चलेगी। ऐसे विद्यार्थी, जिन्‍होंने 8वीं कक्षा उत्‍तीर्ण की है तथा 9वीं कक्षा में अध्ययनरत हैं (शैक्षणिक वर्ष 2019-20 में), वे इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पात्र होंगे। चयन मानदंड 8वीं कक्षा के शैक्षणिक निष्पादन एवं पाठ्य विषयेत्तर गतिविधियों के प्रदर्शन पर आधारित होंगे। चयन मानदंड निम्नलिखित हैः



ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को चयन मानदंड में विशेष प्राथमिकता दी गई है। यदि चयनित अभ्‍यर्थियों में बराबरी होती है, तो कम आयु वाले अभ्‍यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इच्‍छुक विद्यार्थी 3 फरवरी 2020 (1400 बजे) से 24 फरवरी 2020 (1800 बजे) तक इसरो की वेबसाइट www.isro.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। 03 फरवरी 2020 से वास्तविक लिंक उपलब्ध होगी। प्रत्‍येक राज्‍य से अनंतिम रूप से चयनित अभ्‍यर्थियों की सूची 02 मार्च 2020 को घोषित की जाएगी। अनंतिम रूप से चयनित अभ्‍यर्थियों से प्रासंगिक प्रमाणपत्रों की प्रमाणित छायाप्रतियां 23 मार्च 2020 अथवा इससे पूर्व अपलोड करने का अनुरोध किया जाएगा। संबंधित प्रमाणपत्रों की जाँच के बाद, अंतिम चयनित सूची 30 मार्च 2020 को प्रकाशित की जाएगी।

इस आवासीय कार्यक्रम को 11-22 मई 2020 के दौरान इसरो के 4 केंद्रों पर आयोजित करने का प्रस्ताव है। चयनित अभ्यर्थियों को अहमदाबाद, बेंगलूरु, शिलाँग एवं तिरुवनंतपुरम स्थित इसरो/अं.वि. के किसी भी एक केंद्र में रिपोर्ट करने का अनुरोध किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को इसरो के अतिथि गृहों/छात्रावासों में ठहराने का प्रबंध किया जाएगा। विद्यार्थियों की यात्रा (निकटतम रेलवे स्‍टेशन से रिर्पोटिंग स्‍टेशन तक आने-जाने का वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी का किराया), पाठ्यक्रम सामग्री तथा संपूर्ण पाठ्यक्रम के दौरान आवास और भोजन आदि का व्यय, इसरो द्वारा वहन किया जाएगा। विद्यार्थी को रिर्पोटिंग केंद्र पर लाने तथा ले जाने के लिए ए‍क अभिभावक/माता-पिता को भी वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी का किराया प्रदान किया जाएगा।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफ.ए.क्यू.)
किसी अन्य स्पष्टीकरण के लिए कृपया yuvika2020@isro.gov.in  तथा युविका सचिवालय (रेस्पाँड एवं ए.आई.) के दूरभाष : 080 2217 2269   पर संपर्क करें।

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जनहित में जारी......
श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी

मंगलवार, मार्च 03, 2020

किसे क्या मिला, पढ़िए अपने राज्य का बजट 0.2 वित्तीय वर्ष 2020-21

छत्तीसगढ़ राज्य - बजट 2020-21

आज माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा वर्ष 2020-21 का बजट प्रस्तुत किया गया। यह बजट मुख्य रूप से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ - स्वस्थ एवं सुपोषित नई युवा पीढ़ी का निर्माण की भावना के साथ सुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी एवं विस्तार तथा युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक एवं उत्पादक रूप में उपयोग कर उनकों राज्य के सशक्त संसाधन के रूप में विकसित करने पर केन्द्रित है।

इसके अतिरिक्त यह बजट सर्वेभवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः की भावना के साथ किसानों व आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो की समृद्धि, गांवों की आर्थिक प्रगति, शिक्षा में प्रगति के नये सोपान, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों के विकास, युवाओं की ऊर्जा का उत्पादक संसाधन के रूप में अनुप्रयोग, शहरी एवं ग्रामीण अधोसंरचना के सुदृढीकरण तथा संवेदनशील प्रशासन की अवधारणा के साथ छत्तीसगढ़ जनता को समर्पित है।


1. आर्थिक स्थिति1.1 वर्ष 2019-20 के प्रावधिक अनुमान अनुसार स्थिर भाव पर राज्य की जीएसडीपी मंे 6.08 प्रतिशत की तुलना में त्वरित अनुमान अनुसार 7.06 प्रतिशत की वृद्धि संभावित।
1.2 वर्ष 2019-20 में स्थिर भाव पर कृषि क्षेत्र में 3.31 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र में 4.94 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित। इस प्रकार कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों में राज्य की अनुमानित वृद्धि दर राष्ट्रीय स्तर पर इन क्षेत्रों में अनुमानित वृद्धि दर क्रमशः 2.8 एवं 2.5 प्रतिशत की तुलना में अधिक है।
1.3 प्रचलित भाव पर राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2018-19 में 3 लाख 04 हजार करोड़ से बढ़कर 2019-20 में 3 लाख 29 हजार करोड़ होना अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.26 प्रतिशत अधिक।
1.4 विगत वर्ष अनुमानित प्रति व्यक्ति आय 96 हजार 887 की तुलना में वर्ष 2019-20 में प्रति व्यक्ति आय 98 हजार 281 रूपये का अनुमान है, जो कि गत वर्ष की तुलना में 6.35 प्रतिशत अधिक।
1.5 वर्ष 2019-20 के केन्द्रीय बजट में राज्य के लिये अनुमानित केन्द्रीय करों में कमी। आगामी वर्ष में केन्द्र से प्राप्त होने वाली जीएसटी क्षतिपूर्ति में भी कमी संभावित, किन्तु राज्य सरकार की नीतियों एवं प्रयासों से राज्य के स्वयं के संसाधनों में 11 प्रतिशत की दर से वृद्धि।

2. गढ़बो नवा छत्तीसगढ़: स्वस्थ और सुपोषित नयी युवा पीढ़ी का निर्माण2.1 राज्य के सभी परिवार सार्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत शामिल।
2.2 राज्य में 65 लाख 22 हजार राशन कार्डधारी, लाभान्वित जनसंख्या 2 करोड़ 43 लाख। इन राशन कार्डाें पर चावल प्रदाय हेतु 3 हजार 410 करोड़ का प्रावधान।
2.3 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य इलाकों में प्रति परिवार 2 किलो चना वितरण के लिए 171 करोड़ का प्रावधान है। बस्तर संभाग में प्रति परिवार 2 किलो गुड़ वितरण के लिए 50 करोड़ का प्रावधान है।
2.4 कोण्डागांव में आयरन एवं विटामिन युक्त फोर्टिफाईड चावल वितरण की पायलट परियोजना के लिये 5 करोड़ 80 लाख का प्रावधान है।
2.5 महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर से प्रारंभ मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुपोषण योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके लिए 60 करोड़ का प्रावधान है।
2.6 आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिये ऊंचाई, लंबाई एवं भार मापक यंत्रों की व्यवस्था के लिए 25 करोड़ का प्रावधान है।
2.7 विशेष पोषण आहार योजना में 766 करोड़, महतारी जतन योजना में 31 करोड़ का प्रावधान है।
2.8 डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना में प्राथमिकता एवं अंत्योदय राशन कार्डधारी परिवारों को 5 लाख रूपये एवं सामान्य राशन कार्ड वाले परिवारों को 50 हजार तक कैशलेस इलाज की सुविधा। लगभग 65 लाख परिवारों को इलाज की पात्रता व इसके लिए 550 करोड़ का प्रावधान।
2.9 मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार पर 20 लाख तक के व्यय हेतु 50 करोड़ का प्रावधान है।
2.10 मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना में 13 करोड़ का प्रावधान। 5 माह की अल्प अवधि में ही 11 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित।
2.11 मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत 13 नगर निगमों के स्लम एरिया में निवासरत परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, जांच उपचार एवं दवाईयां उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
2.12 राज्य सिकलसेल संस्थान में उच्च स्तरीय प्रयोगशाला एवं सभी जिला अस्पतालों में सिकलसेल यूनिट की स्थापना की जायेगी।
2.13 एम.सी.आई. के मापदण्डों के अनुरूप चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सा उपकरण और स्किल लैब की स्थापना हेतु 75 करोड़ का प्रावधान है।

3. कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन3.1 अन्नदाता को उनके श्रम का उचित लाभ देने के लिये राजीव गांधी किसान न्याय योजना प्रारंभ की जायेगी। योजना का लाभ वर्ष 2019-20 के लिये भी दिया जायेगा। इसके लिए 5 हजार 100 करोड़ का प्रावधान है।
3.2 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 366 करोड़, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 370 करोड़, एकीकृत बागवानी मिशन में 205 करोड़, जैविक खेती मिशन के लिए 20 करोड़, वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम में 200 करोड़ एवं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 110 करोड़ का प्रावधान है।
3.3 कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत 5 एच.पी. तक के कृषि पंपों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय के लिये 2 हजार 300 करोड़ का प्रावधान है।
3.4 गोठानों के संचालन हेतु गौठान समितियों को प्रतिमाह 10 हजार का अनुदान तथा पशुओं के चारे के लिये धान के पैरे की व्यवस्था की जायेगी। पैरा के रख-रखाव को सरल बनाने हेतु चौकोर बेलर क्रय करने के लिए नवीन मद में 6 करोड़ का प्रावधान है।
3.5 बेमेतरा, जशपुर, धमतरी एवं अर्जुन्दा, जिला बालोद में उद्यानिकी महाविद्यालय तथा लोरमी में कृषि महाविद्यालय की स्थापना के लिए नवीन मद में 5 करोड़ का प्रावधान है।
3.6 इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में खाद्य प्रौद्योगिकी की स्थापना की जायेगी।
3.7 बेमेतरा एवं तखतपुर में डेयरी डिप्लोमा महाविद्यालय की स्थापना के लिए 2 करोड़ का प्रावधान है।
3.8 मछली पालन के क्षेत्र में रोजगार की संभावना को देखते हुए युवाओं को डिप्लोमा पाठ्यक्रम के अध्यापन हेतु ग्राम राजपुर (धमधा) में फिशरीज पॉलिटेक्निक की स्थापना की जायेगी।
3.9 9 पशु औषधालयों को पशु चिकित्सालय में उन्नयन, 12 नवीन पशु औषधालय तथा 5 विकास खंडों में मोबाईल पशु चिकित्सा इकाई स्थापित की जायेगी।

4. सिंचाई4.1 बस्तर संभाग मंे बोधघाट बहुद्देशीय परियोजना से 2 लाख 66 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है।
4.2 पैरी बांध एवं पैरी-महानदी इंटर लिंकिंग नहर परियोजना के लिए 20 करोड़, डांडपानी वृहत् जलाशय परियोजना, कुनकुरी के लिए 20 करोड़ एवं शेखरपुर वृहत् जलाशय, सरगुजा के लिए 20 करोड़ का नवीन मद में प्रावधान है।
4.3 नाबार्ड सहायित सिंचाई परियोजनाओं हेतु 697 करोड़, महानदी परियोजना हेतु 237 करोड़, लघु सिंचाई परियोजनाओं हेतु 610 करोड़ तथा एनीकट/स्टाप डैम निर्माण के लिए 173 करोड़ का प्रावधान है। कमाण्ड क्षेत्र में सिंचाई की पूर्ति हेतु भी 116 करोड़ का प्रावधान है।

5. पंचायत एवं ग्रामीण विकास5.1 ‘नरवा गरूवा घुरूवा बारी’ कार्यक्रम के तहत 912 नालों पर नरवा उपचार के लिये 20 हजार 810 काम स्वीकृत किये गए हैं। 1 हजार 900 गोठानों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। घुरूवा का उपयोग कर 3 लाख 16 हजार मैट्रिक टन जैविक खाद का उत्पादन किया गया है। 1 लाख 50 हजार बाड़ियों को पुनर्जीवित करने का कार्य हुआ है। इन कार्याें के लिये महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अभिसरण से राशि की स्वीकृतियां दी गई हैं। योजना मं 1 हजार 603 करोड़ का प्रावधान है।
5.2 राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में 400 करोड का प्रावधान है।
5.3 प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में अब तक 7 लाख 22 हजार आवास पूर्ण हो चुके हैं। आगामी वर्ष में इस हेतु 1 हजार 600 करोड़ का प्रावधान है।
5.4 गोबर.धन योजना अंतर्गत 1 हजार 176 बायोगैस संयंत्र के स्थापना का भी लक्ष्य है। इस हेतु 450 करोड़ का प्रावधान है।
5.5 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हेतु 2 हजार 70 करोड़ का प्रावधान है।

6. स्वच्छ पेयजल6.1 नल कनेक्शन के माध्यम से पेय जल हेतु प्रारंभ की गई जल जीवन मिशन योजना के लिये 225 करोड़ का प्रावधान है।
6.2 ग्रामीण क्षेत्रों में पाईप द्वारा ग्रामीण जल प्रदाय योजना के लिये 185 करोड़ तथा नलकूप खनन के लिये 70 करोड़ का प्रावधान है।
6.3 नगरीय जल प्रदाय योजनाओं के लिये 124 करोड़ का प्रावधान है।
6.4 राज्य में निर्मित हो रहे गोठानों में जल प्रदाय हेतु नलकूप खनन के लिये 5 करोड़ का प्रावधान है।

7. शैक्षणिक विकास-स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा7.1 राज्य के 1 लाख 31 हजार शिक्षाकर्मियों को संविलियन हो चुका है। शेष 16 हजार शिक्षाकर्मियों में से 2 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके शिक्षाकर्मियों का 1 जुलाई 2020 से संविलियन किया जायेगा।
7.2 महान संत गुरू घासीदास की जन्मस्थली ग्राम गिरौदपुरी में गुरूकुल विद्यालय की स्थापना की जायेगी।
7.3 दूरस्थ आदिवासी अंचल के ग्राम तोंगपाल, जिला सुकमा एवं कुआकोंडा, जिला दंतेवाड़ा में छात्रावास की सुविधा सहित नवीन महाविद्यालय प्रारंभ किया जायेगा। सुुकमा, कोण्डागांव, नारायणपुर, बीजापुर एवं तखतपुर में कन्या महाविद्यालय खोला जायेगा।
7.4 महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ आगमन की स्मृति में ग्राम कंडेल, जिला धमतरी में महाविद्यालय प्रारंभ किया जायेगा।
7.5 स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन की पूर्ति हेतु औद्योगिक क्षेत्र सिरगिट्टी, नगरनार एवं तिल्दा में नवीन आई.टी.आई. खोले जाएंगे।
7.6 दंतेवाड़ा में मल्टी स्किल सेंटर की स्थापना के लिए 3.85 करोड़ का प्रावधान है।
7.7 मुख्यमंत्री पॉलीटेक्निक गुणवत्ता विकास योजना के तहत 9 पॉलीटेक्निक कॉलेज के उन्नयन हेतु 5 करोड़ का प्रावधान है।
7.8 राज्य के 3 इंजीनियरिंग कॉलेज एवं 5 पॉलीटेक्निक कॉलेजों में नव विकसित तकनीकों के अध्ययन एवं शोध हेतु इंटरनेट ऑफ थिंग्स एवं रोबोटिक्स की प्रयोगशालाएं स्थापित की जायेगी।

8. श्रम एवं समाज कल्याण8.1 निराश्रितों, बुजुर्गाें, विधवा महिलाओं एवं निःशक्त व्यक्तियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिये सामाजिक सुरक्षा और कल्याण मद में 352 करोड़, वृद्धावस्था पेंशन योजना में 185 करोड़ और मुख्यमंत्री पेंशन योजना मेें 150 करोड़ का प्रावधान है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना में 68 करोड़ तथा सुुखद सहारा योजना में 100 करोड़ का प्रावधान है।
8.2 दिव्यांगजनों के लिये निःशक्तजन पुनर्वास केन्द्र, मादक द्रव्यों एवं पदार्थाें की रोकथाम एवं नशामुक्ति केन्द्र का संचालन तथा तृतीय लिंग समुदाय से संबंधित योजनाओं हेतु 5 करोड़ 30 लाख का प्रावधान है।
8.3 असंगठित श्रमिक सुरक्षा एवं कल्याण मण्डल हेतु 38 करोड़ 50 लाख का प्रावधान है।
8.4 ठेका मजदूर, घरेलू कामकाजी महिला एवं हम्माल कल्याण मण्डल हेतु 15 करोड़ का प्रावधान है।

9. युवा कल्याण9.1 युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानंद जी के रायपुर स्थित निवास स्थान डे-भवन को स्वामी विवेकानंद स्मृति संस्थान के रूप में विकसित किया जायेगा।
9.2 राजीव युवा मितान क्लब योजना के लिए नवीन मद में 50 करोड़ का प्रावधान है।
9.3 युवा महोत्सव के लिए नवीन मद में 5 करोड़ का प्रावधान है।
9.4 आईआईटी, आईआईएम एवं एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लेने वाले राज्य के युवाओं के शिक्षण शुल्क का भार शासन द्वारा वहन किया जायेगा तथा ऐसे युवाओं की प्रतिभा का राज्य के विकास में उपयोग करने के लिये शासकीय, अर्द्धशासकीय संस्थानों में सीधे चयन की पात्रता दी जायेगी।
9.5 खेल संबंधी नीतिगत निर्णय, विभिन्न विभागों से समन्वय, खेल अधोसंरचनाओं का रख-रखाव तथा आवासीय खेल अकादमी के संचालन हेतु छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है।
9.6 मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के लिए नवीन मद में 10 करोड़ का प्रावधान है।

10. औद्योगिक विकास10.1 नई औद्योगिक नीति 2019 का मुख्य उद्देश्य समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता एवं परिपक्व अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
10.2 उद्योगों के लिये आबंटित किये जाने वाले भू-खण्ड की दरों में 30 प्रतिशत तथा लीज रेन्ट की दर में 33 प्रतिशत कमी की गई है।
10.3 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्तर क्षेत्र में 20 एकड़ तक के निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की अनुमति देते हुए अधोसंरचनात्मक विकास कार्याें के विरूद्ध 4 करोड़ तक का अनुदान देने का प्रावधान है।
10.4 राज्य में उत्पादित सब्जी, फल एवं मोटे अनाजों को प्रसंस्कृत कर मूल्य संवर्धन की दृष्टि से उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए नये फूड पार्क की स्थापना हेतु नवीन मद में 50 करोड़ का प्रावधान है।
10.5 नये औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 15 करोड़ एवं जेम ज्वेलरी पार्क की स्थापना के लिए 1 करोड़ का प्रावधान है।
10.6 उद्योगों की स्थापना पर दी जाने वाली लागत पूंजी अनुदान के लिये 100 करोड़ एवं ब्याज अनुदान के लिये 39 करोड़ का प्रावधान है।

11. वन संपदा11.1 प्राकृतिक पुनरोत्पादन के संरक्षण हेतु 200 करोड़ का प्रावधान है। इससे 60 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन होगा तथा राज्य की सालाना आय में 400 करोड़ की वृद्धि संभावित है।
11.2 लघु वनोपज के प्रसंस्करण हेतु 50 करोड़ का प्रावधान है।

12. नगरीय प्रशासन एवं विकास12.1 शहरी नागरिकों की बुनियादी समस्याओं का निराकरण वार्ड स्तर पर करने के लिये मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय योजना प्रारंभ की गई है। इस हेतु 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
12.2 13 नगर निगम क्षेत्र के निवासियों के लिये मुख्यमंत्री मितान योजना प्रारंभ की जा रही है। इस हेतु 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
12.3 पौनी-पसारी योजना के लिए 30 करोड़ का प्रावधान है।
12.4 नगरीय क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के लिए 489 करोड़, स्मार्ट सिटी योजना के लिए 396 करोड़, अमृत मिशन के लिए 300 करोड़ एवं राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के लिए 50 करोड़ का प्रावधान है।

13. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गाें का कल्याण13.1 अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों के लिये 61 नये छात्रावास खोलने सहित कुल छात्रावास/आश्रमों के संचालन के लिये 378 करोड़ का प्रावधान है।
13.2 नवीन मद में 100 भवन विहीन छात्रावास/आश्रमों के भवन निर्माण सहित कुल छात्रावास/आश्रम निर्माण कार्याें के लिये विवेकानंद गुरूकुल उन्नयन योजना में 303 करोड़ का प्रावधान है।
13.3 जनजाति सलाहकार परिषद् के कामकाज के लिये पृथक सचिवालय की स्थापना की जायेगी।
13.4 दिसंबर 2019 में रायपुर में आयोजित देश के सबसे बड़े आदिवासी नृत्य महोत्सव की सफलता को देखते हुए प्रतिवर्ष राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जायेगा।
13.5 अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के दौरान निःशुल्क आवासीय सुविधा के लिये 10 पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों की स्थापना की जायेगी।
13.6 सरगुजा एवं बस्तर संभाग एवं कोरबा जिले के लिये जिला संवर्ग के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिये विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन किया गया है।

14. शिल्प, कला, संस्कृति एवं पर्यटन14.1 छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की पहचान का केन्द्र बन चुके रायपुर के गढ़-कलेवा की अन्य 26 जिला मुख्यालयों में स्थापना के लिये स्व-सहायता समूहों को 10 लाख का रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराया जायेगा।
14.2 मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना हेतु 25 करोड़ का प्रावधान है।
14.3 नवा रायपुर में अभिलेखागार एवं संग्रहालय का निर्माण तथा जगदलपुर एवं बिलासपुर के संग्रहालयों का उन्नयन किया जायेगा।
14.4 राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये विभाग के बजट में 75 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इस वर्ष 103 करोड़ 50 लाख का प्रावधान किया गया है।
14.5 राम वन गमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत श्रीराम-जानकी द्वारा उपयोग किये गये मार्ग पर चिन्हांकित 9 प्रमुख पर्यटन केन्द्रों पर अधोसंरचना विकास एवं निर्माण के लिये 10 करोड़ का प्रावधान है।

15. एकीकृत ई-शासन परियोजना (IPEG)15.1 वर्तमान प्रणाली में पृथक-पृथक सेवाओं के लिये नागरिकों को बार-बार पहचान पत्र एवं अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। उक्त परेशानियांे को दूर करने के लिये आधुनिक सूचना और संचार तकनीक का उपयोग कर सक्रिय एवं कुशल नागरिक सेवा वितरण प्रणाली का निर्माण किया जायेगा।

16. राजस्व प्रशासन16.1 11 नगर निगम क्षेत्रों के लिये 1 अनुपात 500 के बड़े स्केल वाले नक्शे तैयार किये जाएंगे। नगर निगम क्षेत्रों के सर्वेक्षण कार्य हेतु नवीन मद में 25 करोड़ का प्रावधान है।
16.2 5 तहसील कार्यालयों के मॉडल भवन, 25 नये तहसील कार्यालय एवं 4 नये राजस्व अनुविभाग की स्थापना की जायेगी। 10 फरवरी 2020 से अस्तित्व में आ चुके नवीन जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 17 करोड़ की लागत से जिला कार्यालय भवन निर्माण किया जायेगा। इन कार्याें हेतु 11 करोड़ 80 लाख का प्रावधान है।

17. पुलिस प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था17.1 समाज में बढ़ते हुए साइबर अपराधों की संख्या को देखते हुए 1 साइबर पुलिस थाना की स्थापना की जायेगी।
17.2 03 स्मार्ट पुलिस थाना, 5 नवीन थाना, 10 चौकी एवं 5 पुलिस अनुविभाग कार्यालय भवन, रायपुर एवं दुर्ग में पुलिस ट्रांजिट भवन तथा बस्तर रेंज में पुलिस कर्मचारियों के लिये 1 हजार आवास गृहों के निर्माण हेतु 22 करोड़ 50 लाख का प्रावधान है।
17.3 5 थाना, 10 चौकी निर्माण, 10 चौकी से थाने में उन्नयन किया जायेगा।
17.4 बेमेतरा, गरियाबंद, संजारी बालोद, बलौदाबाजार, सूरजपूर, मुंगेली, सुकमा एवं पेण्ड्रारोड के उपजेल को जिला जेल में उन्नयन किया जायेगा।
17.5 जेलों की व्यवस्था में सुधार हेतु सुझाव प्रस्तुत करने के लिये जेल सुधार आयोग का गठन किया जायेगा।
17.6 माननीय उच्च न्यायालय एवं सभी सिविल जिलों में लंबित मामलों में पक्षकारों के बीच समझौता कराने के लिये मध्यस्थता केन्द्र खोला जाना प्रस्तावित हैै।

18. अधोसंरचना विकास18.1 एशियन विकास बैंक की सहायता से राज्य में सड़क विकास परियोजना (फेज़-3) के अंतर्गत कुल 3 हजार 535 करोड़ लागत की 25 नवीन सड़कों हेतु 710 करोड़ का प्रावधान है। वर्ष 2020-21 में एडीबी सहायित सड़क विकास योजना की चौथे चरण की स्वीकृति भी प्राप्त की जायेगी।
18.2 नवीन वृहद पुल निर्माण हेतु 240 करोड़ 50 लाख एवं नवीन मध्यम पुल निर्माण की जवाहर सेतु योजना के अंतर्गत 151 करोड़ का प्रावधान है।
18.3 सड़क एवं पुल निर्माण के नवीन कार्यों के लिए 600 करोड़ का नवीन मद में प्रावधान है। इनमें 434 ग्रामीण सड़कें, 88 मुख्य जिला मार्ग, 50 राज्य मार्ग एवं 31 शहरी मार्गों का निर्माण किया जायेगा।
18.4 500 एवं 750 सीट की क्षमता वाले 11 नवीन ऑडिटोरियम का निर्माण किया जायेगा।
18.5 इसके अतिरिक्त संभागीय मुख्यालयों दुर्ग, जगदलपुर एवं अम्बिकापुर में 3 हजार 500 सीटर क्षमता के 3 नवीन इन्डोर स्टेडियम का निर्माण किया जायेगा। इसके लिये नवीन मद में 54 करोड़ 50 लाख का प्रावधान है।
18.6 नवा रायपुर में झीरम घाटी के शहीदों की स्मृति में शहीद स्मारक का निर्माण किया जायेगा।
18.7 जगदलपुर, अंबिकापुर एवं बिलासपुर एयरपोर्ट में आटोमेटेड एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर की स्थापना हेतु 7 करोड़ 20 लाख का प्रावधान है।
18.8 बैकुण्ठपुर (कोरिया) में एयर स्ट्रीप के निर्माण हेतु 1 करोड़ का प्रावधान है।

19. परिवहन19.1 वाहनों में ओवर लोडिंग की जांच के लिये वे-ब्रिज की स्थापना हेतु 9 करोड़ का प्रावधान है।
19.2 सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा के लिये वाहनों में जीपीएस के ट्रैकिंग हेतु व्हीकल टैªकिंग प्लेटफार्म का निर्माण किया जायेगा। इस हेतु 14 करोड़ 40 लाख का प्रावधान है।

20. विद्युतीकरण20.1 मुुख्यमंत्री विद्युत अधोसंरचना विकास योजना के लिये 25 करोड़ का प्रावधान है।
20.2 घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक के बिजली बिल आधा के लिये 850 करोड़ का प्रावधान है।
20.3 मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना में 135 करोड़ का प्रावधान है।

21. वर्ष 2020-21 का बजट अनुमान21.1 वर्ष 2020-21 हेतु कुल राजस्व प्राप्तियां 83 हजार 831 करोड़ अनुमानित है। इसमें राज्य का राजस्व 35 हजार 370 करोड़ एवं केन्द्र से प्राप्त होने वाली राशि 48 हजार 461 करोड़ है।
21.2 वर्ष 2020-21 के लिए अनुमानित सकल व्यय 1 लाख 2 हजार 907 करोड़ का है। सकल व्यय से ऋणों की अदायगी एवं पुर्न प्राप्तियों को घटाने पर शुद्ध व्यय 95 हजार 650 करोड़ अनुमानित है। राजस्व व्यय 81 हजार 400 करोड़ एवं पूंजीगत व्यय 13 हजार 814 करोड़ है। वर्ष 2020-21 में पूंजीगत व्यय कुल व्यय का 14.44 प्रतिशत है।
21.3 वर्ष 2020-21 के बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए 38 प्रतिशत, आर्थिक क्षेत्र के लिए 40 प्रतिशत एवं सामान्य सेवा क्षेत्र के लिए 22 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है।

22. राजकोषीय स्थिति22.1 इस बजट में पूर्व वर्षों की भांति 2 हजार 431 करोड़ का राजस्व आधिक्य अनुमानित किया गया है।
22.2 राज्य का सकल वित्तीय घाटा 11 हजार 518 करोड़ अनुमानित है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3.18 प्रतिशत एवं निर्धारित सीमा के भीतर है।
22.3 वर्ष 2020-21 हेतु कुल प्राप्तियां 96 हजार 91 करोड़ के विरूद्ध शुद्ध व्यय 95 हजार 650 करोड़ अनुमानित है। इन वित्तीय संव्यवहारों के फलस्वरूप 441 करोड़ की बचत अनुमानित है। वर्ष 2019-20 के संभावित घाटा 3 हजार 963 करोड़ को शामिल करते हुए वर्ष 2020-21 के अंत में 3 हजार 522 करोड़ का बजट घाटा अनुमानित है।

23. कर प्रस्ताव2020-21 के लिए कोई नया कर प्रस्ताव नहीं है।





23 शेल कंपनियों के नेटवर्क सहित 7896 करोड़ रुपये के नकली चालान की बड़ी धोखाधड़ी का पता चला

23 शेल कंपनियों के नेटवर्क सहित 7896 करोड़ रुपये के नकली चालान की बड़ी धोखाधड़ी का पता चला

दो अभियुक्तों को गिरफ्तार करके 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

केंद्रीय कर के वंचन रोधी स्‍कंध,  दिल्ली पश्चिम आयुक्‍तालय के अधिकारियों ने 23 शेल कंपनियों के नेटवर्क के इस्‍तेमाल द्वारा 1709 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी)  सहित 7896 करोड़ रुपये के नकली चालान के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें खरीद और माल की वास्तविक आपूर्ति के बिना चालान तैयार किया जाता था। इस मामले में 29 फरवरी,  2020 को दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

आरोपी व्यक्ति फर्जी चालान के आधार पर आईटीसी को पारित करने के उद्देश्य से कई फर्जी कंपनी बनाकर कर की चोरी कर रहे थे। आईटीसी को वास्तविक बनाने के लिए उन्होंने बैंकिंग लेनदेन का भी इस्तेमाल किया। इन फर्मों ने खरीदारों को फर्जी चालान जारी किया, जिन्होंने वास्तव में किसी भी सामान को प्राप्त किए बिना धोखाधड़ी वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया और जीएसटी देयता के लिए अयोग्य आईटीसी का लाभ उठाकर  सरकारी खजाने को धोखा दिया। वे कई मोबाइल फोन, कंप्यूटर और गलत दस्तावेजों के साथ अपने ठिकाने में पकड़े गए।

आरोपियों ने सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 (1) (बी) और धारा 132 (1) (सी) के तहत अपराध किए हैं, जो धारा 132 (5) के प्रावधानों के अनुसार संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध हैं तथा सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 की उपधारा (1) के खंड (i) सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा के अनुसार दंडनीय हैं। तदनुसार, अभियुक्तों को सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 69 (1) के तहत 29 फरवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया और मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की जांच चल रही है।

सोमवार, मार्च 02, 2020

मानव संसाधन विकास मंत्रालय देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाएगा - श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

मानव संसाधन विकास मंत्रालय देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाएगा - श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

छात्राओं को आगामी शैक्षणिक सत्र के दौरान स्कूलों में कक्षा मॉनिटर के रूप में नामित किया जाएगा, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में महिला हेल्पलाइन नंबर को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, सरकार ने छात्राओं की शिक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं: मानव संसाधन विकास मंत्री

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा है कि शिक्षा के माध्यम से छात्राओं और महिलाओं के सशक्तीकरण की गति को आगे बढ़ाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (आईडबल्यूडी) मनाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने इस वर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में 1 से 7 मार्च तक एक थीम आधारित विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत 1 मार्च का थीम शिक्षा है। श्री पोखरियाल ने कहा कि महिलाओं को श्रद्धांजलि के रूप में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा उत्सव पूरे वर्ष जारी रहेगा।

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा है कि सरकार ने छात्राओं की शिक्षा के लिए वर्ष 2014 से कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। यह ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की योजना की सफलता की कई वजहों में से एक है जिससे शिक्षा के सभी स्तरों पर लड़कियों का कुल नामांकन अनुपात अब लड़कों की तुलना में अधिक है। प्राथमिक स्तर पर लड़कों के 89.28 प्रतिशत के मुकाबले लड़कियों का नामांकन अनुपात 94.32 प्रतिशत है। माध्यमिक स्तर पर लड़कों के 78 प्रतिशत की तुलना में लड़कियों का नामंकन 81.32 प्रतिशत है।

श्री निशंक ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छात्राओं को अपने जीवन में उत्कृष्टता लाने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां शुरू करने का फैसला लिया है ताकि छात्राएं यह साबित कर सकें कि लैंगिक भिन्नता उत्कृष्टता हासिल करने में बाधक नहीं है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग गोलमेज वार्ता का आयोजन करेगा और कई अन्य गतिविधियों के बीच देश भर के लगभग 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों पर महिला सशक्तीकरण के कई अन्य कार्यक्रम शुरू करेगा।  

उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को कक्षा निर्देश के दौरान तेज छात्राओं पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए प्रेरित किया है। श्री निशंक ने बताया कि छात्राओं में नेतृत्व के गुणों और आत्मविश्वास का पोषण करने के लिए मंत्रालय ने वर्ष 2020-21 और उसके बाद के शैक्षणिक सत्रों की कम से कम आधी अवधि के लिए कक्षा मॉनिटर "मैं हूं मॉनिटर" के रूप में छात्रा को नामित करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने यह भी बताया कि योग ओलंपियाड की तर्ज पर स्कूल स्तर पर लड़कियों के लिए एक सेल्फ डिफेंस ओलंपियाड का आयोजन किया जाएगा। लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्कूलों की छठी से बारहवीं कक्षा की लड़कियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जाता है।

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में संस्कृति और थिएटर क्लबों को महिलाओं के मुद्दों पर नुक्कड़ नाटक, माइम शो आदि आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। श्री निशंक ने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय अपने-अपने परिसरों में विभिन्न स्थानों पर महिला हेल्पलाइन नंबरों को प्रमुखता से प्रदर्शित करेंगे।

श्री निशंक ने कहा कि छात्राओं को प्रेरित करने के लिए स्कूलों में पूरे वर्ष सप्ताह में एक बार सुबह विशेष सभाओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन सभाओं में विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल कर चुकी महिलाओं पर वार्ता, रोल प्ले, दिन के सद्विचार और महिला सशक्तिकरण पर समूह गायन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, खेल, नृत्य, संगीत, कला, सामाजिक सेवा और ऐसे ही कुछ नए क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

श्री निशंक ने बताया कि स्कूलों से यह भी अनुरोध किया जा रहा है कि वे महिला संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को संगठन की विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित करें। शैक्षिक संस्थान उस जिले की प्रमुख/प्रेरणादायी महिलाओं पर निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन करेंगे जहां वे स्थित हैं।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ आंदोलन के तहत लड़कियों की शिक्षा के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए लगातार काम कर रहा है। स्कूलों में छात्राओं के नामंकन को प्रोत्साहित करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्वच्छ विद्यालय पहल के तहत 15.08.2014 से 15.08.2015 की एक साल की अवधि के अंदर प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में अलग-अलग शौचालयों का निर्माण कराया है। अब सभी सरकारी स्कूलों में छात्रों और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं। इसके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने लड़कियों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

वर्ष 2018-19 से प्रभावी स्कूली शिक्षा की नई एकीकृत योजना-समग्र शिक्षा के तहत मौजूदा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) को उच्च प्राथमिक स्तर से उच्च माध्यमिक स्तर तक के उन्नयन में शामिल करने का प्रावधान किया गया है। केजीबीवी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के वंचित समूहों की लड़कियों के लिए आवासीय विद्यालय हैं। 30 सितंबर, 2014 को 3593 की तुलना में दिसंबर 2019 तक 4881 केजीबीवी चल रहे हैं। केजीबीवी में वर्तमान में 6.18 लाख लड़कियों का नामांकन है, जबकि 30 सितंबर, 2014 को 3.52 लाख लड़कियों का नामांकन था।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से विभिन्न क्षेत्रों में प्रख्यात महिला व्यक्तित्वों के नाम पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में दस (10) चेयर स्थापित करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समाज में सबसे अधिक वंचित महिलाओं पर विशेष ध्यान देने वाले महिला अध्ययन केंद्रों की स्थापना की जा रही है।

उच्च शिक्षा में एकलौती बेटी को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2014-15 में सामाजिक विज्ञान में स्वामी विवेकानंद सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप फॉर रिसर्च शुरू की गई थी।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने आठ विशेष महिला विश्वविद्यालयों के लिए सहायता प्रदान की है।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की सहायता के लिए प्रगति छात्रवृत्ति योजना को लागू कर रही है।

सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी सस्थानों के बी.टेक कार्यक्रमों में सीटें बढ़ाकर महिला नामांकन को मौजूदा 8 प्रतिशत से वर्ष 2018-19 में बढ़ाकर 14 प्रतिशत, 2019-20 में 17 प्रतिशत और 2020-21 में 20 प्रतिशत करने का फैसला लिया है।

सरकार ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी, शिबपुर के स्नातक कार्यक्रमों में सीटें बढ़ाकर अगले 2 से 4 वर्ष की अवधि में महिला नामांकन को मौजूदा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।

तदनुसार, भारतीय प्रौद्योगिकी सस्थानों में वर्ष 2018-19 में 835 सीटें और 2019-20 में 1122 सीटें बढ़ाई गई हैं। शैक्षणिक वर्ष 2018-2019 में एनआईटी और आईआईईएसटी में अतिरिक्त 673 सीटें बढ़ाई गई।

मंगलवार, फ़रवरी 18, 2020

पाली और संस्कृत की उत्पत्ति: BCE गणना के आलोक में एक भाषावैज्ञानिक शोध-निबंध


पाली और संस्कृत की उत्पत्ति: BCE गणना के आलोक में एक भाषावैज्ञानिक शोध-निबंध

यह शोध-निबंध पाली और संस्कृत भाषाओं की उत्पत्ति, विकास-क्रम और पारस्परिक संबंध का अध्ययन BCE (ईसा-पूर्व) समय-सीमा के आधार पर करता है। भाषावैज्ञानिक साक्ष्य—ध्वन्यात्मक परिवर्तन, व्याकरणिक संरचना, छंद-विन्यास, तथा अभिलेखीय प्रमाण—के आधार पर यह प्रतिपादित किया गया है कि संस्कृत का वैदिक रूप दूसरी सहस्राब्दी BCE में सुस्पष्ट रूप से उपस्थित था, जबकि पाली मध्य-इंडो-आर्यन चरण में, लगभग छठी से पहली शताब्दी BCE के बीच साहित्यिक रूप में स्थापित हुई। अध्ययन यह भी स्पष्ट करता है कि पाली, संस्कृत की “उत्पत्ति” नहीं, बल्कि उसी इंडो-आर्यन भाषिक परिवार की एक उत्तरवर्ती विकासधारा है।

1. प्रस्तावना
भारतीय आर्य भाषाओं का विकास इंडो-यूरोपीय परिवार की इंडो-आर्यन शाखा से हुआ। भाषावैज्ञानिक पुनर्निर्माण (comparative reconstruction) के आधार पर प्रोटो-इंडो-आर्यन का विभाजन लगभग 2000 BCE या उससे कुछ पूर्व माना जाता है। इसके बाद पुरातन (Old Indo-Aryan) चरण में वैदिक संस्कृत का उद्भव हुआ, जिसने भारतीय बौद्धिक परंपरा की आधारभूमि तैयार की। मध्य-इंडो-आर्यन (Middle Indo-Aryan) चरण में विभिन्न प्राकृत रूप विकसित हुए, जिनमें पाली एक मानकीकृत साहित्यिक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हुई।

2. संस्कृत की उत्पत्ति और BCE समय-निर्धारण
संस्कृत का प्राचीनतम रूप वैदिक संस्कृत है, जिसका प्रमुख स्रोत Rigveda है। भाषिक, छंदात्मक और ऐतिहासिक विश्लेषण के आधार पर इसका रचनाकाल लगभग 1500–1200 BCE (कुछ विद्वानों के अनुसार 1700–1100 BCE की व्यापक सीमा) माना जाता है। वेदिक संस्कृत की विशेषताएँ—जैसे जटिल संधि-नियम, विभक्ति-प्रणाली की समृद्धि, तथा ध्वनियों का अपेक्षाकृत प्राचीन रूप—इसे पुरातन इंडो-आर्यन स्तर पर स्थापित करती हैं।चौथी शताब्दी BCE के आसपास Panini द्वारा रचित अष्टाध्यायी ने संस्कृत के व्याकरण को मानकीकृत किया। इससे स्पष्ट होता है कि उस समय तक संस्कृत एक परिपक्व, व्यवस्थित भाषा बन चुकी थी, जिसकी जड़ें कई शताब्दियों पूर्व तक जाती हैं।

3. पाली की उत्पत्ति और ऐतिहासिक साक्ष्य
पाली को मध्य-इंडो-आर्यन श्रेणी में रखा जाता है। यह भाषा बौद्ध धर्म के थेरवाद परंपरा से संबद्ध है और उसका प्रमुख ग्रंथ-समूह Tipiṭaka है। ऐतिहासिक दृष्टि से बुद्ध का जीवनकाल लगभग 6वीं–5वीं शताब्दी BCE माना जाता है। बौद्ध उपदेश प्रारंभ में मौखिक रूप में संरक्षित रहे। पाली कैनन का लिखित संकलन श्रीलंका में पहली शताब्दी BCE के आसपास माना जाता है। भाषावैज्ञानिक विश्लेषण से स्पष्ट है कि पाली में संस्कृत की अपेक्षा ध्वनि-सरलीकरण (जैसे “ऋ” का “अ” या “इ” में रूपांतरण), संधि-नियमों का लोप, तथा व्याकरणिक रूपों का संक्षेपण मिलता है। ये लक्षण उसे मध्य-इंडो-आर्यन विकास-चरण में स्थापित करते हैं।

4. तुलनात्मक विश्लेषण

यह तुलनात्मक तालिका दर्शाती है कि संस्कृत और पाली में विकासात्मक संबंध है, परंतु पाली संस्कृत से प्रत्यक्ष “उत्पन्न” नहीं, बल्कि समान पूर्वज से विकसित उत्तरवर्ती धारा है।

5. निष्कर्ष
BCE गणना और भाषावैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि संस्कृत का वैदिक रूप दूसरी सहस्राब्दी BCE में विद्यमान था, जबकि पाली मध्य-पहली सहस्राब्दी BCE में एक मानकीकृत साहित्यिक भाषा के रूप में उभरी। दोनों भाषाएँ इंडो-आर्यन परिवार की सदस्य हैं, पर उनकी काल-रेखाएँ और विकास-स्तर भिन्न हैं। इस प्रकार वैज्ञानिक अध्ययन यह स्थापित करता है कि संस्कृत भाषिक परंपरा में प्राचीनतर है, जबकि पाली उसी परंपरा का मध्यकालीन, सरलीकृत और लोकाभिमुख रूप है।

Huleshwar Prasad Joshi

शनिवार, फ़रवरी 08, 2020

अबुझमाड़ पीस मैराथन - 2020

अबुझमाड़ पीस मैराथन - 2020

भिलाई इस्पात संयंत्र एवं पुलिस - प्रशासन के सौजन्य से जिला नारायणपुर में दिनांक 08 फरवरी 2020 को रन फार पीस, रन फार अबुझमाड हाप मैराथन, 21 कि.मी का आयोजन कराया गया। जिसमें 18 राज्यों के लगभग 11292 धावकों ने पंजीयन कराया था, वहीं 09 विदेशी धावको ने भी इस मैराथन में भाग लिया, ये सभी प्रतिभागी केन्या देश के निवासी थे। इस मैराथन में पुरूष वर्ग में प्रथम स्थान पर शंकर मानथापा (मेघालय, 1घण्टा 2मिनट), और द्वितीय स्थान पर साइमन (केन्या, 1घण्टा 5मिनट) रहे जबकि महिला वर्ग में एलीसा (केन्या, 1घण्टा 11मिनट) के साथ प्रथम और डिम्पल (लखनउ) द्वितीय स्थान में रही।

शुक्रवार, फ़रवरी 07, 2020

पूरे देश में लागू हो सकता है सिटीज़न कॉप मोबाइल एप्प : जीपी सिंह, एडीजी

पूरे देश में लागू हो सकता है सिटीज़न कॉप मोबाइल एप्प : जीपी सिंह, एडीजी

छत्तीसगढ़ पुलिस का मोबाइल ऐप "सिटीजन कॉप" को माइक्रो मिशन -03 के तहत BPR&D नई दिल्ली द्वारा चयनित किया गया है। इसी परिप्रेक्ष्य में आज दिनांक 7/02/2020 को बीपीआरडी नई दिल्ली द्वारा सिटीजन कॉप के उपयोगिता एवम फीचर्स को बारीकी से जानने के लिए श्री जीपी सिंह, एडीजी EOW को आमंत्रित किया गया था। श्री जीपी सिंह द्वारा सिटीजन कॉप का लाइव डेमोस्ट्रेशन दिया गया। इस दौरान पुलिस अनुसंधान एवम विकास ब्यूरो, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली के डीजी, एडीजी, आईजी एवम डीआईजी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

BPR&D नई दिल्ली के डीजी श्री वीएसके कौमुदी द्वारा सिटीजन कॉप एप्प की सराहना की गई। BPR&D के वरिष्ठ अधिकारियों ने एप्प की उपयोगिता जानकर श्री सिंह को बेहतर एप्प तैयार करवाने के लिए बधाई दी। संभव है इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि सिटीजन कॉप मोबाइल एप्प को श्री सिंह द्वारा रायपुर आईजी के कार्यकाल में दिनांक 08/09/2015 को रायपुर रेंज के 05 जिलों में लागू कराया गया था, जो वर्तमान में प्रदेश के 11 जिले में संचालित किया जा रहा है।

वर्तमान में सिटीजन कॉप के छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 1.25 लाख यूजर्स सहित देश भर में 3.5 लाख से अधिक यूजर्स सक्रिय हैं।

सिटीज़न कॉप मोबाइल एप्प के माध्यम से पुलिस ने लगभग 50 करोड़ रुपए कीमत के 35 हजार चोरी/गुम मोबाइल फोन रिकवर कर उनके मूल मालिकों को लौटाया गया है।

सिटीजन कॉप को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016 में प्लेटिनम कैटेगरी में "डिजिटल इंडिया अवॉर्ड" एवम फिक्की द्वारा वर्ष 2015 में "स्मार्ट पोलिसिंग अवॉर्ड" से सम्मानित किया गया है।

सिटीजन कॉप एप्प में हर राज्य के पुलिस की आवश्यकता के अनुरूप नित नए फीचर्स जोड़े और कस्टमाइज किए जा रहे हैं।

इस एप्प की सबसे खास बात यह है कि पिछले साढ़े चार से संचालित एप्प को बनाने अथवा मेंटेनेंस करने में छत्तीसगढ़ सरकार अथवा पुलिस विभाग ने कोई आर्थिक लागत नहीं लगाया है, अर्थात ज़ीरो बजट में संचालित है यह एप्प।

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शुक्रवार, जनवरी 10, 2020

अधिकारियों/स्टाफ की पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान स्वीकृति के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराया जावे - श्री जी.पी. सिंह, एडीजी

एडीजी श्री जी.पी. सिंह, नें लोक अभियोजन संचालनालय में अभियोजन अधिकारियों की मीटिंग ली 

न्याय प्रणाली में लोक अभियोजन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है - श्री जी.पी. सिंह, एडीजी 

अधिकारियों/स्टाफ की पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान स्वीकृति के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराया जावे - श्री जी.पी. सिंह, एडीजी 

आज दिनांक 10.01.2019 को श्री जी. पी. सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, ईओडब्ल्यू/एसीबी एवं संचालक, लोक अभियोजन द्वारा इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर स्थित लोक अभियोजन संचालनालय में अभियोजन अधिकारियों की मीटिंग ली गई। इस मीटिंग में लोक अभियोजन संचालनालय के अधिकारियों के अलावा राज्य के विभिन्न जिलों में पदस्थ उप संचालक-अभियोजन, संयुक्त संचालक, जिला अभियोजन अधिकारी एवं सहायक जिला अभियोेजन अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा बैठक में श्री जी. पी. सिंह ने उपस्थित अभियोजन अधिकारियों को संबोधित करते हुए निर्देशित किया कि:- 
ऽ न्याय प्रणाली में लोक अभियोजन अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, अतएव प्रत्येक अभियोजन अधिकारी अपने पदजनित दायित्वों का निर्वहन उत्साह व निष्ठा से संपादित करें। 
ऽ माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुजरात राज्य विरूद्ध किसन लाल एवं अन्य में दिनांक 7.1.2014 को पारित निर्णय में, दोषमुक्ति के प्रकरणों की समीक्षा कर यथोचित कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये हैं, जिसका पालन सुनिश्चित करें।
ऽ प्रभा साहू विरूद्ध छ.ग.शासन में माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा पारित दिशा-निर्देशों के तहत शासकीय अभिभाषक से समय-सीमा में ऐसे प्रकरणों की जानकारी अनिवार्य रूप से प्राप्त की जावे, जिसमें शासन की ओर से अपील न किया गया हो तथा उसकी समीक्षा कर यथोचित कार्यवाही सुनिष्चित करें।
ऽ तिजउ राम कंवर विरूद्ध छ.ग.शासन में माननीय उच्च न्याायालय, बिलासपुर द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुसार ब्रीफों का संधारण सुनिश्चित करें तथा संबंधित प्रकरणों के निराकरण उपरांत ब्रीफों के नष्टीकरण हेतु समय-सीमा का निर्धारण शासन को प्रस्तावित करें।
ऽ सत्र न्यायालय में पैरवी के लिये उप संचालक-अभियोजन को अतिरिक्त लोक अभियोजक घोषित किया गया है, अतएव संबंधित जिला कलेक्टर से संपर्क कर सत्र न्यायालय का आबंटन सुनिश्चित करावें।
ऽ अपने प्रभार के न्यायालयों में पारित निर्णयों की प्रतिलिपि अविलम्ब प्राप्त करें, उसकी समीक्षा करें तथा आवश्यकतानुसार उस पर विधिसम्मत अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित करावें। 
ऽ सभी स्टेक होल्डर विभागों से यथोचित तालमेल बनाकर रखें, ताकि कार्य संपादन में सुगमता हो।
ऽ जिला मुख्यालयों में अभियोजन कार्यालयों के निर्माण के लिये जिला कलेक्टर एवं डिस्ट्रिक्ट जज से संपर्क कर जमीन का आबंटन करावें, ताकि शासन स्तर पर भवन निर्माण हेतु यथोचित पहल की जा सके।
ऽ इसी तरह व्यावसायिक दक्षता में सुधार के लिये समय-समय पर प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन कराया जावे, जिसमें ज्यूडिसरी के अधिकारियों एवं विषय विशेषज्ञों को आहूत कर अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षित करायें। 
ऽ अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर यथोचित निगाह एवं नियंत्रण रखें। उनके कार्य की गुणवत्ता में सुधार के लिये उनके कार्यों की लगातार समीक्षा करें एवं आवश्यकतानुसार उनका समुचित मार्गदर्शन करें। 
ऽ अधीनस्थों के कार्यों की सतत मानीटरिंग के लिये यह आवश्यक है कि पर्यवेक्षणीय अधिकारी अपने अधीनस्थ कार्यालयों का समयानुसार निरीक्षण करें। अतिरिक्त संचालक- अभियोजन इस हेतु एकजाई निरीक्षण रोस्टर जारी करें।
ऽ अधिकारियों/स्टाफ की पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान स्वीकृति के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराया जावे।

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शनिवार, जनवरी 04, 2020

एडीजी श्री जीपी सिंह ने माननीय मुख्यमंत्री से मिलकर नये साल की बधाई दी

एडीजी श्री जीपी सिंह ने माननीय मुख्यमंत्री से मिलकर नये साल की बधाई दी

आज दिनांक 04/01/2020 को आईपीएस एसोसिएशन के अधिकारियों ने माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से मिलकर नये साल की बधाई दी। इस दौरान श्री डीएम अवस्थी, पुलिस महानिदेशक, श्री जीपी सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, ईओडब्ल्यू/एसीबी रायपुर, श्री आनंद छाबडा, आईजी रायपुर, श्री सुन्दरराज पी, डीआईजी बस्तर, श्री शेख आरिफ हुसैन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, रायपुर एवं श्रीमती पारूल माथूर, पुलिस अधीक्षक जांजगीर चाम्पा सहित अन्य आईपीएस अधिकारी उपस्थित रहे। माननीय मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के कार्य की सराहना करते हुए बेहतर पुलिसिंग के लिए कार्य करने के लिए अपनी शुभकामना दी।

बुधवार, जनवरी 01, 2020

AnguthaChhap Lekhak : अँगूठाछाप लेखक - ‘‘अबोध विचारक के बईसुरहा दर्शन’’ नामक किताब की खासियत क्या है ?



Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" नामक किताब की खासियत क्या है ?

अँगूठाछाप लेखक - ‘‘अबोध विचारक के बईसुरहा दर्शन’’ एक असफल सामाजिक जागरूकता पर आधारित ग्रँथ है। Angutha Chhap Lekhak अँगूठाछाप लेखक न तो आत्मकथा है, न उपन्यास है, न एकाँकी है और न तो कहानी है। वास्तव में यह फिलॉसोफी भी नहीं है। बल्कि समस्त प्रकार के साहित्यिक संरचनाओं से प्रेरित और साहित्य के कसौटियों से परे एक ग्रँथ है। निःसंदेह समूचे विश्व में इस ग्रँथ से बेहतर लाखो ग्रँथ, क़िताब, साहित्य, दर्शन शास्त्र और धार्मिक पुस्तकें होंगे जो इससे कई गुणा बेहतर और सटीक मार्गदर्शन करता होगा परन्तु यह ग्रँथ एक नवीन ऑडियोलॉजी और साइंटिफिक थिंकिंग प्रस्तुत करता है।

चाहे क्यों न यह ग्रँथ लेखक की असफलता और अपरिपक्वता को चिन्हाँकित और प्रमाणित करता हो। चाहे क्यों न लेखक अपने विचार और फिलॉसोफी को समाज में थोपने के प्रयास से असफल रहा हो। फिर भी इस ग्रँथ के माध्यम से लेखक नें हंड्रेड्स क़्वेश्चन के साथ आपको नवदर्शन के अनुरूप सोचने और बौद्धिक विकास के लिए मजबूर करता है। यह ग्रँथ आपको एक बेहतरीन नवीन ऑडियोलॉजी के नाम पर ढ़ेर सारा प्रश्न और अधूरे स्पष्टीकरण के साथ आपको निराश भी करता है। यदि आप स्वयं न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत के अनुकूल तर्क करने में सक्षम नहीं हैं अपना उत्तर खोजने के योग्य नहीं हैं, Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" को पढ़ना आपके लिए बेचैनी का कारण बनेगा। इस क़िताब से आपको कोई विशेष शिक्षा अथवा जानकारी नहीं मिलेगी। यदि आप किसी पूर्वाग्रह से प्रेरित हैं अथवा किसी विचारधारा के अंधग़ुलाम हैं तो आप इस ग्रँथ को बिलकुल मत पढ़िए। आपको लेखक के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए प्रेरित होना पड़ सकता है। क्योंकि आप जिन कृत्य को अपनी गौरवशाली परंपरा और संस्कृति मानते आ रहे हैं, लेखक उन्हीं कृत्यों पर संवैधानिक कर्तव्यों का हवाला देते हुए नए साइंटिफिक थिंकिंग के साथ तर्क करने का प्रयास करेंगे। फिर आपके पास दो विकल्प हो सकते हैं, पहला यह कि आप अपनी बुद्धि और तर्क के बल पर अंध ग़ुलामी से मुक्त हो जाएँ और दूसरा यह कि आप यथावत उसी विचारधारा के साथ आँख मुँदकर चलते रहें, चाहे वह कितना ही गलत क्यों न हो। आप अन्याय जानकर भी राइट टू क़्वेश्चन एंड स्पीकिंग का प्रयोग नहीं करेंगे बल्कि सहते रहेंगे, ढ़ोते रहेंगे।

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" वर्तमान परिवेश में चल रहे व्यक्तिगत, सामाजिक तथा धार्मिक विश्वास और गौरवशाली परंपरा के नाम पर चले आ रहे बुराइयों पर साइंटिफिक थिंकिंग विकसित करने का प्रयास है। यह ग्रँथ एरर.फ्री नहीं बल्कि एरर.फुल प्रकाशित है। मूलतः इस ग्रँथ में मौजूद त्रूटि और स्वच्छंदता ही इसके ओरिजिनल एलिमेंट्स हैं। मूल रूप से हिन्दी भाषा में लिखे इस ग्रँथ में इंग्लिश और छत्तीसगढ़ी के शब्दों, वाक्यों और कहावतों का प्रयोग हुआ है। ये ग्रँथ हिन्दी भाषी लोगों को छत्तीसगढ़ी सीखने तथा बोलने के लिए प्रेरित कर सकती है। इसमें ऐसे शब्दसंयोग भी मिलेंगे जो शायद किसी भी डिक्शनरी में न हो। आत्म-आलोचना और अपमानजनक सम्बोधन के साथ लेखक ने हिडन मैसेज दिया है। यह ग्रँथ पाठकों को न सिर्फ सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन के लिए प्रेरित करती है वरन् साहित्य लिखने के लिए बुद्धिजीवी होने अथवा अधिक पढ़े लिखे होने की अनिवार्य योग्यता वाली मानसिकता पर भी कठोर प्रहार करता है। लेखक इस क़िताब के माध्यम से हिस्टोरिकल बुक्स पर भी क़्वेश्चन करता है।

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब के लेखक कौन हैं ?
Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब के लेखक श्री हुलेश्वर प्रसाद जोशी जी हैं । 

Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब किस प्रकाशन से प्रकाशित होगी ?
Angutha Chhap Lekhak "अँगूठाछाप लेखक" किताब का प्रकाशन "श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी, रायपुर-छत्तीसगढ़ www.thebharat.co.in" से होगी। 


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