"जीवन बचाओ मुहिम"

हत्यारा और मांसाहार नहीं बल्कि जीवों की रक्षा करने वाला बनो।


रविवार, जून 16, 2019

ईश्वर कौन - HP Joshi

ईश्वर कौन - HP Joshi

मनुष्य स्वयं के निर्णय से जीवन जिए तो श्रेयस्कर होगा, पर प्रेरणा से जीवन जीने वाले अधिकांश व्यक्ति दुःखी ही रह जाता है वहीं अधिकांश खुशी भी हो जाते हैं। ऐसा मैं पहला व्यक्ति कदापि नहीं जो कह रहा है "जिस प्रकार से आपका एक निर्णय आपकी पूरी जिंदगी बदल देती है वैसे ही आपका एक निर्णय/एक संकल्प आपको जीवनपर्यंत के लिए ख़ुश रख सकता है।"  

इस संदर्भ में मैं एक पुरानी कहानी लिखना चाहता हूं "जापान में एक बहुत खुशमिजाज व्यक्ति, चाहें तो आप संत मान सकते हैं, वे अपने जीवन के लगभग 25 वर्ष को यूं ही स्ट्रेस और दुःख में बर्बाद कर लिया था। आप सबको भलीभांति ज्ञात है जापान में बहुत भयंकर और बार बार भूकंप आते रहते हैं। एक दिन वोको जी सुबह सुबह उठे तो उसके मन में एक विचार आया ईश्वर ने एक दिन और जीने के लिए दिया है तो बताओ वोको जी क्या तुम आज ख़ुश रहना चाहते हो???
भीतर से ही वोको जी चिल्ला पड़ा - हां, हां मै आज ख़ुश रहना चाहता हूं।
बस इतने से विचार के कारण वह पूरे दिन ख़ुश रहा, जबकि उसके दिनचर्या अथवा आसपास के परिवेश में कोई बदलाव ही नहीं हुआ था। रात्रि में सोने के पहले वह सोचने लगा, निष्कर्ष में पहुंचा कि वह रोज प्रातः जागेगा तो स्वयं को आवाज लगाएगा, वोको जी क्या तुम आज ख़ुश रहना चाहते हो???
फिर स्वयं ही जवाब देगा, हां, हां ज़रूर, मैं जरूर ख़ुश रहूंगा।
इसी तरह वह रोज इसे दोहराने लगा, कई बार वह तनावग्रस्त हो जाता, कई बार कुछ ऐसी कोई घटना सामने आ जाती जो उन्हें परेशान करने लगती, फिर उन्हें याद आता कि सुबह उसने क्या संकल्प लिया है?
फिर स्वयं ही बोलता, बेटा बताओ आपको ख़ुश रहना कि नहीं???
फिर बोलता, हां, हां मैंने तो सुबह ही ख़ुश रहने का संकल्प लिया है, जरूर ख़ुश रहूंगा।"

ऐसे ही एक छोटा सा विचार, छोटा सा संकल्प आपके जीवन को केवल सफल ही नहीं वरन् सुखमय भी बना देगी, आप भी रोज इसे दोहरा सकते हैं, आप भी वोको जी की भांति ख़ुश हो सकते हैं। VOKO जी को एक बार अपना गुरु बना कर देखिए, VOKO ही आपको सुख का भगवान प्रतीत होने लगेंगे।

HP Joshi
Atal Nagar
Nawa Raipur Chhattisgarh

शनिवार, जून 15, 2019

ईश्वर को कौन कौन से काम दूं ?? - HP Joshi

ईश्वर को कौन कौन से काम दूं ?? - HP Joshi

कल की ही बात है मैं सोच रहा था कि ईश्वर को सभी पाने की लालसा रखते हैं, मुझे भी ईश्वर से मिलने की सोचना चाहिए। ठीक इतने में ही एक विचार आया, ये तो ठीक है ईश्वर से मिल लूंगा, मगर मिलूंगा तो क्या बात होगी ?
उनसे किस प्रकार से मिला जाए?
कहां? मिला जाए
क्यों? मिलूं
किस प्रयोजन से मिलूं?
सोचता रहा, सोचता रहा....... इतने में विचार आया, कुछ बड़ा, उपयोगी अथवा अमूल्य वस्तुएं मांग लूंगा। फिर ये निर्धारित करने में लग गया, ऐसी क्या, और कौन कौन सी वस्तुएं है, जिसे मांगा जा सकता है? उनकी उपयोगिता क्या होगी? बड़ी लम्बी लिस्ट बना लिया, फिर देखा कि लिस्ट 9 पन्ने का हो गया, मगर मेरी अपेक्षाएं समाप्त नहीं हुई। इसी बीच सोचा यदि ईश्वर मिलकर बोलेंगे कि मै तुम्हे निर्धारित संख्या में ही आशीर्वाद दूंगा, तो??
फिर लिस्ट में कटौती करने लगा, उसकी उपयोगिता और विकल्प खोजने लगा। पता चला जो 9 पन्ने की मांग पत्र थी, उसमें सबको स्वयं ही पा सकता था। एक विचार आया स्वर्ग मांग लेता हूं, वहां मौज करूंगा, सुख से रहूंगा। मगर मेरी पत्नी, मेरी दुर्गम्या, मेरा तत्वम, मेरे माता - पिता, भाई - बहन और सगे संबंधियों, और मित्रों, गुरुजनों का क्या करूं ??
सोचा सबको ले जाऊंगा। अब लिस्ट बनाने लगा, किसको किसको ले जाऊंगा??
क्यों, ले जाऊंगा??
क्या, मेरे साथ वे सभी स्वर्ग में खुश रहेंगे।
मैंने अपने सभी परिजनों को लेे जाने की सूची में शामिल कर लिया, फिर दोस्तों, गुरुजनों और आसपास के विद्वान लोग जिन्हें मै जानता हूं उन्हें भी सूचीबद्ध करने लगा। इसी बीच ख्याल आया कि तत्वम के जन्मदिवस पर कुछ साथियों को काल किया था, तो वे आवश्यक काम बताकर, अथवा अन्य काम से व्यस्त होने का हवाला देकर आने से असमर्थता जाहिर किए थे। बड़े भैया को बुलाया तो बोले उनकी सासू मां की आज डायलिसिस हो रही है, इसलिए वे अस्पताल में हैं। मैंने सोचा ऐसे ही अधिकांश लोगो का महत्वपूर्ण कार्य अथवा जिम्मेदारियां होंगी, उन्हें लेे जाऊंगा, तो उनका धर्म खतरे में चला जाएगा, सोचा उनके अपने लोगों को भी लेे चलूंगा तो अच्छा होगा। सोचते सोचते रात दो बज गए, नींद आ रही थी, एलर्जी का दवाई भी खाया था, सुबह आवश्यक कार्यों को निपटाने ऑफिस भी जाना है, बाकि कल करूंगा, फिर सोचा कहीं आज ही भगवान आ गए तो???
मैंने फिर निद्रा त्यागने का संकल्प ले लिया, आगे चलकर पूरे भारत भर के लोग शामिल हो गए, याद आया समाज के प्रतिष्ठत व्यक्ति और मेरे आदर्श समाज सेवक साथी श्री बंजारे जी जो आबूधाबी में रहते छूट रहे हैं। मैं उसके बारे में सोचते सोचते, देश के अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक पहुंच गया, निष्कर्ष में पहुंचा कि समूचे पृथ्वी के सभी मानव ही नहीं, वरन् सभी जीव जंतु भी स्वर्ग जाएंगे। तभी याद आया, कुछ लोग, आतंकवादी हैं, कुछ नक्सलवादी हैं, कुछ अपराधी हैं, कुछ असामाजिक तत्व भी हैं उनका क्या किया जाए??
उन्हें छोड़ देता हूं, फिर याद आया कि कुछ लोग धार्मिक वैमनस्यता को फैलने वाले धार्मिक नेताएं है, उनका क्या करूं??
चलो उन्हें भी छोड़ देता हूं, कुछ लोग ऐसे धार्मिक नेताओ को अपना गुरु मार्गदर्शक और भगवान मानते हैं, उनका क्या करूं?? सोचा इनको भी छोड़ देता हूं। फिर सोचा कुछ लोगों के भीतर स्लीपिंग क्रिमिनल्स हैं तो उनका क्या करूं??
सोचा छोड़ देता हूं। आगे खोजने लगा, किसमे किसमे स्लीपिंग क्रिमिनल्स है, असमंजस में पड़ गया, मेरे आसपास के लोगों में भी मिला, मुझमें भी स्लीपिंग क्रिमिनल्स मिल गया। इतने में ही मेरी पुत्र तत्वम जाग गया, आकर बोला पापा सूसू करना है। मैंने उन्हें सूसू करवाया, उसके बाद वह मेरे गोद में ही सोने का प्रयास करने लगा, मैंने सुलाया, तब तक रात्रि के साढ़े तीन बज गया था। निष्कर्ष में पहुंचे बिना ही सो गया।

HP Joshi
Nawa Raipur, Chhattisgarh

रविवार, जून 09, 2019

ब्रह्माजी से संवाद : - HP Joshi

ब्रह्माजी से संवाद : - HP Joshi

यह झूठी कहानी या बनावटी बात नहीं, सत्य है। ब्रम्हाजी से संवाद के बाद मैंने सितम्बर 2007 में ही उनके बताए अनुसार सामाजिक जागरूकता का काम शुरू कर दिया। इस दौरान मेरे आसपास के कुछ तथाकथित ज्ञानियों से बात हुई, चर्चा के दौरान उन्होंने मेरे तर्क को समर्थन दिया गया, परन्तु लोग चलने को तैयार नहीं हो पाए। एक महोदय को मैंने बताया, वे मानने को तैयार ही नहीं हुए, कि ऐसा मेरा विचार हो सकता है फिर मैंने अपने ब्रम्हा जी से हुए संवाद के बारे में उन्हें बताया। वे बौखला गए, बोलने लगे मेरा जन्म उनके शिर से हुई है मै ही इस धर्म का बुद्धि हूं, मुझसे पहले ऐसा ज्ञान आपको नहीं मिलना चाहिए, इसलिए मैं आपको मिले ज्ञान को आत्मार्पित नहीं करूंगा। मै ब्रम्हा जी को इसलिए पूजता नहीं हूं, क्योंकि वे सबको समान रूप से बनाते हैं, वो तो हमारे समूह के लोग बुद्धजीवी हैं, भविष्य को समझते हैं इसलिए क्यों न, कुटिलता ही सही परंतु अपना वर्चस्व बरकरार रख पाए हैं। फिर मै सभी को अपना भाई कैसे मान लूं? ब्रम्हा जी को चाहिए कि यह ज्ञान आकर मुझे दे, नहीं आएंगे, मुझे नहीं देंगे, तो आपके संवाद को मै प्रकृति के सिद्धान्त के विपरित समझता हूं।

एक व्यक्ति से बात हुई बोले इतना गहरा और सटीक ज्ञान आपको कैसे हुआ ?
मैंने कहा - ब्रम्हा जी से कुछ दिन पहले मेरी संवाद हुई थी। महोदय इतना सुनते ही बौखला गए, बोले ब्रम्हा जी पुराने दिनों की बातें है अब वे नहीं है। तुम झूठ बोल रहे हो, तुम झूठे हो। अगली बार ऐसी अफवाह लेकर मेरे पास मत आना। मैंने कहा आप क्षेत्र के प्रमुख मंदिर के पुजारी हैं, आपको ब्रम्हा में विश्वास नहीं? उन्होंने कहा तुम यहां से चले जाओ.... वरना अच्छा नहीं होगा।

मैंने कुछ परिचित लोगों, सहकर्मियों और दोस्तो से भी ब्रम्हा जी संवाद के बारे में बताया, अधिकांश लोगों ने मान लिया कि "मेरा तर्क सही है, परन्तु उन्होंने ब्रम्हा जी से संवाद को असत्य घोषित कर दिया।" कुछ लोगों को मेरे बातों में विश्वास हो गया तो कुछ मुझे ढोंगी कहने लगे थे।

एक दिन मैंने अपने दादा जी से बात करी, उन्हें बताया कि  दादाजी, कुछ दिन पहले ब्रम्हा जी मेरे पास आए थे, उनसे मेरी लंबी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा है "आप सभी मनुष्य ही नहीं वरन् सभी जीव मुझ ब्रम्हा के ही संतान हो, कोई पराया नहीं, सभी सगे भाई - बहन हो। यह तो सृष्टि के संचालन के कारण, तुम केवल इस जन्म में अमुक (मेरे पिता जी का नाम लेकर बोले) का पुत्र हो, अन्यथा अरबों खरबों जन्मों से मेरे पुत्र ही हो, ऐसे ही सभी जीव जंतु भी मेरे संतान हैं अर्थात आप सभी भाई - बहन हो। कुछ झूठे और पापी लोग, इस सत्य को जानते हुए भी अपने स्वार्थ से प्रभावित होकर, झूठी कहानियां सुना सुना कर मुझे बदनाम कर दिया है। जिस प्रकार से आपके माता पिता आप भाई बहनों में कोई भेद नहीं रखते, उसी प्रकार से मै स्वयं प्रकृति अर्थात ब्रम्हा किसी से भेद नहीं करता। मै किसी मनुष्य से पूजन का अभिलाषा नहीं रखता, मैं आपका पिता हूं, आप अपने इस जन्म के पिता की भांति ही, व्यवहार करें, मै प्रकृति हूं, मै ही ब्रम्हा हूं। जब प्रकृति नहीं होगी, तो आप नहीं होंगे, मानव समाज नहीं होगी, धर्म नहीं होगा, जीव जंतु नहीं होंगे।  इसलिएआप धार्मिक उन्हें जानना जो प्रकृति के पूजक हों, धार्मिक होने के लिए आपके समाज या तथाकथित धर्म का अनुयाई होना आवश्यक नहीं। चाहे मनुष्य कोई भी देश काल अथवा जाति, धर्म का हो उनके लिए प्रकृति की संरक्षण आवश्यक है। प्रकृति ही देवता है, प्रकृति पूजा का प्रेमी नहीं है।परन्तु समस्त जीव को उनका आदर करना चाहिए, उसके प्रति सम्मान का भाव होनी चाहिए, प्रकृति ही नहीं, वरन् वे सभी जीव जंतु जो आपको देते हैं वे देवता हैं। इत्यादि ........." इस संबंध में अमुक अमुक (कुछ मंदिरों के पुजारियों का नाम लेकर) से बात करी वे इसे स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। मेरे दादा जी को समझने में देर नहीं लगी, उन्होंने झट से एक सुझाव दिया कि ब्रम्हा जी से मिले ज्ञान को एक वाक्य में समेट लो, और उसका प्रचार करो, जब कोई इसपर विचार करने को तैयार रहे तभी उन्हें आगे विस्तार से बताना, संभव है जो मूर्ख होंगे उन्हें छोड़कर आपके वाक्य को सभी मानने लगेंगे, कुछ अपने जीवन में शामिल भी करेंगे।

मैंने निर्देश प्राप्त कर एक वाक्य बनाने की जुगत करता रहा, अंत में एक वाक्य "जम्मो जीव के भाई बराबर" अर्थात "सभी जीव भाई - बहन के समान हैं" बताने में सफल हो गया हूं।

(HP Joshi)
Atal Nagar, Raipur

शुक्रवार, जून 07, 2019

बुद्धजीवी कौन ??? - HP Joshi

बुद्धजीवी कौन ???

सदियों से बुद्धजीवी कौन है? यह जानना महत्वपूर्ण विषय रहा है क्योंकि बुद्धजीवी ही सही मायने में ईश्वर, परमात्मा, भगवान और देवताओं का प्रतिनिधि है वहीं सही मायने में सच्चा धर्मगुरु है। जिनके मार्गदर्शन और बताए रास्ते पर चलना सच्चा धर्म है या यह कि उनके बताए मार्ग और नियम के अनुरूप जीवन जीना ही धार्मिक होना है।

यदि हम किसी बुद्धजीवी के सानिध्य में है मतलब हमसे कोई अपराध, हिंसा अथवा पाप होने की संभावना कम हो जाती है। बुद्धजीवियों के सानिध्य का लाभ जानकर मै बुद्धजीवियों के खोज में लगा रहा, लंबी यात्रा के बाद यह जान पाया कि बुद्धजीवी कौन है?? उन्हें कैसे पहचाना जा सकता है?? और क्या बुद्धजीवी का ढोंग करने वाले कुछ लोग भी बुद्धजीवी हैं?

आइये हम बुद्धजीवी कौन है कैसे होते हैं उन्हें जानने के पहले थोड़ा सा बुद्ध को जान लें, यदि आप बुद्ध को जानते हों तो आपको बुद्धजीवी खोजने में या बनने में कोई कठिनाई नहीं होगी क्योंकि बुद्ध जैसे, बुद्ध के सिद्धांतो के अनुरूप जीवन जीने वाले ही बुद्धजीवी हैं। बुद्ध की जीवन शैली और सिद्धांत क्या और कैसा था यह किसी साहित्य का पुस्तकों में खोजेंगे तो उसमे सत्य के बजाय बनावटी भी हो सकती है, तो हम बुद्ध को जानें कैसे??

बुद्ध स्वयं को ज्ञानी, महात्मा या भगवान अथवा ईश्वर नहीं मानते थे, वे स्वयं को साधारण सा मनुष्य मानते थे और इसके लिए वे केवल प्रकृति के सिद्धांत के अनुरूप आचरण व कार्य करते थे। हमें ज्ञात है बुद्ध का नाम बुद्ध नहीं था, वे बुद्ध बने थे। अब पहले हमें बुद्ध बनने का राज ही जान लेना चाहिए।

प्रकृति बड़ी भोली और सच्ची होती है जो किसी से दुर्भावना नहीं रखती, किसी से भेद नहीं करती, किसी से परहेज़ नहीं करती, किसी को अपना पराया नहीं मानती, किसी के लिए अपने आचरण में परिवर्तन नहीं करती, चाहे वह कोई भी हो। प्रकृति को आप नुकसान पहुंचाएंगे तब भी वे आपसे बदला नहीं लेंगे। बस इतनी सी सच्चाई, इतने से साधारण व्यवहार को अपनाने के कारण ही एक गौतम नाम का बालक आगे चलकर बुद्ध बन गया। प्रकृति के भोलेपन अपनाने के बाद कोई भी मनुष्य बुद्ध, बुद्धू, भोला या बुद्धजीवी हो सकता है। इतनी सी बात को जान लेने के बाद  पृथक से यह जानने की आवश्यकता नहीं होती कि बुद्धजीवी कौन है? वे कैसे होते हैं? उन्हें कैसे पहचानें? क्योंकि प्रकृति के भोलेपन ही बुद्ध है और उसी भोलेपन से जीवन जीना, या ऐसे ही भोलेपन का व्यवहार करना ही बुद्धजीवियों की आधारशिला है पहचान है। कुछ ग्रंथ या पुस्तकें आपको बहलाएगी, बेवकूफ बनाएगी, कुछ मार्गदर्शन भी करेगी मगर आप प्रकृति के व्यवहार, प्रकृति से सिद्धांत और प्रकृति के न्याय को जानकर  पूर्ण हो सकते हैं बुद्ध और बुद्धजीवियों को जान सकते हैं अलग से आपको लाखों पन्नों की ग्रंथ/पुस्तकें पढ़ने की जरूरत नहीं। बस आप "प्रकृति के व्यवहार, प्रकृति से सिद्धांत और प्रकृति के न्याय" को आत्मर्पित कर लें, फिर केवल अपने भीतर के आवाज को सुनें, उसके अनुरूप ही जीवन जिएं। यही सच्चा मानव धर्म भी है। किसी धर्म के अनुयायियों के आस्था तक बात न पहुंच जाए, वे चिढ़ न जाएं मेरा सही, तुम्हारा गलत ये न कहने लगें, इसलिए बुद्ध और बुद्धजीवी बनने बनाने की आज की लेख समाप्त करता हूं।

(हुलेश्वर जोशी)
नवा रायपुर, छत्तीसगढ़

बुधवार, जून 05, 2019

देशवासियों को ईद-उल-फितर की बधाई - हुलेश्वर जोशी

देशवासियों को ईद-उल-फितर की बधाई - हुलेश्वर जोशी

ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर मै देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति पर ईद-उल फितर का त्‍यौहार मनाया जाता है जो ईश्‍वर के प्रति अनुराग, प्रेम, भाईचारे और कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। इस त्‍यौहार का सारांश एक-दूसरे को प्रेम और खुशियां बांटना है। मुझे उम्‍मीद है कि ईद-उल-फितर हम भारतीय के भीतर उदारता की भावना को मजबूत करेगा और हमें एक-दूसरे के करीब लाकर मैत्री, भाईचारे, आपसी सम्‍मान, सहानुभूति और प्रेम के बंधन में बांधेगा। 

आप कोई भी धर्म के हों, यदि आपका व्यवहार किसी भी धर्म के अनुयायी के लिए सौतेला है तो आपसे अनुरोध है कि कृपया प्रकृति के सिद्धांत के अनुरूप अपना आचरण रखें। हमें प्रकृति के व्यवहार को ही अपने व्यवहार में शामिल करना चाहिए, हम सभी मनुष्य एक ही ईश्वर के संतान हैं चाहे हम उन्हें किसी भी रूप या नाम से जानें। इसका तात्पर्य है कि हम सभी जीव भाई-बहन के समान है।

(हुलेश्वर जोशी)
नवा रायपुर, छत्तीसगढ़

शुक्रवार, मई 31, 2019

भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री, केबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं राज्य मंत्रियों के नाम व विभाग .............

माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने जारी किया आदेश, 2019-2024 हेतु केन्द्रीय मंत्रियों के नाम व विभाग जानने के लिए क्लिक करें

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की सलाह पर राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्‍द ने केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद के निम्‍नलिखित सदस्‍यों के बीच विभागों के बंटवारे का निर्देश दिया है :-


श्री नरेन्‍द्र मोदी, प्रधानमंत्री - कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाण ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग। सभी महत्‍वपूर्ण नीतिगत मुद्दे तथा वे सभी विभाग, जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं।



कैबिनेट मंत्री
1. श्री राजनाथ सिंह - रक्षा मंत्री
2. श्री अमित शाह - गृह मंत्री
3. श्री नितिन जयराम गडकरी - सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्री
4. श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा - रसायन एवं उर्वरक मंत्री
5. श्रीमती निर्मला सीतारमन - वित्‍त मंत्री और कॉरपोरेट कार्य मंत्री
6. श्री रामविलास पासवान - उपभोक्‍ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री
7. श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर - कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री; ग्रामीण विकास मंत्री और पंचायती राज मंत्री
8. श्री रविशंकर प्रसाद - कानून एवं न्‍याय; संचार; इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
9. श्रीमती हरसिमरत कौर बादल - खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री
10. श्री थावर चंद गेहलोत - सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री
11. डॉ. सुब्रह्मण्‍यम जयशंकर - विदेश मंत्री
12. श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ - मानव संसाधन विकास मंत्री
13. श्री अर्जुन मुंडा - जनजातीय कार्य मंत्री
14. श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी - महिला एव बाल विकास और वस्‍त्र मंत्री
15. डॉ. हर्षवर्धन - स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्‍वी विज्ञान मंत्री
16. श्री प्रकाश जावड़ेकर - पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्री
17. श्री पीयूष गोयल - रेल और वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री
18. श्री धर्मेन्‍द्र प्रधान - पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्‍पात मंत्री
19. श्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी - अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्री
20. श्री प्रहलाद जोशी - संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री
21. डॉ. महेन्‍द्र नाथ पांडेय - कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री
22. श्री अरविन्‍द गणपत सावंत - भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्री
23. श्री गिरिराज सिंह - पशुपालन, दुग्‍ध उत्‍पादन एवं मत्‍स्‍यपालन मंत्री
24. श्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत - जल शक्ति मंत्री



राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)  
1. श्री संतोष कुमार गंगवार - श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार)
2. श्री राव इन्‍द्रजीत सिंह - सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्‍वयन मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार); और आयोजना मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार)
3. श्री श्रीपद येसो नाइक - आयुर्वेद, योगा और नेचरोपैथी, यूनानी,सिद्धा और होम्‍योपैथी (आयुष) मंत्रालय (स्‍वतंत्र प्रभार); और रक्षा मंत्रालय
4. डॉ. जितेन्‍द्र सिंह - पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय; कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग
5. श्री किरेन रिजिजु - युवा मामले एवं खेल मंत्रालय और अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्रालय
6. श्री प्रह्लाद सिंह पटेल - संस्‍कृति मंत्रालय  तथा पर्यटन मंत्रालय
7. श्री राजकुमार सिंह - विद्युत मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय  और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
8. श्री हरदीप सिंह पुरी - आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
9. श्री मनसुख मांडविया - जहाजरानी और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय  



राज्‍य मंत्री
1. श्री फग्गनसिंह कुलस्ते - इस्‍पात मंत्रालय
2. श्री अश्विनी कुमार चौबे - स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
3. श्री अर्जुनराम मेघवाल - संसदीय कार्य मंत्रालय; और भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय
4. जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह - सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
5. श्री कृष्‍ण पाल गुर्जर - सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
6. श्री दानवे रावसाहब दादाराव - उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
7. श्री जी. किशन रेड्डी - गृह मंत्रालय
8. श्री पुरुषोत्तम रूपाला - कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
9. श्री रामदास अठावले - सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
10. साध्वी निरंजन ज्योति - ग्रामीण विकास मंत्रालय
11. श्री बाबुल सुप्रियो - पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
12. श्री संजीव कुमार बालियान - पशुपालन, दुग्‍ध उत्‍पादन एवं मत्‍स्‍यपालन मंत्रालय
13. श्री धोत्रे संजय शामराव - मानव संसाधन विकास, संचार और  इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
14. श्री अनुराग सिंह ठाकुर - वित्‍त और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
15. श्री अंगड़ी सुरेश चन्नबसप्पा - रेल मंत्रालय
16. श्री नित्‍यानंद राय - गृह मंत्रालय
17. श्री रतन लाल कटारिया - जल शक्ति; सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
18. श्री वी. मुरलीधरन - विदेश मंत्रालय; संसदीय कार्य मंत्रालय
19. श्रीमती रेणुका सिंह सरुता CG - जनजातीय कार्य मंत्रालय
20. श्री सोम प्रकाश - वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
21. श्री रामेश्‍वर तेली - खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय
22. श्री प्रताप चंद्र सारंगी - सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय;और पशुपालन, दुग्‍ध उत्‍पादन एवं मत्‍स्‍यपालन मंत्रालय
23. श्री कैलाश चौधरी - कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
24. श्रीमती देबाश्री चौधरी - महिला एवं बाल विकास मंत्रालय

शनिवार, मई 25, 2019

प्रकृति का सिद्धान्त अर्थात नैसर्गिक सिद्धान्त ही न्याय है, सच्चा धर्म और सर्वोच्चतम् जीवन शैली है - HP Joshi

प्रकृति का सिद्धान्त अर्थात नैसर्गिक सिद्धान्त ही न्याय है, सच्चा धर्म और सर्वोच्चतम् जीवन शैली है - एचपी जोशी

समग्र ब्रम्हाण्ड में लाखों ज्ञात/अज्ञात धर्म हैं, जो छोटे छोटे कबिलों के सरदार से लेकर ईश्वर द्वारा स्थापित माना जाता हैं। निःसंदेह ये सभी धर्म स्थापना के दौरान प्रकृति के सिद्धान्त के अनुकूल ही रहे होंगे, परन्तु बाद में अच्छे-बूरे लोगों के सम्पर्क में आने के बाद लगातार बदलते रहे हैं इसलिए हम कुछ धर्मों को नैसर्गिक सिद्धान्तों के विपरित पाते हैं। वर्तमान में अधिकांश धर्मों के तथाकथित रखवाले भी है जो मौजूदा स्थिति में व्याप्त बुराईयों, अधार्मिक सिद्धान्तों को बदलने के स्थान पर संरक्षित करने के लिए हिंसा फैलाने के लिए उत्तरदायी हैं। 

ऐसे स्थिति में सच्चे मानव धर्म की पुनस्र्थापना के लिए मैं धार्मिक नेताओं से अपील करता हूं कि वे मौजूदा धर्म में व्याप्त बुराईयों, अधार्मिक सिद्धान्तों को बदलने का आवश्यक पहल करें। ताकि उनका धर्म मौलिक धर्म अर्थात प्रकृति के सिद्धान्त के अनुकूल हो सके।

मै मानव समाज से भी अनुरोध करता हूं कि वे अपने अंतरात्मा के अनुकूल धर्म को मानें, तथाकथित धर्म के चक्कर में आकर मानवता के खिलाफ, मानव-मानव के बीच भेदभाव, छूआछूत, घृणा और नफरतें न करें। क्योंकि समस्त मनुष्य का जन्म समान प्रक्रिया से होती है जो एक ही प्रकृति द्वारा पोषित हैं, जिस प्रकृति द्वारा हम अभिसिंचित हैं वह प्रकृति हम सभी मानव से समान व्यवहार करती है, किसी से भेद नही करती है। यह प्रकृति ही देवता है जो सबको समान रूप से देती है, ईश्वर है जो समस्त ऐश्वर्य का कारण है, परमात्मा है जो समस्त आत्माओं की हेतु है। 

आपसे पुनः अनुरोध है आओ आज संकल्प लें कि हम प्रकृति के सिद्धान्तों के अनुकूल ही व्यहार करेंगे, इसके विपरित कृत्य नही करेंगे। मानव-मानव को एक समान मानेंगे और सच्चे अर्थों में मनुष्य बनकर रहेंगें नैसर्गिक सिद्धान्त को अपने धर्म में शामिल करेंगे। क्योंकि प्रकृति का सिद्धान्त अर्थात नैसर्गिक सिद्धान्त ही न्याय है, सच्चा धर्म और सर्वोच्चतम् जीवन शैली है।

जो किसी दूसरे व्यक्ति/मनुष्य से घृणा अथवा नफ़रत करते हैं, उन्हें कारणों/मापदण्ड की समीक्षा करनी चाहिए, कि क्या उनका मापदण्ड नैसर्गिक (प्रकृति) के सिद्धांत के अनुकूल है?

यदि, आपका आचरण नैसर्गिक सिद्धांतों के अनुकूल है तभी आप सच्चे अर्थों में मानव हैं। अन्यथा आपसे अनुरोध है कि आप नैसर्गिक सिद्धांत को समझें, यही न्याय है, यही सच्चा धर्म है और यही सर्वोत्तम मानव जीवन शैली भी है। 


(एचपी जोशी)
अटल नगर, रायपुर

बुधवार, मई 22, 2019

संवैधानिक निकायों को कमजोर करने के खिलाफ सचेत किया : उपराष्ट्रपति

केंद्रीय सर्तकता आयोग, नियंत्रक‍ और महालेखा परीक्षक और निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक निकायों को कमजोर करने के खिलाफ सचेत किया : उपराष्ट्रपति

भारत विश्‍वभर के निवेशकों के लिए एक आकर्षक लक्ष्य के रूप में उभरा है: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने प्रबंधन संस्थानों से वैश्विक परंपराओं को अपनाने के लिए कहा;

छात्रों को ज्ञान और उन्नयन कौशल से अपने आपको लैस करने के लिए कहा;

ग्रेट लेक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत विश्‍वभर के निवेशकों के लिए एक आकर्षक लक्ष्य के रूप में उभरा है। उन्‍होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को उच्च मानकों को बनाए रखना चाहिए और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना चाहिए। श्री नायडू आज चेन्नई में ग्रेट लेक इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस बात की चर्चा करते हुए कि भारत अगले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है,  श्री नायडू ने बताया कि आर्थिक असंतुलन, शहरी-ग्रामीण विभाजन, स्‍त्री-पुरूष भेदभाव और सामाजिक भेदभाव को दूर करने तथा सभी संस्थानों की प्रतिष्ठा बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी), नियंत्रक‍ और महालेखा परीक्षक (कैग) और निर्वाचन आयोग, संसद और राज्य विधानसभाएँ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की पवित्रता को कमजोर करने के लिए किसी को भी कुछ नहीं कहना या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई शिकायत हो तो उसके निवारण के लिए उपयुक्त मंच भी उपलब्‍ध हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है और प्रभावी चुनाव प्रणाली और नियमित आधार पर चुनाव कराने का ट्रैक रिकॉर्ड है। चुनावों को  ‘लोकतंत्र का त्योहार’ बताते हुए, उन्होंने निर्वाचन आयोग को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संचालन के लिए बधाई दी।

संस्‍थान से उतीर्ण होने वाले छात्रों को अपने अल्मा मेटर का सम्मान करने और हमेशा अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए काम करने का आह्वान करते हुए, श्री नायडू ने उन्हें अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने और सामाजिक रूप से कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के परिसरों पर माहौल को बाहरी मुद्दों से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए और उन्होंने प्रसन्‍नता व्यक्‍त करते हुए कहा कि कुछ को छोड़कर, अधिकांश 900 विश्वविद्यालय किसी भी व्‍यवधान से मुक्त हैं।

उपराष्ट्रपति ने उन्हें अपने माता-पिता, मातृभाषा, मूल स्थान, मातृभूमि और गुरु (शिक्षक) की उपेक्षा नहीं करने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें मातृभूमि की सुरक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा के लिए भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा, "साथी इंसानों का ख्याल रखना राष्ट्रवाद है और केवल वंदे मातरम या जय हिंद कहना राष्‍ट्रवाद नहीं है।" उन्होंने छात्रों में नैतिकता और नैतिक मूल्यों को विकसित करने के लिए शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

यह बताते हुए कि प्रबंधन केवल कॉर्पोरेट क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, श्री नायडू ने कहा कि प्रबंधन अध्ययन का दायरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और संबद्ध उद्योग तक बढ़ाना चाहिए और इन क्षेत्रों को व्यवहार्य और जीवंत बनाने के लिए समाधान प्रदान करना चाहिए।

कृषि को संकट में बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि को लाभदायक और टिकाऊ बनाने के लिए संरचनात्मक बदलाव लाने और नई रणनीतियों और कार्यक्रमों की जरूरत है। कर्म योग कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों के साथ बातचीत करने के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए ग्रेट लेक इंस्टीट्यूट की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण समस्याओं को जानना और समझना उनके लिए महत्वपूर्ण है।

श्री नायडू ने भारतीय प्रबंधन संस्थानों के लिए वैश्विक रूप से स्वीकृत शिक्षण परपंराओं, कार्यप्रणाली और पाठ्यक्रम को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे छात्रों को वैश्विक रोजगार बाजार में विधिवत मान्यता मिले। भारतीय संस्थानों को वैश्विक प्रमुखता प्राप्त करने और अन्य प्रबंधन संस्थानों के साथ तालमेल कायम करने के लिए विश्व स्तर पर स्वीकृत मापदंड अपनाने होंगे। उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के संस्थानों के साथ इस तरह के अकादमिक संबंध छात्रों को शिक्षण अनुभव प्रदान करने का एक शानदार तरीका है"।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को बताया कि वे एक बहुत ही रोमांचक मोड़ पर भारत की विकास की गाथा में शामिल हो रहे हैं। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और स्टार्टअप के लिए दूसरा सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र बन गया है।

यह बताते हुए कि चौथी औद्योगिक क्रांति तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित थी, श्री नायडू ने संस्‍थान से उतीर्ण होने वाले छात्रों से कहा कि प्रबंधकों के रूप में उन्हें औद्योगिक प्रक्रियाओं और प्रथाओं में प्रौद्योगिकी संचालित परिवर्तनों का प्रबंधन करने की आवश्यकता होगी। उपराष्ट्रपति ने कहा ”प्रत्येक परिवर्तन संभावित रूप से विघटनकारी है। आपको इस व्यवधान को नियंत्रित और प्रबंधित करना होगा। इसलिए अपने आप को ज्ञान से लैस करें और अपने कौशल को लगातार उन्नत करें” ।

उपराष्ट्रपति ने अपना संदेश दिया, उन्होंने थिरुक्कलुर के हवाले से कहा: “जो सीखा है उसे अच्छी तरह से जानो। और जो अधिक महत्वपूर्ण है, वह है उस शिक्षा के प्रति सच्चा रहना।

अपनी कक्षा 12 की परीक्षाओं में शानदार युवा छात्रों की प्रभावशाली शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा “जैसा कि हम उनकी उपलब्धियों का आनंद लेते हैं, यह हमारी पूरी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें वैश्विक मानकों की सर्वोत्तम और सस्ती उच्च शिक्षा प्रदान करें जिससे उन्हें वैश्विक रोजगार ब

शनिवार, मई 11, 2019

खुशखबरी-बधाई हो; आपका रिजल्ट जारी हो गया ...... कक्षा-10वीं/12वीं का रिजल्ट देखनें के लिए यहां क्लिक करें - HP Joshi


छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल से कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं के छात्र छात्राएं अपना परीक्षा परिणाम निम्न लिंक को क्लिक करके जान सकते हैं, उन्हें कहीं इंटरनेट कैफे वगैरह में भटकने की जरूरत नही।

लू और गर्मी से बचें, घर से बाहर निकलने से परहेज करें।

कक्षा-10वीं के रिजल्ट के लिए Server1  या  Server2 में क्लिक करें l

कक्षा-12वीं के  रिजल्ट के लिए Server1  या  Server2 में क्लिक करें l



आपसे आग्रह है अच्छी तरह सोच विचार कर ही विषय का चयन करें। गर्मी के दिनों में आगामी कक्षा की पढाई जारी रखें और पिछले 5वर्षों के अनसाल्ड पेपर को साल्व करते रहें।


कैसे देखें रिजल्ट :- उपर नीले रंग या लाल रंग में लिखे सर्वर Server में क्लिक करने पर एक नया पेज खुलेगा जिसमें निम्नानुसार जानकारी दर्ज कर अपना रिजल्ट देखें।
  • Enter Your Roll Number(*) - के सामने खाली स्थान (बाक्स में) अपना रोलनंबर डालें।
  • Enter Captcha(*) - के सामने खाली स्थान (बाक्स में) कैप्चा कोड Captcha डालें जो बाक्स के पीछे 06 अंकों में लिखा होगा।
  • उपरोक्त दोनो बाक्स में रोलनंबर व कैप्चा कोड डालने के बाद, Submit (सबमिट बटन) पर क्लिक करें।

परीक्षा में असफल होने वाले छात्र-छात्राओं से मेरा निवेदन है कि वे किसी भी शर्त में आत्मघाती कदम नही उठायें, अगले वर्ष के लिए प्रयास करें, मन लगाकर पढेंगे तो आगे चलकर अवश्य सफल होंगे। परीक्षा में असफल होने का मतलब जीवन में असफल होना नही होता। ऐसे लाखों प्रकरण है जिसमें परीक्षा में सदैव अव्वल आने वाले भी सुखमय जीवन नही जी पाते है जबकि 2-3 साल में एक कक्षा पास होने वाले भी सुखमय और सफलतम जीवन जीते हैं।


(HP Joshi)
Atal Nagar, Raipur, (Chhattisgarh)


शुक्रवार, मई 10, 2019

विधवाओं के लिए मौजूदा समाजिक नियम अमानवीय और अत्याचार है जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन करती है - HP Joshi

विधवाओं के लिए मौजूदा समाजिक नियम अमानवीय और अत्याचार है जो उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन करती है - HP Joshi

समाजिक नियमों के नाम पर पति के देहांत होने पर रोती बिलखती महिला को पहले जबरदस्ती अच्छे कपडे पहनाया जाता है सोलह श्रृंगार किया जाता है और फिर कतार में तलाब अथवा नदी ले जाकर उनके सारे श्रृंगार को हमेशा हमेशा के लिए जबरदस्ती और अमानवीय तरीके से छीन लिया जाता है। उसके बाद भी हमारा जी नही भरता और जीवनभर के लिए छद्म समाजिक नियम के नाम पर सैकडों प्रतिबंध लगा देते हैं जिसपर उसका पूरा अधिकार होता है। 

कतिपय मामलों में विधवा पुनर्विवाह के प्रकरण को छोडकर, संबंधित महिला को जीवनपर्यंत अपने इच्छाओं का दमन करना पडता है, समाजिक अत्याचार और शोषण का शिकार होना पडता है। समाजिक रिवाज के नाम पर विधवा महिलाओं के साथ हो रही कृत्य केवल समाजिक बुराई मात्र ही नही है जिसे हमें जल्द ही रोकना चाहिए, बल्कि यह संबंधित महिला के साथ अत्याचार, प्रताडना और अमानवीय कृत्य है। कल तक जब समाज का अधिकांश सदस्य अशिक्षित था तब तक ऐसे कृत्य को समाजिक नियम और रितिरिवाज के नाम पर बर्दास्त किया जाता रहा है। परन्तु अब समाज शिक्षित है और वह अच्छे-बूरे का ज्ञान रखती है। इसलिए ऐसी व्यवस्थाओं को तत्काल समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

समाजिक नियम के नाम पर हम अपनी माताएं, बहनें, बेटियों, बहुएं और पत्नी के साथ हम कितना अत्याचार कर रहे हैं? क्या हमें ऐसी अमानवीय सामाजिक नियम को तत्काल समाप्त नही कर देना चाहिए? 

आपसे अनुरोध है आइये सकारात्मक पहल करें ताकि हमारी माताएं, बहनें, बेटियों, बहुएं और पत्नी विधवा होने के स्वाभीमानपूर्ण जीवन जी सकें। विधवा महिलाओं को अत्याचार और अमानवीय शोषण से मुक्त करने में आपका योगदान आवश्यक है।

कुछ प्रश्न ???

  • अगले जन्म में यदि आप विधवा हुए तो क्या आप इसे बर्दास्त करेंगे?
  • क्या ऐसे समाजिक नियमों का काई औचित्य है? जिसमें हम किसी के साथ अमानवीय अत्याचार करते हों।



एचपी जोशी
अटल नगर, रायपुर

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