"जीवन बचाओ मुहिम"

हत्यारा और मांसाहार नहीं बल्कि जीवों की रक्षा करने वाला बनो।


शनिवार, मई 16, 2020

भ्रष्टाचारी महिला पटवारी रिश्वत लेते पकड़ाये

भ्रष्टाचारी महिला पटवारी रिश्वत लेते पकड़ाये

आवेदक श्री संजय साहू पिता श्री लखन लाल साहू, निवासी-ग्राम-बड़ेदेवगांव, तहसील खरसिया, जिला-रायगढ़ (छ0ग0) ने दिनांक 03.03.2020 को एक लिखित शिकायत पत्र उप पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो, बिलासपुर के समक्ष प्रस्तुत किया कि आवेदक ने स्वंय एवं दो नाबालिक भाईयों के नाम से बडे़देवगांव में जमीन खरीदा था। उस समय आवेदक एवं नाबालिक भाईयों के नाम से ऋण पुस्तिका था। अब तीनों भाई बालिक हो जाने से ऋण पुस्तिका में दुरूस्त कराने अपने गांव के पटवारी, कुमारी सुमित्रा सिदार, प0ह0न0-16, ग्राम-बकेली से संपर्क करने पर ऋण पुस्तिका को दुरूस्त करने हेतु 4000/- रूपये रिश्वत की मांग किया । शिकायत की वाईस रिकार्डर देकर सत्यापन कराया गया जो सही पाया गया। दिनांक 14.05.2020 को टेªप कार्यवाही की गई आरोपी कुमारी सुमित्रा सिदार, प0ह0न0 -16, ग्राम-बकेली, तहसील-खरसिया, जिला-रायगढ़ (छ0ग0) को प्रार्थी से 4000/- रूपये रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के विरूद्ध धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत विधिवत कार्यवाही करते गिरफ्तार किया गया है।

प्रार्थी द्वारा रिश्वत संबंधित बातचीत को रिकार्ड करने के बाद प्रार्थी के पिताजी का स्वास्थ्य खराब होने एवं लाकडाउन होने से आज कार्यवाही की गई है।

एक वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त चतुर्थ वर्ग कर्मचारी का पेंशन एवं जमा राशि दिलवाने के एवज में 16000/-रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ाये

एक वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त चतुर्थ वर्ग कर्मचारी का पेंशन एवं जमा राशि दिलवाने के एवज में 16000/-रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ाये 

आवेदक श्री बिनेश्वर राम टेकाम पिता स्व. श्री घोंडूराम टेकाम, उम्र-62, वर्ष, निवासी-ग्राम रेंवटी, तहसील प्रतापपुर, थाना चंदोरा, जिला-सूरजपुर (छ0ग0) ने दिनांक 17.03.2020 को एक लिखित शिकायत पत्र उप पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो, अम्बिकापुर के समक्ष प्रस्तुत किया कि वह खण्ड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय प्रतापपुर में चतुर्थ वर्ग स्वीपर के पद से जनवरी 2019 में सेवानिवृत्त हुआ था। सेवानिवृत्त होने के पश्चात् उसे गे्रजवेटी एवं अन्य राशि मिलाकर लगभग 10 लाख रूपये मिलना था। जिसमें से प्रथम किस्त के रूप में उसे 07 लाख रूपये प्राप्त हो चुका है एवं 03 लाख रूपये मिलना शेष होने से प्रार्थी को काफी आर्थिक तंगी थी। प्रार्थी ने शेष 03 लाख रूपये के लिये एवं पेंशन प्रकरण तैयार करने के लिये कार्यालय खण्ड चिकित्सा अधिकारी प्रतापपुर जिला सूरजपुर में जाकर लेखापाल श्री गिरवर कुशवाहा से मिला जिन्होंने शेष 03 लाख रूपये का बिल बनाकर टेªजरी में प्रस्तुत करने एवं पेेंशन प्रकरण तैयार करने के एवज में 16000/-रूपये रिश्वत की मांग की। लेखापाल श्री गिरवर कुशवाहा पूर्व में भी 07 लाख रूपये दिलाने के एवज में प्रार्थी से 19000/-रूपये ले चुका है। प्रार्थी आरोपी को रिश्वत नही देना चाहता था। शिकायत की वाईस रिकार्डर देकर सत्यापन कराया गया जो सही पाया गया। दिनांक 14.05.2020 को टेªप कार्यवाही की गई आरोपी श्री गिरवर कुशवाहा, लेखापाल, कार्यालय खण्ड चिकित्सा अधिकारी प्रतापपुर जिला-सूरजपुर को प्रार्थी से 16000/-रूपये रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के विरूद्ध धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत विधिवत कार्यवाही की जा रही है।

अभी तक प्रार्थी के सेवानिवृत्त के 01 वर्ष के बाद भी पेंशन प्रकरण नही बनाया गया जो शासन के दिशानिर्देश का उलंधन कर एक चतुर्थ वर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारी को जान बूझकर प्रताड़ित किया जा रहा था। जिस पर एसीबी द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

कहीं उपेक्षित तो नही "मेरा गाँव और मेरे हीरो" - एच.पी. जोशी

कहीं उपेक्षित तो नही "मेरा गाँव और मेरे हीरो" - एच.पी. जोशी

मेरे गांव में अनेकों बहादुर और हीरोज हैं जिन्हें लोग जानते नही। इन्हें भले ही कोई पदक न मिला हो, भले ही आप जानकारी और साक्ष्य के अभाव में इन्हें नहीं जानते हों मगर ये आपके फिल्मी दुनिया वाले हीरो से कम नही हैं। आज अपने गाँव के तीन हीरो के बारे में बताता हूँः-

1- स्विमिंग पूल में घंटों सैकड़ों किलोमीटर तैरकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले भी 10-11 साल के दिनेश के साथ प्रतियोगिता में फैल हो सकता है, क्योंकि दिनेश राहेन नदी के बाढ़ में घंटों आरपार कर लेता है।

2- ग्लेशियर में हजारों मील ऊपर चढ़ना निःसंदेह कठिन काम है मगर 10-11 साल का उम्मेंद अपने शिर से ऊपर खाप वाले गेड़ी में चढ़कर 1-2 किलोमीटर तक कच्चे और कीचड भरे रास्ते में चल सकता है और कम बहाव वाले नाला को भी पार कर लेता है क्या यह बहादुरी से कम है?

3- सागर, सागर तो 3री कक्षा का स्टूडेंट है शशी रंगीला का सगा भाई है मगर यह भी किसी हिरो से कम नही, वह अपना पेट फुला ले तो कोई कितना भी ढिशुम ढिशुम कर ले, आपके हाथ थक जाएंगे मगर उनके पेट मे दर्द नही होगा।

ख्याल रखना, उम्मेद मेरे पथरहापरा का ही लड़का है जो भले ही मुझसे 5 साल बडा है मगर रिस्ते में मेरे दादा जी हैं जबकि दिनेश मुझसे 3साल छोटा मेरा मौसेरा भाई है, छोटे भाई शशि रंगीला एक छत्तीसगढ़ी कलाकार हैं जो सतनामी बघवा वाला गाना गाते हैं।

आपको बता दूं मेरे गाँव मे केवल ये तीन हीरो ही नहीं, बल्कि सैकड़ो हीरो हैं जिनके अपने विशेष योग्यता हैं आपको बतादूं ऐसे हीरो हर गाँव में मिल जाएंगे। आइये संकल्प लें अपने गाँव के ऐसे ही हीरोज का सम्मान करें, उनके बारे में लोगों को भी जानने का अवसर प्रदान करें ताकि हमारी योग्यता और विशेषता आने वाली पीढ़ी को ज्ञात रहे। क्योंकि बिते दिनों को जानन के लिए हम इतिहास, समकालिन ग्रथ और साहित्य पढ़ते हैं मगर जो लिखा ही नही जाएगा वह आगे पढ़ने को कैसे मिलेगा? पूर्व में लिखे गये पुस्तकों में उल्लेख नही होने के कारण हम अपना गौरवशाली परम्परा और इतिहास भूल जाएंगे इसलिए इनके बारे में भी लिखना आवश्यक है। 

माता श्यामा देवी कहती थी "जिनके दरबारी साहित्यकार अथवा इतिहासकार नही रहेे इतिहास में उनके बहादूरी और महानता के कारनामे नही मिलेंगे, उपेक्षा से बच गये तो भी उनके योग्यता और चरित्र के विपरित उन्हें जलील और बदनाम भी किया जा सकता है। इतिहास अथवा साहित्य में जो लिखा है वह पूरी निष्ठा से लिखी गई है इसकी कोई गारंटी नही है वह बनावटी और झूठा भी हो सकता है।" इसलिए छोटे-मोटे साहित्यकारों को निश्पक्ष होकर अपने आसपास के लोगों के बारे में भी लिखना चाहिए वह भी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ, बिना किसी स्वार्थ अथवा व्यक्तिगत हित के। 

यदि आप लेखन में रूचि रखते हैं तो जरूर लिखिए, अपने आसपास के महान लोगों को उपेक्षा के शिकार होने के लिए बेरहम बनकर चूप मत बैठिए, लिखिए। अधिक नहीं तो कम ही सहीं परन्तु लिखिए, आपका लेखन चाहे साहित्य के कसौटियों से परे हों लिखिए उन्हें अमर कर दिजीए जो अमरता के असली हकदार हैं, लिखिए।

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लेखक श्री हुलेश्वर जोशी वर्तमान में "अंगुठाछाप लेखक" - (अभिज्ञान लेखक के बईसुरहा दर्शन) नामक ग्रंथ लिख रहा है, उल्लेखनीय है कि लेखक द्वारा लिखे जा रहे ग्रंथ जो कुछ-कुछ आत्मकथा, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संवाद, काल्पनिक आलेख और पिछले जन्म के स्वप्नों और स्मृतियों पर आधारित है।

शुक्रवार, मई 15, 2020

एक हसीन ख्वाब लेकर बस जा मेरे दिल में - सोमवार, अप्रेल 18/2011 की रचना

"मेरे दिल में"
यह कविता मेरे द्वारा सीआईएटीएस स्कूल, 5वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल कंगोली, जगदलपुर में तैनाती के दौरान सोमवार, अप्रेल 18/2011 को लिखा गया था, जो मेरी अपनी काल्पनिक प्रेमिका को संबोधित है। 

कोई हसीन ख्वाब लेकर आ मेरे दिल में
बिना बुलाए बस जा, मेरे दिल में
मैं करीब ही तो हूं कहीं तेरे दिल में.....
एक हसीन ख्वाब लेकर बस जा मेरे दिल में


मुझे किसी मंजिल की जरूरत नहीं
तेरे जाने के बाद, मेरे दिल में
एक भोली सुरत बनकर आ जाओ.....
एक हसीन ख्वाब लेकर बस जा मेरे दिल में


कोई आंखों से पुकारती है समां कर मेरे दिल में
कोई छिपकर चोरी से देखती है मेरे दिल में
प्लीज तुम भी आ जाओ न .....
एक हसीन ख्वाब लेकर बस जा मेरे दिल में


मंगलवार, मई 12, 2020

महान होने की चाहत में भूल गया, कि मैं कितना गलत और स्वार्थी हूँ - आलेख

महान होने की चाहत में भूल गया, कि मैं कितना गलत और स्वार्थी हूँ

जन्म से ही उच्च नीच की कहानियां सुनते हुए पला बढ़ा हूँ, उच्च लोगों की आवभगत, आदर सत्कार, सम्मान और पूजा देखा हूँ। नीच लोगों के तिरस्कार, अपमान और उनसे घृणित व्यवहार को देखकर मेरा पूरा फिजिक्स कांप चुका है गणित भी आपस में टकरा टकरा कर लाखों विस्फोट कर रहे हैं। मेरा गणित प्रभावित है, प्रेरित है तो सिर्फ और सिर्फ उच्च नीच के विभाजनकारी सिद्धांत और उनके अर्थात उच्च लोगों के अधिकार व स्वाभिमान और नीच लोगों के गुलामी व कर्तव्य से। मेरे गणित का क्या दोष है? क्या मनुष्य को देख और सुनकर नही सीखना चाहिए? क्या जिसे अपने लोगों ने, समाज और धर्म ने जिन सिद्धांतों को अच्छा कहकर तारीफ किया, उसका पालन किया, ऐसे परम्परा को ऐसे संस्कृति को चाहे क्यों न वह अमानवीय है भूल जाऊं? मुझे सिद्धांत के अमानवीय अथवा विभाजनकारी होने से क्या मतलब, मैं तो अपने संस्कृति और परंपरा के नाम पर बिना कोई प्रश्न किये अपने लीडर के पीछे भेंड़ की तरह चलते रहना चाहता हूं। क्योंकि क्रांतिकारी होने, आंदोलन करने अथवा बनी बनाई परंपरा को समाप्त करने का प्रयास करना अत्यंत कठिन है। मैं ऐसे रिवाज का विरोध क्यों करूँ जिसमे मुझे ही फायदा हो? मुझे दूसरे दबे हुए वर्ग का प्रतिनिधित्व करने से तो हानि ही है फिर क्यों अपने पैर में कुल्हाड़ी मारूँ।

मेरी पत्नी कहती है कि हमारा अगला जन्म उसी नीच लोगों के बीच होगा तो क्या करेंगे? वह कहती है आज हम स्टेटबैंक के कर्जदार हैं तो चाहे किसी भी शर्त में हो हमें ब्याज सहित लौटाना ही पड़ेगा, वह कहती है कर्म का एकाउंट पहले जन्म के साथ ही खुल चुका है जो बारम्बार नही बदलेगा ठीक वैसे ही जैसे आप राजपत्र में नाम बदलवाने, चेहरे का प्लास्टिक सर्जरी करवाकर चेहरा बदलने के बाद भी स्टेट बैंक से कर्ज वाला एकाउंट कर्ज जमा किये बिना बंद नही कर सकते। जिस प्रकार आप सैकड़ों बैंक में कई प्रकार के एकाउंट खोलते हैं वैसे ही आप अपने जीवन मे करोड़ो एकाउंट खोलते रहते हैं। आपको ज्ञात है आपके मृत्यु के बाद भी कर्ज देने वाला बैंक आपके चल अचल सम्पति को कुर्की करवा लेती है अर्थात मरने के बाद भी लेनदेन चुकता होने के बाद ही आपका एकाउंट बंद होता है। मेरी पत्नी मुझसे कहती है आप ऐसा कोई एकाउंट मत खोलिए जिससे आगे आपको दाण्डिक ब्याज सहित लौटना पड़े, आप प्रयास करिए कि ऐसा एकाउंट खोलिए जिसमें ब्याज सहित न भी सहीं बराबर या उससे कम मिले तो भी जीवन सुखमय ही बना रहे, चाहे मिले या न मिले जीवन मुश्किल न हो, अपमान और तिरस्कार न मिले, चाहे तब जीवन मनुष्य का हो या पशु, पक्षी या किट पतंगे का हो।

मोक्ष, आध्यात्म और तपस्या एकांत नही है - श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी
वह कहती है बिना मृत्यु के मनुष्य जानवर नहीं हो सकता, जानवर पक्षी नही हो सकते, पक्षी कीड़े नही हो सकते और कीड़े मनुष्य नही हो सकते। कहती है शेर भालू नही हो सकता और भालू शेर नहीं हो सकता। हो सकता है विज्ञान ऐसा अविष्कार कर ले तब ऐसा संभव हो, मगर अभी तो ऐसा नही हो रहा है। आज धार्मिक आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार आत्मा परमात्मा का प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगा, श्रेष्ठ मानवीय कर्म के बिना जीवन मृत्यु के चक्र से मोक्ष भी नहीं मिलेगा, मोक्ष मिला भी तो वह भी कुछ निर्धारित समय के लिए ही मिलेगा। मोक्ष से भी आप बोर हो जाएंगे, ठीक जैसे अकेले शून्य का अधिक महत्व नहीं, अकेलेपन में आप भी नही रह पाएंगे। आपको अपने होने पर संदेह होने लगेगा और आप मेरे तलास में फिर जन्म मरण के चक्र में वापस लौट आएंगे क्योंकि हित-मित, साथी या मितान के बिना हर कोई अपने जीवन को व्यर्थ और नीरस जान लेता है। आपका यह सोचना कि आप आध्यात्म करेंगे, तपस्या करेंगे तो कब तक? क्या वहां आपका साथी नही होगा? साथी तो वहां भी मिलेगा, आप स्वयं अपने साथी होंगे। आप स्वयं को पूर्ण अपूर्ण पाकर वापस लौट आएंगे तपस्या और आध्यात्म से क्योकि तब जो अधिक मिल जाएगा उसे रखोगे कहाँ? या फिर खाली हो जाएगा तो खालीपन को भरोगे किसमें? आपने अभी कल ही एक कविता लिखा है "आध्यात्मिक प्रेमी और उनके संवाद" यह क्या है? उस कविता को समीक्षा करेंगे तो पाएंगे उस कविता में काल्पनिक प्रेमी और प्रेमिका आपके भीतर ही द्वंद वार्तालाप कर रहे हैं, ठीक आध्यात्म और तपस्या भी इस कविता की भांति ही अंदर ही अंदर बात करने का बेहतर तरीका है, इसी तरीके से आप कुछ बेहतर पा सकते हैं ऐसा उन्हें लगता हैं जो इस मार्ग में चलते हैं। तब आप अकेले शरीर मे भी अकेले नही हो पाएंगे, आपके शरीर में और अधिक भीड़ होंगी, अधिक द्वंद होंगे, अधिक वार्ता होगी, बुद्धि में अधिक जोर होगा। आप अपने आराध्य को आकर्षित करने के लिए अधिक बल का प्रयोग करेंगे, सायद जितना आपको विशालकाय पर्वत के ऊपर गट्ठा लेकर चलने में ताकत लगाना पड़ेगा, सायद जितना बैल गाड़ी में लगे बैल को नदी का चढ़ाव चढ़ने में लगेगा उससे भी अधिक। मतलब यह कि आप अकेले कहीं भी किसी भी स्थिति में नहीं होते, आप अकेले हो भी नही सकते, यह बात केवल आपके लिए नहीं हर जीव जंतुओं के लिए है।

ज्योतिष की औकात नही कि वह 100 फिसदी सटीक भविष्यवाणी कर सके - श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी
मैंने कहा "मुझे इस जन्म में जो अच्छा लगता है, मेरे स्वार्थ के लिए अच्छा है वही करता हूँ, अगले जन्म को किसने देखा है?" इतना कहते ही जैसे उन्हें मौका मिल गया बोलने लगी आपको ज्योतिष शास्त्र में बड़ा विश्वास है, आपके कुछ परिचित लोग आज भी ज्योतिषी हैं, कुछ हद तक आप भी ज्योतिषी होने का स्वांग करते थे। जाओ अपने किसी ज्ञानी ज्योतिषी के पास या पूरे विश्व मे खोजिए सायद कोई ज्योतिषी हो जो आपको अगले जन्म का दावा करके बता दे, मैं तो कई ज्योतिषी को जानती हूँ जो बड़े बड़े दावे और तरीके बताते फिरते हैं। सटीक और 100फीसदी अनुमान लगाने के नाम पर करोड़पति बन चुके हैं। यह बात अलग है कि आपका एक ज्ञानी ज्योतिषी दोस्त जो अपने स्वयं का विवाह सफल बना नहीं पाया वह दूसरे के विवाह को सफल करने का तरीका बताता है, कुंडली देखकर गुण कम या अधिक मिलने का दावा करता है। ऐसे झूठे लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के लिए FIR करना चाहिए, आपको जिसने आपके वैवाहिक जीवन के बारे में बताया था वह सरासर झूठ निकला फिर भी आप उनके भक्त बने फिर रहे हैं। कुछ लोग जो स्वयं खुश नही रह पा रहे हैं वे खुश रहने के योग बताते हैं जो कभी दान नही किया वह दान करना सीखाता है। जो अपने घर में शाम को क्या सब्जी बनेगा नही जानता वह लोक परलोक का भविष्यवाणी करता है, जो अपने मांसाहारी और शराबी पुत्र के चरित्र को जान नही पाता वह आपके साथी के चरित्र पर प्रश्नचिन्ह बनाता है। वह जो सड़े हुए नारियल को अपनी अज्ञानता छिपाने के लिए शुभ बता देता है वह जो लेफ्टिनेंट कर्नल का स्पेलिंग नहीं जानता, हिंदी में भी नही लिख पाता वह आपको कहता है आपकी बेटी आर्मी में कर्नल बनेगी। वह जो खुद अधिक खा कर अपना हाजमा बिगाड़ लेता है वह आपको संयम सिखाता है। आप बचपन में थे तब से पता है 2 को 2 से जोड़ेंगे तो 4 ही होगा यह सही है ऐसा मान्य है मगर आप 5 लोगों से अपना कुंडली बनवाओगे तो 5 के 5 अलग अलग भविष्यवाणी करेंगे, आगे आप 50 के पास जाओ कुंडली बनवाओ सब घुमा फिराकर बताएंगे, संभावना बताएंगे, वह भी सटिक नहीं। सत्य और सही अनुमान कोई नही बताएगा, 99% झूठ ही मिलेंगे, कुछ दावे भी किये जायेंगे मगर उससे शीघ्र ही पर्दा भी उठ जाएगा। बोलने लगी पूरे विश्व के ज्योतिषियों में कोई एक ज्योतिष भी नही होगा जिसका 30% भविष्यवाणी भी सही अथवा सटीक हो और उनके उपाय वास्तव में सही हों। यदि ऐसा कोई है तो मेरा चुनौती है साबित करे कि उनका भविष्यवाणी सही हो। उस ज्योतिषी की बात तो आपको याद होगा ही जिसने कहा था कि हम दो जुड़वा बेटी के माता पिता होंगे, क्या सही साबित हुआ? हमारे वैवाहिक जीवन अत्यंत सरल और सुखमय होगा उसने कहा था, उसने कहा था हमारा विचार शतप्रतिशत मिलेगा। यदि विचार शतप्रतिशत मिल रहा है तो आज हम वादविवाद में क्यों उलझे हैं? क्यों संघर्ष कर रहे हैं? 

न्याय करना मेरे आचरण में नही क्योंकि मैं मक्कार और स्वार्थी हूं - हुलेश्वर जोशी
मेरे ज्योतिषी दोस्त और विश्वसनीय ज्योतिष शास्त्र के बारे में इतना बुराई और कमी सुनकर अंदर ही अंदर क्रोध बढ़ने लगा, मगर क्या करूँ उनसे विवाद करना अत्यंत घातक आत्मघाती है इसलिए छत ऊपर चला गया। बहुत सोचा, बहुत कुछ समझ मे आया मगर इतने हजारों साल से मेरे पूर्वजों के भरोसे को क्यों तोड़ दूँ? क्यों पत्नी के कहने मात्र से अपने परंपरा और विश्वास से विमुख हो जाऊं? जिसे मेरे पूर्वज हमेशा से मानते आए हैं उन्हें गलत क्यों प्रमाणित कर दूं? क्यों उस विचारधारा को गलत मानकर अपने पूर्वजों के बुद्धिमत्ता पर प्रश्न करूँ? इससे बेहतर है कि सही गलत को छोड़कर बनी बनाई नियम, परंपरा और संस्कृति पर चलना बेहतर समझता हूं। चाहे मेरे पूर्वज गलत रहे हों, उनके सिद्धांत मानवता के खिलाफ रहा हो या फिर संकुचित विचारधारा से प्रेरित हो, अलग से दिमाक नही लगाऊंगा यदि ये सिद्धांत मुझे महान बताता है या फायदा पहुचाता है अथवा मेरे सम्मान के लिए अच्छा है तो इसका विरोध नही करूँगा। अच्छा भला मेरा स्वार्थ पूरा हो रहा है और पत्नी कहती है सबको बराबर समझो सबसे बराबर का सम्मान दो, मुझे बड़ा गुस्सा आता है पत्नी ऊपर क्योंकि मैं महान हूँ, महान बने रहना चाहता हूँ इसलिए पत्नी के बातों का मेरे लिए कोई औचित्य नहीं है। मैं तो दूसरे व्यक्ति से नफ़रत, घृणा और द्वेष करते रहूंगा; मैं तो केवल अपना स्वार्थ सिद्धि के लिए अग्रसर रहूंगा। दूसरे लोग, दूसरे समाज, दूसरे वर्ण, दूसरे धर्म और दूसरे सभ्यता को झूठ और गलत समझता रहूंगा। अपने समाज, वर्ण, धर्म और सभ्यता की समीक्षा नहीं करूंगा क्योंकि समीक्षा करूँगा तो मैं स्वयं भी हर वर्गीकरण में नीच हो जाऊंगा, खुद से घृणा और अपराधबोध से ग्रसित हो जाऊंगा। इसलिए यह तय रहेगा कि मैं, मेरा परिवार, मेरी जाति, मेरा वर्ण, मेरा धर्म, मेरा समाज और मेरी सभ्यता सबसे श्रेष्ठ है। चाहे कोई कुछ भी समझे, कुछ भी बोले, कुछ भी करे मैं अपने पूर्वजों के मान्यता के साथ रहूंगा, चाहे कोई कुरीति कहे, अमानवीय कहे मुझे इससे कोई फर्क नही पड़ेगा। कोई मुझे सोचने पर मजबूर करेगा, मेरे विश्वास के खिलाफ बोलेगा तो धार्मिक आस्था को हानि पहुचाने का झूठा आरोप लगाकर उसे जेल भेजवा दूंगा।

यह लेख श्री हुलेश्वर जोशी के अप्रकाशित पुस्तक अंगुठाछाप लेखक का एक हिस्सा है। श्री जोशी अपने पुस्तक के माध्यम से समाज को एक नवीन दर्शन की ओर मोडने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि उनका स्वयं मानना है वे असफल दार्शनिक हैं।

शनिवार, मई 09, 2020

आध्यात्मिक प्रेमी और उनके वार्ता - HP Joshi

आध्यात्मिक प्रेमी और उनके वार्ता - HP Joshi
काले बोल्ड रंग के शब्द प्रेमी के प्रश्न है जबकि नीले रंग के शब्द प्रेमिका का प्रतिउत्तर है।


वह कौन हैं जिसे अपनी बात बताऊं
वह कौन है जिसे अपने साथ चलाऊं
वह कौन है जिससे रूठकर मनाऊं
वह कौन है जिसे हर बात में पकाऊं

     
आप कह सकते हैं मुझसे अपनी बात
कितने कठिन हों रास्ते चलूंगी साथ
चाहे कितने रूठ जाएं मुझसे, आप
संकल्प है मेरी, रहूंगी आपके साथ

धरती के उस पार से निहारोगी कैसे?
आकाशगंगा में दूर रहती आओगी कैसे?
रेडियो संदेश भी मिलता है बहुत देर से
बताओ, वादा करके निभाओगी कैसे?


धरती के इस पार हूँ तो क्या हुआ
आकाशगंगा की दूरी भी तो क्या हुआ
कोशिश करूंगी हर बार ऐसा....
मिलेंगे, मुझे ऐसा एक विश्वास हुआ


जो उस दुनिया की महारानी हैं आप
गुरुत्वाकर्षण की शक्तिकेंद्र हैं आप
एक पल छोड़ आओगी तो बिखर जाएंगी जिंदगियां
बताओ, फिर भी क्या मेरे अपने हैं आप


महारानी हूँ यह जानती हूं
शक्तिकेन्द्र हूँ यह भी भूली नही हूँ
मन में तो मेरा ही अधिकार है साथी
विश्वास का रिश्ता तुमसे ही निभाती हूँ


सोचो जरा, राज को कोई जानेगा तो क्या होगा?     
ईश्वर भी तो अंदर ही है आपके भी रहने से क्या होगा?
तो क्या प्रत्यक्ष दर्शन और वार्ता नही होगी आपके साथ?     
विश्वास करिए, धैर्य रखिए, हर कण में हूँ आपके साथ।

इस कविता के रचनाकार श्री हुलेश्वर जोशी जी हैं, जो "अंगुठाछाप लेखक" (अभिज्ञान लेखक के बईसुरहा दर्शन) नामक ग्रंथ के लेखक हैं। हालांकि यह ग्रंथ अभी प्राकशित नही हुई है।


:Images for Poem:


शुक्रवार, मई 01, 2020

यह क्या है?

यह क्या है?

यह क्या है?
बर्तन या टोकरी?
नही; न बर्तन, न टोकरी!

यह किससे बनी है?
मिट्टी या कागज?
नही; न मिट्टी, न कागज़!

तुमने कैसे सीखा, इसे बनाना
यूट्यूब, फेसबुक या रेसिपी?
नही; न यूट्यूब से, न फ़ेसबुक से, न रेसिपी से!

तुम नासमझ और अंधे हो, बेहुदा और जिद्दी हो।
हां।
हो सकता है मैं नासमझ हूँ।
हो सकता है मैं अंधा ही हूँ।
हो सकता है में बेहुदा और जिद्दी भी हूँ।

बाबूजी यह......
न बर्तन, न टोकरी; हमारी जरूरी इनोवेशन
न मिट्टी, न कागज; हमारी मेहनत और फैशन
न इसे यूट्यूब से सीखा, न फेसबुक से सीखा, न इसे रेसिपी से; सीखा है माँ से बनाती थी जैशन

Image for Innovation of Rural Bharat 


















रचनाकार - श्री एचपी जोशी

जोशी की गीता

जोशी की गीता

असंगठित शब्द, बिना लय-छंद कविता
एक आग्रह "विनती", जोशी की गीता

झूठ फरेब कुरीति और आडम्बर
नैसर्गिक न्याय सबके लिए बराबर

चोरी चकारी, झूठ लूट डकैती
धर्म नहीं तेरे बाप की बपौती

धोखा अफवाह मोबलिंचिंग हिंसा
एक रास्ता है अब करले अहिंसा

स्वर्ग नरक नहीं कोई जन्नत
है मेरा भी एक ही मन्नत

संगठन शक्ति की तुम करते हो बर्बादी
निष्ठा कर संविधान में, जो देती आजादी

5000 हजार साल पीछे की कल्पना
कोई गैर नहीं, आज तेरा भी है अपना

अपना पराया, उच्च नीच
एक सेल्फी तो साथ में खींच

खोद के गड्ढा जिसने गिराया
उठा उन्हें भी नही पराया

Image of HP Joshi












रचनाकार - श्री एचपी जोशी

गुरुवार, अप्रैल 30, 2020

केन्द्रीय शासन के भ्रष्ट अधिकारी पर एसीबी की कार्यवाही - दिनांक 30.04.2020

केन्द्रीय शासन के भ्रष्ट अधिकारी पर एसीबी की कार्यवाही 
दिनांक 30.04.2020
आवेदक श्री नीरज कुमार ठाकुर पिता श्री इन्द्र बहादूर सिंह, उम्र 28, वर्ष, पता-मकान नंबर-51/1, कैलाशपुरी चैंक, वार्ड नंबर-56, बुढ़ा तालाब रायपुर, जिला-रायपुर (छ0ग0) ने दिनांक 06.04.2020 को एक लिखित शिकायत पत्र पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो, रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया कि संदीप राय बिलासपुर निवासी ने रेल्वे काॅलोनी सफाई का कार्य टेंडर पर लिया गया है। संदीप राय का फर्म श्री सांई छाया वेयर हाऊस बिलासपुर का प्रोपाईटर है जिसके कार्य करने के लिये आवेदक को अधिकार पत्र एवं मुख्तयार दिया गया है। 

आवेदक ने माह जुलाई से दिसम्बर तक का किये कार्य का बिल 15,96,000/-रूपये जमा किया है। माह जनवरी 2020 से मार्च 2020 तक के कार्य भुगतान के लिये शुंभाशीष सरकार, पिता स्व0 गोपाल चन्द्र सरकार उम्र-54 वर्ष, पद-मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, खारून रेल विहार कालोनी, फाफाड़ीह चैक, दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे (एस0ई0सी0आर0) रायपुर द्वारा 8 प्रतिशत के हिसाब से रिश्वत की मांग की गई है। कार्य के शुरू से ही भुगतान हेतु काफी प्रताड़ित किया गया है, और लगतार बेखौफ होकर रेल्वे के अधिकारी द्वारा प्रार्थी से रिश्वत मांगी जा रही है और न देने पर उसका भुगतान रोका जाता है। 

प्रार्थी द्वारा रिश्वत की प्रताड़ना से तंग आकर एसीबी कार्यालय में आकर पुलिस अधीक्षक रायपुर को अपनी व्यथा बताई गयी। जिस पर संज्ञान लेते हुये शिकायत का सत्यापन कराया गया । जिसमें पाया गया कि आरोपी अधिकारी द्वारा प्रार्थी से 1,20,000/- रूपये की रिश्वत मांगी है। जिसे प्रार्थी को तीन किस्तों में देना है। सत्यापन उपरांत ट्रेप टीम का गठन किया गया एवं विधिवत कार्यवाही उपरांत आज दिनांक 30.04.2020 को अनावेदक ने आवेदक से प्रथम किस्त के रूप में 30,000/-रूपये रिश्वत लेते हुये रंगे हाथों पकड़ा गया । 

एसीबी छत्तीसगढ़ द्वारा केन्द्र सरकार के भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने का यह दूसरा मामला है। 

आरोपी का फोटो
























गुरुवार, अप्रैल 16, 2020

कोरोना संक्रमण से बचाव आवश्यक क्यों, कितना खतरनाक है कोरोना, कोरोना के उपाय क्या-क्या हैं और लॉक डाउन में क्या करें : HP Joshi

कोरोना संक्रमण से बचाव आवश्यक क्यों, कितना खतरनाक है कोरोना, कोरोना के उपाय क्या-क्या हैं और लॉक डाउन में क्या करें : HP Joshi

आज महामारी कोरोना के संक्रमण से लगभग पूरी दुनिया प्रभावित है, संसार के सारे देश कोरोना से लड़ाई लड़ने की अथक प्रयास कर रहे हैं। सारे विश्व के वैज्ञानिक, चिकित्सक, फार्मासिस्ट, पैथोलोजिस्ट, सरकार, सेना, सशस्त्रबल और पुलिस पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पित भाव से अपनी पूरी ताकत कोरोना से लड़ाई में झोंक रहे हैं। इसमें समाजसेवी संगठन और दानदाताओं का भी अच्छा योगदान है जो जरूरतमंद लोगों के आवश्यता को पूरा करने में बिना व्यक्तिगत स्वार्थ के लगे हुए हैं।

सरकारें आम नागरिकों से उनके और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए केवल एक ही सहयोग चाह रहे हैं कि वे अपने घरों में ही रहें, अत्यंत आवश्यक हो तभी आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए घर से निकलें। अर्थात जब घर से निकलें तो मास्क, रुमाल अथवा गमछे से मुह और नाक को ढकें, हाथों में सेनेटाइजर लगाएं, किसी भी शर्त में दूसरे व्यक्ति से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष फिजिकल संपर्क से बचें। यदि आप अधिक समय के लिए घर से निकल रहे हों तो सेनेटाइजर अपने जेब में ही रख लें और बार बार सेनेटाइजर से हाथ धोएं; व्यर्थ ही किसी भी वस्तु को स्पर्श करने से बचें। क्योंकि यही उपाय आपको और आपके परिवार को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकते हैं। हालांकि ऐसा कोई शोध सामने नही आया है जिसमें यह बोला गया हो कि पशु पक्षियों से भी कोरोना संकमण का फैलाव हो सकता है, इसके बावजूद आपको एहतियात के रूप में इनसे भी फिजिकल डिस्टेंस बनाने की जरूरत है; क्या पता आप जिस पशु पक्षियों को छू रहे हैं वह किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो।

अभी तक ज्ञात रिसर्च के अनुसार "कोरोना संक्रमण का फैलाव हवा से नहीं होता।" यह मानवता की जीत के लिए अत्यंत सकारात्मक है इसलिए इसके संक्रमण पर आसानी से रोक लगाया जा सकता है। केवल जरूरत है तो सरकारों के दिशा निर्देश का पालन करते हुए फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धान्तों का पालन करने की।

एक वेबसाइट में संकलित जानकारी के अनुसार आज 16/4 के 7 बजे तक दुनियाभर के लगभग 20 लाख लोग कोरोना के चपेट में आ चुके हैं, जिसमें से 1.34 लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है; वहीं लगभग 5.10 लाख लोग उपचार के बाद स्वस्थ्य हो चुके हैं। ये आंकड़े हमें गहराई से सोचने और सुरक्षित रहने को मजबूर करती है। इसलिए आपसे अनुरोध है सरकार के दिशा निर्देश का पालन करें और घर मे ही सुरक्षित रहें। यदि सरकार के दिशा निर्देश का पालन नही किया जाता है, यदि फिजिकल डिस्टेंस के सिद्धांत और सरकार द्वारा सुरक्षा मापदंड का उल्लंघन किया जाता है तो वह दिन दूर नही जब सन 1346-1353 की "प्लेग" से भी खतरनाक परिणाम भुगतने के लिए हम मजबूर होंगे; प्राप्त जानकारी के अनुसार महामारी प्लेग, मानवता को 7साल तक समाप्त करने का प्रयास करते हुए दुनियाभर से लगभग 7 से 20 करोड़ लोगों को मौत के मुह में ढकेल दी थी। दूसरी सबसे बड़ी महामारी थी "स्पेनिश फ्लू" जो लगभग 1918-1920 में आई थी, जो 3साल में अपने साथ 5करोड़ लोगों को मार डाली थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बहुत जल्द ही कोरोना का टीका खोज लिया जाएगा, तो भी टेस्टिंग, निर्माण और टीकाकरण करने में साल भर से कम नहीं लगेगा।

आज जरूरत है तो केवल:-
1- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए रखने की।
2- लक्षण दिखाई देने पर तत्काल एहतियात बरतने और उपचार के लिए कोरोना अस्पतालों जाने की।
3- न्यूनतम आवश्यक वस्तुओं का उपयोग करते हुए घर में ही रहने की।
4- प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष फिजिकल डिस्टेंस बनाने की।
5- यदि किसी अत्यावश्यक काम से बाहर निकलना पड़े तो मास्क, रुमाल या गमछे से नाक और मुह को ढकें, हाथ में सेनेटाइजर लगाएं। अधिक समय तक यदि आपको घर से बाहर रहने की जरूरत है तो सेनेटाइजर अपने जेब में रखें और समय समय में लगाते रहें।
6- पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन पर रोक लगाएं।
7- केवल सरकार के दिशा निर्देश पर ध्यान दें। अन्य स्त्रोत से प्राप्त जानकारी अफ़वाह हो सकती है, इसलिए इससे बचें; क्योंकि अफ़वाह हमेशा घातक होता है।
8- कोरोना के संबंध में सोशल मीडिया अथवा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त जानकारी को शेयर करने से बचें; यदि आपके पास पर्याप्त कारण हो कि यह जानकारी सरकार द्वारा दी गई है तभी अन्य व्यक्ति को शेयर करें।
9- आपसे निवेदन है कि यदि आप सक्षम हों तो सरकार के रिलीफ फण्ड में दान करें अथवा अपने आसपास के जरूरत मंदों की सहायता करें; यदि आप मकान मालिक हैं तो किराएदार को किराए के लिए परेशान न करें, यदि आप सक्षम दुकानदार हैं तो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पुराने उधारी चुकाने के लिए मजबूर न करें बल्कि जरूरत के आधार पर कम से कम अतिआवश्यक सामग्री उन्हें उधारी भी दें।
10- लॉक डाउन के दौरान समय का सदुपयोग करें, पूरे परिवार मिलकर चर्चा करें, अपने अनुभव शेयर करें, Books पढ़ें, Online माध्यम से कुछ सीखें, शिक्षा ग्रहण करें।
11- शिक्षकों और विशेषज्ञों से अनुरोध है कि वे यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव इत्यादि के माध्यम से अपने स्टूडेंट्स के लिए काम करते रहें। छत्तीसगढ़ के शिक्षक सरकारी वेबसाइट CGSchool.in में अपना योगदान दें।
12- क्लास 1 से 12 के स्टूडेंट्स यूट्यूब में Bodhaguru चैनल के माध्यम से अपना पढ़ाई जारी रखें, छत्तीसगढ़ के स्टूडेंट्स cgschool में जाकर भी अपना पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
13- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी अनेकों यूट्यूब चैनल हैं जिसके माध्यम से आप अपना तैयारी जारी रख सकते हैं।
14- संविधान और केंद्रीय व राज्य सरकार द्वारा लागू अधिनियम और नियमों का अध्ययन करें; आप चाहें तो साहित्य भी पढ़ सकते हैं।
15- स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए पूरे परिवार मिकलर घर अथवा आंगन में ही योग और व्यायाम करें; ऐसा न भी करें तो आंगन, छत अथवा बालकनी में जाकर शरीर को धूप जरूर दें।
16- आज इतने बड़े संकट के बावजूद जो आपके सुरक्षा में लगे हैं, अर्थात चिकित्साकर्मी, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिसकर्मी, किसान और वैज्ञानिक यही सही मायने में ईश्वर हैं इनका आजीवन सम्मान करने का संकल्प लें।
17- सरकार सदैव कल्याणकारी होती है इसे स्वीकार करें और हैसियत के अनुसार सरकार का सहयोग करें।
18- मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा अतिरिक्त्त चीजों के उपयोग में कमी लाने का संकल्प लें।
19- स्वच्छ वायु, स्वच्छ जल, भोजन, साफ सुथरे कपड़े और आवास, दाल चावल सब्जी रोटी जैसे भोज्य पदार्थ, चिकित्सालय और चिकित्साकर्मी, स्कूल कॉलेज और शिक्षक, वैज्ञानिक, विद्युत और जल आपूर्ति में लगे लोग, वैज्ञानिक, सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, सरकार और समाजसेवी संगठन, इत्यादि आवश्यक हैं।
20- मानवता सर्वोपरि है। यदि जाति, वर्ण, धर्म, सीमा और धार्मिक स्थल यदि मानवता के खिलाफ हो जाएं तो इसका त्याग करें।
21- घर में रहें, जिंदा रहें

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