"जीवन बचाओ मुहिम"

हत्यारा और मांसाहार नहीं बल्कि जीवों की रक्षा करने वाला बनो।


शनिवार, दिसंबर 18, 2021

गुरू घासीदास जयंती विशेषांक: गुरु घासीदास बाबा जी के 07 सिद्धांत, प्रचलित 42 अमृतवाणी (उपदेश) और 27 मुक्ता (हिन्दी और छत्तीसगढ़ी में) संक्षिप्त व्याख्या सहित

गुरू घासीदास जयंती विशेषांक: गुरु घासीदास बाबा जी के 07 सिद्धांत, प्रचलित 42 अमृतवाणी (उपदेश) और 27 मुक्ता (हिन्दी और छत्तीसगढ़ी में) संक्षिप्त व्याख्या सहित 

श्रीमती कली बाई जोशी की किताब गिया के रित (Gyan ke Amrit) से साभार 


"धार्मिक होये के (सतनामियत दिखाए के) लाख उदिम कर लेवव फेर कहूँ तुमन गुरु घासीदास बाबा के बताए रसदा म नई चलहू त फेर तुहर सतनामी होय के कोनों फायदा नई हे। अइसनहा चरित्तर ह दिखावा अऊ ढोंग ले बढ़के काहीं नोहे।" - स्वर्गीय श्री मालिकराम जोशी 

“शिक्षा ग्रहण पहले और भोजन ग्रहण नहले।”
माता श्यामा देवी जोशी 


मानव-मानव के बीच प्रेम, सद्भावना, भाईचारा, समानता और न्याय की भावना विकसित करने वाले संत गुरु घासीदास बाबा का जन्म 18 दिसंबर 1756 को तत्कालीन रायपुर जिला (वर्तमान में बलौदाबाज़ार जिला) के ग्राम गिरौदपुरी में हुआ था, उन्ही के याद में आज 18 दिसंबर को समूचे भारत वर्ष सहित कुछ अन्य देशों में भी गुरु घासीदास बाबा की जयंती मनाया जा रहा है। संभव है आप उनके जीवनी के बारे में मुझसे बेहतर जानते हों, सायद न भी जानते हों। इसलिए आज उनके जीवनी के बारे में लिखना प्रासंगिक नहीं समझता, क्योंकि मेरा मानना है कि कोई इंसान चाहे गुरु घासीदास बाबा को न जाने मगर उनके संदेशों को समूचे मानव समाज को जानना आवश्यक है। अतः हम आपको इस लेख के माध्यम से गुरु घासीदास बाबा जी के सप्त सिद्धांत, अमृतवाणियों और मुक्ताओं का संक्षेप में उल्लेख कर रहे हैं।  


गुरु घासीदास के सिद्धांत

 

1

सतनाम ऊपर अडिग विश्वास रखव।

सतनाम पर अडिग विश्वास रखो।

 

2

मूर्ति पूजा झन करव।

मूर्ति पूजा मत करो।

 

3

जाति-पाती के प्रपंच म झन परव।

जाति-पाती के प्रपंच में मत पडो।

 

4

जीव हत्या मत करव।

जीव हत्या मत करो।

 

5

नशा का सेवन झन करव।

नशीले पदार्थों का सेवन मत करो।

 

6

दुसर स्त्री ल घलो माता-बहन मानव।

गैर स्त्री को भी माता-बहन मानो।


7

चोरी अऊ जुआ ले दूर रहव।

चोरी मत करो और जुआ-सट्टेबाजी से दुर रहें।


 


गुरु घासीदास बाबा के अमृतवाणी

 1

सत ह मनखे के गहना आय।

गुरु घासीदास ने कहा है कि “सत्य ही मानव का आभूषण है।

2

जन्म ले मनखे-मनखे सब एक बरोबर होथे, फेर करम के अधार म मनखे-मनखे गुड अऊ गोबर होथे।

“मनखे-मनखे एक बरोबर।“

गुरु घासीदास ने कहा है कि सभी मनुष्य एक समान होते हैं।

जन्म के आधार पर सभी मनुष्य एक समान होते हैं; सभी मनुष्य एक समान शक्ति के साथ और एक ही प्राकृतिक सिद्धांत के आधार पर जन्म लेते हैं। कर्म के आधार पर मनुष्य की विशेषताएं भिन्न हो सकती है।

·        कोई मनुष्य किसी विशेष कुल, धर्म या जाति में जन्म ले लेने से महान या नीच नहीं हो सकता, ऐसी विचारधारा या मान्यता रखना अमानवीय और अवैधानिक मानसिकता मात्र है।

3

सतनाम ल जानव, समझव अऊ परखव तब मानव एखर पहिली सतनाम ल घलो झन मानहौ। 

गुरु घासीदास ने कहा है कि सतनाम क्या है इसे पहले जान लें, समझ लें और इसकी कसौटियों को परख लें, तभी मानें। अन्यथा सतनाम को भी मत मानो, क्योंकि सतनाम को जाने बेगैर आपके सतनामी बनने या सटनामी होने का कोई औचित्य नहीं होगा।

4

·        सतनाम ह घट घट में समाय हे अऊ सतनाम ले ही सृष्टि के रचना होए हावय। कखरों बाप ह सृष्टि के निरमान नई करे हावे।

गुरु घासीदास ने कहा है कि सतनाम अर्थात पाँच तत्वों की योग से ही ब्रम्हांड की रचना हुई है और यही ज्ञात पाँच तत्व सत्य है जिससे आकाशगंगा संचालित होती है। आकाशगंगा को किसी के बाप ने नहीं बनाया है, यह स्वतः निर्मित है।

5

जान के मरइ ह तो मारब आएच आय, फेर कोनो ल सपना म मरई ह घलो मारब आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि किसी मनुष्य, पशु पक्षी या किसी भी जीव जन्तु को जानबूझकर मारना तो हत्या है ही वरन किसी जीव को सपने में अथवा सांकेतिक रूप से मारना भी हत्या है।

·        होलिका दहन और रावण का पुतला दहन भी हत्या की मानसिकता से प्रेरित है इसीलिए मूल सतनामी धर्म संस्कृति में होलिकादहन और रावण दहन वर्जित है। 

6

·        चोरी अउ लालच झन करव।

·        चोरी करई अऊ मँगनी माँगे के आदत ह तुँहला निकम्मा अऊ गरियार बना देहि।

·        मोर ह सब्बो संत के आय, अउ तोर हीरा ह मोर बर कीरा आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि चोरी और लालच न करें क्योंकि चोरी करने की आदत और माँगकर (भीख माँगने) की प्रवित्ती इंसान को निकम्मा और नकारा बना देती है। गुरु घसीदास बाबा ने यह भी कहा है कि मेरी प्रापर्टी दूसरे संतों (मनुष्य) के लिए सहज उपलब्ध है, अपने हिस्से को मैं बाँट सकता हूँ मगर दूसरे की प्रापर्टी मेरे लिए व्यर्थ और अनुपयोगी है।

7

·        पहुना ल साहेब समान जानिहव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि मेहमान को साहेब मतलब सगे-संबंधी मानो, सर्वोच्च मानो।

8

तरिया बनावव, दरिया बनावव, कुआँ बनावव; फेर मंदिर बनई मोर मन नई आवय; मोर संत मन ककरो मंदिर झन बनाहू।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि तालाब, नदिया और कुआँ बनाओ। मगर किसी का मंदिर (धार्मिक स्थल) कदापि मत बनाना।

·        लेकिन बड़ी दुर्भाग्य की बात है कि खुद को गुरु घासीदास बाबा का बड़ा अनुयायी बताने वाले लोग ही उनके मूल भावना के विपरीत गुरु घासीदास बाबा का ही मंदिर और मूर्ति बनवा रहे हैं।

9

बारा महीना के खर्चा सकेल लेहु तबेच भले भक्ति करहु; नई ते ऐखर कोनो जरूरत नई हे।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि किसी व्यक्ति अथवा कथित अदृश्य या आराध्य लोगों की भक्ति करना आवश्यक नहीं है, भक्ति करना ही है तो पहले कम से कम वर्ष भर की आवश्यकता के लिए राशन और धन एकत्र कर लीजिए। यदि आपके पास परिवार की जरूरत के लिए धन नहीं है तो भक्ति करना व्यर्थ है।

10

·        झगरा के जर नइ होवय, ओखी के खोखी होथे।

·        रिस अउ भरम ल तियागथे, तेकरे बनथे।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि झगड़ा का कोई औचित्यपूर्ण आधार नहीं होता है, अधिकतर झगड़ा निराधार कारणों से ही होता है जिसका प्रतिफल अत्यंत बुरा या दु:खद होता है। गुरु घासीदास बाबा का यह भी कहना है कि जो इंसान गुस्सा और भ्रम को त्याग देता है वही सुख से जीवन जी सकता है अन्यथा विभिन्न बाधाओं से भरे जीवन जीना उनकी अपनी मजबूरी हो जाती है।

 11

·        सतनाम ह जीवन के आधार आय।

·        सत ल कमजोर झन मानहु।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि सतनाम अर्थात पाँच तत्वों की योग से ब्रम्हांड की रचना हुई है और यही पाँच तत्व सत्य है जिससे आकाशगंगा संचालित होती है इसलिए सतनाम ही जीवन का मूल आधार है। अतः सत्य को कमजोर न समझें।

12

भीख माँगना मरन समान हे, न भीख माँगव अऊ न तो भीख दव, जाँगर टोर के कमाए ल सिखव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि भिक्षा माँगना मृत्यु के समान है इसलिए किसी भी स्थिति में न तो भिक्षा माँगे और न भिक्षा दें। खुद की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने मेहनत से धन अर्जित करें। हालाँकि गुरु घासीदास बाबा ने दीन –दु:खियों के सहायता करने की सलाह दी है।

 13

मरे मनखे ल पीतर मनई मोला बईहाय कस लागथे। पितर पूजा झन करिहौ, जियत दाई ददा के सेवा अऊ सनमान करव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि मृत व्यक्ति को पितर मानकर उन्हें भोजन खिलाने का प्रयास करना मुझे पागलपन प्रतीत होता है। यदि आप मुझे अपना मार्गदर्शक समझते हैं तो पितर की पूजा मत करना बल्कि अपने जिंदा माता-पिता और बड़े बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करना।

14

·        जीव ल मार के झन खाहु।

·        माँस तो माँस ओखर सहिनाव ल घालो झन छुहौ।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि किसी भी जीव का हत्या करके उसे अपने भोजन में शामिल मत करना। गुरु घासीदास बाबा ने यहाँ तक कहा है कि माँस तो माँस, माँस जैसे दिखने वाली भोज्य पदार्थों और माँस के समानांतर नाम वाली चीजों को भी न खायें; ऐसा करने से आप धोखे से भी माँस का सेवन करने से बचेंगे।

·        अधिक मसालेदार सब्जी न खायें बल्कि सात्विक भोजन ही ग्रहण करें क्योंकि अधिक मसालेदार भोज्य पदार्थ आपके आचार व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

15

चुगली अऊ निंदा ह घर अऊ समाज ल बिगाडथे।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि चुगली और निंदा मत करो; क्योंकि यह परिवार और समाज को बिगाड़ता है।

·        गुरु घासीदास के अनुसार समाज का तात्पर्य सतनामी समाज या सतनामी जाति से नहीं बल्कि समूचे मानव समाज से है।

16 

अवैया ल रोकव झन अऊ जवईया ल टोकन मत; काबर के धरम अऊ निजी मानस ह बिल्कुल निजी आजादी के जिनिस आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि जो मनुष्य सतनामी बनना चाहता है उसे रोकना मत और जो सतनामियत को छोड़कर हिन्दू, क्रिश्चयन, बौद्ध या मुसलमान बनने जा रहा है उसे टोकना मत; क्योंकि धार्मिक आध्यात्मिक मान्यता इंसान की प्राकृतिक आजादी है।

17

·        अपन आप ल हीनहा अउ कमजोर झन मानहु, तहु मन काकरो ले कमती नई अव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि खुद को किसी से निम्न अथवा कमजोर मत समझना; क्योंकि सभी मनुष्य एक समान शक्ति के साथ जन्म लेते हैं।

18

मोर संत मन मोला काकरो ल बड़े कइहीं त मोला बरछी म हुदेसे कस लागही।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि कोई भी अनुयायी यदि गुरु घासीदास बाबा को किसी अन्य संत से महान कहेंगे तो उन्हे बरछी से छेदने जैसे पीड़ा होगी।

·        दुर्भाग्य ये है कि अधिकतर अनुयायी अपने-अपने गुरुओं / संतों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संत और गुरु प्रमाणित करने में लगे हैं।

·        बरछी : एक प्रकार के नुकीले लोहे की हथियार होती है।

 

19

नियाव ह सबो बर बरोबर होथे।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि जिस प्रकार से प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत सबके लिए समान रूप से कार्य करती है; ठीक उसी प्रकार से मानव निर्मित न्याय व्यवस्था में भी सभी मनुष्यों और जीवों को न्याय पाने का समान अधिकार होनी चाहिए।

·        यदि किसी न्याय प्रणाली में कुल, जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान,अथवा जीवन के आधार पर न्याय का तरीका बदल जाता है अर्थात छूट या सजा का प्रावधान अलग-अलग होता है। इसका तात्पर्य यह कि ऐसा न्याय प्राकृतिक न्याय के खिलाफ और अमानवीय सिद्धांत मात्र है।

  

20 

इही जनम ल सुधारना साँचा ये; लोक-परलोक अऊ पुनर्जन्म के गोठ झूठ आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि लोक-परलोक (स्वर्ग-नरक) और पुनर्जन्म की अवधारणा बिल्कुल झूठ है। अतः आप जिस जीवन में हैं उसी जीवन को बेहतर जीने और बेहतर करने का प्रयास करिए।

·        गुरु घासीदास बाबा के अनुसार कोई सतलोक या अमरलोक नहीं होता है।

·        गुरु घासीदास बाबा ने पुनर्जन्म के बातों का समर्थन नहीं किया है।

·        हालाँकि गुरु घासीदास ने नाम की अमरता की बात जरूर कही है। मगर दुर्भाग्य कुछ गीतकार और पंथी गायकों ने खुद का अमरलोक बना दिया है। जो कि  गुरु घासीदास के मूल विचारधारा के विपरीत है।

·        संभव है दूसरे किसी ग्रह में जहाँ जीवन है कुछ जीव हुबबू मनुष्य की तरह दिखते हों, मगर वो आपके रचनाकार या ईश्वर नहीं हैं।

·        स्वर्ग नर्क या सतलोक –अधम लोक की परिकल्पना घोर बकवास है, ऐसा कोई स्थान, तारे या ग्रह नहीं है। 

21

·        जतेक हव सब मोर संत आव, ककरो बर काँटा झन बोहौ।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि जितने भी लोग हैं, इंसान और जीव हैं दुनिया में, वे सभी मेरे संत हैं इसलिए किसी के रास्ते में काँटे मत बोना।

 

22

ये धरती ह तोर ये, येकर सिंगार कर।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि ये पृथ्वी आपकी (पृथ्वी में रहने वाले सभी जीव की) अपनी निजी है। इसलिए आप सबको इसे शृंगारित करनी चाहिए।

·        अर्थात पर्यावरण की स्वच्छता, जल की उपलब्धता और वायु की शुद्धता के लिए कार्य करें; कृषि कार्य करें, पर्यावरण को प्रदूषित न करें।

·        कुछ गीतकारों के द्वारा गुरु घासीदास बाबा के द्वारा 12 गाड़ी लकड़ी जलाने की बात कही गई है जो कि सरासर झूठा अफवाह है। कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा उनके ऊपर जानलेवा हमला होने की बात कही बताई जाती है।

 

23

दीन दुःखी के सेवा सबले बड़े धरम आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि दीन-दुखियों और जरुरतमन्द लोगों की सेवा और सहयोग ही वास्तविक धर्म है।

·        वर्तमान कथित प्रचलित धर्म धर्म का कुरूपित स्वरूप है जो इंसान को इंसान से लड़ाता है, हिंसा कराता है।

·        धार्मिक होने का मतलब कर्मकांड करना, अपने आराध्य की भक्ति मे लीन रहना मात्र कदापि नहीं है।

·        कुछ इंसान इस भ्रम में जीते हैं कि केवल उनका धर्म गौरवशाली और सर्वश्रेष्ठ है, जबकि यह मूर्खता से बढ़कर कुछ विशेष नहीं है।

 

24

पान, परसाद, नरियर, सुपारी ल चढ़ाना ढोंग आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि किसी मूर्ति अथवा काल्पनिक पात्र के नाम पर खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों और स्वर्ण आभूषण या धन को बर्बाद करना पाखंड है।

·        लेकिन दुर्भाग्य हम भी गुरु घासीदास बाबा के नाम पर उनके आसन, जैतखाम और मूर्ति में खाद्य पदार्थों को चढ़ा रहे हैं।

·        गुरु घासीदास बाबा ने जैतखाम को सतनामियों की इंडेंटिटी के रूप में गड़ाया था, परंतु दुर्भाग्य की बात ये है कि हम जैतखाम को गुरु घसीदास की मूर्ति समझ बैठे हैं और इसकी पूजा करने लगे हैं जबकि गुरु घासीदास बाबा ने पूजा का विरोध किया है।

25

मंदिर, मस्जिद अऊ गुरुद्वारा झन जाहव, अपन घट के ही देव ल मनावव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा सहित किसी भी धार्मिक स्थल में न जायें, वरन अपने घट के देवता को मनाओ।

·         यहाँ पर घट का तात्पर्य घर और शरीर से है, जिससे हम बने हैं और जिससे हमारा जीवन संचालित होती है। अर्थात शरीर को स्वस्थ और निरोगी रखें तथा शरीर के लिए, हमारे जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संपदा को ही देवता मानें।

26

खेती बर पानी अऊ संत के बानी ल जतन के राखिहव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि कृषि कार्य के लिए पानी और संतों के ज्ञान को सहेज कर रखें।

क्योंकि

·        पानी के बिना अभी तक कृषि संभव नहीं है, और कृषि के बिना भोजन तथा भोजन-पानी के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है।

·         संतों की ज्ञान और अनुभव से हमें अमूल्य मार्गदर्शन मिलती है जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है। 

27

·        मया के बँधना ह असली बँधना आय।

·        मन के आवभगत ह असली आवभगत आय।

गुरु घासीदास बाबा ने सुखमय और सफल वैवाहिक जीवन के लिए प्रेम का बंधन ही वास्तविक बंधन है। गुरु घासीदास बाबा के अनुसार अंतरात्मा से की गई सत्कार ही असली सत्कार है।

28

बइला-भईसा ल सूरज चढ़े के बाद नागर म झन फाँदहू अऊ गाय-भैंस ल कभु नागर म झन जोतहु।

गुरु घासीदास बाबा ने पशु क्रूरता को रोकने के लिए किसानों को सुझाव दिया कि बैल –भैस को दोपहर के बाद हल न फँदें, पशुओं को भी इंसानों की तरह आराम करने का अधिकार है। उन्होंने दूध देने वाली मादा पशुओं जैसे गाय और भैस को हल जोतने के कार्य में नहीं लेने का सुझाव दिया है।

 29

पानी पीहु छान के अउ गुरू बनाहू जान के।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि पानी को सदैव छान कर पीयें; साथ ही यदि आप किसी मनुष्य को गुरु बना रहे हैं तो उनके गुण अवगुण और ज्ञान मार्ग की सम्पूर्ण जानकारी लेकर ही गुरु बनायें।

·        क्योंकि अधिकतर लोग षड्यन्त्रपूर्वक चाटुकारों के माध्यम से झूठे प्रशंसा और अफवाह के दम पर खुद को गुरु बताने मे सफल हो जाते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें वास्तविक मानव धर्म का ज्ञान ही नहीं है वो अधर्म, हिंसा और अन्याय को ही धर्म का नाम दे बैठे हैं। आपकी मार्गदर्शन करने के बजाय आपको लड़ाने और आपको अमानुष बनाने के लिए तैयार बैठे हैं।

30 

जइसे खाहु अन्न वैसे बनही मन, जइसे पीहू पानी वइसे बोलहु बानी।

गुरु घासीदास बाबा ने माँसाहार और शराब सेवन से बचने का सलाह देते हुए कहा है कि आप जैसे भोजन ग्रहण करेंगे वैसे ही उस भोजन के अनुरूप आपका तन और मन रहेगा, तथा आप जैसे पानी पियेंगे उसके अनुरूप आपकी बोली होगी।

·        यदि आप हिंसा करके जीवों के शरीर को भोजन के रूप में ग्रहण करेंगे तो आप सदैव हिंसा और हत्या के लिए उतावले रहेंगे, उसी प्रकार यदि आप यदि शराब सेवन करेंगे तो आप अपनी दूषित मनोदशा के अनुरूप ही लोगों से बातें करेंगे।

 

31

·        सतनाम ल अपन आचरण में उतारव; अंधविश्वास, रूढ़िवाद अऊ परंपरावाद ल झन मानव।

·        मोर कहना ल घलो झन मानव, अपन दिमाक लगावव।

गुरु घासीदास ने कहा है कि सतनाम अर्थात सत्य को अपने आचरण में सम्मिलित करें तथा अंधविश्वास, रूढ़िवादी परंपराओं को मत मानो।

32

मेहनत के रोटी ह सुख के आधार आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि मेहनत से अर्जित धन और भोज्य पदार्थ सुख का आधार है।

·        भिक्षा, खैरात, चोरी और डकैती से धन और भोजन अर्जित करना अनुचित कृत्य है।

 33

·        ज्ञान पंथ कृपान कै धारा।

·        गियान दुधारी तलवार ले जादा धारदार होथे, फेर येला धारण करईया ल कोनो घाटा घलो नई होवय।

·        जेन मनखे ज्ञानी होथे ओला अपन रक्षा बर हथियार रखे ल नई परय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि ज्ञानी मनुष्य के लिए उनका ज्ञान कृपाण के समान है। ज्ञानी मनुष्य को अपने दुश्मन से लड़ने के लिए हथियार की जरूरत नहीं पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि आप कृपाण या तलवार रखेंगे तो हो सकता है उस कृपाण या तलवार से आपको अथवा आपके परिवार को हानि हो सकती है, मगर ज्ञान से आपको कोई हानि नहीं होगी।

 

4

दाई ह दाई आय, मुरही गाय के दुध झन पीहौ।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि माँ तो माँ होती है चाहे वह आपकी हो या किसी दूसरे की, अतः माँ की सेवा और सम्मान करें। जिस गाय या भैंस का बछड़ा-बछिया, अथवा पड़वा-पड़िया मर गया हो, उसका दूध मत पीना।

35

पशुबलि अंधविश्वास ये एला कभू झन करहु।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि पशु की बलि देना अंधविश्वास है।

·        मारना तो हत्या ही है चाहे आप उस हत्या को बलि का नाम दें, वध कहें या आत्मरक्षा कहें।

·        हत्या हत्या ही है चाहे धर्म के नाम पर हो या व्यक्तिगत स्वार्थ या अन्य कारण से किया गया हो।

·        पशुबलि मत दो, इससे कोई ईश्वर या भगवान खुश होकर आपके मनोकामना को पूरा नहीं करता।

·        धर्म के नाम पर हत्या उचित कैसे हो सकता है? धार्मिक लोगों की मान्यता रहती है कि ईश्वर सबके जन्म के कारण हैं, अर्थात समस्त जीवों के माता-पिता हैं तो फिर बताओ क्या कोई माँ-बाप अपने संतान को खाना या मारना चाहेगा? 

36

धन ल उड़ाहव झन, बने काम म लगाहव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि धन का अपव्यय न करें, अच्छे कार्यों में लगायें।

·        अर्थात नशे का सेवन, शराब सेवन, सट्टा, जुआ और कोई शर्त में न लगाएं बल्कि कृषि भूमि क्रय करें, आभूषण खरीदें, घर बनायें, शिक्षा-स्वास्थ्य और पारिवारिक-सामाजिक जरूरत के काम में लगायें ।

37

एक धुबा मारेच तुहु तोर बराबर आय।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि आपने जिस भ्रूण अथवा नवजात शिशु की हत्या की है वह भी आपके समान है।

·        भ्रूण भी एक मानव है और उसे भी आपकी तरह गरिमामय जीवन जीने का भरपूर अधिकार है।

·        गुरु घासीदास बाबा के समकाल में भ्रूण और कन्या शिशुओं की हत्या होती थी जिसे रोकने के लिए उन्होंने ये बात कही थी। 

38

कोनो मनखे कुल, जात अऊ धरम ले महान अऊ पुजनीय नई होवय।

गुरु घासीदास बाबा ने समाज मे व्याप्त ऊँच –नीच के मानसिकता का खंडन करते हुए कहा है कि कोई भी इंसान या जीव किसी खास कुल, जाति अथवा धर्म में जन्म लेने मात्र से महान या पूज़्यनीय नहीं होता है।

·        कोई व्यक्ति आपके गुरु के कुल में जन्म लिया है इसका तात्पर्य यह नहीं कि वह आपके बच्चों का गुरु होगा। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि “पानी पीहु छान के अउ गुरू बनाहू जान के।“

·        महानता कर्म आधारित हो सकती है परंतु वंश आधारित कदापि नहीं हो सकता। क्योंकि आपकी पैतृक धन, संपदा भौतिक होने केकारण आपको हस्तांतरण हो जाती है मगर ज्ञान और अनुभव हस्तांतरण योग्य वस्तु नहीं है। 

39

बासी भोजन अऊ दुरगुन ले दुरिहा रईहव।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि बासी भोजन और दुर्गुण से दुर रहें।

·        बासी भोजन आपके शारीरिक स्वास्थ्य को तथा दुर्गुण आपके मानसिक और सामाजिक छवि को बर्बाद करती है। 

40   

·        मोला-तोला अऊ बेर-कुबेर झन देखव; जउन हे तउने ल बाँट बिराज के खा लव । 

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि आपके पास जो भी भोजन,धन-संपदा और कार्य है उसे परिवार के सभी सदस्य आपस में बाँट लें; किसी भी छोटे-बड़े काम को मुझे करना है,आपको करना है, अथवा बाद में करना है ये सोचकर टालना मत। 

41

·        बईरी संग घलो पिरीत रखहु।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि अपने शत्रु से भी प्रेम रखना।

·        क्योंकि वह अभी आपके लिए शत्रु हो सकता है मगर मूलतः वह मेरा संत है; मेरा अपना है। गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि जतेक हव सब मोर संत आव, ककरो बर काँटा झन बोहौ। आप और आपके शत्रु दोनों ही मेरे लिए एक समान हैं इसलिए दुश्मन के लिए भी प्रेम और सद्भावना रखना।

42

दान के लेवईया अऊ दान के देवईया दुनो पापी होथे।

गुरु घासीदास बाबा ने कहा है कि दान लेने वाला और दान देने वाला दोनों ही पापी हैं।

·        क्योंकि दान लेने वाला षड्यन्त्रपूर्वक बिना मेहनत किये आपके संतान और बुजुर्ग माता-पिता के हिस्से को छीन रहा है और आप खुद अपने संतान और बुजुर्ग माता-पिता के हिस्से को छीनकर खैरात में उसे दे रहे हैं।

 

गुरु घासीदास बाबा के मुक्ता

 

1

सँसो-फिकर झन करव, समसिया ले लड़े बर आगु बढ़व।

चिंता न करें; समस्या का डटकर सामना करें।


 

2

नशा मत करव, नशा ह नाश के उदिम आय।

नशा न करें; क्योंकि नशा नाश का कारण है।


 3

कोनों मनखे ल बदनाम मत करिहौ।

किसी भी मनुष्य को बदनाम न करें।

 

4

मूर्ति पूजा मत करव, मूर्ति पूजा करना मुरुखता आय।

मूर्ति पूजा न करें क्योंकि मूर्ति पूजा मूर्खता है।


5        

मरे मनखे (पितर) के पूजा मत करव।

मृत मनुष्य (पितर) का पूजा न करें।

·        मृत व्यक्ति जो खुद के लिए कुछ नहीं कर सकता है वह आपके लिए क्या करेगा?

  

 6

जेन सिरा गे हाँवय तेखर पूजा पचिसठा मत करहौ।

मृत मनुष्य का पूजा न करें।

 

7

हुम–हवन अबिरथा बुता आय।

पूजा-हवन न करें, यह व्यर्थ कार्य है।

 

8

कहूँ जाए के पहिली मन म शंका झन करहु ।

कहीं भी जाने के पहले से मन में शंका न करें।

 

9

कोनों दिन, बेरा अऊ दिशा ह अपसगुन नई होवै।

कोई दिन, समय और दिशा अशुभ नहीं होता है।

 

10

असली देवता दाई-ददा, पेड़-परबत अऊ नदिया-तरिया हर आय।

वास्तविक देवता माता-पिता, पेड़-पहाड़ और नदी-तालाब है।

 

11

राहु, केतु, गृहदोष, शनि भद्रा ल मत मानव, कुंडली दोष के बात ह झूठा षड्यन्त्र आय।

राहु, केतु, गृहदोष, शनि भद्रा को मत मानो, कुंडली दोष की बात असत्य और एक षड्यन्त्र है।

 

 

12

शंख मत फुँकव; शंख फुके ले ईश्वर या देवता नई जागे, अबिरथा शोर मत करव।

शंख मत फुको, शंख फुँकने से कोई ईश्वर या देवता नहीं जागता है, व्यर्थ शोर मत करो।

 

13

सुतई, कछुआ के हाड़ा ल बर्तन समझके कोई काम म मत लावव।

मृत जीव (सीप और कछुआ) के हड्डी को बर्तन के रूप मे उपयोग में मत लाओ।

 

14

छुआ-छूत मत मानव; कोनों मनखे अछूत नई होवय।

छुआछूत मत मानो, कोई मनुष्य अछूत नहीं होता है।

 

15

देवी-देवता ल मत मानव, ईंखर दलाल मन तुँहला लूट लेहिं।

देवी-देवता को मत मानो, अन्यथा इनके दलाल आपको लूट खायेंगे।

 

16

दुसर के नारी-पुरुष ले दुरिहा रहव।

गैर स्त्री-गैर पुरुष से दुर रहें, अर्थात शारीरिक संबंध की अपेक्षा न रखें।

 

17

भाग के भरोसा झन करव; अपन किसमत खुदेच लिखव।

भाग्य के भरोसे मत रहो, अपनी किस्मत खुद लिखो।

 

18

अपन बचन म अडिग रहव, बचन ले मत मुकरव।

अपने वचन (वादा) मे अडिग रहो, वादाखिलाफी मत करो।

 

19

दुसर के धन म लालच झन करव।

दूसरे के धन, संपदा में लालच न करें।

20

मान बड़ाई म मत परव।

किसी के झूठे तारीफ और बहकावे में मत आओ।

 

21

घर-परिवार के भेद कोनों ल झन बताहौ; तूँहरे ठिठोली बन जाही।

अपने घर-परिवार की गोपनीयता भंग न करें, अन्यथा आपकी हँसी होगी।

 

22

कखरो अहित मत करव।

किसी भी जीव का अहित न करें।

 

 

23

लबारी अऊ असत बानी झन बोलाहौ।

झूठ और असत्य बात न बोलें।

 

24

बइरी के मीठ बोली म मत फँसहु।

दुश्मन चाहे कितना ही मीठा क्यों न बोले, उसके बहकावे में न फँसें।

 

25

परोसी के उन्नति म जलव मत, मेहनत करके अपन उन्नति करव।

पड़ोसी के उन्नति से दुर्भावना न करें, बल्कि खुद मेहनत करके उन्नति की ओर आगे बढ़ें।

 

26

बुरे मनखे के संग झन जाहौ।

बुरे मनुष्य से दोस्ती न करें, उनके हमराही न बनें।

 

27

जेखर दुवारी म सनमान नई मिलय ऊँहा कभु झन जाहु।

जिसके आँगन में सम्मान न हो, या जहाँ आपको अपमानित किया जाता हो वहाँ कभी भी न जायें। 




श्रीमती कली बाई जोशी की किताब गिया के रित (Gyan ke Amrit) से साभार 

शुक्रवार, दिसंबर 17, 2021

गुरु घासीदास जयंती विशेषांक : समानता और न्याय पर आधारित दुनिया की सर्वश्रेष्ठ दर्शन प्रस्तुत करने वाले सतनाम धर्म के प्रणेता गुरु घासीदास बाबा की जयंती के अवसर पर उनके प्रचलित संदेश और उसमें निहित उनके दर्शन की संक्षिप्त जानकारी

गुरु घासीदास जयंती विशेषांक : समानता और न्याय पर आधारित दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दर्शन प्रस्तुत करने वाले सतनाम धर्म के प्रणेता गुरु घासीदास बाबा की जयंती के अवसर पर उनके प्रचलित संदेश और उसमें निहित उनके दर्शन की संक्षिप्त जानकारी 

सबसे पहले आप सहित पूरी दुनिया के मानव समुदाय को मेरी ओर से गुरू घासीदास बाबा जी के जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ

हम प्रत्येक वर्ष 18 दिसम्बर को गुरू घासीदास बाबा की जयंती मनाते हैं इतना ही नहीं बल्कि पूरे महीना को हम गुरू पर्व के रूप में मनाते हैं कुछ स्थानों में जनवरी, फरवरी और मार्च के महीने में भी गुरू घासीदास बाबा जी की जयंती मनाने की प्रथा का शुरूआत हो चूका है। मगर बड़ी दुर्भाग्य की बात है हम अधिकतर आयोजनों में केवल उत्सवधर्मी ही रह जाते हैं क्योंकि जयंती आयोजन के दौरान हम गुरू घासीदास बाबा के संदेश और उसमें निहित दर्शनों की कोई चर्चा ही नहीं करते। 

अतः आज हम गुरू घासीदास बाबा की जयंती के अवसर पर उनके प्रचलित संदेश और उसमें निहित उनके दर्शन की चर्चा करेंगे, जो इसप्रकार से हैं:-

# मनखे-मनखे एक बरोबर (सभी मनुष्य एक बराबर हैं।):- बाबा जी का यह संदेश मानव-मानव के बीच व्याप्त असमानता को समाप्त करने के उनके लक्ष्य पर आधारित समानता का सिद्धांत है जो पूरी दुनिया भर में समानता पर आधारित समस्त दर्शनों में सर्वश्रेष्ठ प्रासंगिक दर्शन है। मनखे-मनखे एक समान उन सभी कुटिल सिद्धांतों के अस्तित्व का अंतिम निदान भी है जो मानव को मानव से ऊंचनीच होने का कपोल कल्पित झूठा प्रमाण प्रस्तुत करने का षड्यंत्र करती है। ‘‘मनखे-मनखे एक समान’’ का सिद्धांत छुआछूत, जातिवाद, ऊंच-नीच, धार्मिक संघर्ष, के साथ ही झूठे धार्मिक सिद्धांतो के लिए ब्रम्हास्त्र है।

# सत्य ही मानव का आभूषण है:- न्याय और सत्य के साझे समर्थन पर आधारित बाबा जी का यह दर्शन पूरी दुनिया के समस्त दर्शनों में सर्वश्रेष्ठ प्रासंगिक दर्शन है।

# सतनाम को मानो:- सतनाम का तात्पर्य ‘‘सत्य के नाम’’ से है जो पंच तत्वों के योग से बना यौगिक शब्द है।

# पराय स्त्री को माता-बहन मानो:- यदि आप किसी को अपना मित्र मानते हैं तो वह भी आपको मित्र समझता है और यदि आप किसी को शत्रु बना लेते हैं तो वह भी आपसे शत्रुता ही करता है। इसी प्रकार से यदि हम किसी अन्य के माता, बहन-बेटियों और बहुओं को माता-बहन मानेंगे तो वह भी हमारी बहन-बेटियों को अपनी माता-बहन के समान ही मानेंगे। मगर दुर्भाग्य की बात है कि हम लगभग हर स्त्री को भोग की वस्तु की तरह देखने वाले दरिंदे हो चूके हैं इसीलिये आये दिन मीडिया में हम निर्भया बनती बेटियों के लिये मोमबत्ती जलाने के लिये विवश होते जा रहे हैं।

# जुआ मत खेलो:- परिवार के आर्थिक और सामाजिक पतन पर रोक लगाने के ध्येय से बाबा जी का संदेश।

# नशे का सेवन मत करो:- आर्थिक, सामाजिक और नैतिक पतन को रोकने के उद्देश्य से।

# दोपहर में खेत मत जोतो:- पशु क्रुरता नियंत्रण पर आधारित संदेश है। क्योंकि तब एक जोड़ बैल को ही तीन से अधिक जोतहार द्वारा अमानवीय तरीके से हल जोतने के कार्य में लगाया जाता था जिससे बैल की मृत्यु भी हो जाती थी।

# पितृ (पितर) पूजा के बजाय जिन्दा माता-पिता और बड़ों-बुजुर्गों की सेवा करो:-

# लड़की/लड़के में भेद मत करो:- महिलाओं के मानव अधिकारों पर आधारित बाबा जी का यह संदेश ‘‘कन्या भ्रुण हत्या पर रोक’’ लगाने में कारगर शाबित है।

# मूर्ति पूजा मत करो:-

# जीव हत्या मत करो:-

# शाकाहार को अनाओ:-

# जाति-पाति के प्रपंच में मत पड़ो:- फूट डालो और राज करो का सिद्धांत है।

# व्यभिचार मत करो:-

# चोरी मत करो:-

आपसे अनुरोध है कि आप भी समाज की बेहतरी के लिये गुरू घासीदास बाबा के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने में भागीदार बनें।

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गुरु घासीदास बाबा और सतनाम धर्म से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य : 
1- गुरु घासीदास बाबा ने जीवन पर्यंत मूर्ति पूजा का विरोध किया और कुछ लोग उनके ही मूर्ति बनाकर पूजने लगे हैं।

2- गुरु घासीदास बाबा ने चमत्कार और अतिसंयोक्तिपूर्ण कपोल कल्पित कहानियों का विरोध किया और लोग उनके बारे में ही चमत्कारिक अफवाहें फैला दी।
# मरणासन्न को मृत बताकर, मृत बछिया को जिंदा करने की अफवाह फैलाई गई।
# भाटा के बारी से मिर्चा लाना : गुरु घासीदास बाबा ने भाटा के बारी से मिर्च नही लाया बल्कि उन्होंने कृषि सुधार के तहत एक समय में, एक ही भूमि में, एक साथ एक से अधिक फसल के उत्पादन करने का तरीका सिखाया। जैसे - राहर के साथ कोदो, धान अथवा मूंगफली का उत्पादन। चना के साथ धनिया, सूरजमुखी, अलसी और सरसों का उत्पादन। सब्जी में मूली के साथ धनिया और भाजी; बैगन के साथ मिर्च, और मीर्च के साथ टमाटर, इत्यादि।
# गरियार बैल को चलाना : सामाजिक रूप से पिछड़े, दबे लोगों को मोटिवेट कर शोषक वर्ग के बराबर लाने का काम किया; अर्थात दलितोद्धार का कार्य किया। इसके तहत उन्होंने ऐसे लोगों (शोषित लोगों) को चलाया, आगे बढ़ाया जो स्वयं शोषक समाज के नीचे और दबे हुए मानकर उनके समानांतर चलने का साहस नहीं करते थे उन्हें सशक्त कर उनके समानांतर लाकर बराबर का काम करने योग्य बनाया।
# शेर और बकरी को एक घाट में पानी पिलाना : गुरु घासीदास बाबा सामाजिक न्याय के प्रणेता थे, उन्होंने शोषित और शोषक दोनों ही वर्ग के योग से सतनाम पंथ की स्थापना करके सबको एक समान सामाजिक स्तर प्रदान किया, एक घाट मतलब एक ही सामाजिक नियम/ भोज में शामिल किया।
# 5मुठा धान को बाहरा डोली में पुरोकर बोना : गुरु घासीदास बाबा ने बाहरा डोली में 5मुठा धान को पुरोकर बोया का मतलब कृषि सुधार हेतु रोपा पद्धति का शुरआत किया, कुछ विद्ववान मानते हैं सतनाम (पंच तत्व के ज्ञान) को पूरे मानव समाज में विस्तारित किया।
# गोपाल मरार का नौकर : गुरु घासीदास बाबा को कुछ विरोधी तत्व गोपाल मरार का नौकर मानते हैं जबकि गोपाल मरार उन्हें गुरु मानते थे। हालांकि शुरुआती दिनों में गुरु घासीदास बाबा कृषि सुधार हेतु वैज्ञानिक पद्धति के विकास करने के लिए गोपाल मरार के बारी में अधिक समय देते थे और बहुफसल उत्पादन को लागू कर मरार समाज को प्रशिक्षण देने का काम करते थे।
# अमरता और अमरलोक का सिद्धांत : गुरु घासीदास बाबा द्वारा किसी भी प्रकार से भौतिक रूप से अमरता और अमर लोक या अधमलोक की बात नहीं कहा, उन्होंने नाम की अमरता और अच्छे बुरे सामाजिक व्यवस्था की बात कही जिसे कुछ लोगों द्वारा समाज को गुमराह किया जा रहा है।

3- गुरु घासीदास बाबा ने जन्म आधारित महानता का विरोध किया, इसके बावजूद समाज मे जन्म आधारित महानता की परंपरा बनाकर समाज में थोपने का प्रयास किया जा रहा है। एक परिवार विशेष में जन्म लेने वाले अबोध शिशु को भी धर्मगुरु घोषित कर दिया जा रहा है।

4- गुरु घासीदास बाबा और गुरु बालकदास के योगदान को भुलाकर काल्पनिक पात्र को आराध्य बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं ऐसे लोगों को भी समाज का आराध्य बताया जा रहा है जो वास्तव में आराध्य होने के लायक नहीं है या समाज में उनका कोई योगदान नहीं रहा है।

5- मनखे-मनखे एक समान : ये एक ऐसा क्रांतिकारी सिद्धांत है जो मानव को मानव बनने का अधिकार देता है। मनखे मनखे एक समान का सिद्धांत मानव के सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक विकास और समानता के लिए अत्यंत प्रभावी रहा है।

6- मानव अधिकारों की नींव : सतनाम रावटी के माध्यम से गुरु घासीदास बाबा द्वारा लोगों को बताया गया कि सभी मनुष्य समान हैं, कोई उच्च या नीच नहीं है; प्राकृतिक संसाधनों में भी सभी मनुष्य का बराबर अधिकार है।

7- महिलाओं के मानव अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा : गुरु बालकदास के नेतृत्व में महिलाओं के मानव अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अखाड़ा प्रथा की शुरुआत कराया गया। पराय (गैर) स्त्री को माता अथवा बहन मानने की परम्परा की शुरूआत कर स्त्री को विलासिता और भोग की वस्तुएं समझने वाले अमानुष लोगो को सुधरने का रास्ता दिखाया।

8- सामाजिक बुराइयों अंत : गुरु घासीदास बाबा द्वारा समाज मे व्याप्त कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों को विरोध करते हुए उसे समाप्त करने का काम किया गया; उन्होंने सामाजिक बुराइयों से मुक्त सतनाम पंथ की स्थापना की थी; परंतु आज जो लोग स्वयं को सतनाम पंथ के मानने वाले प्रचारित करते हैं वे समाज में सैकड़ों सामाजिक बुराइयों को सामाजिक नियम की आत्मा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 

9- प्रत्येक जीव के लिए दया और प्रेम : गुरु घासीदास बाबा ने केवल मानव ही नहीं बल्कि अन्य सभी जीव के अच्छे जीवन की बात कही, इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने हिंसा, नरबलि, पशुबलि और मांसाहार का विरोध किया था। इसके बावजूद स्वयं को सामाजिक /धार्मिक नेता समझने वाले कुछ लोग मांसाहार के माध्यम से जीव हत्या को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।

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महत्वपूर्व संदेश : 
# जम्मों जीव हे  भाई - बहिनी बरोबर । (हुलेश्वर जोशी) 
# शिक्षा ग्रहण पहले, भोजन ग्रहण नहले । (माता श्यामा देवी जोशी) 
# आपके पैरों मे चाहे जूते न हों, मगर हाथों मे किताब जरूर होनी चाहिए । 
# भारतीय संविधान दुनिया की सबसे अच्छी किताब मे से एक है, इसे जरूर पढ़ें । 
# धार्मिक कट्टरपंथी अनुचित है । 
# सुंदरता का पैमाना गोरी चमड़ी नहीं। 
# पत्नी आपकी सेविका या दासी नहीं बल्कि जीवन की सहभागिनी है । 
# धर्मवादी अथवा जातिवादी होना किसी भी स्थिति में धर्म निरपेक्षता से बेहतर नहीं हो सकता । 


नारायणपुर: स्वर्गीय श्री अरूण चन्द्राकर की स्मृति में राज्य स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ

नारायणपुर: स्वर्गीय श्री अरूण चन्द्राकर की स्मृति में राज्य स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ

आज दिनांक 17.12.2021 को पुलिस अधीक्षक श्री गिरिजा शंकर जायसवाल द्वारा स्वर्गीय श्री अरूण चन्द्राकर की स्मृति में आफिसर्स क्लब, बैडमिंटन कोर्ट, नारायणपुर में राज्य स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री गिरिजा शंकर जायसवाल, पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर और विशेष अतिथि के रूप में श्री पोषण लाल चन्द्राकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, नारायणपुर और जिला नारायणपुर के बैडमिंटन खिलाड़ी उपस्थित रहे।

स्वर्गीय श्री अरूण चन्द्राकर की स्मृति में आयोजित राज्य स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में राज्य भर से राष्ट्रीय और राज्य स्तर के लगभग 200 खिलाड़ी भाग लेंगे, जिसमें प्रमुखता से दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, धमतरी, जगदलपुर, राजनांदगांव और नारायणपुर के अधिकतर खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं।

यह प्रतियोगिता दिनांक 17 से 19 दिसम्बर तक चलेगी, जिसका फाईलन मैच दिनांक 19/12/2021 को खेली जाएगी। यह मैच दो कैटेगरी, (01) ओपन कैटेगरी (40 वर्ष से कम उम्र वालों के लिये) और (02) वेटनर्स कैटेगरी (40 वर्ष और उससे अधिक उम्र वालों के लिये) में आयोजित हो रही है।

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एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल ने जिला नाराणपुर के 35 प्रधान आरक्षकों को स्टार लगाकर सहायक उप निरीक्षक और 149 आरक्षकों को फित्ती लगाकर प्रधान आरक्षक के पद पद किया पदोन्नत

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल ने जिला नाराणपुर के 35 प्रधान आरक्षकों को स्टार लगाकर सहायक उप निरीक्षक और 149 आरक्षकों को फित्ती लगाकर प्रधान आरक्षक के पद पद किया पदोन्नत

आज दिनांक 17.12.2021 को पुलिस अधीक्षक श्री गिरिजा शंकर जायसवाल के द्वारा डीआरजी ग्रेट हाॅल, नारायणपुर में कुल 184 जवानों को पदोन्नति दिया गया है, जिसमें जिला नारायणपुर के 35 प्रधान आरक्षकों को स्टार लगाकर सहायक उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी गई तथा 149 आरक्षकों को फित्ती लगाकर प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति दी गई है।

उल्लेखनीय है कि यह पदोन्नति राज्य सरकार के मंशानुरूप पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार एस.ओ.पी. 25/2021 में निहित प्रावधानों तहत् पदोन्नति पूर्व परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले आरक्षक और प्रधान आरक्षकों को वरियता के आधार पर दी गई है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, जगदलपुर के आदेशानुसार संभाग स्तर पर विभागीय पदोन्नति पूर्व शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा ली गई तथा परीक्षा में उत्र्तीण जवानों को पदोन्नति पूर्व प्रशिक्षण कराया गया।

प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति:-
पदोन्नति प्रक्रिया के अंतर्गत प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक के पद पर पदोन्नति हेतु बस्तर संभाग के प्रधान आरक्षकों को पीटीएस लालबाग (जगदलपुर) में पीपी कोर्स कराया गया। पीपी कोर्स के पूर्ण होने पर पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज, जगदलपुर द्वारा आदेश क्रमांक पुमनि/बस्तर/स्था/479/2021, दिनांक 16.12.2021 के तहत् बस्तर संभाग के कुल 237 प्रधान आरक्षकों की पदोन्नति आदेश जारी किया है, जिसमें जिला नारायणपुर के 35 प्रधान आरक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिला है।

आरक्षक से प्रधान आरक्षक पदोन्नति:-
पदोन्नति प्रक्रिया के अंतर्गत आरक्षक से प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति हेतु जिला नारायणपुर के आरक्षकों को सेनानी, 16वीं वाहिनी छसबल, नारायणपुर के अधीन जिला नारायणपुर में ही पीपी कोर्स कराया गया। पीपी कोर्स के पूर्ण होने पर पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर के आदेश क्रमांक/पु.अ./ना.पुर/स्था./पी-2098/2021 दिनांक 17.12.2021 के द्वारा जिला नारायणपुर के 149 आरक्षकों को प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति का लाभ दिया गया है।

श्री गिरिजा शंकर जायसवाल ने पदोन्नति प्राप्त जवानों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि "पदोन्नति से न सिर्फ आपके व्यक्तिगत और सामाजिक गरिमा में वृद्धि होती है वरन् विभागीय जिम्मेदारियों की भी अभिवृद्धि होती है। अतः पदोन्नति के साथ ही यह आवश्यक है कि आप अपने पदीय गरिमा के अनुरूप अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के स्तर को भी सशक्त और अव्वल दर्जे का बनायें।"

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मंगलवार, दिसंबर 14, 2021

नारायणपुर पुलिस की पहल: शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल, बेनूर में ‘‘यातायात जागरूकता कार्यक्रम’’ का हुआ आयोजन

नारायणपुर पुलिस की पहल: शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल, बेनूर में ‘‘यातायात जागरूकता कार्यक्रम’’ का हुआ आयोजन

आज दिनांक 14.12.2021 को पुलिस अधीक्षक श्री गिरिजा शंकर जायसवाल के निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर के विशेष मार्गदर्शन में शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल, बेनूर में ‘‘यातायात जागरूकता कार्यक्रम’’ का आयोजन हुआ। आरआई श्री दीपक साव, यातायात प्रभारी, नारायणपुर के नेतृत्व में संचालित इस कार्यक्रम में यातायात जागरूकता पर केन्द्रित विषयों पर स्कूल के छात्रों को अवेयर किया गया, इसके तहत् ट्रैफिक साईन और मौजूदा यातायात नियमों की जानकारी दी गई।

छात्र/छात्राओं को संबोधित करते हुए यातायात प्रभारी श्री साव ने कहा कि ‘‘यातायात नियम आपके आजाद़ी पर पाबंदी लगाने के लिये नहीं बल्कि आपकी और सड़क यात्रा करने वाले सभी लोगों के प्राणों की रक्षा के लिये बनाये गये हैं।’’ अतः इसका पालन करना अत्यंत आवश्यक है। श्री साव ने छात्रों से पुनः कहा कि इसके लिये यह भी आवश्यक है कि आप यातायात नियमों और ट्रैफिक सिग्नल्स की पूरी जानकारी हासिल कर सकें इसीलिये ये जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं। आपसे सभी से व्यक्तिगतरूप से अपेक्षा है कि आप इस वर्कशॉप में सीखी गई बातें जीवन पर्यंत पालन करेंगे और जागरूक नागरिक बनेंगे।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल, बेनूर में आयोजित ‘‘यातायात जागरूकता कार्यक्रम’’ के दौरान उप पुलिस अधीक्षक श्री रितेश श्रीवास्तव (एसडीओपी, बेनूर), आरआई श्री दीपक साव, निरीक्षक श्री तोपसिंह नवरंग (थाना प्रभारी, बेनूर) प्राचार्य श्री दीनदयाल शोरी (शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल, बेनूर) एवं, स्कूल के अन्य स्टॉफ व यातायात पुलिस के अधिकारी सहित लगभग 200 छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।

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शनिवार, दिसंबर 11, 2021

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) द्वारा अंदरूनी क्षेत्र के थाना/कैम्प में तैनात जवानों की मच्छरजनित बिमारियों से बचाव के लिये "फागिंग मशीन" वितरण किया गया

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) द्वारा अंदरूनी क्षेत्र के थाना/कैम्प में तैनात जवानों की मच्छरजनित बिमारियों से बचाव के लिये "फागिंग मशीन" वितरण किया गया

आज दिनांक 12.12.2021 को पुलिस अधीक्षक श्री गिरिजा शंकर जायसवाल के निर्देशानुसार नारायणपुर जिला के अंदरूनी क्षेत्र के थाना/कैम्प में तैनात जवानों की मच्छरजनित बिमारियों और मलेरिया से बचाव हेतु 08 नग "फागिंग मशीन" का वितरण किया गया है। साथ ही जवानों को फागिंग मशीन चलाने और इसके बेहतर रखरखाव के लिये प्रशिक्षण भी दिया गया है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले श्री जायसवाल ने अंदरूनी नक्सल क्षेत्र के थाना/कैम्पों की प्रवास के दौरान मच्छरों की अधिकता देखकर जवानों की मच्छरजनित बिमारियों से बचाव के लिये फागिंग मशीन वितरण का मन बनाया था।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हाल ही में पुलिस अधीक्षक नारायणपुर के निर्देशानुसार अंदरूनी क्षेत्र के थाना/कैम्पों में जवानों के लिये शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हेतु "आरओ प्लांट" लगवाया गया है। नक्सल घटनाओं के दौरान जवानों को गोली लगने अथवा बारूदी विस्फोट से आने वाली चोट के दौरान शरीर से निकलने वाले रक्तस्त्राव (ब्लड) को रोकने के लिये "क्विक क्लाॅट" और आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिये "फर्स्ट एड बाॅक्स और मेडिसिन" भी वितरित किये गये हैं।

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शुक्रवार, दिसंबर 10, 2021

02 जनवरी 2022 (रविवार) को "अखिल भारतीय ऑनलाइन धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता - 2022" का होगा आयोजन

02 जनवरी 2022 (रविवार) को "अखिल भारतीय ऑनलाइन धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता - 2022" का होगा आयोजन

सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ ह्युमन राइट्स और ब्लॉग www.thebharat.co.in के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ समाज सेवक, लेखक और विचारक श्री हुलेश्वर जोशी के विशेष मार्गदर्शन में 02 जनवरी 2022 (रविवार) को "अखिल भारतीय ऑनलाइन धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता - 2022" का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। यह सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता समानता, प्राकृतिक न्याय और महापुरुषों के धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक विचारों तथा मानव अधिकारों पर आधारित 105 प्रश्नों की श्रृंखला पर आधारित हिंदी माध्यम में आयोजित किये जायेंगे, जिसके लिए अभ्यर्थियों को 3घंटे का समय मिलेगा। उक्त प्रतियोगिता में भाग लेकर न्यूनतम 60% अंक प्राप्त वाले अभ्यर्थियों को सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ ह्युमन राइट्स द्वारा ऑनलाइन माध्यम से सर्टिफिकेट प्रदान किये जायेंगे।

"अखिल भारतीय ऑनलाइन धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता - 2022" के आयोजक श्री डीपी जोशी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ ह्युमन राइट्स) ने बताया कि यह परीक्षा नए वर्ष 2022 में बेहतरीन नवीन जीवन दर्शन के विकास और देशवासियों के मध्य एकता, भाईचारा, समानता और न्याय की भावना का विकास करने के ध्येय से आयोजित की जा रही है। श्री जोशी ने कहा कि यह ऑनलाइन परीक्षा अपने किस्म की पहली ऐसी अनोखी सामान्य ज्ञान परीक्षा होने जा रही है जो अभ्यर्थियों के लिए न सिर्फ ज्ञानवर्धक होगी वरन अभ्यर्थी के दर्शन को उन्नत भी करेगी।

परीक्षा में शामिल होने के लिए अपना पंजीकरण कब और कैसे करें?
परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई भी व्यक्ति अपना ऑनलाइन पंजीकरण दिनांक 1 जनवरी 2022 (शनिवार) की रात्रि 11:59 बजे तक ब्लॉग www.thebharat.co.in में कर सकते हैं। कतिपय कारणों से जो पंजीकरण नहीं करा पाएगे वे भी सीधे ऑनलाइन परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

परीक्षा कैसे दिला सकते हैं?
दिनांक 02 जनवरी 2022 (रविवार) सायं 5:00 बजे अखिल भारतीय ऑनलाइन धार्मिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता - 2022 के लिए प्रश्नपत्र ब्लॉग www.thebharat.co.in में अपलोड किये जायेगे। यह ऑनलाइन परीक्षा गूगल फॉर्म पर आधारित होंगी। ब्लॉग में अपलोडेड प्रश्नपत्र के यूआरएल (लिंक) को अन्य सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी अधिकाधिक लोगों को शेयर किये जायेंगे। परीक्षा में सम्मिलित केवल ऐसे पात्र प्रतिभागियों को ही सर्टिफिकेट प्रदान किये जायेंगे जो प्रश्नपत्र जारी होने के 03 घंटे के समय सीमा के भीतर अपना उत्तर अपलोड करेंगे।

अधिक जानकारी के लिए किनसे, कैसे संपर्क करें ?
# अधिक जानकारी के लिए श्री हुलेश्वर जोशी से उनके व्हाट्सप्प नम्बर 98261-64156 में समन्वय स्थापित किया जा सकता है।

बुधवार, दिसंबर 08, 2021

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) के निर्देश पर नारायणपुर पुलिस द्वारा माॅक-ड्रिल का कराया गया अभ्यास

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) के निर्देश पर नारायणपुर पुलिस द्वारा माॅक-ड्रिल का कराया गया अभ्यास 

नारायणपुर जिले में तैनात जवान कुशल और दक्ष होने के साथ ही अत्यंत तत्परता से कार्यवाही को अंजाम देने में सक्षम हैं - आईपीएस गिरिजा शंकर जायसवाल

पुलिस अधीक्षक श्री गिरिजा शंकर जायसवाल के निर्देशानुसार नारायणपुर पुलिस द्वारा जिले की कानून व्यवस्था, सुरक्षा और नक्सल संवेदनशीलता पर केन्द्रित माॅक-ड्रिल का अभ्यास कराया गया, जिसके तहत् आज दिनांक 08.12.2021 को जिला नारायणपुर सभी 14 पुलिस थाना और 13 से अधिक सशस्त्र बल मुख्यालयों और कैम्पों में आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिये माॅक-ड्रिल का अभ्यास किया गया। माॅक-ड्रिल के जिले के सभी थाना/कैम्प को अलर्ट करते हुए न्यूनतम समय में पुलिस थाना/कैम्प को संभावित नक्सल खतरे से निपटने के लिये तैयार किया गया। इसके तहत् विशेष रूप से कैम्प स्टान्टू और फायर बाउण्ड सुनिश्चित की गई वहीं संभावित अवैध परिवहनों, संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण और अपराधियों की धर पकड़ के लिये थाना/कैम्प के सामने और सभी संभावित स्थल में मोबाईल चेक पोस्ट और नाकेबंदी सुनिशित कर जिले की सम्पूर्ण सुरक्षा की जायजा लिया गया।

श्री जायसवाल ने बताया कि "माॅक-ड्रिल ही एक ऐसा अभ्यास है जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों की पुलिस और सशस्त्र बल के जवानों को एक्सपर्ट बनाया जाना संभव होता है।" उन्होने बताया कि माॅक-ड्रिल के माध्यम नारायणपुर जिला के जवानों के सक्रियता और तत्परता की जांच की गई, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान पाया कि नारायणपुर जिले में तैनात सभी बल के जवान त्वरित गति से आकस्मिक स्थिति से निपटने में दक्ष हैं इसकी तत्परता उल्लेखनीय समय में रिकार्ड की गई है।

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रविवार, दिसंबर 05, 2021

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) ने नीलय जैन और चेतन श्रीवास को छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ अंडर-16 में सलेक्ट होने पर दी बधाई

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) ने नीलय जैन और चेतन श्रीवास को छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ अंडर-16 में सलेक्ट होने पर दी बधाई

नारायणपुर जिला मुख्यालय के छात्रों नीलय जैन और चेतन श्रीवास को छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ अंडर-16 में चयनित होने पर अपनी शुभकामनाएं दी। उल्लेखनीय है कि ये दोनों बालक छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ अंडर-16 टीम के साथ बडोदा (गुजरात) में आयोजित होने वाली मुंबई और विदर्भ के साथ त्रिकोणी टुर्नामेंट में भाग लेंगे, उसके बाद वे दोनो ही 5 जनवरी से बीसीसीआई द्वारा आयोजित ‘‘विजय मर्चेंट ऑल इंडिया ट्राॅफी’’ में सम्मिलित होने कर्नाटक जायेंगे।

श्री जायसवाल ने कहा कि ये शुरूआत नारायणपुर जिला को गौरवान्वित करने वाली सुखद शुरूआत है, दोनों बालकों की उपलब्धि हमें आशान्वित करती है कि अब वह दिन दूर नहीं जब हमारे नारायणपुर में भी क्रिकेट के सितारे चमकेंगे। श्री जायसवाल ने कहा है कि नारायणपुर के अन्य छात्रों और खिलाड़ियों को भी इनसे प्रेरणा लेकर गुणवत्तापूर्ण तैयारी शुरू करनी चाहिये, तैयारियों में यदि उन्हें किसी भी प्रकार से समस्याओं का सामना करना पड़े तो वे नारायणपुर पुलिस से हर संभव मदद प्राप्त कर सकते हैं।

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) ने टाईगर ब्वॉय चेन्द्रु के स्मृति में आयोजित रात्रिकालीन टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता-2021 (पंचम सत्र) का किया शुभारंभ

एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) ने टाईगर ब्वॉय चेन्द्रु के स्मृति में आयोजित रात्रिकालीन टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता-2021 (पंचम सत्र) का किया शुभारंभ

दिनांक 04.12.2021 की देर रात एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) द्वारा प्लसवन के तत्वाधान में श्री पंकज जैन (जिला नारायणपुर व्यापारी संघ के अध्यक्ष) एवं श्री गजेन्द्र साहू (मुक्ता रेस्टोरेंट) के संयृक्त स्पॉसरशीप में प्रतिवर्ष की भांति जिला नारायणपुर में टाईगर ब्वॉय चेन्द्रु के स्मृति में आयोजित रात्रिकालीन टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता का किया शुभारंभ किया गया। श्री जायसवाल ने सद्भावना मैच के तहत् ‘‘नागरिक-11, नारायणपुर’’ और ‘‘जिला प्रशासन, नारायणपुर’’ के बीच मैच की शुभारंभ किया, जिसमें आईपीएस श्री अक्षय कुमार की नेतृत्व वाली जिला प्रशासन की टीम टॉस जीतकर विजयी रही। श्री जायसवाल द्वारा दीप प्रज्वलित कर मैंच की शुभारंभ किया गया इसके बाद श्री प्रमोद नेलवाड़ (नगर पालिका उपाध्यक्ष) द्वारा चेन्द्रु ब्वाय के पारिवारिक सदस्यों को श्रीफल और सॉल भेंट किया गया। विदित हो कि इस प्रतियोगिता का आयोजन पिछले पॉच साल से खेल परिसर ग्राउण्ड, नारायणपुर में किया जा रहा है, जिसमें शामिल होने के लिये पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश से हर साल लगभग 60-70 टीम भाग लकर खेलने आती है। खेल में सम्मिलित होने प्रत्येक टीम के लिये प्रवेश शुल्क 2500/- (शब्दों में - पच्चीस सौ) रूपये मात्र है जबकि प्रथम और द्वितीय पुरूस्कार क्रमशः 66,666/- (शब्दों में - छियासठ हजार, छः सौ छियासठ) रूपये और 33,333/- (शब्दों में - तैंतीस हजार, तीन सौ तैंतीस) रूपये और ट्राफी है।

‘‘टाईगर ब्वॉय चेन्द्रु स्मृति : रात्रिकालीन टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता-2021’’ की शुभारंभ के दौरान एसपी श्री गिरिजा शंकर जायसवाल (आईपीएस) के साथ आईएएस श्री पोषण चन्द्राकर (सीईओ जिपं), आईएफएस श्री शशीगानंदन के. (डीएफओ), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अक्षय कुमार (आईपीएस), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चन्द्राकर, उप पुलिस अधीक्षक श्री अनुज कुमार, उप पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत खाण्डे, आरआई श्री दीपक साव, श्री पंकज जैन (व्यापारी संघ के अध्यक्ष), श्री गजेन्द्र साहू (मुक्ता रेस्टोरेंट), श्री प्रमोद नेलवाड (नगर पालिका उपाध्यक्ष), श्री बोधन देवांगन, प्रदेश महासचिव (युवा कांग्रेस) श्री कमलजीत आहूजा, व्यापरी संघ, श्री रघु मानिकपुरी, (वरिष्ठ कांग्रेस नेता) और श्री सुनील राठौर, सीईओ, खबर खलीफा सहित चेन्द्रु ब्वॉय की धर्म पत्नी और उनके पारिवारिक सदस्य और जिले के गणमान्य नागरिको सहित सैकड़ों खिलाड़ी उपस्थित रहे। क्रिकेट प्रतियोगिता की शुभारंभ के दौरान एसपी श्री जायसवाल ने चेन्द्रु ब्वॉय की धर्मपत्नी और उनके पारिवारिक सदस्यों को उनके हर जरूरतों खासकर शैक्षणिक जरूरतों की पूर्ति के लिये पुलिस विभाग को तत्पर रहने तथा हर संभव मदद के लिये सीधे पुलिस अधीक्षक से मिलने की सलाह दी।

उल्लेखनीय है कि बीसवीं सदी के 60 की दशक में चेन्द्रु ब्वाय, बस्तर मोगली और टाईगर ब्वाय चेंदरू के नाम से पूरी दूनिया में विख्यात रहे चेंदरू मंण्डावी, नारायणपुर के आईकॉनिक शख़्स रहे हैं जिनका निधन वर्ष-2013 में नारायणपुर में ही हुआ है। चेन्द्रु ब्वाय ने भारत सहित दूनिया के विभिन्न राष्ट्रों के प्रशासकों, पत्रकारों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया, जिनमें अमेरिका, जापान, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन के प्रशासक, पत्रकार और पर्यटक भी सम्मिलित रहे हैं। ये शख़्स न सिर्फ टाईगर को भौतिक रूप से सामने देखने वरन् टाईगर ब्वाय चेंदरू और उनके टाईगर की जीवन शैली के अध्ययन, अवलोकन और उनके साथ फोटो लेने आते थे। चेन्द्रु ब्वाय न सिर्फ बचपन से ही टाईगर को पाले थे वरन् वे बचपन से ही उनके साथ ही रहना, खाना और सोना भी करते थे ठीक वैसे ही जैसे हम आम जीवन में अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। चेन्द्रु ब्वाय को बस्तर के पहला भारतीय हॉलीबुड हीरो होने का भी गौरव प्राप्त है।
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