Thursday, March 30, 2017

सतनाम धरम के मनईया महतारी अउ बहिनी बर पाती

सतनाम धरम के मनईया महतारी अउ बहिनी बर पाती 

सतनाम धरम के मनईया जम्मों दाई अउ बहिनी मन ले चरण स्पर्स करत, हुलेश्वर जोशी के बिनती हवय कि आप अइसन बेटा बेटी ल जनम देवव जेन ह सतनाम धरम के परम्परा ल आगु बढाये खातिर संत रूप म भंवसागर ल तार देवय, दुनिया भर म सतनाम धरम ल किर्ति परदान करा सकंय l आपन ले बिनती हवय आप अपन कोख के जनम देय अंश ल शाकाहार, परोपकार, दयावान अउ धरमवान बनाये के जतन करव जेकर ले विश्व के महान संतजनों के सतनाम धर्म को पुनस्थापित करे म आपके योगदान मिल सकय l अपन अंश ल सत्यकरम करे खातिर परेरित करव, सतनाम धरम के संस्थापक परमपुज्यनीय गुरूघासी दास के बताये रस्दा म चले के ताकत अउ परेरना देवव l आपन अपन देवीय ताकत ल जानव कि आप अपन गरभ के भीतरी म, कोख म अपने जइसे मनखे ल गढ सकथव त ऐहु बात त गांठ धरके बांध लव आपन अपन गरभ के भितरीम ओकर जिनगी के रस्दा धलो निरधारित कर सकत हव अउ ओकर जीनगी के आवसियकता ल निरधारित करके ओकर अंतस म गियान ल पिरो सकत हव अउ ओला ताकत दे सकत हव l हे दाई बहिनी होव मोर बखाने आपन के उक्त गुण ह सांकेतिक आए असली ताकत ल आपन सुवयम ही जानसकत हव अउ दुसर आदिपुरूष सतनाम l


सतनाम धरम के अनुयायी होए खातिर आपन के करतबिय होतहे कि आप सतनामी समाज ल एक जिम्मेदार अउ सच्चा मनखे/अंश परदान करव l आपके आशिष ले जनम लेवईया अंश ह केवल अउ केवल आपके ही इक्च्छानुसार करतबिय करही, आपके पुन्यपरताप के अनुसार ही आपके अंश के भविशय ह निरधारित होही l एकरे सेती ले मय ह बार-बार आपन के बिनती करत हंव कि आप सतनाम धरम के हित ल धियान धरके ही अपन अंश के निरमान करव l
एक इसतिरी के जीवन कब सुफल होथे :- इसतिरी जनम के सुफलता के समबंध म माता श्यामा देवी अउ सतनाम धरम के संतसमाज ले जेन गियान मिले हवय ओकर अनुसार मय ह आपन ले इसतिरी जनम के सुफलता के बिषय म जानकारी दिये के परयास करत हंव :: एक इसतिरी के जीनगी तबे सुफल होथे जब वो अपन अंश के रूप म बेटी नईते बेटा ल जनम देथे, अंश के निरमान बिना एक इसतिरी के जीनगी बियरथ खईता हो जाथे l जब माता के रूप म कुमाता नई बनय अउ कुपुतर नईते कुपुतरी बने ले अपन अंश ल बचा लेथे, मतलब ओकर अंश ह धरम के रस्दा म चलथे, तबे एक इसतिरी के जीनगी ह सुफल होथे l
परतेय महतारीन ले मोर बिनती हवय कि ओ अपन अंश ल सही रस्दा देखावय अउ धरम के मारग म चलावय l जेन महतारी के अंश ह सत के मारग ल अपन धरम जान लेथे अउ ओकरेच अनुरूप करम करथे, अइसन बेटा/बेटी के महतारी बर अमरलोक म एक उत्तम पद निरधारित हो जोथे l


नारी बर नवा रसदा :- संत समाज म प्रचलित प्रथा के अनुसार नारी जीवन के मरम ल बताये के सुअवसर ह मोर बर बड भागिय के बिसे आए, नारी जीनगी म करना चाही अउ का नई करना चाहि ए बिसे ह महतपुरन आए जेला मय निचे लिखत हंव –
1. परतेक नारी देवी के स्वरूप आए, नारी के सनमान देवी जस करे जाए चाहि नारी ह महतारी, बहिनी, बेटी, बहु या परइसतिही के रूप म होय l
2. नारी जीवन म उत्तम इसथान पति के होथे, ओकर बाद सास-ससुर : माता-पिता : धर्मगुरू /आदि पुरूष : अंश : देवर-ननद : कुल के समस्त सदस्य : समाज : सतनाम धर्म के समस्त अनुयायी और भवसागर के जम्मो जीवन धारी परानी l जबकि विवाहपूर्व माता-पिता के इसथान उत्तम होथे l
3. परतेक नारी ल शाकाहारी होना चाही अउ सतनाम धरम के बारे म समपुरन गियान होना चाही, जेकर ले सुवयम अउ अपन अंश ल धरम के पुरन गियान दे सकय l
4. परतेक इसतिरी ल (विधवा माता/बहन ल छोडके) सदैव सिंगार करना चाही अउ पति के प्रति निसठा रखना चाही l


5. परतेक नारी ल सदा ही धरम रक्षा अनुरूप अंश को जनम देना चाही अउ अपन अंश ल धरमवान बनाये के नियति करना चाही l
6. पति अउ सास-ससुर के सेवा सदा ही करना चाही l
7. सतनाम धरम अउ परमपुज्यनीय गुरूघासीदास के बताये रसदा म चलत अपन जीनगी के जम्मो करम ल करना चाही l


महतारी अउ बहिनी मन बर लिखे पतिया के पठन-पाठन करे ले महतारीन अउ बहिनी के जीनगी अमर हो जाही l




लेख : हुलेश्वर जोशी सतनामी
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